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पेपर III · इकाई III · भाग ख (Law)

भारत में IPR का ढाँचा और कॉपीराइट की विषय-वस्तु (धारा 13)

भारत के IPR अधिनियम और संस्थाएँ, TRIPS, और कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अनुसार कॉपीराइट की विषय-वस्तु।

  • IPR ढाँचा
  • CGPDTM
  • TRIPS
  • कॉपीराइट
  • धारा 13
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (Law, section-exact): बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights): अवधारणा, प्रकार और उद्देश्य। यह पृष्ठ भारत के ढाँचे और संस्थाओं का संक्षिप्त परिचय देता है और कॉपीराइट की विषय-वस्तु (subject matter) पर विस्तार से है। पहला पृष्ठ अवधारणा, प्रकार और उद्देश्य का है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2013 से 2024 के उपलब्ध पेपरों में बौद्धिक संपदा से 2023 (पेपर III) का एक प्रश्न मिलता है: कॉपीराइट की विषय-वस्तु (Subject matter of copyright), 2 अंक। हल इसी पृष्ठ पर है।
  • इस प्रश्न का उत्तर कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 13(1) की तीन श्रेणियों में है। उन्हें और उनकी परिभाषाओं को क्रम से याद रखना अधिकतम अंक देता है।
  • भारत के अधिनियमों और संस्थाओं की तालिका उत्तर में 'वर्तमान ढाँचा' वाला वाक्य जोड़ने में काम आती है।

भारत का IPR ढाँचा: एक सरल नक़्शा

भारत में हर अधिकार का अपना अधिनियम है और अपना कार्यालय। इसे ऐसे समझें जैसे एक बड़े भवन में अलग-अलग विभाग हों, जिनका एक ही प्रवेश-द्वार, यानी IP India का पोर्टल, है। उस पोर्टल पर पेटेंट, डिज़ाइन, ट्रेड मार्क, भौगोलिक संकेतक, कॉपीराइट और अर्धचालक लेआउट-डिज़ाइन (SICLDR) के कार्यालय अलग-अलग दिखते हैं।

पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेड मार्क के कार्यालय पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेड मार्क के महानियंत्रक (Controller General of Patents, Designs and Trade Marks, CGPDTM) के कार्यालय के अंतर्गत आते हैं, जो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) का अधीनस्थ कार्यालय है (IP India)। बौद्धिक संपदा को बढ़ावा देने के लिए CIPAM (Cell for IPR Promotion and Management) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का प्रकोष्ठ है।

पादप किस्मों के लिए अलग प्राधिकरण है: पादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है (CIPAM)। यह पादप किस्मों के पंजीकरण और किसानों की किस्मों के प्रलेखन जैसे काम करता है।

भारत के अधिनियम और संस्थाएँ: एक नज़र में

अधिकारअधिनियमनिबंधक या प्राधिकरण (सरल रूप में)
पेटेंटपेटेंट अधिनियम, 1970पेटेंट कार्यालय; CGPDTM के अंतर्गत
ट्रेडमार्कट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999ट्रेड मार्क्स रजिस्ट्री; CGPDTM के अंतर्गत
डिज़ाइनडिज़ाइन अधिनियम, 2000डिज़ाइन कार्यालय; CGPDTM के अंतर्गत
भौगोलिक संकेतकवस्तुओं के भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999GI रजिस्ट्री (IP India पोर्टल पर)
कॉपीराइटकॉपीराइट अधिनियम, 1957कॉपीराइट कार्यालय; कॉपीराइट रजिस्टर (धारा 44)
पादप किस्मेंपादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 (विशेष व्यवस्था)पादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली
अर्धचालक लेआउट-डिज़ाइनअर्धचालक एकीकृत परिपथ अभिन्यास-डिज़ाइन अधिनियम, 2000 (विशेष व्यवस्था)SICLD रजिस्ट्री

संस्थाओं का वर्णन संक्षिप्त है; विस्तृत संरचना के लिए 'देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ' और IP India का पोर्टल।

अंतरराष्ट्रीय पृष्ठभूमि और राष्ट्रीय नीति

IP India के अनुसार भारत बर्न अभिसमय (Berne Convention), सार्वभौमिक कॉपीराइट अभिसमय, 1952 (Universal Copyright Convention) और TRIPS समझौते, 1995 का सदस्य है। WTO के अनुसार TRIPS 1 जनवरी 1995 से प्रभावी हुआ और यह बौद्धिक संपदा पर अब तक का सबसे व्यापक बहुपक्षीय समझौता है। इसकी तीन मुख्य विशेषताओं में पहली है मानक: हर मुख्य क्षेत्र में न्यूनतम सुरक्षा-मानक, जिनमें संरक्षित विषय-वस्तु, दिए जाने वाले अधिकार, अनुमत अपवाद और सुरक्षा की न्यूनतम अवधि शामिल हैं। बर्न अभिसमय के नैतिक अधिकारों वाले उपबंध को छोड़कर पेरिस और बर्न अभिसमयों के मुख्य उपबंध TRIPS में संदर्भ द्वारा शामिल हैं।

राष्ट्रीय IPR नीति, 2016 को भारत सरकार ने 12 मई 2016 को स्वीकृत किया (CIPAM)। उसके सात उद्देश्य हैं: IPR जागरूकता, पहुँच और प्रचार; IPR का सृजन; विधिक और विधायी ढाँचा; प्रशासन और प्रबंधन; IPR का व्यावसायीकरण; प्रवर्तन और न्यायनिर्णय; और मानव पूँजी का विकास। नीति में पाँच वर्ष की समीक्षा की व्यवस्था है, जिसकी समिति की अध्यक्षता DPIIT के सचिव करते हैं (CIPAM)। PIB की 13 मई 2016 की विज्ञप्ति के अनुसार मंत्रिमंडल ने नीति को एक दिन पहले मंज़ूर किया और नीति मानती है कि भारत का विधायी, प्रशासनिक और न्यायिक ढाँचा TRIPS के अनुरूप है।

भारत में IPR कानूनों की कालरेखा

  1. 1911

    भारतीय पेटेंट और डिज़ाइन अधिनियम, 1911 (अधिनियम 2/1911), जो स्वतंत्रता के समय लागू था (IP India, WIPO)

  2. 1914

    भारतीय कॉपीराइट अधिनियम, 1914, जो ब्रिटिश कॉपीराइट अधिनियम, 1911 को भारत में लागू करता था; 1957 के अधिनियम की धारा 79 ने इसे निरसित किया (IP India, कॉपीराइट अधिनियम)

  3. 1957 से 1958

    कॉपीराइट अधिनियम, 1957; 21 जनवरी 1958 से लागू (कॉपीराइट अधिनियम की पाद-टिप्पणी, IP India)

  4. 1970 से 1972

    पेटेंट अधिनियम, 1970; मुख्य उपबंध 20 अप्रैल 1972 से लागू; धारा 162 से 1911 का अधिनियम पेटेंट के संबंध में निरसित (पेटेंट अधिनियम, WIPO)

  5. 1995

    TRIPS प्रभावी, 1 जनवरी 1995 (WTO, WIPO Lex)

  6. 1999 से 2001

    ट्रेड मार्क्स अधिनियम 1999, GI अधिनियम 1999, डिज़ाइन अधिनियम 2000, SICLD अधिनियम 2000, PPV&FR अधिनियम 2001

  7. 2012

    कॉपीराइट (संशोधन) अधिनियम, 2012 (2012 का 27), 21 जून 2012 से; IP India के अनुसार सबसे व्यापक संशोधन

  8. 2016

    राष्ट्रीय IPR नीति, 12 मई 2016 (CIPAM, PIB)

IP India, WTO, CIPAM, WIPO और संबंधित अधिनियमों के पाठ

कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की रूपरेखा

कॉपीराइट अधिनियम, 1957 21 जनवरी 1958 से लागू हुआ। इसके पहले 1914 का कॉपीराइट अधिनियम था, जो मूलतः ब्रिटिश कॉपीराइट अधिनियम, 1911 का भारत में विस्तार था; 1957 के अधिनियम की धारा 79 ने उसे निरसित किया। IP India के अनुसार 1957 के अधिनियम में 1983, 1984, 1992, 1994, 1999 और 2012 में संशोधन हुए, जिनमें 2012 का संशोधन सबसे व्यापक है। 2012 के संशोधन के कारणों में WIPO के दो इंटरनेट संधियों (WCT और WPPT) के अनुरूप बनाना, संगीत और फ़िल्म उद्योग की चिंताएँ, दिव्यांगजन की ज़रूरतें और लेखकों के हितों की रक्षा शामिल थे।

अधिनियम की सबसे ज़रूरी धाराओं का क्रम इस प्रकार याद रखें: धारा 2 परिभाषाएँ; धारा 13 जिन कृतियों में कॉपीराइट होता है; धारा 14 कॉपीराइट का अर्थ, यानी विशेष अधिकार; धारा 17 पहला स्वामी; धारा 22, 26 और 27 अवधि; धारा 44 और 45 कॉपीराइट रजिस्टर में प्रविष्टि। यह ढाँचा परीक्षा में उत्तर का क्रम भी बन सकता है। एक पंक्ति में इसे यों रटें: परिभाषा, विषय-वस्तु, अधिकार, स्वामी, अवधि, पंजीकरण।

कॉपीराइट की विषय-वस्तु: धारा 13(1)

2023 का प्रश्न 'Subject matter of copyright' का सीधा उत्तर धारा 13(1) में है। धारा 13(1) के अनुसार, इस धारा और अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन, कॉपीराइट पूरे भारत में तीन वर्गों की कृतियों में बनता है। (क) मौलिक साहित्यिक, नाट्य, संगीत और कलात्मक कृतियाँ (original literary, dramatic, musical and artistic works)। (ख) सिनेमैटोग्राफ़ फ़िल्में (cinematograph films)। (ग) ध्वनि-रिकॉर्डिंग (sound recording)।

'मौलिक' (original) शब्द केवल पहले वर्ग के साथ आया है। यानी साहित्यिक, नाट्य, संगीत और कलात्मक कृति मौलिक होनी चाहिए। IP India भी यही कहता है कि कृति मौलिक होनी चाहिए, यानी नक़ल की हुई न हो, और कॉपीराइट विचार की नहीं, अभिव्यक्ति की रक्षा करता है। धारा 2(y) में 'कृति' (work) का अर्थ इन्हीं में से कोई भी है: साहित्यिक, नाट्य, संगीत या कलात्मक कृति, सिनेमैटोग्राफ़ फ़िल्म, या ध्वनि-रिकॉर्डिंग।

लेखक कौन है, यह भी वर्ग के अनुसार बदलता है। धारा 2(d) के अनुसार साहित्यिक या नाट्य कृति में लेखक स्वयं रचनाकार है; संगीत कृति में संगीतकार; फ़ोटोग्राफ़ के अलावा कलात्मक कृति में कलाकार; फ़ोटोग्राफ़ में फ़ोटो खींचने वाला व्यक्ति; फ़िल्म या ध्वनि-रिकॉर्डिंग में निर्माता (producer); और कंप्यूटर द्वारा बनी कृति में वह व्यक्ति जो कृति बनवाता है। इसलिए 'लेखक' शब्द का अर्थ हर वर्ग में एक जैसा नहीं है।

अब हर वर्ग की परिभाषा देखें, जो धारा 2 में है। साहित्यिक कृति (धारा 2(o)) में कंप्यूटर प्रोग्राम, तालिकाएँ और संकलन, जिनमें कंप्यूटर डेटाबेस शामिल हैं, आते हैं। नाट्य कृति (धारा 2(h)) में सस्वर पाठ का कोई अंश, नृत्य-रचना या मूक अभिनय द्वारा मनोरंजन शामिल है, जिसका दृश्य-विधान या अभिनय का रूप लिखित या अन्य प्रकार से तय हो, पर सिनेमैटोग्राफ़ फ़िल्म इसमें नहीं आती। संगीत कृति (धारा 2(p)) संगीत से बनी कृति है और उसमें संगीत का ग्राफ़िक संकेतन आता है, पर संगीत के साथ गाए, बोले या किए जाने वाले शब्द या क्रिया इसमें शामिल नहीं हैं।

कलात्मक कृति (धारा 2(c)) में (i) चित्र, मूर्ति, रेखाचित्र (जिसमें आरेख, मानचित्र, चार्ट या योजना शामिल है), उत्कीर्णन या फ़ोटोग्राफ़, चाहे उसमें कलात्मक गुण हो या न हो; (ii) वास्तुकला की कृति (work of architecture); और (iii) कलात्मक शिल्प-कौशल की कोई अन्य कृति आते हैं। सिनेमैटोग्राफ़ फ़िल्म (धारा 2(f)) दृश्य रिकॉर्डिंग की कोई भी कृति है और उसमें साथ की ध्वनि-रिकॉर्डिंग शामिल है; वीडियो फ़िल्में भी इसमें हैं। ध्वनि-रिकॉर्डिंग (धारा 2(xx)) ध्वनियों की ऐसी रिकॉर्डिंग है जिससे वे ध्वनियाँ दोबारा उत्पन्न की जा सकें, चाहे रिकॉर्डिंग किसी माध्यम पर हो या किसी विधि से। कंप्यूटर प्रोग्राम (धारा 2(ffc)) शब्दों, कोड, योजनाओं या किसी अन्य रूप में व्यक्त निर्देशों का वह समूह है, जिसमें मशीन-पठनीय माध्यम शामिल है, और जो कंप्यूटर से कोई विशेष कार्य या परिणाम करा सके।

धारा 13(1): तीन वर्ग और उनकी परिभाषाएँ

वर्ग (धारा 13(1))परिभाषा की धारासरल आशयउदाहरण (कल्पित)
(क) साहित्यिक कृति (literary work)2(o)कंप्यूटर प्रोग्राम, तालिकाएँ और संकलन (कंप्यूटर डेटाबेस सहित)पाठ्यपुस्तक, कविता, सॉफ़्टवेयर का कोड
(क) नाट्य कृति (dramatic work)2(h)सस्वर पाठ, नृत्य-रचना, मूक अभिनय; फ़िल्म नहींनाटक की पांडुलिपि, नृत्य-नाटिका
(क) संगीत कृति (musical work)2(p)संगीत और उसका ग्राफ़िक संकेतन; शब्द और क्रिया शामिल नहींधुन का स्वर-लेखन (नोटेशन)
(क) कलात्मक कृति (artistic work)2(c)चित्र, मूर्ति, रेखाचित्र, उत्कीर्णन, फ़ोटोग्राफ़; वास्तुकला की कृति; कलात्मक शिल्पचित्र, फ़ोटोग्राफ़, मानचित्र
(ख) सिनेमैटोग्राफ़ फ़िल्म (cinematograph film)2(f)दृश्य रिकॉर्डिंग की कृति, साथ की ध्वनि-रिकॉर्डिंग सहित; वीडियो फ़िल्मेंफ़ीचर फ़िल्म, डॉक्यूमेंट्री वीडियो
(ग) ध्वनि-रिकॉर्डिंग (sound recording)2(xx)ध्वनियों की रिकॉर्डिंग जिससे ध्वनि दोबारा उत्पन्न हो सकेगाने की स्टूडियो रिकॉर्डिंग

वर्ग धारा 13(1) से और परिभाषाएँ धारा 2 के पाठ से हैं; उदाहरण समझाने के लिए गढ़े गए हैं।

धारा 13(2) से 13(5): शर्तें और सीमाएँ

धारा 13(1) बताती है कि कॉपीराइट किन वर्गों में बन सकता है, और धारा 13 की बाक़ी उपधाराएँ बताती हैं कि कब बनता है और कब नहीं। धारा 13(2) में राष्ट्रीयता और प्रकाशन की शर्तें हैं: प्रकाशित कृति का भारत में पहली बार प्रकाशित होना, या बाहर प्रथम प्रकाशन हो तो लेखक का उस तिथि पर भारत का नागरिक होना; अप्रकाशित कृति में लेखक का कृति बनाते समय भारत का नागरिक या भारत में अधिवासी होना; और वास्तुकला की कृति में उसका भारत में स्थित होना। यह नियम धारा 40 और 41 वाली कृतियों पर लागू नहीं होता। संयुक्त लेखकत्व में शर्तें सभी लेखकों को पूरी करनी होती हैं।

धारा 13(3) में कुछ अपवाद हैं: किसी फ़िल्म में कॉपीराइट नहीं बनता यदि उसका पर्याप्त भाग किसी अन्य कृति के कॉपीराइट का उल्लंघन है; और किसी साहित्यिक, नाट्य या संगीत कृति पर बनी ध्वनि-रिकॉर्डिंग में कॉपीराइट नहीं बनता यदि उसे बनाने में उस कृति के कॉपीराइट का उल्लंघन हुआ हो। धारा 13(4) कहती है कि फ़िल्म या ध्वनि-रिकॉर्डिंग का कॉपीराइट उस कृति में अलग कॉपीराइट को प्रभावित नहीं करता जिस पर फ़िल्म या रिकॉर्डिंग बनी है। धारा 13(5) के अनुसार वास्तुकला की कृति में कॉपीराइट केवल उसके कलात्मक स्वरूप और डिज़ाइन में है, निर्माण की प्रक्रियाओं या विधियों में नहीं।

इन शर्तों का मतलब परीक्षा के लिए इतना है कि धारा 13(1) 'क्या' बताती है और धारा 13(2) से 13(5) 'कब और कितना'। दो अंक के उत्तर में केवल धारा 13(1) चाहिए; पाँच या दस अंक में शर्तें जोड़ सकते हैं।

कॉपीराइट का अर्थ, स्वामित्व और अवधि

धारा 14 के अनुसार 'कॉपीराइट' का अर्थ है किसी कृति या उसके पर्याप्त भाग के संबंध में कुछ कार्य करने या करने का अधिकार देने का विशेष अधिकार। साहित्यिक, नाट्य या संगीत कृति (कंप्यूटर प्रोग्राम को छोड़कर) में इन कार्यों में शामिल हैं: कृति को किसी भी भौतिक रूप में पुनरुत्पादित करना, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में भंडारण शामिल है; जनता को प्रतियाँ जारी करना; कृति का सार्वजनिक प्रदर्शन या जनता तक संप्रेषण; उस पर सिनेमैटोग्राफ़ फ़िल्म या ध्वनि-रिकॉर्डिंग बनाना; अनुवाद करना; और रूपांतरण करना।

धारा 17 में पहला स्वामी सामान्यतः लेखक है। परंतुकों में अपवाद हैं: अख़बार या पत्रिका के स्वामी के रोज़गार में प्रकाशन के लिए बनी कृति (करार के अभाव में, प्रकाशन से जुड़े अधिकार में); मूल्यवान प्रतिफल पर किसी व्यक्ति के कहने पर बनी फ़ोटो, चित्र, उत्कीर्णन या फ़िल्म में वह व्यक्ति; सेवा-अनुबंध या प्रशिक्षुता में बनी अन्य कृतियों में नियोक्ता; सरकारी कृति में सरकार; और सार्वजनिक उपक्रम द्वारा या उसके निर्देश और नियंत्रण में बनी कृति में वह उपक्रम। सभी में 'करार के अभाव में' की शर्त है।

अवधि: धारा 22 के अनुसार लेखक के जीवनकाल में प्रकाशित साहित्यिक, नाट्य, संगीत और कलात्मक कृतियों में कॉपीराइट लेखक की मृत्यु के बाद आने वाले कैलेंडर वर्ष के आरंभ से साठ वर्ष तक रहता है। धारा 26 में फ़िल्म और धारा 27 में ध्वनि-रिकॉर्डिंग के लिए प्रकाशन के बाद के कैलेंडर वर्ष के आरंभ से साठ वर्ष। अन्य श्रेणियों (अज्ञात लेखक, सरकारी कृतियाँ आदि) के लिए 'देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ'।

पंजीकरण: धारा 44 और 45 में कॉपीराइट रजिस्टर की व्यवस्था है। रजिस्टर में प्रविष्टि का आवेदन लेखक, प्रकाशक, स्वामी या हितबद्ध व्यक्ति कर सकता है। पर IP India और CIPAM के अनुसार कॉपीराइट रचना के साथ अपने आप बनता है और पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, यद्यपि वह साक्ष्य के रूप में उपयोगी है।

धारा 13(1): कॉपीराइट की विषय-वस्तु

कॉपीराइट की विषय-वस्तु (धारा 13(1))

(क) मौलिक कृतियाँ

  • साहित्यिक 2(o)
  • नाट्य 2(h)
  • संगीत 2(p)
  • कलात्मक 2(c)

(ख) सिनेमैटोग्राफ़ फ़िल्म

  • 2(f)
  • साथ की ध्वनि-रिकॉर्डिंग शामिल
  • वीडियो फ़िल्में

(ग) ध्वनि-रिकॉर्डिंग

  • 2(xx)

13(2) से 13(5)

  • राष्ट्रीयता और प्रकाशन की शर्तें
  • अपवाद 13(3)
  • अलग कॉपीराइट 13(4)
  • वास्तुकला 13(5)
आधार: कॉपीराइट अधिनियम, 1957 का पाठ, IP India।

कॉपीराइट की अवधि: धारा 22, 26, 27

कृतिअवधिधारा
लेखक के जीवनकाल में प्रकाशित साहित्यिक, नाट्य, संगीत, कलात्मक कृतिमृत्यु के बाद के कैलेंडर वर्ष के आरंभ से 60 वर्ष22
सिनेमैटोग्राफ़ फ़िल्मप्रकाशन के बाद के कैलेंडर वर्ष के आरंभ से 60 वर्ष26
ध्वनि-रिकॉर्डिंगप्रकाशन के बाद के कैलेंडर वर्ष के आरंभ से 60 वर्ष27

अन्य श्रेणियों की अवधि के लिए देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ।

मुख्य तथ्य

कानून
कॉपीराइट अधिनियम, 1957; 21 जनवरी 1958 से लागू; संशोधन 1983, 1984, 1992, 1994, 1999, 2012
विषय-वस्तु
धारा 13(1): मौलिक साहित्यिक, नाट्य, संगीत, कलात्मक कृतियाँ; सिनेमैटोग्राफ़ फ़िल्में; ध्वनि-रिकॉर्डिंग
विषय-वस्तु: दूसरी पुष्टि
IP India का Basic of Copyright पृष्ठ यही तीन वर्ग बताता है
पंजीकरण
अनिवार्य नहीं; साक्ष्य के रूप में उपयोगी; कॉपीराइट रजिस्टर धारा 44
अवधि
जीवन + 60 वर्ष (धारा 22); फ़िल्म और ध्वनि-रिकॉर्डिंग 60 वर्ष (धारा 26, 27)
अंतरराष्ट्रीय सदस्यता
बर्न अभिसमय, सार्वभौमिक कॉपीराइट अभिसमय 1952, TRIPS 1995
अंतरराष्ट्रीय सदस्यता: दूसरी पुष्टि
WIPO Lex का भारत-प्रोफ़ाइल बर्न अभिसमय, सार्वभौमिक कॉपीराइट अभिसमय (1952) और TRIPS में भारत को दर्शाता है
TRIPS प्रभावी
1 जनवरी 1995
राष्ट्रीय IPR नीति
12 मई 2016 को स्वीकृत; सात उद्देश्य
अंतिम जाँच
3 अक्टूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • 'Subject matter of copyright' में केवल साहित्यिक और कलात्मक कृतियाँ लिखना। धारा 13(1) में फ़िल्में और ध्वनि-रिकॉर्डिंग भी हैं।
  • 'मौलिक' शब्द को सभी वर्गों पर लागू समझना। धारा 13(1)(क) में यह शब्द साहित्यिक, नाट्य, संगीत और कलात्मक कृतियों के लिए है।
  • कंप्यूटर प्रोग्राम को अलग वर्ग गिनना। धारा 2(o) के अनुसार वह साहित्यिक कृति की परिभाषा में है।
  • गीत के बोल और धुन को एक कृति मानना। धारा 2(p) में बोल संगीत कृति का भाग नहीं हैं।
  • वास्तुकला की पूरी इमारत पर कॉपीराइट बताना। धारा 13(5) केवल कलात्मक स्वरूप और डिज़ाइन की रक्षा करती है।
  • विचार पर कॉपीराइट बताना। कॉपीराइट अभिव्यक्ति की रक्षा करता है।

ध्यान दें

यह सामग्री परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं। वास्तविक मामले में अधिनियम का आधिकारिक पाठ और विधिक सलाहकार देखें।