घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, धारा 4 से 16: संरक्षण अधिकारी, सेवा प्रदाता और आवेदन की प्रक्रिया
घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 4 से 16: सूचना देना, संरक्षण अधिकारी और सेवा प्रदाता की भूमिका, धारा 12 का आवेदन और तीन दिन, दो दिन, साठ दिन की समय-सीमाएँ; 2018 का प्रश्न हल सहित।
- संरक्षण अधिकारी
- सेवा प्रदाता
- धारा 12
- समय-सीमा
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005: Sections 1-29, 31." इस पृष्ठ पर धारा 4 से 16 हैं: संरक्षण अधिकारी को सूचना, पुलिस, सेवा प्रदाता, आश्रय-गृह और चिकित्सा सुविधा के कर्तव्य, संरक्षण अधिकारियों की नियुक्ति और कर्तव्य, सरकार के दायित्व तथा मजिस्ट्रेट के पास आवेदन से लेकर परामर्श और बंद कमरे में सुनवाई तक की प्रक्रिया। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं है; वास्तविक मामले में अधिकृत विधिक सहायता लें।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- इस पृष्ठ की धाराओं से 2018 में एक प्रश्न आया: 'अनुतोष के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन कौन कर सकता है' (2 अंक, लगभग 15 शब्द)। इसका उत्तर धारा 12(1) में है।
- इस अध्याय में समय-सीमाओं के सीधे तथ्य हैं: पहली सुनवाई सामान्यतः तीन दिन के भीतर, नोटिस की तामील दो दिन में, परामर्श के बाद अगली तिथि दो महीने के भीतर और आवेदन का निपटारा पहली सुनवाई से साठ दिन में। ऐसे आँकड़े 2 और 5 अंक के प्रश्नों में सीधे पूछे जा सकते हैं।
- संरक्षण अधिकारी, सेवा प्रदाता, आश्रय-गृह और चिकित्सा सुविधा के नाम और कर्तव्य याद रखने की चीज़ हैं; उनकी तुलना-तालिका नीचे दी गई है।
पहले सरल भाषा में
मान लीजिए किसी महिला को घर में हिंसा झेलनी पड़ रही है और उसे नहीं पता कि कहाँ जाए। थाने जाए, अदालत जाए, किसी संस्था के पास जाए, या पहले रहने की जगह ढूँढे? अधिनियम का तीसरा और चौथा अध्याय इसी उलझन को सुलझाते हैं। विचार 'एक खिड़की, कई सेवाएँ' जैसा है। महिला संरक्षण अधिकारी (Protection Officer), पुलिस, पंजीकृत संस्था (service provider), आश्रय-गृह या चिकित्सा सुविधा, किसी के भी पास पहुँचे, हर कोई उसे उसके अधिकार बताए और ज़रूरी मदद उस तक पहुँचाए।
अधिनियम की बनावट को ऐसे समझें। धारा 4 से 11 सहायक व्यवस्था बनाती हैं: कौन सूचना दे सकता है, कौन किस मदद का दायित्व उठाता है और राज्य को क्या करना है। धारा 12 से 16 अदालती प्रक्रिया शुरू करती हैं: आवेदन किसे और कितने दिन में सुनना है, नोटिस कैसे जाएगा, परामर्श और बंद कमरे की सुनवाई कैसे होगी। अगले पृष्ठ पर बताए गए आदेश (धारा 17 से 29) इसी प्रक्रिया से निकलते हैं।
किसकी क्या भूमिका है: धारा 4 से 11 एक नज़र में
| धारा | कौन | क्या करना है |
|---|---|---|
| 4 | कोई भी व्यक्ति | जिसे विश्वास करने का कारण हो कि घरेलू हिंसा हुई है, हो रही है या होने की संभावना है, वह संबंधित संरक्षण अधिकारी को सूचना दे सकता है। सद्भाव से सूचना देने पर कोई दीवानी या आपराधिक दायित्व नहीं। |
| 5 | पुलिस अधिकारी, संरक्षण अधिकारी, सेवा प्रदाता, मजिस्ट्रेट | जिसे शिकायत मिले या जो घटना-स्थल पर मौजूद हो, वह व्यथित व्यक्ति को उसके अधिकार और उपलब्ध सेवाएँ बताए। |
| 6 | आश्रय-गृह का प्रभारी | व्यथित व्यक्ति, या उसकी ओर से संरक्षण अधिकारी या सेवा प्रदाता, अनुरोध करे तो आश्रय देना होगा। |
| 7 | चिकित्सा सुविधा का प्रभारी | अनुरोध पर व्यथित व्यक्ति को चिकित्सा सहायता देनी होगी। |
| 8 | राज्य सरकार | प्रत्येक ज़िले में अधिसूचना द्वारा संरक्षण अधिकारी नियुक्त करना। |
| 9 | संरक्षण अधिकारी | मजिस्ट्रेट की सहायता, घरेलू घटना रिपोर्ट, आवेदन, विधिक सहायता, आश्रय, चिकित्सा जाँच और आदेशों का पालन। |
| 10 | सेवा प्रदाता | पंजीकृत संस्था: घरेलू घटना रिपोर्ट दर्ज करना, चिकित्सा जाँच कराना, आश्रय दिलाना। |
| 11 | केंद्र और राज्य सरकारें | प्रचार, संवेदनशीलता-प्रशिक्षण, मंत्रालयों में समन्वय और प्रोटोकॉल बनाना। |
धारा 5: व्यथित व्यक्ति को कौन-सी पाँच बातें बतानी हैं
धारा 5 सूचना का कर्तव्य बाँधती है। पुलिस अधिकारी, संरक्षण अधिकारी, सेवा प्रदाता या मजिस्ट्रेट को जब घरेलू हिंसा की शिकायत मिले, या वह घटना-स्थल पर मौजूद हो, या घटना की सूचना उसे दी जाए, तो उसे व्यथित व्यक्ति को पाँच बातें बतानी हैं। ये पाँच बातें परीक्षा में क्रम से लिखने योग्य हैं।
| खंड | क्या बताना है |
|---|---|
| (a) | संरक्षण आदेश, आर्थिक अनुतोष का आदेश, अभिरक्षा आदेश, निवास आदेश, प्रतिकर आदेश या एक से अधिक आदेश माँगने के आवेदन का उसका अधिकार |
| (b) | सेवा प्रदाताओं की सेवाएँ उपलब्ध हैं |
| (c) | संरक्षण अधिकारियों की सेवाएँ उपलब्ध हैं |
| (d) | विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अधीन निःशुल्क विधिक सेवाओं का उसका अधिकार |
| (e) | जहाँ प्रासंगिक हो, भारतीय दंड संहिता की धारा 498-A के अधीन शिकायत दर्ज करने का उसका अधिकार |
परंतुक: यदि संज्ञेय अपराध की सूचना मिले तो पुलिस अधिकारी को कानून के अनुसार कार्रवाई करने के कर्तव्य से मुक्ति नहीं मिलती।
खंड (e) में पुरानी दंड संहिता की धारा 498-A का नाम है, क्योंकि अधिनियम का पाठ 2005 का है। अध्ययन-सहायता के रूप में ध्यान रखें कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 (1 जुलाई 2024 से लागू) में पति या पति के रिश्तेदार द्वारा महिला के प्रति क्रूरता का अपराध धारा 85 में है और 'क्रूरता' की परिभाषा धारा 86 में है। उत्तर में अधिनियम के पाठ की धारा 498-A का ही उल्लेख करें, और चाहें तो कोष्ठक में BNS का मिलान जोड़ दें।
संरक्षण अधिकारी (Protection Officer): धारा 8 और 9
संरक्षण अधिकारी इस अधिनियम का क्षेत्र-स्तर का अधिकारी है। धारा 8(1) के अनुसार राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा प्रत्येक ज़िले में आवश्यक संख्या में संरक्षण अधिकारी नियुक्त करती है और वे क्षेत्र भी अधिसूचित करती है जिनमें वे शक्तियाँ प्रयोग करेंगे। धारा 8(2) कहती है कि वे यथासंभव (as far as possible) महिलाएँ हों और निर्धारित योग्यता और अनुभव रखें। सेवा की शर्तें भी निर्धारित की जाती हैं (धारा 8(3))।
धारा 9(1) में उसके नौ कर्तव्य हैं और धारा 9(2) कहती है कि वह मजिस्ट्रेट के नियंत्रण और पर्यवेक्षण में रहेगा। प्रश्न में अक्सर कर्तव्यों की सूची माँगी जाती है, इसलिए नीचे की तालिका को याद करें।
धारा 9(1): संरक्षण अधिकारी के कर्तव्य
| खंड | कर्तव्य |
|---|---|
| (a) | अधिनियम के अधीन मजिस्ट्रेट के कार्यों में सहायता करना। |
| (b) | शिकायत मिलने पर निर्धारित प्रपत्र में मजिस्ट्रेट को घरेलू घटना रिपोर्ट देना और उसकी प्रतियाँ संबंधित थाने के प्रभारी तथा क्षेत्र के सेवा प्रदाताओं को भेजना। |
| (c) | यदि व्यथित व्यक्ति चाहे तो संरक्षण आदेश के अनुतोष का आवेदन मजिस्ट्रेट को देना। |
| (d) | यह सुनिश्चित करना कि उसे विधिक सहायता मिले और शिकायत का निर्धारित प्रपत्र निःशुल्क उपलब्ध हो। |
| (e) | विधिक सहायता या परामर्श देने वाले सेवा प्रदाताओं, आश्रय-गृहों और चिकित्सा सुविधाओं की सूची रखना। |
| (f) | आवश्यकता होने पर सुरक्षित आश्रय-गृह उपलब्ध कराना और अपनी रिपोर्ट की प्रति थाने और संबंधित मजिस्ट्रेट को भेजना। |
| (g) | शारीरिक चोट होने पर चिकित्सा जाँच कराना और रिपोर्ट की प्रति थाने और मजिस्ट्रेट को भेजना। |
| (h) | धारा 20 के आर्थिक अनुतोष के आदेश का पालन और निष्पादन दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में बताई प्रक्रिया से सुनिश्चित करना। |
| (i) | निर्धारित अन्य कर्तव्य निभाना। |
सेवा प्रदाता (service provider): धारा 10
सेवा प्रदाता कोई ऐसी संस्था है जो महिलाओं के अधिकारों और हितों की रक्षा का उद्देश्य रखती है और राज्य सरकार के पास पंजीकृत है। धारा 10(1) के अनुसार सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अधीन पंजीकृत कोई स्वैच्छिक संस्था या कंपनी अधिनियम, 1956 या किसी अन्य कानून के अधीन पंजीकृत कंपनी, जिसका उद्देश्य विधिक, चिकित्सा, वित्तीय या अन्य सहायता सहित वैध साधनों से महिलाओं के अधिकारों की रक्षा है, राज्य सरकार के पास स्वयं को सेवा प्रदाता के रूप में पंजीकृत कराएगी।
धारा 10(2) में उसकी तीन शक्तियाँ हैं: व्यथित व्यक्ति चाहे तो घरेलू घटना रिपोर्ट दर्ज करना और मजिस्ट्रेट तथा संरक्षण अधिकारी को भेजना, चिकित्सा जाँच कराकर रिपोर्ट संरक्षण अधिकारी और थाने को भेजना, और आवश्यक होने पर आश्रय-गृह में आश्रय दिलाना। धारा 10(3) के अनुसार सद्भाव से किए कार्य के लिए सेवा प्रदाता या उसके सदस्य के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य कार्यवाही नहीं होगी।
संरक्षण अधिकारी और सेवा प्रदाता: तुलना
संरक्षण अधिकारी (धारा 8, 9)
कौनराज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी
नियुक्ति या पंजीकरणज़िले के लिए अधिसूचना द्वारा नियुक्ति; यथासंभव महिलाएँ
नियंत्रणमजिस्ट्रेट के नियंत्रण और पर्यवेक्षण में (धारा 9(2))
मुख्य कार्यघरेलू घटना रिपोर्ट, आवेदन, विधिक सहायता, आश्रय, चिकित्सा जाँच, आदेश का पालन
संरक्षणधारा 35 में सद्भाव की सुरक्षा (सिलेबस की धाराओं से बाहर)
सेवा प्रदाता (धारा 10)
कौनपंजीकृत स्वैच्छिक संस्था या कंपनी
नियुक्ति या पंजीकरणस्वयं राज्य सरकार के पास पंजीकरण कराती है
नियंत्रणअधिनियम में मजिस्ट्रेट के नियंत्रण का उल्लेख नहीं; नियमों के अनुसार पंजीकरण
मुख्य कार्यघरेलू घटना रिपोर्ट दर्ज करना, चिकित्सा जाँच कराना, आश्रय दिलाना
संरक्षणधारा 10(3): सद्भाव के कार्य पर वाद, अभियोजन आदि नहीं
आश्रय-गृह, चिकित्सा सुविधा और सरकार के दायित्व: धारा 6, 7, 11
धारा 6 और 7 छोटी हैं पर प्रश्न-योग्य हैं। यदि व्यथित व्यक्ति, या उसकी ओर से संरक्षण अधिकारी या सेवा प्रदाता, आश्रय-गृह के प्रभारी से आश्रय माँगे तो प्रभारी को आश्रय देना होगा; इसी प्रकार चिकित्सा सुविधा का प्रभारी चिकित्सा सहायता देने को बाध्य है। यहाँ 'shall' शब्द है, यानी कर्तव्य अनिवार्य है। आश्रय-गृह और चिकित्सा सुविधा वही मानी जाती हैं जो राज्य सरकार ने इस अधिनियम के लिए अधिसूचित की हों (धारा 2(t) और 2(j))।
धारा 11 में केंद्र और प्रत्येक राज्य सरकार के चार दायित्व हैं: (a) टेलीविज़न, रेडियो और मुद्रित माध्यम से नियमित अंतराल पर अधिनियम का व्यापक प्रचार, (b) पुलिस अधिकारियों और न्यायिक सेवा के सदस्यों सहित अधिकारियों का समय-समय पर संवेदनशीलता और जागरूकता प्रशिक्षण, (c) विधि, गृह, स्वास्थ्य और मानव संसाधन से जुड़े मंत्रालयों और विभागों की सेवाओं में प्रभावी समन्वय और उसकी आवधिक समीक्षा, और (d) न्यायालयों सहित संबंधित मंत्रालयों के लिए सेवाओं के प्रोटोकॉल बनाना।
धारा 12: मजिस्ट्रेट के पास आवेदन (2018 का प्रश्न)
अदालती प्रक्रिया की शुरुआत धारा 12(1) से होती है। पाठ के अनुसार 'An aggrieved person or a Protection Officer or any other person on behalf of the aggrieved person may present an application to the Magistrate seeking one or more reliefs under this Act'। यानी आवेदन तीन में से कोई दे सकता है: स्वयं व्यथित व्यक्ति, संरक्षण अधिकारी, या व्यथित व्यक्ति की ओर से कोई अन्य व्यक्ति। 2018 का प्रश्न इसी उप-धारा से है। एक साथ एक या अधिक अनुतोष माँगे जा सकते हैं।
धारा 12(1) का परंतुक कहता है कि आवेदन पर कोई आदेश देने से पहले मजिस्ट्रेट संरक्षण अधिकारी या सेवा प्रदाता से मिली घरेलू घटना रिपोर्ट पर विचार करेगा। धारा 12(2) में प्रतिकर या हर्जाने का अनुतोष माँगा जा सकता है, पर इससे चोटों के लिए प्रतिकर या हर्जाने का वाद करने का अधिकार प्रभावित नहीं होता। यदि किसी न्यायालय ने प्रतिकर की डिक्री पहले दे दी हो तो मजिस्ट्रेट के आदेश के अधीन चुकाई या देय राशि डिक्री की राशि में से घटाई जाएगी (set off) और बची राशि के लिए डिक्री निष्पादनीय रहेगी।
धारा 12 से 16: प्रक्रिया की समय-सीमाएँ और शर्तें
| धारा | विषय | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| 12(3) | आवेदन का प्रपत्र | निर्धारित प्रपत्र और विवरण सहित, या जहाँ तक संभव हो उसके अनुरूप। |
| 12(4) | पहली सुनवाई | मजिस्ट्रेट पहली सुनवाई की तिथि तय करेगा, जो आवेदन प्राप्ति से सामान्यतः तीन दिन से आगे नहीं होगी (not ordinarily beyond three days)। |
| 12(5) | निपटारा | मजिस्ट्रेट प्रत्येक आवेदन का पहली सुनवाई से साठ दिन के भीतर निपटारा करने का प्रयास करेगा (shall endeavour)। |
| 13(1) | नोटिस की तामील | सुनवाई की तिथि का नोटिस मजिस्ट्रेट संरक्षण अधिकारी को देगा; वह प्राप्ति से अधिकतम दो दिन में, या मजिस्ट्रेट द्वारा दी गई अतिरिक्त उचित अवधि में, प्रतिवादी और अन्य को तामील कराएगा। |
| 13(2) | तामील का प्रमाण | संरक्षण अधिकारी की निर्धारित प्रपत्र में तामील-घोषणा तब तक तामील का प्रमाण है जब तक विपरीत सिद्ध न हो। |
| 14(1) | परामर्श | कार्यवाही के किसी भी चरण में मजिस्ट्रेट प्रतिवादी या व्यथित व्यक्ति को अलग-अलग या संयुक्त रूप से सेवा प्रदाता के किसी सदस्य से परामर्श लेने का निर्देश दे सकता है। |
| 14(2) | परामर्श के बाद | निर्देश देने पर अगली सुनवाई की तिथि दो महीने से अधिक की नहीं होगी। |
| 15 | कल्याण विशेषज्ञ | मजिस्ट्रेट अपने कार्यों में सहायता के लिए ऐसे व्यक्ति की सेवाएँ ले सकता है, यथासंभव महिला, चाहे व्यथित व्यक्ति से संबंधित हो या नहीं, जिसमें परिवार-कल्याण में लगा व्यक्ति भी हो। |
| 16 | बंद कमरे में सुनवाई (in camera) | यदि परिस्थितियाँ उचित हों और कोई भी पक्षकार चाहे तो मजिस्ट्रेट कार्यवाही बंद कमरे में कर सकता है। |
आवेदन से सुनवाई तक की प्रक्रिया
सूचना या शिकायत
कोई भी व्यक्ति, संरक्षण अधिकारी या पुलिस (धारा 4, 5)
घरेलू घटना रिपोर्ट
संरक्षण अधिकारी या सेवा प्रदाता (धारा 9(1)(b), 10(2)(a))
आवेदन
व्यथित व्यक्ति, संरक्षण अधिकारी या अन्य व्यक्ति (धारा 12(1))
पहली सुनवाई
सामान्यतः तीन दिन में; नोटिस की तामील दो दिन में (धारा 12(4), 13)
परामर्श और विशेषज्ञ
आवश्यकता होने पर (धारा 14, 15); बंद कमरे में सुनवाई (धारा 16)
निपटारा
पहली सुनवाई से साठ दिन में प्रयास (धारा 12(5))
किस धारा में कौन
धारा 4 से 16
सूचना और सूचना का दायित्व
- धारा 4: कोई भी व्यक्ति सूचना दे सकता है
- धारा 5: पुलिस आदि पाँच बातें बताएँ
सहायता तंत्र
- आश्रय-गृह (6), चिकित्सा सुविधा (7)
- संरक्षण अधिकारी (8, 9)
- सेवा प्रदाता (10)
- सरकार के दायित्व (11)
अदालती प्रक्रिया
- आवेदन (12)
- नोटिस (13)
- परामर्श (14), कल्याण विशेषज्ञ (15)
- बंद कमरे की सुनवाई (16)
सहायता कहाँ मिलती है
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार Women Helpline 181 महिलाओं के लिए 24 घंटे की टोल-फ़्री टेलीफ़ोन सेवा है, जो पुलिस, One Stop Centre और अस्पतालों जैसे प्राधिकारियों से जोड़ती है। यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है; संकट की स्थिति में स्थानीय पुलिस या अधिकृत सेवा से तुरंत संपर्क करें।
मुख्य तथ्य
- सूचना (धारा 4)
- कोई भी व्यक्ति संरक्षण अधिकारी को सूचना दे सकता है; सद्भाव से दी गई सूचना पर दीवानी या आपराधिक दायित्व नहीं
- धारा 5
- पाँच बातें बताना: आदेश माँगने का अधिकार, सेवा प्रदाता, संरक्षण अधिकारी, निःशुल्क विधिक सेवा, 498-A की शिकायत
- संरक्षण अधिकारी (धारा 8)
- राज्य सरकार प्रत्येक ज़िले में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करती है; यथासंभव महिलाएँ
- धारा 9(1)
- संरक्षण अधिकारी के नौ कर्तव्य, खंड (a) से (i)
- मजिस्ट्रेट के नियंत्रण में
- संरक्षण अधिकारी मजिस्ट्रेट के नियंत्रण और पर्यवेक्षण में (धारा 9(2))
- सेवा प्रदाता (धारा 10)
- राज्य सरकार के पास पंजीकृत संस्था; तीन शक्तियाँ और सद्भाव की सुरक्षा
- आवेदक (धारा 12(1))
- व्यथित व्यक्ति, संरक्षण अधिकारी या व्यथित व्यक्ति की ओर से कोई अन्य व्यक्ति
- पहली सुनवाई (धारा 12(4))
- सामान्यतः आवेदन प्राप्ति से तीन दिन से आगे नहीं
- निपटारा (धारा 12(5))
- पहली सुनवाई से साठ दिन के भीतर करने का प्रयास
- नोटिस (धारा 13(1))
- संरक्षण अधिकारी प्राप्ति से अधिकतम दो दिन में या अतिरिक्त उचित समय में तामील कराएगा
- परामर्श के बाद (धारा 14(2))
- अगली तिथि दो महीने से अधिक की नहीं
- BNS में क्रूरता
- पति या उसके रिश्तेदार द्वारा क्रूरता: धारा 85 (तीन वर्ष तक कारावास और जुर्माना); 'क्रूरता' की परिभाषा धारा 86 (पूर्व IPC 498-A का मिलान: अध्ययन-सहायता)
- अंतिम जाँच
- 2 अक्तूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- आवेदन करने वालों में केवल व्यथित व्यक्ति को लिखना। धारा 12(1) में संरक्षण अधिकारी और व्यथित व्यक्ति की ओर से कोई अन्य व्यक्ति भी हैं।
- तीन दिन और साठ दिन को एक ही समय-सीमा समझ लेना। तीन दिन पहली सुनवाई की तिथि के लिए हैं और साठ दिन पहली सुनवाई से निपटारे के प्रयास के लिए।
- साठ दिन को कठोर बंदिश लिखना। पाठ 'shall endeavour' कहता है।
- संरक्षण अधिकारी को पुलिस या मजिस्ट्रेट का अधिकारी मान लेना। वह राज्य सरकार द्वारा नियुक्त होता है और मजिस्ट्रेट के नियंत्रण में काम करता है।
- धारा 5 में पाँच बातों की जगह तीन-चार लिख देना। (a) से (e) तक पाँचों खंड याद रखें।
- सेवा प्रदाता को सरकारी विभाग समझना। वह पंजीकृत संस्था या कंपनी है।
- धारा 16 को हर मामले में अनिवार्य बंद कमरे की सुनवाई लिखना। यह परिस्थितियाँ उचित हों और कोई पक्षकार चाहे, तब मजिस्ट्रेट का विवेक है।
कार्य-उदाहरण: समय-सीमाओं की गिनती
हल सहित उदाहरणआवेदन से निपटारे तक की कल्पित समय-रेखा
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है। मान लें किसी दिन (दिन 0) अदालत को आवेदन प्राप्त होता है। नियमों की अधिकतम समय-सीमाएँ ऐसे लगेंगी।
- 1दिन 0: आवेदन प्राप्त धारा 12(1) के अनुसार व्यथित व्यक्ति, संरक्षण अधिकारी या कोई अन्य व्यक्ति आवेदन दे चुका है। मजिस्ट्रेट को घरेलू घटना रिपोर्ट पर विचार करना है।
- 2दिन 3 तक: पहली सुनवाई की तिथि धारा 12(4): तिथि सामान्यतः प्राप्ति से तीन दिन से आगे नहीं। मान लें पहली सुनवाई दिन 3 को तय हुई।
- 3नोटिस: प्राप्ति से 2 दिन धारा 13(1): संरक्षण अधिकारी नोटिस मिलने के दो दिन में, या मजिस्ट्रेट की अनुमति से और उचित समय में, प्रतिवादी को तामील कराएगा।
- 4परामर्श हो तो धारा 14(2): यदि दिन 10 को मजिस्ट्रेट परामर्श का निर्देश देता है तो अगली तिथि उस निर्देश से दो महीने के भीतर रखी जाएगी।
- 5दिन 63 तक: निपटारे का प्रयास धारा 12(5): निपटारा पहली सुनवाई से साठ दिन में करने का प्रयास; पहली सुनवाई दिन 3 को हुई तो यह दिन 63 तक होगा।
निष्कर्ष: तीन दिन, दो दिन, दो महीने और साठ दिन चार अलग गिनतियाँ हैं और अलग बिंदुओं से शुरू होती हैं। इन्हें परीक्षा में मिलाकर न लिखें; साथ ही साठ दिन 'प्रयास' है, कठोर बंदिश नहीं (shall endeavour)।
केस स्टडी (कल्पित): एक पड़ोसी की सूचना से अदालत तक
उदाहरण (काल्पनिक)रोशनी को सहायता कैसे पहुँची
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; पात्र, स्थान और घटनाएँ वास्तविक नहीं हैं। एक कल्पित क़स्बे में पड़ोसी को लगता है कि पास के घर में रह रही एक महिला के साथ घरेलू हिंसा हो रही है। वह स्वयं महिला नहीं है और महिला स्वयं आगे आने से डर रही है।
- सूचना (धारा 4)
- पड़ोसी संबंधित संरक्षण अधिकारी को सूचना देता है। अधिनियम के अनुसार सद्भाव से दी गई सूचना पर उस पर कोई दीवानी या आपराधिक दायित्व नहीं आएगा।
- अधिकारों की जानकारी (धारा 5)
- संरक्षण अधिकारी महिला से मिलता है और उसे आदेश माँगने के अधिकार, सेवा प्रदाताओं और संरक्षण अधिकारियों की सेवाओं और निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में बताता है।
- रिपोर्ट और मदद (धारा 9, 10)
- वह घरेलू घटना रिपोर्ट बनाकर मजिस्ट्रेट, थाने और स्थानीय सेवा प्रदाताओं को भेजता है। ज़रूरत हो तो आश्रय या चिकित्सा जाँच का प्रबंध करता है।
- आवेदन (धारा 12)
- महिला चाहे तो स्वयं आवेदन दे सकती है; यदि वह चाहे तो संरक्षण अधिकारी या उसकी ओर से कोई अन्य व्यक्ति आवेदन दे सकता है। मजिस्ट्रेट पहली सुनवाई की तिथि सामान्यतः तीन दिन में रखता है।
- सुनवाई (धारा 13 से 16)
- नोटिस की तामील संरक्षण अधिकारी कराता है; मजिस्ट्रेट परामर्श का निर्देश दे सकता है और महिला या कोई भी पक्ष चाहे तो बंद कमरे में सुनवाई कर सकता है।
सीख
अधिनियम ने सूचना देने वाले को सुरक्षा, पीड़ित को एक से अधिक रास्ते और अदालत को समय-सीमा दी है। इसका उद्देश्य है कि सहायता तक पहुँचने के लिए महिला को अकेले कठिन प्रक्रिया पार न करनी पड़े।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2018RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
उन व्यक्तियों को प्रगणित कीजिये जो कि घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत अनुतोष हेतु मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं?
आदर्श उत्तर
व्यथित व्यक्ति, संरक्षण अधिकारी, या व्यथित व्यक्ति की ओर से कोई अन्य व्यक्ति (धारा 12(1))।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
संरक्षण अधिकारी की नियुक्ति कौन करता है?
आदर्श उत्तर
राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा प्रत्येक ज़िले में नियुक्त करती है; वे यथासंभव महिलाएँ होंगी (धारा 8)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
मजिस्ट्रेट पहली सुनवाई की तिथि कब तक तय करेगा?
आदर्श उत्तर
आवेदन प्राप्ति से सामान्यतः तीन दिन से आगे की तिथि नहीं होगी (धारा 12(4))।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
धारा 5 के अंतर्गत व्यथित व्यक्ति को कौन-सी बातें बताई जानी चाहिए?
आदर्श उत्तर
शिकायत पाने वाला पुलिस अधिकारी, संरक्षण अधिकारी, सेवा प्रदाता या मजिस्ट्रेट व्यथित व्यक्ति को पाँच बातें बताएगा: आदेश माँगने का अधिकार, सेवा प्रदाताओं की उपलब्धता, संरक्षण अधिकारियों की उपलब्धता, निःशुल्क विधिक सेवा का अधिकार और जहाँ प्रासंगिक हो 498-A की शिकायत का अधिकार।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
संरक्षण अधिकारी के प्रमुख कर्तव्य लिखिए।
आदर्श उत्तर
संरक्षण अधिकारी मजिस्ट्रेट की सहायता करता है और घरेलू घटना रिपोर्ट बनाकर मजिस्ट्रेट, थाने और सेवा प्रदाताओं को भेजता है। वह व्यथित व्यक्ति के चाहने पर आवेदन देता है, विधिक सहायता, आश्रय और चिकित्सा जाँच सुनिश्चित करता है और आर्थिक अनुतोष के आदेश का पालन कराता है (धारा 9)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन से निपटारे तक की प्रक्रिया बताइए (धारा 12 से 16)।
आदर्श उत्तर
धारा 12(1) के अनुसार व्यथित व्यक्ति, संरक्षण अधिकारी या कोई अन्य व्यक्ति आवेदन देता है और मजिस्ट्रेट घरेलू घटना रिपोर्ट पर विचार करता है। पहली सुनवाई की तिथि सामान्यतः तीन दिन में रखी जाती है। नोटिस संरक्षण अधिकारी के माध्यम से दो दिन में तामील होता है (धारा 13)। मजिस्ट्रेट परामर्श का निर्देश दे सकता है, तब अगली तिथि दो महीने में होगी (धारा 14)। वह कल्याण विशेषज्ञ की सहायता ले सकता है (धारा 15) और बंद कमरे में सुनवाई कर सकता है (धारा 16)। निपटारे का प्रयास पहली सुनवाई से साठ दिन में होता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
संरक्षण अधिकारी और सेवा प्रदाता की भूमिकाओं की तुलना कीजिए।
आदर्श उत्तर
संरक्षण अधिकारी राज्य सरकार द्वारा ज़िले के लिए नियुक्त होता है, यथासंभव महिला होता है और मजिस्ट्रेट के नियंत्रण में काम करता है। वह घरेलू घटना रिपोर्ट, आवेदन, विधिक सहायता, आश्रय और चिकित्सा जाँच सुनिश्चित करता है। सेवा प्रदाता राज्य सरकार के पास पंजीकृत स्वैच्छिक संस्था या कंपनी है, जिसका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा है। वह घरेलू घटना रिपोर्ट दर्ज कर सकता है, चिकित्सा जाँच और आश्रय दिला सकता है। दोनों को सद्भाव की सुरक्षा मिलती है; सेवा प्रदाता के लिए यह धारा 10(3) में है।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के अंतर्गत पीड़ित महिला को सहायता देने वाले तंत्र और अनुतोष की प्रक्रिया समझाइए।" पहली पंक्ति में सहायता-तंत्र और अदालती प्रक्रिया, दो भाग बताएँ। (5 अंक में केवल एक भाग, 2 अंक में एक तथ्य।)
मुख्य भाग
- तंत्र: संरक्षण अधिकारी (धारा 8, 9), सेवा प्रदाता (धारा 10), आश्रय-गृह (6), चिकित्सा सुविधा (7), पुलिस की सूचना-बाध्यता (5)
- प्रक्रिया: आवेदन (12(1)), तीन दिन में पहली सुनवाई, दो दिन में नोटिस (13), परामर्श (14), बंद कमरे की सुनवाई (16)
- समय-सीमा: साठ दिन में निपटारे का प्रयास (12(5))
निष्कर्ष
निष्कर्ष: सूचना से लेकर आदेश तक एक एकीकृत और समय-बद्ध तंत्र पीड़ित महिला को अकेले कठिन प्रक्रिया से बचाता है।
अतिरिक्त मूल्य
- धारा 12(1) के तीनों आवेदकों की सूची
- तीन दिन, दो दिन, साठ दिन की सही गिनती
- सद्भाव की सुरक्षा (धारा 4(2) और 10(3)) का उल्लेख
त्वरित पुनरावृत्ति
- धारा 4: कोई भी व्यक्ति संरक्षण अधिकारी को सूचना दे सकता है; सद्भाव से देने पर कोई दीवानी या आपराधिक दायित्व नहीं
- धारा 5: पाँच बातें: आदेश माँगने का अधिकार, सेवा प्रदाता, संरक्षण अधिकारी, निःशुल्क विधिक सेवा, 498-A की शिकायत
- धारा 6 और 7: आश्रय-गृह और चिकित्सा सुविधा के प्रभारी अनुरोध पर आश्रय और चिकित्सा देंगे
- धारा 8: ज़िले में अधिसूचना द्वारा संरक्षण अधिकारी; यथासंभव महिलाएँ
- धारा 9: संरक्षण अधिकारी के नौ कर्तव्य (a) से (i); मजिस्ट्रेट के नियंत्रण में
- धारा 10: सेवा प्रदाता राज्य सरकार के पास पंजीकृत संस्था; तीन शक्तियाँ
- धारा 11: प्रचार, प्रशिक्षण, समन्वय, प्रोटोकॉल
- धारा 12(1): आवेदक: व्यथित व्यक्ति, संरक्षण अधिकारी, कोई अन्य व्यक्ति
- 12(4): पहली सुनवाई सामान्यतः तीन दिन में; 12(5): निपटारे का प्रयास साठ दिन में
- धारा 13: संरक्षण अधिकारी दो दिन में नोटिस तामील कराएगा
- धारा 14: परामर्श; अगली तिथि दो महीने में
- धारा 15: कल्याण विशेषज्ञ (यथासंभव महिला); धारा 16: बंद कमरे में सुनवाई
याद रखने योग्य शब्द
- Protection Officer
- service provider
- धारा 12
- तीन दिन
- साठ दिन
- in camera