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पेपर III · इकाई III · भाग ख (Law)

बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR): अवधारणा, प्रकार और उद्देश्य

IPR क्या है, इसके प्रकार, हर अधिकार का कानून और अवधि, और 2016 के प्रश्न का हल।

  • IPR
  • पेटेंट
  • कॉपीराइट
  • ट्रेडमार्क
  • GI
  • डिज़ाइन
  • व्यापार रहस्य
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (Law, section-exact): बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights)। यह पृष्ठ अवधारणा, प्रकार और उद्देश्य पर है। भारत का कानूनी ढाँचा, संस्थाएँ और कॉपीराइट की विषय-वस्तु अगले पृष्ठ पर है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • उपलब्ध पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में बौद्धिक संपदा से दो प्रश्न आए हैं, दोनों 2 अंक के: 2016 (पेपर III) में "बौद्धिक संपदा अधिकार के कोई चार प्रकार" और 2023 में कॉपीराइट की विषय-वस्तु। पहले का हल इसी पृष्ठ पर है, दूसरे का अगले पृष्ठ पर।
  • Law के प्रश्न अक्सर परिभाषा या सूची के होते हैं। इसलिए हर अधिकार का नाम, उसका कानून और उसकी अवधि एक साथ याद रखना सबसे अच्छी तैयारी है।
  • अवधि वाले आँकड़े (20 वर्ष, 10 वर्ष, 60 वर्ष) अधिनियम के पाठ से लिए गए हैं और तुलना-तालिका में एक जगह दिए हैं।

बौद्धिक संपदा क्या है और इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी

मान लीजिए जयपुर का एक कारीगर नीले रंग की एक नई डिज़ाइन बनाता है। उसकी पूँजी न कोई मशीन है, न कोई ज़मीन; उसकी पूँजी वह विचार और कौशल है। अगर अगले ही दिन बाज़ार में कोई उसकी नक़ल बेचने लगे, तो उसकी मेहनत का फल कोई और खा जाएगा। बौद्धिक संपदा अधिकार इसी समस्या का उत्तर हैं।

CIPAM की परिभाषा के अनुसार बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) मानव मस्तिष्क की रचनाओं को कहते हैं, जैसे आविष्कार, साहित्यिक और कलात्मक कृतियाँ, प्रतीक, नाम, चित्र और डिज़ाइन, जो व्यापार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कला जैसे क्षेत्रों में प्रयोग होते हैं। भौतिक संपत्ति को छुआ और देखा जा सकता है, पर यह संपत्ति अमूर्त (intangible) है। फिर भी यह भौतिक संपत्ति की तरह खरीदी, बेची, लाइसेंस पर दी, उपहार में दी या विरासत में दी जा सकती है। इन रचनाओं के रचनाकारों या स्वामियों को क़ानून जो सुरक्षा देता है, उसे बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights, IPR) कहते हैं।

IPR के पीछे तीन तर्क हैं। पहला, पुरस्कार: CIPAM के अनुसार ये अधिकार रचनाकारों को उनके प्रयासों और निवेश का फल सुनिश्चित करके नवाचार और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करते हैं। दूसरा, अनधिकृत प्रयोग पर रोक: स्वामी के पास विशेष अधिकार होते हैं, जिनके बल पर वह बिना अनुमति नक़ल, प्रयोग या दोहन रोक सकता है। तीसरा, प्रवर्तन: उल्लंघन होने पर न्यायालय में कार्रवाई हो सकती है। इन तीनों को जोड़कर कहें तो IPR रचना करने वाले को सुरक्षा देते हैं ताकि समाज में और रचनाएँ बनें।

इसके साथ एक संतुलन भी जुड़ा है। पेटेंट में आविष्कारक को सीमित अवधि के लिए एकाधिकार इस शर्त पर मिलता है कि वह अपने आविष्कार का पूरा तकनीकी विवरण सार्वजनिक करे। यानी कुछ समय का एकाधिकार और बदले में ज्ञान का सार्वजनिक होना। राष्ट्रीय IPR नीति, 2016 भी, CIPAM के अनुसार, अधिकार-धारकों के हित और व्यापक जनहित के बीच संतुलन की बात करती है।

अधिकारों की सूची: भारत में कौन से प्रकार माने जाते हैं

CIPAM के अनुसार भारत में IPR के ये प्रकार मान्य हैं: कॉपीराइट (Copyrights), पेटेंट (Patents), ट्रेडमार्क (Trademarks), डिज़ाइन (Designs), भौगोलिक संकेतक (Geographical Indications), पादप किस्में (Plant Varieties) और अर्धचालक (Semi-Conductors)। यह सात की सूची है और परीक्षा में 'चार प्रकार बताइए' जैसे प्रश्न का उत्तर इसी में से चुनकर लिखा जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर WTO के TRIPS समझौते (Agreement on Trade-Related Aspects of Intellectual Property Rights) की सूची थोड़ी अलग शैली में है। उसके अनुसार इसमें ये क्षेत्र आते हैं: कॉपीराइट और संबंधित अधिकार (कलाकारों, ध्वनि-रिकॉर्डिंग के निर्माताओं और प्रसारण संगठनों के अधिकार), सेवा चिह्न सहित ट्रेडमार्क, उत्पत्ति-स्थान के नामों सहित भौगोलिक संकेतक, औद्योगिक डिज़ाइन, पौधों की नई किस्मों की सुरक्षा सहित पेटेंट, एकीकृत परिपथों के लेआउट-डिज़ाइन, और अप्रकट सूचना (undisclosed information) जिसमें व्यापार रहस्य (trade secrets) और परीक्षण-डेटा शामिल हैं। TRIPS 1 जनवरी 1995 से प्रभावी हुआ।

दोनों सूचियों को साथ पढ़ें, क्योंकि उत्तर में एक बात का अंतर दिखाना अच्छा लगता है: व्यापार रहस्य TRIPS की सूची में है, पर CIPAM की 'भारत में मान्य प्रकार' वाली सूची में नाम से नहीं है। इसलिए 'चार प्रकार' के उत्तर में सुरक्षित चुनाव पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और भौगोलिक संकेतक जैसे प्रकार हैं, जिनके अपने अधिनियम हैं।

पेटेंट (Patent)

IP India के अनुसार पेटेंट किसी आविष्कार के लिए सरकार द्वारा पेटेंटी को सीमित अवधि के लिए दिया गया वैधानिक अधिकार है, जो आविष्कार के पूर्ण प्रकटन के बदले मिलता है। इस अधिकार से वह दूसरों को उस उत्पाद या प्रक्रिया को बिना सहमति बनाने, प्रयोग करने, बेचने या आयात करने से रोक सकता है। CIPAM के अनुसार पेटेंट प्रादेशिक (territorial) है, यानी उसी देश में लागू होता है जहाँ वह दिया गया है। भारत में यह पेटेंट अधिनियम, 1970 से शासित है।

पेटेंट के लिए आविष्कार को तीन कसौटियाँ पूरी करनी होती हैं: नवीनता (novelty), आविष्कारी चरण (inventive step) और औद्योगिक प्रयोज्यता (industrial application)। साथ ही उस पर धारा 3 और 4 के अपवाद लागू नहीं होने चाहिए। धारा 2(1)(j) में 'आविष्कार' (invention) का अर्थ ऐसा नया उत्पाद या प्रक्रिया है जिसमें आविष्कारी चरण हो और जो औद्योगिक प्रयोग में सक्षम हो। धारा 2(1)(ja) के अनुसार आविष्कारी चरण वह विशेषता है जो मौजूदा ज्ञान की तुलना में तकनीकी उन्नति या आर्थिक महत्व या दोनों वाली हो और जिससे आविष्कार उस क्षेत्र के कुशल व्यक्ति के लिए स्पष्ट न रहे।

अवधि: धारा 53(1) के अनुसार पेटेंट की अवधि आवेदन की तिथि से 20 वर्ष है। CIPAM भी यही बताता है, और WTO के TRIPS समझौते का अनुच्छेद 33 भी न्यूनतम अवधि फ़ाइलिंग तिथि से 20 वर्ष तय करता है। CIPAM के अनुसार धारा 3 और 4 के अंतर्गत वैज्ञानिक सिद्धांत या अमूर्त सिद्धांत, मनुष्यों या पशुओं के उपचार की विधियाँ, और कंप्यूटर प्रोग्राम अपने आप में पेटेंट नहीं हो सकते। अपवादों की पूरी सूची के लिए 'देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ'।

कॉपीराइट और संबंधित अधिकार (Copyright and related rights)

कॉपीराइट रचनाकारों को उनकी मौलिक कृतियों पर मिलने वाला अधिकार है। IP India के अनुसार कॉपीराइट साहित्यिक (कंप्यूटर प्रोग्राम सहित), नाट्य, संगीत और कलात्मक कृतियों के रचनाकारों तथा सिनेमैटोग्राफ़ फ़िल्मों और ध्वनि-रिकॉर्डिंग के निर्माताओं को मिलता है। यह अधिकारों का एक गुच्छा है, जिसमें पुनरुत्पादन (reproduction), जनता तक संप्रेषण (communication to the public), रूपांतरण (adaptation) और अनुवाद (translation) शामिल हैं। भारत में यह कॉपीराइट अधिनियम, 1957 से शासित है।

तीन बातें हमेशा याद रखें। पहली, कॉपीराइट विचार की नहीं, विचार की अभिव्यक्ति (expression) की रक्षा करता है। दूसरी, कृति मौलिक (original) होनी चाहिए, यानी नक़ल की हुई न हो। तीसरी, कॉपीराइट रचना के साथ ही अपने आप उत्पन्न हो जाता है, पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, पर पंजीकरण साक्ष्य का काम करता है।

अवधि (धारा 22, 26, 27): लेखक के जीवनकाल में प्रकाशित साहित्यिक, नाट्य, संगीत और कलात्मक कृतियों में कॉपीराइट लेखक के जीवनकाल और उसके बाद 60 वर्ष रहता है; ये 60 वर्ष लेखक की मृत्यु के अगले कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से गिने जाते हैं। सिनेमैटोग्राफ़ फ़िल्मों और ध्वनि-रिकॉर्डिंग में 60 वर्ष हैं, जो प्रकाशन के अगले कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से गिने जाते हैं। अन्य प्रकार की कृतियों (जैसे अज्ञात-नामा कृतियाँ) के लिए धारा 23 आदि अलग हैं। 'संबंधित अधिकार' (related rights) वे अधिकार हैं जो मूल रचनाकार के अलावा कलाकारों, ध्वनि-रिकॉर्डिंग निर्माताओं और प्रसारण संगठनों को मिलते हैं (WTO के TRIPS के अनुसार)। भारत में 2012 के संशोधन ने, IP India के अनुसार, कलाकारों को विशेष आर्थिक और नैतिक अधिकार दिए। कॉपीराइट की विषय-वस्तु की विस्तृत चर्चा अगले पृष्ठ पर है।

ट्रेडमार्क (Trade Mark)

IP India के अनुसार ट्रेडमार्क ऐसा चिह्न है जो एक व्यक्ति की वस्तुओं या सेवाओं को दूसरों से अलग पहचान दे सके। यह स्रोत की पहचान बताता है और ब्रांड की साख की रक्षा करता है। इसमें शब्द (नाम सहित), अक्षर या अंक, लोगो, चिह्न या डिवाइस, रंगों का संयोजन, वस्तु या उसकी पैकेजिंग का आकार, और ध्वनियाँ आ सकती हैं।

CIPAM ने ट्रेडमार्क के कार्य गिनाए हैं: पहचान, स्रोत की पहचान, गुणवत्ता का आश्वासन और विज्ञापन-मूल्य। पंजीकरण योग्य चिह्न में विशिष्टता (distinctiveness) चाहिए; जो चिह्न विशिष्टता-रहित, सामान्य या वर्णनात्मक शब्द हों, या जनता को भ्रमित करने वाले हों, वे अस्वीकार हो सकते हैं। अवधि: धारा 25(1) के अनुसार पंजीकरण की अवधि दस वर्ष है और धारा 25(2) के अनुसार इसका नवीकरण हर बार दस वर्ष के लिए हो सकता है। इसीलिए CIPAM कहता है कि ट्रेडमार्क हर 10 वर्ष पर नवीकरणीय हैं, और इस अर्थ में अवधि सैद्धांतिक रूप से बढ़ती रह सकती है। कानून: ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999।

भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication, GI)

भौगोलिक संकेतक वह संकेत है जो किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र से उत्पन्न वस्तु की पहचान कराता है और जिसकी विशेष गुणवत्ता, साख या अन्य विशेषता उस स्थान से जुड़ी होती है। भारतीय अधिनियम में 'भौगोलिक संकेतक' (geographical indication) की परिभाषा धारा 2(1)(e) में है। IP India इसके पाँच तत्व गिनाता है: यह एक संकेत है; किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र से उत्पन्न होता है; कृषि, प्राकृतिक या निर्मित वस्तुओं की पहचान कराता है; निर्मित वस्तुएँ उसी क्षेत्र में बनी, संसाधित या तैयार हों; और उनमें विशेष गुणवत्ता, साख या अन्य विशेषता हो।

कानून: वस्तुओं के भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 (1999 का अधिनियम सं. 48)। अवधि: धारा 18(1) के अनुसार पंजीकरण दस वर्ष के लिए है और नवीकरणीय है। ध्यान रखें कि ट्रेडमार्क और GI का मूल अंतर स्वामित्व का है: ट्रेडमार्क किसी एक व्यक्ति या संस्था का होता है, जबकि GI के पंजीकृत स्वामी उत्पादकों के संघ, संगठन या विधि से स्थापित प्राधिकारी होते हैं, और उत्पादक 'प्राधिकृत उपयोगकर्ता' (authorised user) के रूप में पंजीकृत होते हैं।

औद्योगिक डिज़ाइन (Industrial Design)

IP India के अनुसार डिज़ाइन किसी वस्तु के उन दृश्य गुणों को कहते हैं, जैसे आकार, पैटर्न या अलंकरण, जो औद्योगिक प्रक्रिया से लगाए जाते हैं, आँख को भाते हैं और केवल आँख से परखे जाते हैं, तथा कार्यात्मक या यांत्रिक पहलू इसमें शामिल नहीं हैं। उदाहरण: मोबाइल का आकार, कुर्सी की बनावट, कपड़े पर दोहराया जाने वाला पैटर्न। डिज़ाइन का उद्देश्य वस्तु को देखने में आकर्षक बनाना है।

कानून: डिज़ाइन अधिनियम, 2000। अवधि: धारा 11(1) के अनुसार पंजीकरण की तिथि से दस वर्ष, और धारा 11(2) के अनुसार पाँच वर्ष की अतिरिक्त वृद्धि संभव है। जो डिज़ाइन नया या मौलिक नहीं है, पहले प्रकाशित हो चुका है, या केवल कार्य से तय होता है, वह पंजीकृत नहीं हो सकता।

व्यापार रहस्य, पादप किस्में और लेआउट-डिज़ाइन: कितना और कैसे

व्यापार रहस्य (trade secret): WIPO के अनुसार व्यापार रहस्य गोपनीय सूचना पर बौद्धिक संपदा अधिकार हैं, जिन्हें बेचा या लाइसेंस पर दिया जा सकता है। रहस्य बनने की तीन सामान्य शर्तें हैं: सूचना गुप्त होने के कारण वाणिज्यिक रूप से मूल्यवान हो, केवल सीमित व्यक्तियों को ज्ञात हो, और धारक ने उसे गुप्त रखने के उचित कदम उठाए हों, जैसे साझेदारों और कर्मचारियों से गोपनीयता-अनुबंध। ईमानदार वाणिज्यिक रीतियों के विपरीत ऐसी सूचना को लेना, प्रयोग करना या बताना अनुचित व्यवहार माना जाता है। पेटेंट से अंतर: यहाँ कोई पंजीकरण और कोई तयशुदा अवधि नहीं है, पर सुरक्षा तभी तक है जब तक रहस्य बना रहे।

भारत में व्यापार रहस्य की स्थिति पर सावधानी चाहिए। CIPAM की सूची में, जो सात प्रकार बताती है, व्यापार रहस्य नाम से नहीं है। भारत में इसके लिए अलग अधिनियम का पाठ इस पृष्ठ में नहीं दिया गया है; इसलिए इससे आगे का दावा न करें। देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ।

पादप किस्में (plant varieties) और अर्धचालक एकीकृत परिपथ लेआउट-डिज़ाइन (semiconductor integrated circuit layout-designs) CIPAM की सात की सूची में हैं और TRIPS में भी आती हैं (पौधों की नई किस्मों का उल्लेख पेटेंट के अंतर्गत, और लेआउट-डिज़ाइन अलग शीर्षक में)। इनके लिए भारत में अलग विशेष (sui generis) व्यवस्थाएँ हैं: पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकारों का संरक्षण अधिनियम, 2001 और अर्धचालक एकीकृत परिपथ अभिन्यास-डिज़ाइन अधिनियम, 2000। इनकी अवधि और विशेष शर्तें इस पृष्ठ में नहीं दी जा रहीं; उनके लिए 'देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ'।

तुलना-तालिका: कौन सा अधिकार क्या बचाता है और कितने समय तक

अधिकारक्या बचाता हैभारतीय कानूनअवधि (कानून के अनुसार)
पेटेंट (Patent)नया, आविष्कारी चरण वाला, औद्योगिक रूप से प्रयोज्य उत्पाद या प्रक्रियापेटेंट अधिनियम, 1970आवेदन की तिथि से 20 वर्ष (धारा 53(1))
कॉपीराइट (Copyright)मौलिक साहित्यिक, नाट्य, संगीत, कलात्मक कृतियाँ; फ़िल्म; ध्वनि-रिकॉर्डिंगकॉपीराइट अधिनियम, 1957लेखक का जीवन और उसके बाद 60 वर्ष (धारा 22); फ़िल्म और ध्वनि-रिकॉर्डिंग 60 वर्ष (धारा 26, 27)
ट्रेडमार्क (Trade Mark)वस्तुओं या सेवाओं की पहचान कराने वाला विशिष्ट चिह्नट्रेड मार्क्स अधिनियम, 199910 वर्ष; हर बार 10 वर्ष के लिए नवीकरणीय (धारा 25)
डिज़ाइन (Design)वस्तु का दृश्य रूप: आकार, पैटर्न, अलंकरणडिज़ाइन अधिनियम, 2000पंजीकरण से 10 वर्ष, फिर 5 वर्ष की वृद्धि (धारा 11)
भौगोलिक संकेतक (GI)स्थान से जुड़ी वस्तु का नाम और साखGI अधिनियम, 199910 वर्ष, नवीकरणीय (धारा 18(1))
व्यापार रहस्यगोपनीय वाणिज्यिक सूचनाभारत के लिए: देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठगोपनीयता बनी रहने तक (WIPO का सामान्य वर्णन)
पादप किस्म; लेआउट-डिज़ाइनविशेष (sui generis) व्यवस्थाPPV&FR अधिनियम, 2001; अर्धचालक अभिन्यास-डिज़ाइन अधिनियम, 2000देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ

अवधि के आँकड़े संबंधित अधिनियम के पाठ से और IP India तथा CIPAM के पृष्ठों से मिलान किए गए हैं।

राजस्थान का पहलू

IP India की पंजीकृत भौगोलिक संकेतकों की दो सूचियों (31 दिसंबर 2025 तक पंजीकृत आवेदनों का विवरण, और पंजीकरण-वर्षवार सूची; पहुँच: 3 अक्टूबर 2026) में राजस्थान की कई वस्तुएँ दर्ज हैं। आवेदन की तिथि और पंजीकरण का वित्त वर्ष इस प्रकार हैं: बीकानेरी भुजिया (आवेदन 28.10.2008; पंजीकरण 2010-11), सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग (02.12.2008; 2009-10), बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंट (10.08.2009; 2011-12), मकराना मार्बल (09.04.2013; 2014-15), पोकरण पॉटरी (19.01.2015; 2017-18), सोजत मेहंदी (13.11.2018; 2021-22) और जोधपुर बंधेज क्राफ़्ट (19.04.2021; 2023-24)। IP India का GI परिचय पृष्ठ भी बीकानेरी भुजिया को संभावित भारतीय GI के उदाहरण के रूप में देता है।

बौद्धिक संपदा अधिकार: एक मानचित्र

बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR)

रचना और आविष्कार

  • पेटेंट: 20 वर्ष (धारा 53(1))
  • कॉपीराइट: जीवन + 60 वर्ष
  • संबंधित अधिकार: कलाकार, ध्वनि-रिकॉर्डिंग, प्रसारण

पहचान और साख

  • ट्रेडमार्क: 10 वर्ष, नवीकरणीय
  • GI: 10 वर्ष, नवीकरणीय

रूप और गोपनीयता

  • डिज़ाइन: 10 + 5 वर्ष
  • व्यापार रहस्य: गोपनीयता तक (WIPO)

विशेष व्यवस्था

  • पादप किस्में
  • अर्धचालक लेआउट-डिज़ाइन
आधार: IP India और CIPAM के पृष्ठ तथा संबंधित अधिनियम।

मुख्य तथ्य

भारत में मान्य IPR के प्रकार (CIPAM)
कॉपीराइट, पेटेंट, ट्रेडमार्क, डिज़ाइन, भौगोलिक संकेतक, पादप किस्में, अर्धचालक
TRIPS का प्रभाव
1 जनवरी 1995; कॉपीराइट और संबंधित अधिकार, ट्रेडमार्क, GI, डिज़ाइन, पेटेंट, लेआउट-डिज़ाइन, अप्रकट सूचना
पेटेंट की अवधि
आवेदन की तिथि से 20 वर्ष, धारा 53(1)
पेटेंट की अवधि: दूसरी पुष्टि
CIPAM: आवेदन की तिथि से 20 वर्ष
ट्रेडमार्क की अवधि
10 वर्ष, नवीकरणीय, धारा 25
डिज़ाइन की अवधि
10 वर्ष, 5 वर्ष की वृद्धि, धारा 11
कॉपीराइट की अवधि
जीवन + 60 वर्ष; फ़िल्म और ध्वनि-रिकॉर्डिंग 60 वर्ष
GI की अवधि
10 वर्ष, नवीकरणीय, धारा 18(1)
व्यापार रहस्य
WIPO: गोपनीय सूचना पर IP अधिकार; भारत के लिए अधिनियम का पाठ देखें
राजस्थान के GI (IP India सूची)
बीकानेरी भुजिया: आवेदन 28.10.2008, पंजीकरण 2010-11; सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग: 02.12.2008, 2009-10; बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंट: 10.08.2009, 2011-12; मकराना मार्बल: 09.04.2013, 2014-15; पोकरण पॉटरी: 19.01.2015, 2017-18; सोजत मेहंदी: 13.11.2018, 2021-22; जोधपुर बंधेज क्राफ़्ट: 19.04.2021, 2023-24
अंतिम जाँच
3 अक्टूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • कॉपीराइट को विचार की सुरक्षा समझना। यह अभिव्यक्ति की रक्षा करता है, विचार की नहीं।
  • पंजीकरण को कॉपीराइट की शर्त मान लेना। कॉपीराइट रचना के साथ अपने आप बनता है; पंजीकरण अनिवार्य नहीं है।
  • ट्रेडमार्क और GI का स्वामित्व उलट देना। ट्रेडमार्क किसी एक व्यक्ति या संस्था का होता है; GI में उत्पादकों का संघ या संगठन पंजीकृत स्वामी होता है।
  • पेटेंट की 20 वर्ष की अवधि को पंजीकरण या स्वीकृति की तिथि से गिनना। धारा 53(1) में गिनती आवेदन की तिथि से है।
  • व्यापार रहस्य के लिए पंजीकरण या निश्चित अवधि लिख देना। रहस्य की सुरक्षा गोपनीयता बने रहने पर टिकी है।
  • भारत में मान्य सूची और TRIPS की सूची को एक मान लेना। CIPAM की सात की सूची में व्यापार रहस्य नाम से नहीं है, जबकि TRIPS की सूची में अप्रकट सूचना है।

ध्यान दें

यह सामग्री परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं। वास्तविक मामले में अधिनियमों का आधिकारिक पाठ और विधिक सलाहकार देखें।