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पेपर III · इकाई III · भाग ख (विधि)

POCSO अधिनियम 2012, धारा 1 से 6: बालक की परिभाषा और प्रवेशन लैंगिक हमला

POCSO अधिनियम 2012 की धारा 1 से 6: उद्देश्य और प्रस्तावना, धारा 2 की परिभाषाएँ (बालक: 18 वर्ष से कम), प्रवेशन लैंगिक हमला, उसका गुरुतर रूप और 2019 के संशोधन के बाद का दंड; दोनों पिछले प्रश्न हल सहित।

  • बालक
  • उद्देश्य
  • प्रवेशन लैंगिक हमला
  • 2019 संशोधन
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Crimes against women and children: ... Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012: Sections 1-15." इस पृष्ठ पर धारा 1 से 6 हैं: संक्षिप्त नाम और प्रारंभ, धारा 2 की परिभाषाएँ (बालक आदि), प्रवेशन लैंगिक हमला (धारा 3), उसका दंड (धारा 4), गुरुतर रूप (धारा 5) और उसका दंड (धारा 6); पाठ 2019 के संशोधनों सहित है। विषय संवेदनशील है, इसलिए यहाँ केवल अधिनियम का विधिक पाठ और अर्थ है। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं है; वास्तविक मामले में अधिकृत विधिक सहायता लें।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • इस पृष्ठ की धाराओं से दो प्रश्न आए हैं: 2016 में 'POCSO अधिनियम के अंतर्गत बालक कौन है' और 2018 में 'अधिनियम को बनाने का प्रमुख उद्देश्य' (दोनों 2 अंक, लगभग 15 शब्द)। पहले का उत्तर धारा 2(1)(d) में है और दूसरे का दीर्घ शीर्षक और प्रस्तावना में।
  • 2024 के पेपर में 'shared household' पद POCSO अधिनियम के नीचे छपा था। POCSO की धारा 2(1)(k) में इसकी अपनी परिभाषा है और धारा 2(1)(e) में 'घरेलू संबंध' DV अधिनियम से लिया गया है; दोनों परिभाषाओं की तुलना इसी पृष्ठ पर है।
  • 2019 के संशोधन ने धारा 4 और 6 के दंड बदले, इसलिए 2019 से पहले और बाद की न्यूनतम सज़ा का अंतर परीक्षा में सीधे पूछा जा सकता है। इसकी तुलना-तालिका नीचे है।

पहले सरल भाषा में

बच्चे अपनी रक्षा खुद नहीं कर सकते और अक्सर उन लोगों पर निर्भर होते हैं जो उनके सबसे नज़दीक हैं: परिवार, विद्यालय, संस्थाएँ। इसीलिए बालकों के विरुद्ध लैंगिक अपराधों के लिए सामान्य दंड कानून से अलग एक विशेष कानून बना: लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (The Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012, 2012 का अधिनियम 32)। सोच यह है कि अपराध की परिभाषा बालक की ज़रूरतों के हिसाब से हो, सज़ा कड़ी हो और प्रक्रिया ऐसी हो कि बालक की गोपनीयता और हित सर्वोपरि रहें।

अधिनियम की बनावट सीढ़ी जैसी है। पहले यह तय होता है कि पीड़ित 'बालक' है या नहीं (धारा 2), फिर कृत्य किस श्रेणी का है: प्रवेशन लैंगिक हमला (धारा 3), लैंगिक हमला (धारा 7), लैंगिक उत्पीड़न (धारा 11) या अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग (धारा 13)। फिर देखा जाता है कि कोई गुरुतर परिस्थिति है या नहीं, जैसे पद का दुरुपयोग या बालक की कम आयु (धारा 5 और 9)। अंत में उसी श्रेणी की दंड-धारा लगती है (धारा 4, 6, 8, 10, 12, 14, 15)। इस पृष्ठ पर पहली दो सीढ़ियाँ और धारा 3 से 6 हैं।

दीर्घ शीर्षक और प्रस्तावना: अधिनियम का उद्देश्य (2018 का प्रश्न)

अंशपाठ का आशय
दीर्घ शीर्षक (long title)बालकों को लैंगिक हमले, लैंगिक उत्पीड़न और अश्लील चित्रण (pornography) के अपराधों से संरक्षण देना और ऐसे अपराधों के विचारण के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना तथा संबद्ध विषयों के लिए उपबंध।
संविधान का अनुच्छेद 15(3)राज्य को बालकों के लिए विशेष उपबंध करने का अधिकार देता है।
बाल अधिकार अभिसमयभारत सरकार ने 11 दिसंबर 1992 को संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय (Convention on the Rights of the Child) स्वीकार किया, जिसमें बालक के सर्वोत्तम हित के मानक हैं।
गोपनीयताबालक के उचित विकास के लिए न्यायिक प्रक्रिया के सभी चरणों में उसकी निजता और गोपनीयता की रक्षा आवश्यक है।
सर्वोपरि हितकानून ऐसे चलना चाहिए कि हर चरण पर बालक का सर्वोत्तम हित और कुशल-क्षेम सर्वोपरि माना जाए।
अभिसमय के दायित्वअभिसमय के राज्य-पक्षकारों को बालक को अवैध यौन गतिविधि के लिए प्रेरित या बाध्य करने, वेश्यावृत्ति या अन्य अवैध यौन प्रथाओं में उसके शोषक उपयोग, और अश्लील प्रदर्शनों और सामग्री में उसके शोषक उपयोग को रोकना है।
निष्कर्ष-वाक्यलैंगिक शोषण और लैंगिक दुर्व्यवहार जघन्य अपराध हैं और उनसे प्रभावी ढंग से निपटना आवश्यक है।

धारा 1: संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ

उप-धाराक्या कहती है
1(1)अधिनियम का नाम: The Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 (2012 का अधिनियम 32, 19 जून 2012)।
1(2)विस्तार: पूरे भारत में। 'जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर' शब्द 2019 के अधिनियम 34 की धारा 95 और पाँचवीं अनुसूची से 31-10-2019 से हटा दिए गए।
1(3)प्रारंभ: उस तिथि से जो केंद्र सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा तय करे। अधिसूचना S.O. 2705(E), दिनांक 9 नवंबर 2012 के अनुसार अधिनियम 14 नवंबर 2012 से लागू हुआ।

धारा 2: परिभाषाएँ

धारा 2(1) में अधिनियम के प्रमुख पद परिभाषित हैं। नीचे की तालिका में वे सब हैं। इनमें सबसे अधिक पूछा जाने वाला पद 'बालक' है। धारा 2(1)(d) के अनुसार 'child means any person below the age of eighteen years', यानी 18 वर्ष से कम आयु का कोई भी व्यक्ति। परिभाषा में लड़के और लड़की का भेद नहीं है; पाठ केवल आयु पर टिका है।

खंडपद (statutory term)अर्थ
(a)aggravated penetrative sexual assaultवही अर्थ जो धारा 5 में है।
(b)aggravated sexual assaultवही अर्थ जो धारा 9 में है।
(c)armed forces or security forcesसंघ के सशस्त्र बल या सुरक्षा बल या पुलिस बल, जैसा अनुसूची में निर्दिष्ट है।
(d)child (बालक)18 वर्ष से कम आयु का कोई भी व्यक्ति।
(da)child pornographyबालक को शामिल करने वाले यौन-स्पष्ट आचरण का कोई भी दृश्य-चित्रण, जिसमें फ़ोटो, वीडियो, डिजिटल या कंप्यूटर-निर्मित ऐसी छवि शामिल है जो वास्तविक बालक से अलग पहचानी न जा सके, तथा बनाई, रूपांतरित या संशोधित वह छवि जो बालक को दर्शाती प्रतीत हो (2019 में जोड़ा गया)।
(e)domestic relationshipवही अर्थ जो DV अधिनियम, 2005 की धारा 2(f) में है।
(f)penetrative sexual assaultवही अर्थ जो धारा 3 में है।
(g)prescribedइस अधिनियम के अधीन बने नियमों द्वारा निर्धारित।
(h)religious institutionवही अर्थ जो धार्मिक संस्था (दुरुपयोग निवारण) अधिनियम, 1988 में है।
(i)sexual assaultवही अर्थ जो धारा 7 में है।
(j)sexual harassmentवही अर्थ जो धारा 11 में है।
(k)shared household (साझी गृहस्थी)वह घर जहाँ अपराध का आरोपित व्यक्ति बालक के साथ घरेलू संबंध में कभी रहा है या रहता है।
(l)Special Courtधारा 28 के अधीन इस रूप में नामित न्यायालय।
(m)Special Public Prosecutorधारा 32 के अधीन नियुक्त लोक अभियोजक।

धारा 2(2) कहती है कि जो शब्द इस अधिनियम में परिभाषित नहीं हैं पर भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 में परिभाषित हैं, उनके वही अर्थ होंगे जो उन संहिताओं या अधिनियमों में दिए हैं। किशोर न्याय अधिनियम का यह उल्लेख 2019 के संशोधन से 2000 के अधिनियम की जगह रखा गया। अध्ययन-सहायता के रूप में ध्यान रखें कि IPC और CrPC की जगह अब भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 1 जुलाई 2024 से लागू हैं।

आयु की तीन सीमाएँ, जो अधिनियम में बार-बार आती हैं

आयुकहाँ आती हैमहत्त्व
18 वर्ष से कमधारा 2(1)(d)पीड़ित 'बालक' होने की कसौटी।
16 वर्ष से कमधारा 4(2)प्रवेशन लैंगिक हमले पर न्यूनतम सज़ा बीस वर्ष।
12 वर्ष से कमधारा 5(m) और 9(m)अपराध गुरुतर (aggravated) माना जाता है।

धारा 3: प्रवेशन लैंगिक हमला (penetrative sexual assault)

धारा 3 कहती है कि कोई व्यक्ति 'penetrative sexual assault' करता है यदि वह चार में से कोई कृत्य करे। इस पृष्ठ पर पाठ का केवल विधिक सार और परीक्षा-उपयोगी वर्गीकरण रखा गया है; ब्योरे जान-बूझकर संक्षिप्त हैं। कृत्य की श्रेणी चार खंडों में है।

खंडकृत्य की श्रेणी (वैधानिक भाषा का सार)
(a)अपराधी द्वारा अपने शिश्न का किसी भी सीमा तक (to any extent) बालक के शरीर के निर्दिष्ट अंगों (vagina, mouth, urethra, anus) में प्रवेश कराना, या बालक से अपने साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा कराना।
(b)शिश्न के अलावा कोई वस्तु या शरीर का कोई भाग किसी भी सीमा तक बालक के निर्दिष्ट अंगों (vagina, urethra, anus) में डालना, या बालक से अपने साथ या किसी अन्य के साथ ऐसा कराना।
(c)बालक के शरीर के किसी भाग को इस प्रकार संचालित करना कि बालक के शरीर के किसी अंग में प्रवेश हो, या बालक से ऐसा कराना।
(d)बालक के निर्दिष्ट अंगों पर अपना मुख लगाना, या बालक से अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा कराना।

धारा 3 के किसी भी खंड का कृत्य 'penetrative sexual assault' है; 'to any extent' शब्द प्रवेश की गहराई की बाध्यता नहीं रखते।

धारा 4: दंड, 2019 के संशोधन के बाद

धारा 4 को 2019 में संशोधित किया गया (2019 का अधिनियम 25, 16-08-2019 से प्रभावी)। उपधारा (1) में न्यूनतम सज़ा 'सात वर्ष' की जगह 'दस वर्ष' की गई और उप-धाराएँ (2) और (3) जोड़ी गईं। अब पाठ यह है: (1) जो प्रवेशन लैंगिक हमला करे उसे किसी भी प्रकार के कारावास की सज़ा होगी जो दस वर्ष से कम नहीं होगी पर आजीवन कारावास तक हो सकती है और वह जुर्माने का भी दायी होगा। (2) सोलह वर्ष से कम आयु के बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करने पर कारावास की सज़ा बीस वर्ष से कम नहीं होगी पर आजीवन कारावास तक हो सकती है, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन तक का कारावास है, और वह जुर्माने का भी दायी होगा। (3) उप-धारा (1) में लगाया गया जुर्माना उचित और युक्तियुक्त होगा और पीड़ित को उसके चिकित्सा खर्च और पुनर्वास के लिए दिया जाएगा।

धारा 5: गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला (aggravated penetrative sexual assault)

धारा 5 में इक्कीस खंड (a) से (u) हैं। इन्हें याद करने का सबसे सरल तरीका उन्हें सात समूहों में रखना है। यहाँ वही कृत्य, जो धारा 3 में परिभाषित है, तब गुरुतर माना जाता है जब उसके साथ इनमें से कोई परिस्थिति जुड़ी हो। पाठ में आपराधिक कृत्य वही रहता है; केवल परिस्थिति उसे गंभीर श्रेणी में ले जाती है।

धारा 5 के इक्कीस खंड: सात समूह

समूहखंडआशय (पाठ का सार)
पद या स्थिति(a), (b), (c), (d), (e), (f)पुलिस अधिकारी (थाने, स्टेशन-गृह, कर्तव्य के दौरान या पहचान के साथ); सशस्त्र या सुरक्षा बल का सदस्य; लोक सेवक; कारागार, रिमांड-गृह, संरक्षण-गृह, प्रेक्षण-गृह या अन्य देखरेख-स्थल के प्रबंधन या कर्मचारी; अस्पताल के प्रबंधन या कर्मचारी; शैक्षणिक या धार्मिक संस्था के प्रबंधन या कर्मचारी (उस संस्था में)।
समूह और साधन(g), (h)सामूहिक (gang) कृत्य, जिसमें समान आशय से समूह में किसी एक का कृत्य सभी का माना जाता है; घातक हथियार, आग, गर्म या संक्षारक पदार्थ का उपयोग।
परिणाम(i), (j)घोर उपहति (grievous hurt) या शारीरिक हानि या यौन अंगों को चोट; बालक को शारीरिक रूप से अक्षम करना या मानसिक रोग देना या अक्षमता लाना; महिला बालक का गर्भवती होना; एचआईवी या अन्य जानलेवा रोग या संक्रमण; बालक की मृत्यु (मृत्यु वाला उप-खंड 2019 में जोड़ा गया)।
पीड़ित की असुरक्षा(k), (m), (q)बालक की मानसिक या शारीरिक अक्षमता का लाभ उठाना; बालक की आयु बारह वर्ष से कम; बालक के गर्भवती होने की जानकारी होना।
दोहराव या पूर्व दोषसिद्धि(l), (t)एक से अधिक बार या बार-बार; इस अधिनियम या किसी अन्य कानून के अधीन किसी लैंगिक अपराध में पूर्व दोषसिद्धि।
संबंध और विश्वास(n), (o), (p)रक्त, गोद, विवाह या संरक्षकता से रिश्तेदार, पालन-पोषण (foster care) में, माता-पिता के साथ घरेलू संबंध में, या बालक के साथ एक ही या साझी गृहस्थी में रहने वाला; बालक को सेवा देने वाली संस्था का स्वामी, प्रबंधन या कर्मचारी; विश्वास या अधिकार की स्थिति में।
परिस्थिति(r), (s), (u)बालक की हत्या का प्रयास; सांप्रदायिक या पंथीय हिंसा, या प्राकृतिक आपदा या ऐसी ही स्थितियों के दौरान (प्राकृतिक आपदा वाला शब्द 2019 में जोड़ा गया); बालक को सार्वजनिक रूप से निर्वस्त्र करना या घुमाना।

धारा 6: गुरुतर रूप का दंड

धारा 6 को 2019 में नई धारा से बदला गया। अब उप-धारा (1) कहती है कि गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला करने वाले को कठोर कारावास (rigorous imprisonment) होगा जो बीस वर्ष से कम नहीं होगा पर आजीवन कारावास तक हो सकता है, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन तक का कारावास है, और वह जुर्माने का भी दायी होगा, या मृत्यु-दंड से। उप-धारा (2) कहती है कि लगाया गया जुर्माना उचित और युक्तियुक्त होगा और पीड़ित को उसके चिकित्सा खर्च और पुनर्वास के लिए दिया जाएगा।

धारा 4 और 6: 2019 से पहले और बाद की न्यूनतम सज़ा

धारा2019 से पहले2019 के संशोधन के बाद
4(1): प्रवेशन लैंगिक हमलान्यूनतम सात वर्ष, अधिकतम आजीवन कारावास और जुर्मानान्यूनतम दस वर्ष, अधिकतम आजीवन कारावास और जुर्माना
4(2): बालक सोलह वर्ष से कमपृथक प्रावधान नहींन्यूनतम बीस वर्ष, अधिकतम आजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवन) और जुर्माना
6(1): गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमलान्यूनतम दस वर्ष, अधिकतम आजीवन कारावास और जुर्मानान्यूनतम बीस वर्ष, आजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवन) और जुर्माना, या मृत्यु-दंड
जुर्माने का उपयोग—पीड़ित को चिकित्सा खर्च और पुनर्वास के लिए (4(3) और 6(2))

2019 से पहले की स्थिति PRS विधायी सार और PIB के विवरण के अनुसार है; वर्तमान पाठ धारा 4 और 6 में है।

धारा 1 से 6: वर्गीकरण का प्रवाह

  1. पीड़ित बालक?

    18 वर्ष से कम (धारा 2(1)(d))

  2. कृत्य धारा 3 की श्रेणी का?

    प्रवेशन लैंगिक हमला; चार खंड (a) से (d)

  3. कोई गुरुतर परिस्थिति?

    धारा 5 के खंड (a) से (u)

  4. नहीं: धारा 4

    10 वर्ष से आजीवन कारावास और जुर्माना; 16 वर्ष से कम पर 20 वर्ष से

  5. हाँ: धारा 6

    20 वर्ष से आजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवन) और जुर्माना, या मृत्यु-दंड

धारा 5 के सात समूह

गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला, धारा 5

पद या स्थिति

  • पुलिस, सशस्त्र बल, लोक सेवक
  • कारागार, गृह, अस्पताल
  • शैक्षणिक या धार्मिक संस्था

समूह और साधन

  • सामूहिक (gang)
  • हथियार, आग, संक्षारक पदार्थ

परिणाम

  • घोर उपहति या चोट
  • अक्षमता या मानसिक रोग, गर्भ, जानलेवा रोग
  • बालक की मृत्यु (2019)

पीड़ित की असुरक्षा

  • अक्षमता का लाभ
  • बारह वर्ष से कम आयु
  • गर्भ की जानकारी

दोहराव या पूर्व दोषसिद्धि

  • बार-बार
  • पूर्व दोषसिद्धि

संबंध और विश्वास

  • रिश्तेदार, संरक्षक, साझी गृहस्थी
  • सेवा-संस्था का स्वामी या कर्मचारी
  • विश्वास या अधिकार की स्थिति

परिस्थिति

  • हत्या का प्रयास
  • सांप्रदायिक हिंसा या प्राकृतिक आपदा
  • सार्वजनिक रूप से निर्वस्त्र करना

सहायता कहाँ मिलती है

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय अपने पोर्टल पर बाल हेल्पलाइन (Child Helpline) 1098 सूचीबद्ध करता है; PIB के अनुसार महिला हेल्पलाइन 181 को Childline 1098 और आपात-सेवा ERSS 112 से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) का POCSO e-Box बालकों से जुड़े यौन शोषण के मामलों की ऑनलाइन शिकायत-प्रणाली है। यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है; संकट की स्थिति में स्थानीय पुलिस या अधिकृत सेवा से तुरंत संपर्क करें।

मुख्य तथ्य

अधिनियम
The Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012, अधिनियम संख्या 32; 19 जून 2012
प्रारंभ
14 नवंबर 2012, अधिसूचना S.O. 2705(E), दिनांक 9 नवंबर 2012
संशोधन
2019 का अधिनियम 25; 16-08-2019 से प्रभावी (PIB: अधिसूचित 06.08.2019)
2019 के बाद
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की विधि-सूची में POCSO का अंतिम संशोधन अधिनियम 2019 का है; इसके बाद के किसी बदलाव के लिए देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ
बालक (धारा 2(1)(d))
18 वर्ष से कम आयु का कोई भी व्यक्ति
बाल अश्लील सामग्री (धारा 2(1)(da))
2019 के संशोधन से जोड़ा गया खंड
धारा 4(1)
न्यूनतम दस वर्ष (पहले सात वर्ष), अधिकतम आजीवन कारावास और जुर्माना
धारा 4(2)
सोलह वर्ष से कम आयु का बालक: न्यूनतम बीस वर्ष, आजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवन), जुर्माना
धारा 5
गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला: इक्कीस खंड (a) से (u)
धारा 6(1)
कठोर कारावास न्यूनतम बीस वर्ष, आजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवन) और जुर्माना, या मृत्यु
2019 से पहले और बाद (दूसरा स्रोत)
PRS: धारा 4 की न्यूनतम सज़ा सात से दस वर्ष, सोलह वर्ष से कम पर बीस वर्ष; गुरुतर हमले की न्यूनतम सज़ा दस से बीस वर्ष और मृत्यु-दंड का विकल्प
पाठ का स्रोत
विधि और न्याय विभाग की प्रति, अद्यतन 28-02-2023, संशोधनों सहित
अंतिम जाँच
2 अक्तूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • बालक की परिभाषा में 16 या 14 वर्ष लिख देना। धारा 2(1)(d) में अठारह वर्ष से कम आयु का कोई भी व्यक्ति बालक है।
  • 2019 के संशोधन से पहले की सज़ा (न्यूनतम सात वर्ष, गुरुतर में दस वर्ष) को वर्तमान सज़ा बताना। अब न्यूनतम दस और बीस वर्ष है और गुरुतर रूप में मृत्यु-दंड का भी प्रावधान है।
  • 'आजीवन कारावास' का अर्थ चौदह वर्ष लिख देना। धारा 4(2) और 6(1) में स्पष्ट लिखा है कि यह शेष प्राकृतिक जीवन तक का कारावास है।
  • धारा 5 के इक्कीस खंडों में से कुछ ही याद रखकर बाक़ी की जगह अपने शब्द गढ़ना। समूहों में याद रखें और पाठ का अनुसरण करें।
  • धारा 4 और 6 के जुर्माने को राजकोष को जाने वाला जुर्माना बताना। उप-धाराओं के अनुसार वह पीड़ित को चिकित्सा खर्च और पुनर्वास के लिए जाता है।
  • POCSO की 'shared household' को DV अधिनियम की परिभाषा से मिला देना। POCSO में आरोपित का बालक के साथ रहना देखा जाता है।
  • पीड़ित का नाम, पहचान या घटना-विवरण उत्तर में लिख देना। उत्तर में केवल विधिक सिद्धांत और धारा लिखें।