घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, धारा 17 से 29 और 31: निवास का अधिकार, संरक्षण आदेश, अपील और दंड
घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 17 से 29 और 31: साझी गृहस्थी में रहने का अधिकार, पाँच प्रकार के आदेश, अंतरिम और एकपक्षीय आदेश, अधिकारिता, अपील और संरक्षण आदेश के उल्लंघन का दंड।
- निवास का अधिकार
- संरक्षण आदेश
- निवास आदेश
- धारा 31
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005: Sections 1-29, 31." इस पृष्ठ पर धारा 17 से 29 और धारा 31 हैं: साझी गृहस्थी में रहने का अधिकार, संरक्षण, निवास, आर्थिक अनुतोष, अभिरक्षा और प्रतिकर के आदेश, अंतरिम और एकपक्षीय आदेश, अधिकारिता, प्रक्रिया, अपील और संरक्षण आदेश के उल्लंघन का दंड। धारा 30 सिलेबस की सूची में नहीं है। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं है; वास्तविक मामले में अधिकृत विधिक सहायता लें।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2024 का प्रश्न 'विवाह-सदृश संबंध में रहने वाली महिला की सुरक्षा' (2 अंक) इन्हीं धाराओं के अनुतोषों से पूरा होता है: साझी गृहस्थी में रहने का अधिकार (धारा 17) और संरक्षण, निवास, आर्थिक अनुतोष आदि के आदेश (धारा 18 से 22)। इस पृष्ठ की धाराओं पर सीधे परिभाषा-प्रश्न अब तक नहीं आए, पर ये धाराएँ 'क्या सुरक्षा मिलेगी' वाले प्रश्नों का उत्तर देती हैं।
- तथ्य जो सीधे पूछे जा सकते हैं: अपील तीस दिन में सत्र न्यायालय में, उल्लंघन पर एक वर्ष तक कारावास या बीस हज़ार रुपये तक जुर्माना या दोनों, और संरक्षण आदेश तब तक लागू जब तक व्यथित व्यक्ति उन्मोचन (discharge) का आवेदन न करे।
- पाँच अनुतोषों (संरक्षण, निवास, आर्थिक, अभिरक्षा, प्रतिकर) की तुलना-तालिका नीचे है; 5 और 10 अंक के उत्तर में यही ढाँचा काम आता है।
पहले सरल भाषा में
पिछले पृष्ठ पर महिला अदालत तक पहुँची। अब सवाल है कि अदालत उसे क्या देगी। इस अधिनियम में मजिस्ट्रेट के पास पाँच तरह के औज़ार हैं, जिन्हें एक मरम्मत-किट की तरह देखें। संरक्षण आदेश (protection order) 'दूर रहो' कहता है: हिंसा मत करो, संपर्क मत करो, कार्यस्थल पर मत जाओ। निवास आदेश (residence order) 'यह घर उसका है' कहता है: उसे बेदखल मत करो, ज़रूरत हो तो वैकल्पिक आवास दो। आर्थिक अनुतोष (monetary relief) 'नुकसान और खर्च की भरपाई करो' कहता है। अभिरक्षा आदेश (custody order) बच्चे की अस्थायी अभिरक्षा तय करता है और प्रतिकर आदेश (compensation order) मानसिक यातना सहित चोटों का हर्जाना दिलाता है।
इन सबकी नींव धारा 17 का अधिकार है: घरेलू संबंध में रहने वाली हर महिला को साझी गृहस्थी में रहने का अधिकार है, चाहे उस घर में उसका कोई स्वामित्व या हित हो या न हो। यानी महिला को घर से 'निकाल देना' सीधा अधिकार-उल्लंघन है, और उसे निकाला तभी जा सकता है जब कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया अपनाई जाए।
धारा 17: साझी गृहस्थी में रहने का अधिकार
धारा 17(1) 'Notwithstanding anything contained in any other law for the time being in force' से शुरू होती है, यानी यह अधिकार अन्य कानूनों के बावजूद लागू रहता है। पाठ है: 'every woman in a domestic relationship shall have the right to reside in the shared household, whether or not she has any right, title or beneficial interest in the same'। धारा 17(2) कहती है कि व्यथित व्यक्ति को प्रतिवादी द्वारा साझी गृहस्थी या उसके किसी भाग से 'save in accordance with the procedure established by law' बेदखल या अपवर्जित नहीं किया जाएगा। इस प्रकार अधिकार पूर्ण निषेध नहीं है; निकालना कानून की प्रक्रिया से ही संभव है।
धारा 17 में 'every woman in a domestic relationship' शब्द हैं और धारा 2(f) और 2(s) उसके अर्थ तय करती हैं, इसलिए पिछले पृष्ठ की परिभाषाएँ यहाँ सीधे काम आती हैं। 2024 के प्रश्न का उत्तर इसी कड़ी से बनता है: विवाह-सदृश संबंध घरेलू संबंध का एक आधार है, इसलिए ऐसी महिला को भी धारा 17 का अधिकार और धारा 18 से 22 के आदेश मिल सकते हैं।
पाँच अनुतोष एक नज़र में (धारा 18 से 22)
| धारा | आदेश | क्या देता है | मजिस्ट्रेट कब देता है |
|---|---|---|---|
| 18 | संरक्षण आदेश (protection order) | प्रतिवादी को हिंसा, संपर्क, कार्यस्थल पर जाने आदि से रोकता है। | दोनों को सुनवाई का अवसर देकर और प्रथम दृष्टया संतुष्ट होने पर कि घरेलू हिंसा हुई है या होने की संभावना है। |
| 19 | निवास आदेश (residence order) | साझी गृहस्थी में रहने की रक्षा; बेदखली, निपटान या अधिकार-त्याग पर रोक; वैकल्पिक आवास। | धारा 12(1) का आवेदन निपटाते समय, यह संतुष्ट होने पर कि घरेलू हिंसा हुई है। |
| 20 | आर्थिक अनुतोष (monetary relief) | खर्च और नुकसान की भरपाई; भरण-पोषण। | धारा 12(1) का आवेदन निपटाते समय। |
| 21 | अभिरक्षा आदेश (custody order) | बच्चे की अस्थायी अभिरक्षा और प्रतिवादी की मुलाक़ात की व्यवस्था। | संरक्षण आदेश या किसी अन्य अनुतोष के आवेदन की सुनवाई के किसी भी चरण में। |
| 22 | प्रतिकर आदेश (compensation order) | मानसिक यातना और भावनात्मक कष्ट सहित चोटों के लिए प्रतिकर और हर्जाना। | व्यथित व्यक्ति के आवेदन पर, अन्य अनुतोषों के अतिरिक्त। |
धारा 18: संरक्षण आदेश
धारा 18 के अनुसार मजिस्ट्रेट पहले व्यथित व्यक्ति और प्रतिवादी को सुनवाई का अवसर देता है और जब वह प्रथम दृष्टया (prima facie) संतुष्ट हो कि घरेलू हिंसा हुई है या होने की संभावना है, तभी संरक्षण आदेश पारित करता है। आदेश में प्रतिवादी को सात बातों से रोका जा सकता है। इस सूची को याद रखने का सरल तरीका: 'हिंसा न करना, मदद न करना, पास न जाना, संपर्क न करना, संपत्ति न हटाना, आश्रितों को न सताना, और जो अन्य लिखा जाए।'
| खंड | प्रतिवादी को किससे रोका जा सकता है |
|---|---|
| (a) | घरेलू हिंसा का कोई कृत्य करना। |
| (b) | घरेलू हिंसा के कृत्यों में सहायता करना या दुष्प्रेरण करना। |
| (c) | व्यथित व्यक्ति के कार्यस्थल में प्रवेश करना; यदि वह बालक हो तो उसके विद्यालय या उसके द्वारा जाने वाले किसी अन्य स्थान में। |
| (d) | किसी भी रूप में, जैसे व्यक्तिगत, मौखिक, लिखित, इलेक्ट्रॉनिक या टेलीफ़ोनिक, उससे संपर्क का प्रयास करना। |
| (e) | दोनों पक्षों द्वारा संयुक्त रूप से या अकेले प्रतिवादी द्वारा प्रयुक्त या धारित संपत्ति, बैंक लॉकर या बैंक खातों को, स्त्रीधन सहित, मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना अन्य-संक्रामित या संचालित करना। |
| (f) | आश्रितों, अन्य रिश्तेदारों या घरेलू हिंसा से सहायता देने वाले किसी व्यक्ति के विरुद्ध हिंसा करना। |
| (g) | संरक्षण आदेश में बताया गया कोई अन्य कृत्य करना। |
धारा 25(1) के अनुसार धारा 18 के अधीन किया गया संरक्षण आदेश तब तक लागू रहता है जब तक व्यथित व्यक्ति उन्मोचन (discharge) के लिए आवेदन न करे। यानी अवधि अपने आप समाप्त नहीं होती और आदेश हटाने की चाबी व्यथित व्यक्ति के हाथ में है। इसका उल्लंघन धारा 31 में अपराध है (नीचे)।
धारा 19: निवास आदेश
निवास आदेश धारा 12(1) का आवेदन निपटाते समय तब दिया जा सकता है जब मजिस्ट्रेट संतुष्ट हो कि घरेलू हिंसा हुई है। धारा 19(1) के छह खंड हैं, जो साझी गृहस्थी में महिला के कब्ज़े और रहने की रक्षा करते हैं। इसका एक महत्त्वपूर्ण परंतुक है: खंड (b) के अधीन, यानी प्रतिवादी को साझी गृहस्थी से हटने का निर्देश, किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध आदेश पारित नहीं होगा जो महिला है।
| खंड | निवास आदेश में क्या निर्देश |
|---|---|
| (a) | प्रतिवादी को व्यथित व्यक्ति को साझी गृहस्थी के कब्ज़े से हटाने या अन्य प्रकार से उसमें बाधा डालने से रोकना, चाहे प्रतिवादी का उसमें वैध या साम्य-आधारित हित हो या न हो। |
| (b) | प्रतिवादी को साझी गृहस्थी से स्वयं हट जाने का निर्देश (परंतुक: किसी महिला के विरुद्ध नहीं)। |
| (c) | प्रतिवादी या उसके किसी रिश्तेदार को साझी गृहस्थी के उस भाग में प्रवेश से रोकना जहाँ व्यथित व्यक्ति रहती है। |
| (d) | प्रतिवादी को साझी गृहस्थी को अन्य-संक्रामित करने, उसका निपटान करने या उस पर भार डालने से रोकना। |
| (e) | प्रतिवादी को मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना साझी गृहस्थी में अपने अधिकार त्यागने से रोकना। |
| (f) | व्यथित व्यक्ति के लिए साझी गृहस्थी जैसे ही स्तर का वैकल्पिक आवास सुनिश्चित करने या ज़रूरत हो तो उसका किराया देने का निर्देश। |
धारा 19 के बाकी उप-खंडों में अतिरिक्त उपाय हैं। (2) मजिस्ट्रेट व्यथित व्यक्ति या उसके किसी बालक की सुरक्षा के लिए आवश्यक अतिरिक्त शर्तें लगा सकता है। (3) वह प्रतिवादी से हिंसा रोकने के लिए बंधपत्र (bond), ज़मानतदारों सहित या रहित, ले सकता है और (4) ऐसा आदेश दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अध्याय VIII के अधीन आदेश माना जाएगा। (5) न्यायालय निकटतम थाने के प्रभारी को व्यथित व्यक्ति को संरक्षण देने या आवेदन करने वाले व्यक्ति की सहायता का निर्देश दे सकता है, (6) प्रतिवादी पर किराये और अन्य भुगतानों के दायित्व डाल सकता है, (7) थाने के प्रभारी को संरक्षण आदेश के क्रियान्वयन में सहायता का निर्देश दे सकता है और (8) व्यथित व्यक्ति को उसका स्त्रीधन या अन्य संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति लौटाने का निर्देश दे सकता है।
धारा 20, 21 और 22: आर्थिक अनुतोष, अभिरक्षा और प्रतिकर
धारा 20(1) के अनुसार मजिस्ट्रेट प्रतिवादी को व्यथित व्यक्ति और उसके बालक के लिए हिंसा से हुए खर्च और नुकसान की भरपाई के रूप में आर्थिक अनुतोष देने का निर्देश दे सकता है, जिसमें सीमित हुए बिना (but not limited to) चार मदें हैं: (a) कमाई की हानि, (b) चिकित्सा खर्च, (c) व्यथित व्यक्ति के नियंत्रण से संपत्ति के नष्ट होने, क्षतिग्रस्त होने या हटाए जाने से हुई हानि और (d) व्यथित व्यक्ति और उसके बालकों का भरण-पोषण, जिसमें दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 या अन्य कानून के अधीन आदेश के अतिरिक्त या उसके अधीन आदेश भी शामिल है।
धारा 20(2) अनुतोष का मानक तय करती है: वह 'adequate, fair and reasonable' हो और उस जीवन-स्तर के अनुरूप हो जिसकी व्यथित व्यक्ति अभ्यस्त है। धारा 20(3) में मजिस्ट्रेट को एकमुश्त राशि या मासिक भरण-पोषण का आदेश देने की शक्ति है। आदेश की प्रति पक्षकारों और उस थाने के प्रभारी को भेजी जाएगी जिसकी अधिकारिता में प्रतिवादी रहता है (20(4)) और प्रतिवादी को आदेश में बताई अवधि में भुगतान करना होगा (20(5))। भुगतान न होने पर मजिस्ट्रेट प्रतिवादी के नियोक्ता या देनदार को वेतन या ऋण का एक भाग सीधे व्यथित व्यक्ति को देने या अदालत में जमा करने का निर्देश दे सकता है (20(6))।
धारा 21 में अभिरक्षा आदेश है। मजिस्ट्रेट किसी भी अन्य कानून के बावजूद संरक्षण आदेश या अन्य अनुतोष के आवेदन की सुनवाई के किसी भी चरण में बालक या बालकों की अस्थायी अभिरक्षा व्यथित व्यक्ति या उसकी ओर से आवेदन करने वाले व्यक्ति को दे सकता है और प्रतिवादी की मुलाक़ात की व्यवस्था तय कर सकता है। परंतुक: यदि मजिस्ट्रेट की राय में प्रतिवादी की कोई मुलाक़ात बालक के हितों के लिए हानिकारक हो तो वह मुलाक़ात की अनुमति देने से इनकार करेगा। धारा 22 में अन्य अनुतोषों के अतिरिक्त मजिस्ट्रेट मानसिक यातना और भावनात्मक कष्ट सहित घरेलू हिंसा से हुई चोटों के लिए प्रतिकर और हर्जाना देने का आदेश दे सकता है।
धारा 23 से 29: प्रक्रिया-संबंधी प्रावधान
धारा 23 में दो शक्तियाँ हैं। अंतरिम आदेश (interim order): मजिस्ट्रेट किसी भी कार्यवाही में ऐसा आदेश दे सकता है जो वह उचित समझे। एकपक्षीय आदेश (ex parte order): यदि आवेदन प्रथम दृष्टया दर्शाता है कि प्रतिवादी घरेलू हिंसा कर रहा है या कर चुका है या करने की संभावना है, तो व्यथित व्यक्ति के शपथ-पत्र के आधार पर वह धारा 18 से 22 के अंतर्गत प्रतिवादी के विरुद्ध एकपक्षीय आदेश दे सकता है। अर्थ यह है कि तत्काल राहत के लिए प्रतिवादी की सुनवाई की प्रतीक्षा आवश्यक नहीं।
धारा 24 के अनुसार आदेश की प्रति निःशुल्क पक्षकारों, थाने के प्रभारी और स्थानीय सेवा प्रदाता को दी जाएगी। धारा 25(2) के अनुसार आदेश में परिस्थिति के परिवर्तन पर व्यथित व्यक्ति या प्रतिवादी के आवेदन पर, लिखित कारण दर्ज कर, परिवर्तन, संशोधन या निरसन हो सकता है। धारा 26 के अनुसार धारा 18 से 22 के अनुतोष सिविल न्यायालय, परिवार न्यायालय या आपराधिक न्यायालय की किसी भी कार्यवाही में भी माँगे जा सकते हैं, चाहे वह कार्यवाही अधिनियम के प्रारंभ से पहले की हो या बाद की। यदि व्यथित व्यक्ति को अन्य कार्यवाही में कोई अनुतोष मिला हो तो उसे यह मजिस्ट्रेट को बताना होगा (26(3))।
धारा 24 से 29 और 31 की मुख्य बातें
| धारा | विषय | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| 23(1) | अंतरिम आदेश | किसी भी कार्यवाही में उचित अंतरिम आदेश। |
| 23(2) | एकपक्षीय आदेश | प्रथम दृष्टया हिंसा या संभावना दिखने पर व्यथित व्यक्ति के शपथ-पत्र पर धारा 18 से 22 के आदेश। |
| 24 | निःशुल्क प्रतियाँ | आदेश की प्रति पक्षकारों, थाने के प्रभारी और स्थानीय सेवा प्रदाता को निःशुल्क। |
| 25(1) | संरक्षण आदेश की अवधि | तब तक लागू जब तक व्यथित व्यक्ति उन्मोचन के लिए आवेदन न करे। |
| 25(2) | परिवर्तन | परिस्थिति-परिवर्तन होने पर आवेदन पर लिखित कारणों सहित परिवर्तन, संशोधन या निरसन। |
| 26 | अन्य कार्यवाहियों में अनुतोष | धारा 18 से 22 के अनुतोष सिविल, परिवार या आपराधिक न्यायालय की कार्यवाही में भी माँगे जा सकते हैं। |
| 27(1) | अधिकारिता | प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट या महानगर मजिस्ट्रेट, जिसकी सीमा में व्यथित व्यक्ति स्थायी या अस्थायी रूप से रहती, कारोबार करती या नियोजित है; या प्रतिवादी रहता, कारोबार करता या नियोजित है; या वाद-हेतुक उत्पन्न हुआ। |
| 27(2) | प्रवर्तन | अधिनियम के अधीन दिया कोई भी आदेश पूरे भारत में प्रवर्तनीय। |
| 28(1) | प्रक्रिया | धारा 12, 18 से 23 की कार्यवाहियाँ और धारा 31 के अपराध दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के उपबंधों से शासित। |
| 28(2) | न्यायालय की अपनी प्रक्रिया | धारा 12 के आवेदन या धारा 23(2) के निपटारे के लिए न्यायालय अपनी प्रक्रिया बना सकता है। |
| 29 | अपील | मजिस्ट्रेट के आदेश की तामील के तीस दिन के भीतर सत्र न्यायालय में, उस तिथि से जो बाद की हो (व्यथित व्यक्ति या प्रतिवादी)। |
| 31(1) | आदेश के उल्लंघन का दंड | संरक्षण आदेश या अंतरिम संरक्षण आदेश का उल्लंघन अपराध: किसी भी प्रकार के कारावास से, एक वर्ष तक, या जुर्माने से, बीस हज़ार रुपये तक, या दोनों से। |
| 31(2) | विचारण | जहाँ तक व्यावहारिक हो, वही मजिस्ट्रेट जिसने आदेश पारित किया। |
| 31(3) | आरोप | आरोप तय करते समय मजिस्ट्रेट भारतीय दंड संहिता की धारा 498-A या उस संहिता के अन्य उपबंध या दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के आरोप भी लगा सकता है, यदि तथ्य उन अपराधों को दर्शाते हों। |
दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय दंड संहिता की जगह नई संहिताएँ
इस अधिनियम का पाठ 2005 का है, इसलिए वह भारतीय दंड संहिता (IPC) और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) का हवाला देता है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 531(1) कहती है कि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 निरसित है, और BNS और BNSS 1 जुलाई 2024 से लागू हैं। अध्ययन-सहायता के रूप में तीन मिलान याद रखें: (1) IPC की धारा 498-A का अपराध BNS में धारा 85 है और उसमें 'क्रूरता' की परिभाषा धारा 86 में है, जिसकी सज़ा तीन वर्ष तक कारावास और जुर्माना है; (2) CrPC की धारा 125, जिसकी चर्चा धारा 20(1)(d) में है, अब BNSS की धारा 144 (पत्नी, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण का आदेश) है; (3) धारा 19(4) में जिस CrPC अध्याय VIII का उल्लेख है, उसका समतुल्य BNSS का अध्याय IX (Security for keeping the peace and for good behaviour) है। परीक्षा के उत्तर में पहले अधिनियम के पाठ का हवाला दें, फिर कोष्ठक में नया मिलान दें।
आदेश से अपील और उल्लंघन तक
आवेदन
धारा 12 (एक या अधिक अनुतोष)
अंतरिम / एकपक्षीय आदेश
धारा 23, शपथ-पत्र के आधार पर
सुनवाई और अंतिम आदेश
धारा 18 से 22; निःशुल्क प्रति (धारा 24)
अपील
तीस दिन में सत्र न्यायालय (धारा 29)
उल्लंघन
धारा 31: एक वर्ष तक कारावास या बीस हज़ार रुपये तक जुर्माना या दोनों
पाँच आदेश: मानसिक नक्शा
मजिस्ट्रेट के आदेश
संरक्षण आदेश (18)
- हिंसा और संपर्क पर रोक
- कार्यस्थल या विद्यालय में प्रवेश पर रोक
- संपत्ति और खातों के निपटान पर रोक
- उल्लंघन: धारा 31
निवास आदेश (19)
- कब्ज़े और बेदखली पर रोक
- प्रतिवादी को हटने का निर्देश (महिला के विरुद्ध नहीं)
- वैकल्पिक आवास या किराया
आर्थिक अनुतोष (20)
- कमाई की हानि, चिकित्सा, संपत्ति की हानि
- भरण-पोषण
- नियोक्ता या देनदार से सीधा भुगतान
अभिरक्षा (21) और प्रतिकर (22)
- बालक की अस्थायी अभिरक्षा
- मानसिक यातना सहित प्रतिकर
सहायता कहाँ मिलती है
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार Women Helpline 181 महिलाओं के लिए 24 घंटे की टोल-फ़्री टेलीफ़ोन सेवा है, जो पुलिस, One Stop Centre और अस्पतालों जैसे प्राधिकारियों से जोड़ती है। यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है; संकट की स्थिति में स्थानीय पुलिस या अधिकृत सेवा से तुरंत संपर्क करें।
मुख्य तथ्य
- धारा 17
- घरेलू संबंध में हर महिला को साझी गृहस्थी में रहने का अधिकार, चाहे उसका कोई अधिकार, स्वामित्व या लाभकारी हित हो या न हो; बेदखली केवल कानून की प्रक्रिया से
- धारा 18
- सात प्रतिषेध, खंड (a) से (g); प्रथम दृष्टया संतुष्टि और सुनवाई का अवसर आवश्यक
- धारा 19
- छह निर्देश, खंड (a) से (f), और उप-धाराएँ (2) से (8); खंड (b) का परंतुक: महिला के विरुद्ध नहीं
- धारा 20(2)
- अनुतोष adequate, fair and reasonable और अभ्यस्त जीवन-स्तर के अनुरूप
- धारा 23(2)
- शपथ-पत्र के आधार पर एकपक्षीय आदेश
- धारा 25(1)
- संरक्षण आदेश तब तक लागू जब तक व्यथित व्यक्ति उन्मोचन के लिए आवेदन न करे
- धारा 27
- अधिकारिता: व्यथित व्यक्ति या प्रतिवादी का निवास, कारोबार या नियोजन का स्थान, या वाद-हेतुक का स्थान; आदेश पूरे भारत में प्रवर्तनीय
- धारा 29
- तीस दिन में सत्र न्यायालय में अपील
- धारा 31(1)
- उल्लंघन: एक वर्ष तक कारावास, या बीस हज़ार रुपये तक जुर्माना, या दोनों
- धारा 31 का सार
- संरक्षण आदेश या अंतरिम संरक्षण आदेश के उल्लंघन पर एक वर्ष तक कारावास, या बीस हज़ार रुपये तक जुर्माना, या दोनों; वही मजिस्ट्रेट सामान्यतः विचारण करता है
- BNS में 498-A का स्थान
- भारतीय न्याय संहिता, 2023: धारा 85 (अपराध) और 86 (क्रूरता की परिभाषा); सज़ा तीन वर्ष तक कारावास और जुर्माना
- BNSS में धारा 125 CrPC का स्थान
- धारा 144, 'Order for maintenance of wives, children and parents'; CrPC निरसित (धारा 531(1))
- अंतिम जाँच
- 2 अक्तूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- संरक्षण आदेश और निवास आदेश को एक ही समझना। पहला प्रतिवादी के आचरण पर रोक है (धारा 18), दूसरा साझी गृहस्थी में कब्ज़े और रहने की सुरक्षा (धारा 19)।
- धारा 19(1)(b) का परंतुक भूल जाना: प्रतिवादी को घर से हटने का निर्देश किसी महिला के विरुद्ध नहीं दिया जा सकता।
- अपील की अवधि 60 या 90 दिन लिख देना। धारा 29 में तीस दिन और सत्र न्यायालय है, आदेश की तामील के बाद से, और जो तिथि बाद की हो।
- संरक्षण आदेश की अवधि निश्चित वर्ष बता देना। धारा 25(1) में वह तब तक है जब तक व्यथित व्यक्ति उन्मोचन का आवेदन न करे।
- धारा 31 के दंड में बीस हज़ार रुपये को 'न्यूनतम जुर्माना' लिख देना। यह अधिकतम सीमा है: 'may extend to'।
- धारा 17 को निरपेक्ष अधिकार लिखना। पाठ में बेदखली 'procedure established by law' से संभव है।
- धारा 20 के आर्थिक अनुतोष (जिसमें भरण-पोषण शामिल है) और CrPC की धारा 125 (अब BNSS धारा 144) के भरण-पोषण आदेश को एक ही बताना। धारा 20(1)(d) दोनों को जोड़ती है, पर वे अलग उपाय हैं।
कार्य-उदाहरण (कल्पित): ज़रूरत से आदेश तक
हल सहित उदाहरणपाँच ज़रूरतें, पाँच आदेश
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; पात्र और घटनाएँ वास्तविक नहीं हैं। कल्पित महिला रीना के आवेदन में पाँच ज़रूरतें हैं। हर ज़रूरत के लिए सही धारा चुनिए।
- 11. प्रतिवादी बार-बार उसके कार्यालय पहुँचता है और फ़ोन करता है संरक्षण आदेश, धारा 18(c) (कार्यस्थल में प्रवेश पर रोक) और 18(d) (संपर्क पर रोक)।
- 22. प्रतिवादी घर बेचने की धमकी देता है निवास आदेश, धारा 19(1)(d) (साझी गृहस्थी के अन्य-संक्रामण या निपटान पर रोक) और 19(1)(a) (कब्ज़े में बाधा पर रोक)।
- 33. चोट के कारण कमाई गई और इलाज पर ख़र्च हुआ आर्थिक अनुतोष, धारा 20(1)(a) और (b)।
- 44. छोटे बच्चे को अपने साथ रखना चाहती है अभिरक्षा आदेश, धारा 21, मुलाक़ात की व्यवस्था सहित; बालक के हित के विरुद्ध हो तो मुलाक़ात अस्वीकार।
- 55. मानसिक यातना के लिए हर्जाना माँगती है प्रतिकर आदेश, धारा 22 (मानसिक यातना और भावनात्मक कष्ट सहित)।
निष्कर्ष: एक ही आवेदन में एक से अधिक अनुतोष माँगे जा सकते हैं (धारा 12(1)), और तत्काल राहत के लिए धारा 23(2) के अंतर्गत एकपक्षीय आदेश भी माँगा जा सकता है।
केस स्टडी (कल्पित): आदेश से उल्लंघन और अपील तक
उदाहरण (काल्पनिक)एक संरक्षण आदेश का जीवन-चक्र
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; पात्र और स्थान वास्तविक नहीं हैं। कल्पित महिला ने मजिस्ट्रेट के पास आवेदन किया। मामला चरणों में आगे बढ़ता है और हर चरण पर अधिनियम की एक धारा लागू होती है।
- तत्काल राहत
- आवेदन में शपथ-पत्र के आधार पर मजिस्ट्रेट धारा 23(2) के अंतर्गत एकपक्षीय अंतरिम संरक्षण आदेश देता है, जो प्रतिवादी को संपर्क करने से रोकता है।
- सुनवाई और अंतिम आदेश
- दोनों पक्षों को सुनने के बाद मजिस्ट्रेट धारा 18 का संरक्षण आदेश और धारा 19 का निवास आदेश देता है। आदेश की प्रति निःशुल्क पक्षकारों, थाने और सेवा प्रदाता को दी जाती है (धारा 24)।
- अपील
- प्रतिवादी आदेश की तामील के तीस दिन के भीतर सत्र न्यायालय में अपील कर सकता है (धारा 29)। व्यथित व्यक्ति भी चाहे तो अपील कर सकती है।
- उल्लंघन
- यदि प्रतिवादी फिर संपर्क करे तो यह धारा 31(1) का अपराध है। सामान्यतः वही मजिस्ट्रेट विचारण करता है (धारा 31(2)) और तथ्य अनुमति दें तो वह धारा 498-A (अब BNS 85) जैसे आरोप भी लगा सकता है (धारा 31(3))।
- आदेश की अवधि
- आदेश तब तक लागू रहता है जब तक महिला उन्मोचन का आवेदन न दे (धारा 25(1)); परिस्थितियाँ बदलें तो कोई भी पक्ष लिखित कारणों सहित संशोधन माँग सकता है (धारा 25(2))।
सीख
अधिनियम का क्रम है: तत्काल राहत, अंतिम आदेश, अपील का अधिकार, उल्लंघन पर दंड और परिस्थिति बदलने पर आदेश में बदलाव। यह क्रम याद रखने से 10 अंक का उत्तर तैयार हो जाता है।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2024RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
Protection of a woman in a live-in relationship under the DV Act
आदर्श उत्तर
विवाह-सदृश संबंध वाली महिला को धारा 17 का निवास-अधिकार और धारा 18-20 के आदेश मिल सकते हैं।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
संरक्षण आदेश कब पारित किया जा सकता है?
आदर्श उत्तर
दोनों पक्षों को सुनकर, प्रथम दृष्टया घरेलू हिंसा हुई या होने की संभावना मानने पर (धारा 18)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
धारा 29 के अंतर्गत अपील कहाँ और कितने दिन में होती है?
आदर्श उत्तर
आदेश की तामील के तीस दिन के भीतर सत्र न्यायालय में अपील होती है (धारा 29)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
निवास आदेश (residence order) के अंतर्गत मजिस्ट्रेट कौन-से निर्देश दे सकता है?
आदर्श उत्तर
धारा 19(1) में मजिस्ट्रेट प्रतिवादी को व्यथित व्यक्ति को कब्ज़े से हटाने से रोक सकता है, उसे साझी गृहस्थी से हटने का निर्देश दे सकता है, रिश्तेदारों के प्रवेश, अन्य-संक्रामण और अधिकार-त्याग पर रोक लगा सकता है और वैकल्पिक आवास या किराये का निर्देश दे सकता है। महिला के विरुद्ध हटने का निर्देश नहीं दिया जाएगा।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
संरक्षण आदेश के उल्लंघन का दंड धारा 31 के अनुसार बताइए।
आदर्श उत्तर
धारा 31(1): संरक्षण या अंतरिम संरक्षण आदेश का उल्लंघन अपराध है, जिसमें एक वर्ष तक किसी भी प्रकार का कारावास, या बीस हज़ार रुपये तक जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। सामान्यतः वही मजिस्ट्रेट विचारण करता है और तथ्य अनुमति दें तो 498-A या दहेज प्रतिषेध अधिनियम के आरोप भी लगा सकता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
घरेलू हिंसा अधिनियम में मजिस्ट्रेट द्वारा दिए जा सकने वाले अनुतोषों की विवेचना कीजिए।
आदर्श उत्तर
मजिस्ट्रेट पाँच प्रमुख आदेश दे सकता है। संरक्षण आदेश (धारा 18) प्रतिवादी को हिंसा, संपर्क और कार्यस्थल-प्रवेश से रोकता है। निवास आदेश (धारा 19) साझी गृहस्थी में रहने की रक्षा करता है। आर्थिक अनुतोष (धारा 20) में कमाई की हानि, चिकित्सा खर्च और भरण-पोषण आते हैं। अभिरक्षा आदेश (धारा 21) बालक की अस्थायी अभिरक्षा देता है। प्रतिकर आदेश (धारा 22) मानसिक यातना सहित चोटों का हर्जाना दिलाता है। अंतरिम और एकपक्षीय आदेश धारा 23 में हैं। आदेश की प्रति निःशुल्क मिलती है (धारा 24) और तीस दिन में सत्र न्यायालय में अपील हो सकती है (धारा 29)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
धारा 17 (साझी गृहस्थी में रहने का अधिकार) और धारा 19 (निवास आदेश) का संबंध समझाइए।
आदर्श उत्तर
धारा 17 घरेलू संबंध में हर महिला को साझी गृहस्थी में रहने का अधिकार देती है, चाहे उसका उसमें कोई अधिकार, स्वामित्व या लाभकारी हित हो या न हो। बेदखली केवल कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया से हो सकती है। धारा 19 इस अधिकार को लागू कराने का साधन है, जिसमें मजिस्ट्रेट कब्ज़े में बाधा, अन्य-संक्रामण और अधिकार-त्याग पर रोक लगाता है, प्रतिवादी को हटने का निर्देश देता है और वैकल्पिक आवास सुनिश्चित कराता है। इस प्रकार धारा 17 अधिकार है और धारा 19 उसका उपचार।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 में पीड़ित महिला को उपलब्ध अनुतोषों का विवेचन कीजिए।" पहली पंक्ति में धारा 17 का अधिकार और फिर पाँच आदेश बताएँ। (5 अंक में तीन-चार आदेश; 2 अंक में एक आदेश या एक तथ्य।)
मुख्य भाग
- अधिकार: धारा 17, साझी गृहस्थी में रहने का अधिकार, स्वामित्व हो या न हो
- पाँच आदेश: संरक्षण (18), निवास (19), आर्थिक (20), अभिरक्षा (21), प्रतिकर (22), एक-एक पंक्ति
- प्रक्रिया: अंतरिम और एकपक्षीय आदेश (23), अपील तीस दिन में सत्र न्यायालय (29), उल्लंघन पर धारा 31 का दंड
निष्कर्ष
निष्कर्ष: ये अनुतोष महिला को केवल दंड का रास्ता नहीं, बल्कि सुरक्षा, आवास और आर्थिक सहारा तुरंत उपलब्ध कराते हैं।
अतिरिक्त मूल्य
- धारा 19(1)(b) का परंतुक
- धारा 31 के दंड की अधिकतम सीमा
- IPC 498-A का BNS 85 में मिलान (अध्ययन-सहायता)
त्वरित पुनरावृत्ति
- धारा 17: घरेलू संबंध में हर महिला को साझी गृहस्थी में रहने का अधिकार; बेदखली कानून की प्रक्रिया से ही
- धारा 18: संरक्षण आदेश; सुनवाई का अवसर और प्रथम दृष्टया संतुष्टि; खंड (a) से (g)
- धारा 19: निवास आदेश; खंड (a) से (f); (b) का परंतुक: महिला के विरुद्ध हटने का निर्देश नहीं
- धारा 20: आर्थिक अनुतोष; कमाई, चिकित्सा, संपत्ति की हानि, भरण-पोषण; adequate, fair and reasonable
- धारा 21: बालक की अस्थायी अभिरक्षा; हानिकारक मुलाक़ात अस्वीकार
- धारा 22: प्रतिकर, मानसिक यातना सहित
- धारा 23: अंतरिम और एकपक्षीय आदेश (शपथ-पत्र पर)
- धारा 24: आदेश की निःशुल्क प्रतियाँ
- धारा 25(1): संरक्षण आदेश उन्मोचन के आवेदन तक लागू; 25(2): परिवर्तन
- धारा 26: अन्य कार्यवाहियों में भी अनुतोष; धारा 27: अधिकारिता और पूरे भारत में प्रवर्तन
- धारा 28: दंड प्रक्रिया संहिता से शासित; अब BNSS; धारा 29: तीस दिन में सत्र न्यायालय में अपील
- धारा 31: उल्लंघन पर एक वर्ष तक कारावास, या बीस हज़ार रुपये तक जुर्माना, या दोनों
याद रखने योग्य शब्द
- protection order
- residence order
- monetary relief
- एकपक्षीय आदेश
- धारा 31