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पेपर III · इकाई III · भाग ख (विधि)

IT अधिनियम 2000: धारा 66B से 66F

पाँच अपराध एक साथ: चोरी का कंप्यूटर संसाधन (66B), पहचान की चोरी (66C), पहचान बदलकर ठगी (66D), निजता भंग (66E, जहाँ "private area" परिभाषित है) और साइबर आतंकवाद (66F)।

  • 66B
  • 66C पहचान की चोरी
  • 66D personation
  • 66E private area
  • 66F cyber terrorism
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि, धारानुसार): सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धाराएँ 66(B-F), यानी 66B, 66C, 66D, 66E और 66F। धारा 66A (सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2015 में रद्द और जन विश्वास अधिनियम 2023 से अधिनियम से हटाई गई) सिलेबस में नहीं है। धारा 65 और 66 पृष्ठ 2 पर और परिभाषाएँ पृष्ठ 1 पर हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2023 के पेपर III में "Private area" under IT Act 2000 (प्रश्न 43, 2 अंक) पूछा गया। यह शब्द धारा 2 की परिभाषाओं में नहीं है; यह धारा 66E के स्पष्टीकरण के खंड (c) में परिभाषित है। उत्तर वहीं से बनता है।
  • पिछले पेपरों में धारा 66B, 66C, 66D और 66F पर सीधा प्रश्न नहीं मिला। इन धाराओं की सज़ा के आँकड़े (3 वर्ष, 1 लाख रुपये, 2 लाख रुपये, आजीवन कारावास) 2 अंक के उत्तर के लिए पर्याप्त हैं, इसलिए सारणी से इन्हें पक्का कर लें।
  • हर धारा के पाठ में "या" और "और" का फ़र्क़ है: 66B और 66E में कारावास या जुर्माना या दोनों; 66C और 66D में कारावास और जुर्माना, दोनों। यही अंतर अक्सर उत्तर में ग़लत हो जाता है।

पाँच धाराएँ: एक नज़र में

धारा 66 के बाद आने वाली ये धाराएँ आधुनिक साइबर अपराधों का नक़्शा हैं। भारत कोड के पाठ के अनुसार धारा 66 से 67C की नई धाराएँ संशोधन अधिनियम (2009 का अधिनियम 10, 27-10-2009 से प्रभावी) से अधिनियम में आईं। पाँचों धाराओं का रोज़मर्रा का चेहरा पहचानिए: चोरी का मोबाइल या लैपटॉप ख़रीदना (66B), किसी का पासवर्ड या OTP इस्तेमाल करना (66C), फ़ोन पर बैंक-अधिकारी बनकर ठगना (66D), किसी की निजी तस्वीर चुपके से खींचना या फैलाना (66E) और देश की सुरक्षा के विरुद्ध सिस्टमों पर हमला (66F)। यह उदाहरण पहचान के लिए है, परिभाषा नहीं।

सज़ा के शब्दों में एक शब्द बार-बार आता है: "imprisonment of either description"। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 4 के अनुसार कारावास दो प्रकार का है: सश्रम (rigorous, यानी कठोर श्रम सहित) और साधारण (simple)। "Either description" का अर्थ है कि न्यायालय इनमें से कोई एक प्रकार दे सकता है।

धारा 66B: चोरी का कंप्यूटर संसाधन या संचार उपकरण बेईमानी से लेना (Punishment for dishonestly receiving stolen computer resource or communication device)

पाठ: "Whoever dishonestly receive or retains any stolen computer resource or communication device knowing or having reason to believe the same to be stolen computer resource or communication device, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years or with fine which may extend to rupees one lakh or with both."

सोचिए, कोई दुकानदार ऐसा मोबाइल सस्ते में ख़रीदता है जिसके बारे में उसे पता है, या विश्वास करने का कारण है, कि वह चोरी का है। चोरी उसने नहीं की, पर चोरी के माल को बेईमानी से लेना या रखना अपने-आप में अपराध है। धारा 66B यही कहती है। इसके तीन हिस्से याद रखिए। कृत्य: "receive or retains", यानी लेना या रखे रहना। विषय-वस्तु: "stolen computer resource or communication device", यानी चोरी का कंप्यूटर संसाधन या संचार उपकरण (परिभाषाएँ पृष्ठ 1 पर)। मानसिक अवस्था: "dishonestly" और "knowing or having reason to believe" (जानना या विश्वास करने का कारण होना)।

सज़ा: किसी भी प्रकार का कारावास, तीन वर्ष तक, या जुर्माना, एक लाख रुपये तक, या दोनों। यहाँ "or" है, यानी कारावास, जुर्माना या दोनों में से कुछ भी मिल सकता है।

धारा 66C: पहचान की चोरी (Punishment for identity theft)

पाठ: "Whoever, fraudulently or dishonestly make use of the electronic signature, password or any other unique identification feature of any other person, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years and shall also be liable to fine which may extend to rupees one lakh."

तालाबंदी का उदाहरण लीजिए: आपके घर की चाबी आपकी पहचान है। कोई नक़ली चाबी बनवाकर आपके घर में घुस जाए तो अपराध स्पष्ट है। डिजिटल दुनिया में चाबी है आपका पासवर्ड, आपका इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या कोई भी "unique identification feature"। धारा 66C इन्हें बेईमानी या कपट से इस्तेमाल करने को दंडित करती है। अपराध तभी बनता है जब "any other person" की पहचान-सामग्री का उपयोग हो, यानी अपनी नहीं, दूसरे की।

अधिनियम में "unique identification feature" की सूची नहीं दी गई है, इसलिए यह खुले अर्थ वाला शब्द है। आम तौर पर समझने के लिए आप पासवर्ड, PIN या OTP जैसी वस्तुओं को इसके उदाहरण मान सकते हैं (विश्लेषण)। सज़ा में फ़र्क़ देखिए: कारावास तीन वर्ष तक "और" जुर्माना एक लाख रुपये तक। यहाँ "shall also be liable to fine" है, यानी जुर्माना सज़ा का हिस्सा है, वैकल्पिक नहीं।

धारा 66D: कंप्यूटर संसाधन से पहचान बदलकर ठगी (Punishment for cheating by personation by using computer resource)

पाठ: "Whoever, by means of any communication device or computer resource cheats by personation, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years and shall also be liable to fine which may extend to one lakh rupees."

यह धारा "cheating by personation" यानी किसी और के रूप में पेश होकर ठगने का साइबर रूप है। पहचान की चोरी (66C) में दूसरे की पहचान-सामग्री का उपयोग मुख्य है; पहचान बदलकर ठगी (66D) में दूसरे के रूप में पेश होकर ठगना मुख्य है। फ़ोन पर बैंक-अधिकारी बनकर खाता-विवरण माँगना, फ़र्ज़ी प्रोफ़ाइल से विवाह या नौकरी का झाँसा देना, ये 66D की तस्वीरें हैं (उदाहरण, परिभाषा नहीं)।

ध्यान दीजिए कि "cheating by personation" की अपनी परिभाषा इस अधिनियम में नहीं है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 319(1) कहती है कि कोई व्यक्ति "cheats by personation" तब कहलाता है जब वह किसी अन्य व्यक्ति के रूप में पेश होकर, या एक व्यक्ति की जगह दूसरे को जानबूझकर रखकर, या स्वयं को या किसी अन्य को वह व्यक्ति बताकर, जो वह नहीं है, ठगता है। यह अध्ययन के लिए पुल है; मूल अपराध 66D में है, जिसकी शर्त है कि ठगी "by means of any communication device or computer resource" हो।

तुलना: 66C, 66D और भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2)

बिंदुधारा 66C (identity theft)धारा 66D (cheating by personation)BNS धारा 319(2) (अध्ययन-सहायता)
मूल कृत्यदूसरे के इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर, पासवर्ड या अन्य unique identification feature का बेईमानी या कपट से उपयोगसंचार उपकरण या कंप्यूटर संसाधन से दूसरे के रूप में पेश होकर ठगनाकिसी भी माध्यम से दूसरे के रूप में पेश होकर ठगना
साधन की शर्तकोई विशेष साधन नहीं बताया गयाcommunication device या computer resourceकोई साधन-शर्त नहीं
कारावासकिसी भी प्रकार का, तीन वर्ष तककिसी भी प्रकार का, तीन वर्ष तककिसी भी प्रकार का, पाँच वर्ष तक
जुर्मानाएक लाख रुपये तक, और (shall also be liable)एक लाख रुपये तक, और (shall also be liable)जुर्माना, या कारावास, या दोनों
स्वभावकारावास और जुर्मानाकारावास और जुर्मानाकारावास, जुर्माना या दोनों

धारा 66E: निजता का उल्लंघन (Punishment for violation of privacy)

पाठ: "Whoever, intentionally or knowingly captures, publishes or transmits the image of a private area of any person without his or her consent, under circumstances violating the privacy of that person, shall be punished with imprisonment which may extend to three years or with fine not exceeding two lakh rupees, or with both."

इस धारा के तीन कृत्य हैं: capture (चित्र उतारना), publish (प्रकाशित करना) और transmit (भेजना)। चित्र "private area" का होना चाहिए, किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, और ऐसी परिस्थितियों में जिनमें उस व्यक्ति की निजता भंग होती हो। चारों शर्तें साथ पूरी हों: कृत्य, चित्र, सहमति का अभाव, और निजता भंग होने वाली परिस्थितियाँ। मानसिक अवस्था है "intentionally or knowingly"। सज़ा: कारावास तीन वर्ष तक, या जुर्माना दो लाख रुपये से अधिक नहीं, या दोनों।

इस धारा का स्पष्टीकरण पाँच शब्दों की परिभाषा देता है। यही स्पष्टीकरण 2023 में पूछे गए "private area" का स्रोत है।

धारा 66E का स्पष्टीकरण (Explanation), खंड (a) से (e)

खंडशब्दपाठसरल अर्थ
(a)transmitto electronically send a visual image with the intent that it be viewed by a person or personsदृश्य-चित्र इस इरादे से इलेक्ट्रॉनिक रूप में भेजना कि कोई देखे
(b)capturewith respect to an image, to videotape, photograph, film or record by any meansवीडियो बनाना, फ़ोटो खींचना, फ़िल्माना या किसी भी तरह रिकॉर्ड करना
(c)private areathe naked or undergarment clad genitals, pubic area, buttocks or female breastनग्न या अंतःवस्त्र से ढके जननांग, जघन क्षेत्र, नितंब या स्त्री-स्तन
(d)publishesreproduction in the printed or electronic form and making it available for publicछपे या इलेक्ट्रॉनिक रूप में पुनरुत्पादन और जनता के लिए उपलब्ध कराना
(e)under circumstances violating privacycircumstances in which a person can have a reasonable expectation that (i) he or she could disrobe in privacy, without being concerned that an image of his private area was being captured; or (ii) any part of his or her private area would not be visible to the public, regardless of whether that person is in a public or private placeऐसी परिस्थितियाँ जिनमें व्यक्ति उचित रूप से मान सकता है कि वह निजता में कपड़े बदल सकता है, या उसका निजी अंग जनता को नहीं दिखेगा, चाहे जगह सार्वजनिक हो या निजी

"Private area" कहाँ परिभाषित है

"Private area" शब्द धारा 2 (परिभाषाओं) में नहीं है। अधिनियम ने इसे केवल धारा 66E के स्पष्टीकरण के खंड (c) में, उसी धारा के प्रयोजन के लिए, परिभाषित किया है: "the naked or undergarment clad genitals, pubic area, buttocks or female breast"। भारत कोड में प्रकाशित पाठ में "pubic" की जगह "public area" छपा है, जो स्पष्ट मुद्रण-त्रुटि लगती है; 2008 के संशोधित पाठ की प्रति में शब्द "pubic area" है, और अर्थ भी वही बनता है (विश्लेषण)।

उदाहरण से देखिए (कल्पित): किसी कपड़ों की दुकान के ट्रायल-रूम में छिपा कैमरा लगा हो। ट्रायल-रूम वह जगह है जहाँ व्यक्ति उचित रूप से मानता है कि वह निजता में कपड़े बदल सकता है, यानी खंड (e)(i) की परिस्थिति। छिपे कैमरे से बनी रिकॉर्डिंग "capture" है, और उसे किसी को भेजना "transmit"। यदि वही रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर डाली जाए तो "publishes"। हर चरण पर धारा 66E की शर्तें अलग-अलग पूरी होती हैं, इसलिए तीनों कृत्य अलग अपराध गिने जा सकते हैं (विश्लेषण)।

खंड (e)(ii) की एक बारीकी परीक्षा-योग्य है: वाक्य के अंत में "regardless of whether that person is in a public or private place" है। यानी निजता की अपेक्षा केवल निजी स्थान पर नहीं, सार्वजनिक स्थान पर भी हो सकती है, यदि निजी अंग जनता को दिखना अपेक्षित नहीं था।

धारा 66F: साइबर आतंकवाद (Punishment for cyber terrorism)

धारा 66F इस समूह की सबसे गंभीर धारा है और इसकी सज़ा भी सबसे कठोर है: "imprisonment which may extend to imprisonment for life" (उप-धारा (2))। धारा में दो अलग रास्ते (limbs) हैं, खंड (A) और खंड (B), और "commits or conspires to commit" होने के कारण षड्यंत्र भी दंडनीय है।

खंड (A): कोई भी व्यक्ति, "with intent to threaten the unity, integrity, security or sovereignty of India or to strike terror in the people or any section of the people", इन तीन में से किसी साधन से: (i) अधिकृत व्यक्ति की कंप्यूटर संसाधन तक पहुँच रोकना या रुकवाना; (ii) बिना प्राधिकार या प्राधिकार से आगे बढ़कर कंप्यूटर संसाधन में घुसने या पहुँचने का प्रयास; (iii) कोई "computer contaminant" डालना या डलवाना। और इस आचरण से मृत्यु या चोटें, संपत्ति की क्षति या विनाश होता हो या होने की संभावना हो, या समुदाय के जीवन के लिए आवश्यक आपूर्ति या सेवाएँ बाधित होती हों (या यह जानकर कि बाधा की संभावना है), या धारा 70 में विनिर्दिष्ट "critical information infrastructure" पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो।

खंड (B): जो जानबूझकर या इरादे से बिना प्राधिकार या प्राधिकार से आगे बढ़कर कंप्यूटर संसाधन में घुसे और उस रास्ते से ऐसी जानकारी, डेटा या कंप्यूटर डेटाबेस तक पहुँचे जो राज्य की सुरक्षा या विदेशी संबंधों के कारण प्रतिबंधित हो, या कोई भी प्रतिबंधित सूचना, यह विश्वास करने के कारण के साथ कि वह भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, मित्र देशों से संबंध, लोक-व्यवस्था, शिष्टता या नैतिकता को चोट पहुँचाने, न्यायालय की अवमानना, मानहानि या अपराध के लिए उकसावे में, या किसी विदेशी राष्ट्र या समूह के लाभ में काम आ सकती है।

धारा 66F के दो रास्ते: खंड (A) और खंड (B)

बिंदुखंड (A)खंड (B)
आशयभारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा या संप्रभुता को ख़तरे में डालना, या जनता या उसके किसी हिस्से में आतंक फैलानाआशय का अलग उल्लेख नहीं; पर यह विश्वास करने का कारण कि जानकारी का उपयोग देश के हितों के विरुद्ध हो सकता है
साधनपहुँच रोकना, बिना प्राधिकार घुसने का प्रयास, computer contaminant डालनाजानबूझकर बिना प्राधिकार या प्राधिकार से आगे बढ़कर घुसना
परिणाममृत्यु या चोट, संपत्ति की क्षति, आवश्यक आपूर्ति या सेवाओं में बाधा, या critical information infrastructure पर प्रभाव (होना या संभावित होना)प्रतिबंधित जानकारी, डेटा या डेटाबेस तक पहुँच
सज़ाजो दोनों पर लागू है: आजीवन कारावास तक (उप-धारा (2)), षड्यंत्र भीजो दोनों पर लागू है: आजीवन कारावास तक (उप-धारा (2)), षड्यंत्र भी

सज़ा की सारणी: धारा 66B से 66F

धाराअपराधकारावासजुर्मानासज़ा का स्वभाव
66Bचोरी का कंप्यूटर संसाधन या संचार उपकरण बेईमानी से लेना या रखनाकिसी भी प्रकार का, तीन वर्ष तकएक लाख रुपये तककारावास या जुर्माना या दोनों
66Cपहचान की चोरी (identity theft)किसी भी प्रकार का, तीन वर्ष तकएक लाख रुपये तककारावास और जुर्माना
66Dकंप्यूटर संसाधन से पहचान बदलकर ठगी (cheating by personation)किसी भी प्रकार का, तीन वर्ष तकएक लाख रुपये तककारावास और जुर्माना
66Eनिजता का उल्लंघन (violation of privacy)तीन वर्ष तक (प्रकार का उल्लेख नहीं)दो लाख रुपये से अधिक नहींकारावास या जुर्माना या दोनों
66Fसाइबर आतंकवाद (cyber terrorism)आजीवन कारावास तकजुर्माने का उल्लेख नहींकेवल कारावास (आजीवन तक)

निर्णय-चित्र: कृत्य को किस धारा में रखें

  1. चोरी का उपकरण या संसाधन बेईमानी से लिया या रखा?

    हाँ: 66B

  2. दूसरे की पहचान-सामग्री (हस्ताक्षर, पासवर्ड आदि) का बेईमानी या कपट से उपयोग?

    हाँ: 66C

  3. संचार उपकरण या कंप्यूटर संसाधन से दूसरे के रूप में पेश होकर ठगी?

    हाँ: 66D

  4. किसी के private area का चित्र बिना सहमति, निजता भंग करने वाली परिस्थिति में उतारा, छापा या भेजा?

    हाँ: 66E

  5. देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा या संप्रभुता को ख़तरे या आतंक के आशय से सिस्टम पर हमला, या प्रतिबंधित जानकारी तक पहुँच?

    हाँ: 66F

मानचित्र: धारा 66B से 66F

धारा 66B से 66F

संपत्ति और पहचान

  • 66B चोरी का माल (3 वर्ष / 1 लाख रुपये)
  • 66C पहचान की चोरी (3 वर्ष और 1 लाख रुपये)
  • 66D personation (3 वर्ष और 1 लाख रुपये)

निजता

  • 66E private area (3 वर्ष / 2 लाख रुपये)
  • सहमति और परिस्थिति

राष्ट्र

  • 66F cyber terrorism (आजीवन कारावास तक)
  • खंड (A) और खंड (B)

मुख्य तथ्य

66B
किसी भी प्रकार का कारावास तीन वर्ष तक, या जुर्माना एक लाख रुपये तक, या दोनों
66C
किसी भी प्रकार का कारावास तीन वर्ष तक और जुर्माना एक लाख रुपये तक
66D
किसी भी प्रकार का कारावास तीन वर्ष तक और जुर्माना एक लाख रुपये तक
66E
कारावास तीन वर्ष तक, या जुर्माना दो लाख रुपये से अधिक नहीं, या दोनों
66E(c) "private area"
the naked or undergarment clad genitals, pubic area, buttocks or female breast (भारत कोड की प्रति में मुद्रण "public area")
66F
आजीवन कारावास तक, "commits or conspires to commit"
BNS 319(2)
personation द्वारा ठगी: किसी भी प्रकार का कारावास पाँच वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों (अध्ययन-सहायता)
शिकायत
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in; हेल्पलाइन 1930 (गृह मंत्रालय, PIB, 2025)
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026 (भारत कोड का अद्यतन पाठ)

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • "Private area" को धारा 2 की परिभाषा बताना। वह धारा 66E के स्पष्टीकरण के खंड (c) में है।
  • 66C और 66D में सज़ा को "या जुर्माना" लिख देना। दोनों में कारावास और जुर्माना दोनों हैं ("shall also be liable to fine"), जबकि 66B और 66E में "or" है।
  • 66E में जुर्माने की सीमा एक लाख रुपये लिख देना। वह दो लाख रुपये है; एक लाख रुपये की सीमा 66B, 66C और 66D में है।
  • 66E को केवल "फ़ोटो खींचना" तक सीमित करना। तीन कृत्य हैं: capture, publish, transmit; और सहमति का अभाव तथा निजता भंग होने वाली परिस्थिति भी आवश्यक हैं।
  • 66F को केवल हैकिंग कहना। आतंक या देश की सुरक्षा के आशय या प्रतिबंधित जानकारी का तत्व इसकी पहचान है; सज़ा आजीवन कारावास तक है।
  • धारा 66A को इस सूची में जोड़ना। वह श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ में 24 मार्च 2015 को रद्द हो चुकी थी, 2023 में अधिनियम से हटा दी गई और सिलेबस में "66(B-F)" है।
  • 66D का उत्तर बिना "by means of any communication device or computer resource" लिखे देना। यह शर्त इसे सामान्य ठगी से अलग करती है।

सूचना

यह सामग्री परीक्षा की तैयारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। किसी वास्तविक मामले में अधिवक्ता से परामर्श लें।