भारतीय न्याय संहिता 2023, धारा 194 से 197: हाथापाई, लोक सेवक पर हमला और समूहों में शत्रुता
भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 194 (हाथापाई), 195 (बलवा या हाथापाई दबाते लोक सेवक पर हमला), 196 (समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाना) और 197 (राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल आरोप और कथन), सज़ाएँ पाठ के अनुसार।
- BNS 2023
- धारा 194
- धारा 195
- धारा 196
- धारा 197
- हाथापाई
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023: ... Sections 189-191, 194-197, 270, 294-296." इस पृष्ठ पर चार धाराएँ हैं: धारा 194 (हाथापाई, affray), 195 (बलवा या हाथापाई रोकते लोक सेवक पर हमला या बाधा), 196 (समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाना) और 197 (राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल आरोप और कथन)। पाठ राजपत्र (25-12-2023) के अंग्रेज़ी पाठ से लिया गया है। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं है; वास्तविक मामले में अधिकृत विधिक सहायता लें।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- पिछले पेपरों में (2013, 2016, 2018, 2021, 2023 और 2024, यानी जिन छह पेपरों के प्रश्न उपलब्ध हैं) इन धाराओं पर कोई प्रश्न नहीं आया। ये धाराएँ 2026 के सिलेबस में नई जुड़ी हैं, इसलिए तैयारी का आधार धारा का शीर्षक, उप-धारा और सज़ा की सीमा है।
- चारों धाराओं में सज़ा की सीमाएँ अलग-अलग हैं और परीक्षा में आसानी से उलट सकती हैं: हाथापाई में एक माह, लोक सेवक पर हमले में तीन वर्ष (और ₹25,000 से कम नहीं का जुर्माना), शत्रुता बढ़ाने और राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल कथनों में तीन वर्ष, और पूजा-स्थल में पाँच वर्ष। बीते पेपरों में विधि के अधिकांश प्रश्न परिभाषा या धारा-पाठ पर आए, इसलिए 'हाथापाई की परिभाषा' या 'सज़ा' जैसे प्रश्न इसी ढर्रे के होंगे; यह परीक्षा का नियम नहीं, केवल रुझान है।
- इन धाराओं में बलवे (धारा 191), लोक सेवक (धारा 2(28)) और जनता जैसे शब्दों का प्रयोग है, इसलिए पिछले दो पृष्ठों का ज्ञान यहाँ सीधे काम आता है।
पहले सरल भाषा में
कानून जमाव और बलवे को रोकता है, पर समाज की शांति केवल बलवे से भंग नहीं होती। दो लोग भरे चौराहे पर मारपीट कर लें तो आसपास के लोग डर जाते हैं; पुलिस उसे रोकने जाए और कोई उस पर हाथ उठा दे तो कानून का काम ही रुकता है; कोई किसी जाति या समुदाय के विरुद्ध नफ़रत फैलाए तो उसके दंगे में बदलने का ख़तरा रहता है; और कोई यह प्रचार करे कि किसी वर्ग के लोग देश के प्रति वफ़ादार नहीं हो सकते तो यह राष्ट्रीय एकता के लिए चोट है। धारा 194 से 197 इन्हीं चार स्थितियों को पकड़ती हैं।
चारों धाराएँ एक ही अध्याय (अध्याय XI, सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध, Offences against the public tranquillity) की हैं, पर उनकी कसौटियाँ अलग हैं। हाथापाई (affray) में स्थान सार्वजनिक होना चाहिए और मारपीट से शांति भंग होनी चाहिए। धारा 195 की कसौटी यह है कि लोक सेवक अपने कर्तव्य में जमाव को बिखराने या बलवे या हाथापाई को दबाने का प्रयास कर रहा हो। धारा 196 और 197 में शब्द, संकेत, दृश्य अभिव्यक्ति और इलेक्ट्रॉनिक संचार तक के माध्यम आते हैं।
धारा 194: हाथापाई (affray)
| उप-धारा | पाठ का आशय | अंग्रेज़ी का मुख्य शब्द | सज़ा | IPC क्रम (अध्ययन-सहायक) |
|---|---|---|---|---|
| 194(1) | जब दो या अधिक व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर लड़कर लोक शांति भंग करते हैं, तो वे हाथापाई करते हैं। | two or more persons, by fighting in a public place, disturb the public peace | परिभाषा | IPC 159 |
| 194(2) | हाथापाई करने वाला। | commits an affray | किसी भी प्रकार का कारावास, एक माह तक, या जुर्माना, एक हज़ार रुपये तक, या दोनों | IPC 160 |
BNS-IPC तालिका में धारा 194 के शीर्षक पर परिवर्तन ('Change') चिह्नित है।
धारा 195: बलवा या हाथापाई दबाते लोक सेवक पर हमला या बाधा
| उप-धारा | कृत्य | शर्त | सज़ा | IPC क्रम (अध्ययन-सहायक) |
|---|---|---|---|---|
| 195(1) | लोक सेवक पर हमला करना, उसे बाधा पहुँचाना या उस पर आपराधिक बल का प्रयोग करना (assaults or obstructs ... or uses criminal force) | लोक सेवक अपने कर्तव्य के निर्वहन में विधिविरुद्ध जमाव को बिखराने या बलवे या हाथापाई को दबाने का प्रयास कर रहा हो | किसी भी प्रकार का कारावास, तीन वर्ष तक, या जुर्माना जो पच्चीस हज़ार रुपये से कम नहीं होगा, या दोनों | IPC 152 |
| 195(2) | हमले की धमकी देना, बाधा का प्रयास करना, या आपराधिक बल की धमकी या प्रयास (threatens to assault or attempts to obstruct ... or threatens or attempts to use criminal force) | वही शर्त: बिखराने या दबाने का प्रयास | किसी भी प्रकार का कारावास, एक वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों | IPC 152 (तालिका में एक ही क्रम) |
BNS-IPC तालिका में धारा 195 के शीर्षक पर परिवर्तन ('Change') चिह्नित है। उप-धारा (1) में जुर्माने की न्यूनतम सीमा ('shall not be less than twenty-five thousand rupees') पाठ में है।
धारा 196(1): समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाना (promoting enmity between different groups)
| खंड | कृत्य (हिंदी आशय) | अंग्रेज़ी पाठ का मुख्य अंश |
|---|---|---|
| (a) | शब्दों (बोले या लिखे), संकेतों, दृश्य निरूपणों, इलेक्ट्रॉनिक संचार या किसी अन्य रीति से, धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास, भाषा, जाति या समुदाय या किसी भी अन्य आधार पर, विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषायी या क्षेत्रीय समूहों या जातियों या समुदायों के बीच असामंजस्य या शत्रुता, घृणा या वैमनस्य की भावना को बढ़ावा देना या बढ़ावा देने का प्रयास करना। | by words, either spoken or written, or by signs or by visible representations or through electronic communication or otherwise, promotes or attempts to promote, on grounds of religion, race, place of birth, residence, language, caste or community or any other ground whatsoever, disharmony or feelings of enmity, hatred or ill-will |
| (b) | ऐसा कोई कार्य करना जो विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषायी या क्षेत्रीय समूहों या जातियों या समुदायों के बीच सौहार्द के बनाए रखने के प्रतिकूल हो और जिससे लोक शांति भंग होती है या होने की संभावना है। | any act which is prejudicial to the maintenance of harmony ... and which disturbs or is likely to disturb the public tranquillity |
| (c) | किसी धार्मिक, नस्लीय, भाषायी या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय के विरुद्ध आपराधिक बल या हिंसा के प्रयोग या प्रशिक्षण के आशय से (या यह जानते हुए कि ऐसा होने की संभावना है) कोई अभ्यास, आंदोलन, कवायद या ऐसी गतिविधि आयोजित करना, या उसमें भाग लेना, और वह गतिविधि उस समूह के सदस्यों में भय, आशंका या असुरक्षा की भावना पैदा करती हो या करने की संभावना हो। | organises any exercise, movement, drill or other similar activity intending that the participants ... shall use or be trained to use criminal force or violence ... causes or is likely to cause fear or alarm or a feeling of insecurity |
सज़ा (196(1)): कारावास, तीन वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों (पाठ में 'imprisonment which may extend to three years, or with fine, or with both')। 196(2): उप-धारा (1) का अपराध किसी पूजा-स्थल में या धार्मिक पूजा या धार्मिक अनुष्ठान में लगी किसी सभा में हो तो कारावास पाँच वर्ष तक और जुर्माने का भी दायी (imprisonment which may extend to five years and shall also be liable to fine)। IPC क्रम (अध्ययन-सहायक): 153A; तालिका में IPC 153AA 'Deleted' दर्शाया गया है।
धारा 197(1): राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल आरोप और कथन (imputations, assertions prejudicial to national integration)
| खंड | कृत्य (हिंदी आशय) | अंग्रेज़ी पाठ का मुख्य अंश |
|---|---|---|
| (a) | शब्दों, संकेतों, दृश्य निरूपणों, इलेक्ट्रॉनिक संचार या अन्य रीति से यह आरोप लगाना या प्रकाशित करना कि किसी धार्मिक, नस्लीय, भाषायी या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय का होने के कारण कोई वर्ग भारत के संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा और वफ़ादारी नहीं रख सकता, या भारत की संप्रभुता और अखंडता को क़ायम नहीं रख सकता। | makes or publishes any imputation that any class of persons cannot ... bear true faith and allegiance to the Constitution of India ... or uphold the sovereignty and integrity of India |
| (b) | यह कहना, परामर्श देना, सलाह देना, प्रचार करना या प्रकाशित करना कि ऐसे किसी कारण से किसी वर्ग को भारत के नागरिक के रूप में उनके अधिकारों से वंचित किया जाए। | asserts, counsels, advises, propagates or publishes that any class of persons shall ... be denied, or deprived of their rights as citizens of India |
| (c) | ऐसे किसी वर्ग के दायित्व के विषय में कोई कथन, परामर्श, याचना या अपील करना या प्रकाशित करना, जिससे उन सदस्यों और अन्य व्यक्तियों के बीच असामंजस्य, शत्रुता, घृणा या वैमनस्य की भावना पैदा होती है या होने की संभावना है। | makes or publishes any assertion, counsel, plea or appeal concerning the obligation of any class of persons ... causes or is likely to cause disharmony or feelings of enmity or hatred or ill-will |
| (d) | भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता या सुरक्षा को संकट में डालने वाली झूठी या भ्रामक सूचना बनाना या प्रकाशित करना। | makes or publishes false or misleading information, jeopardising the sovereignty, unity and integrity or security of India |
सज़ा (197(1)): कारावास, तीन वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों। 197(2): यही अपराध पूजा-स्थल में या धार्मिक पूजा या अनुष्ठान में लगी सभा में हो तो कारावास पाँच वर्ष तक और जुर्माने का भी दायी। IPC क्रम (अध्ययन-सहायक): 153B; BNS-IPC तालिका में धारा 197 के शीर्षक पर परिवर्तन ('Change') चिह्नित है।
चारों धाराओं को कैसे समझें
धारा 194 (हाथापाई)। इसके दो तत्व हैं: कम से कम दो व्यक्ति, और सार्वजनिक स्थान पर लड़ना जिससे लोक शांति भंग हो। दो लोग अपने घर के भीतर लड़ें तो यह धारा नहीं लगती, क्योंकि 'public place' की शर्त नहीं है। इसमें 'बलवा' का वह सामूहिक उद्देश्य भी नहीं चाहिए जो धारा 189 में है। सज़ा सबसे हल्की है: एक माह तक का कारावास या एक हज़ार रुपये तक का जुर्माना या दोनों।
धारा 195 (लोक सेवक पर हमला या बाधा)। यहाँ 'लोक सेवक' शब्द का अर्थ धारा 2(28) से लेना है, यानी केवल पुलिस अधिकारी नहीं, उस धारा में गिनाया कोई भी लोक सेवक, यदि वह अपने कर्तव्य में जमाव बिखराने या बलवा या हाथापाई दबाने के प्रयास में लगा हो। सब कुछ इसी पर टिका है कि लोक सेवक 'in the discharge of his duty' और 'in endeavouring to disperse an unlawful assembly, or to suppress a riot or affray' हो। उप-धारा (1) में तीन कृत्य हैं: हमला (assaults), बाधा (obstructs), या आपराधिक बल (criminal force)। सज़ा तीन वर्ष तक का कारावास या कम से कम ₹25,000 का जुर्माना या दोनों। उप-धारा (2) में कृत्य धमकी या प्रयास तक हल्का है: धमकी देना या बाधा का प्रयास या आपराधिक बल की धमकी या प्रयास; सज़ा एक वर्ष तक या जुर्माना या दोनों।
धारा 196 (शत्रुता बढ़ाना)। इसमें तीन तरह के कृत्य हैं। खंड (a) बोलने, लिखने, संकेत, दृश्य रूप, इलेक्ट्रॉनिक संचार या 'otherwise' के माध्यम से शत्रुता या असामंजस्य को बढ़ावा देना है; आधार धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास, भाषा, जाति या समुदाय हैं और 'any other ground whatsoever' से सूची खुली छोड़ी गई है। इसमें 'attempts to promote' भी शामिल है, यानी प्रयास भी अपराध है। खंड (b) में केवल बढ़ावा नहीं, कोई कार्य (act) ज़रूरी है जो सौहार्द के प्रतिकूल हो और जिससे लोक शांति भंग होती हो या होने की संभावना हो। खंड (c) हिंसा के प्रशिक्षण या अभ्यास (drill) की बात करता है, जिसमें आयोजक और भागीदार दोनों आते हैं और उसका परिणाम भय, आशंका या असुरक्षा की भावना है। तीनों की सज़ा तीन वर्ष तक; पूजा-स्थल या धार्मिक सभा में होने पर पाँच वर्ष तक कारावास और जुर्माना।
धारा 197 (राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल कथन)। यह धारा आरोप, कथन और प्रचार की बात करती है, जिनका निशाना नागरिकता, निष्ठा और अधिकार हैं। खंड (a) में आरोप यह है कि किसी वर्ग के लोग संविधान के प्रति निष्ठा नहीं रख सकते; खंड (b) में यह कि उन्हें नागरिक अधिकारों से वंचित किया जाए; खंड (c) में उनके दायित्व पर ऐसा कथन जिससे वैमनस्य पैदा हो; और खंड (d) में झूठी या भ्रामक सूचना जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता या सुरक्षा को संकट में डाले। यहाँ भी माध्यम में इलेक्ट्रॉनिक संचार शामिल है। सज़ा तीन वर्ष तक या जुर्माना या दोनों, और पूजा-स्थल में पाँच वर्ष तक और जुर्माना।
धारा 196 और 197 की बनावट एक जैसी है: हर खंड अलग अपराध है, पर सभी खंडों की सज़ा एक जैसी है (तीन वर्ष, और पूजा-स्थल में पाँच वर्ष)। अंतर विषय का है: 196 समूहों के बीच शत्रुता या असामंजस्य और हिंसा के अभ्यास की बात करती है, जबकि 197 किसी वर्ग की निष्ठा या नागरिक अधिकारों पर आरोप और राष्ट्र की एकता के विरुद्ध झूठी सूचना की।
चारों धाराओं की सज़ा का एक नज़र में मिलान
| धारा | अपराध | कारावास की अधिकतम अवधि | जुर्माना | IPC क्रम (अध्ययन-सहायक) |
|---|---|---|---|---|
| 194(2) | हाथापाई (affray) | एक माह (किसी भी प्रकार का) | एक हज़ार रुपये तक; या दोनों | 160 (परिभाषा 159) |
| 195(1) | लोक सेवक पर हमला या बाधा, बलवा या हाथापाई दबाने के प्रयास में | तीन वर्ष (किसी भी प्रकार का) | पच्चीस हज़ार रुपये से कम नहीं; या दोनों | 152 |
| 195(2) | वही कृत्य, धमकी या प्रयास रूप में | एक वर्ष (किसी भी प्रकार का) | जुर्माना; या दोनों | 152 |
| 196(1) | समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाना, सौहार्द के प्रतिकूल कार्य, हिंसा का अभ्यास | तीन वर्ष | जुर्माना; या दोनों | 153A |
| 196(2) | वही अपराध पूजा-स्थल या धार्मिक सभा में | पाँच वर्ष | जुर्माने का भी दायी | 153A |
| 197(1) | राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल आरोप, कथन या झूठी सूचना | तीन वर्ष | जुर्माना; या दोनों | 153B |
| 197(2) | वही अपराध पूजा-स्थल या धार्मिक सभा में | पाँच वर्ष | जुर्माने का भी दायी | 153B |
196(1) और 197(1) में पाठ में 'either description' शब्द नहीं है; वहाँ केवल 'imprisonment which may extend to three years' है, जबकि 194 और 195 में 'imprisonment of either description' लिखा है।
किस कृत्य पर कौन-सी धारा: निर्णय-क्रम
दो या अधिक व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर लड़कर शांति भंग करें?
हाँ: धारा 194 (एक माह तक)
जमाव बिखराने या बलवा-हाथापाई दबाते लोक सेवक पर हमला, बाधा या बल?
हाँ: धारा 195(1) (तीन वर्ष); धमकी या प्रयास हो तो 195(2) (एक वर्ष)
समूहों के बीच शत्रुता, असामंजस्य या हिंसा का अभ्यास?
हाँ: धारा 196(1) (तीन वर्ष); पूजा-स्थल में 196(2) (पाँच वर्ष)
किसी वर्ग की निष्ठा या नागरिक अधिकारों पर आरोप, या एकता के विरुद्ध झूठी सूचना?
हाँ: धारा 197(1) (तीन वर्ष); पूजा-स्थल में 197(2) (पाँच वर्ष)
धारा 196(1) के तीन खंड
धारा 196: शत्रुता बढ़ाना
(a) बढ़ावा देना
- शब्द, संकेत, दृश्य रूप, इलेक्ट्रॉनिक संचार
- धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास, भाषा, जाति, समुदाय या कोई भी आधार
- असामंजस्य, शत्रुता, घृणा या वैमनस्य
(b) सौहार्द के प्रतिकूल कार्य
- कार्य सौहार्द के प्रतिकूल हो
- लोक शांति भंग हो या होने की संभावना
(c) हिंसा का अभ्यास
- आयोजन करना या भाग लेना
- आपराधिक बल या हिंसा के प्रयोग या प्रशिक्षण का आशय या संभावना का ज्ञान
- भय, आशंका या असुरक्षा की भावना
मुख्य तथ्य
- धारा 194(1)
- हाथापाई: दो या अधिक व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर लड़कर लोक शांति भंग करें (IPC 159)
- धारा 194(2)
- किसी भी प्रकार का कारावास एक माह तक, या जुर्माना एक हज़ार रुपये तक, या दोनों (IPC 160)
- धारा 195(1)
- कारावास तीन वर्ष तक, या जुर्माना जो पच्चीस हज़ार रुपये से कम नहीं, या दोनों (IPC 152)
- धारा 195(2)
- धमकी या प्रयास: कारावास एक वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों
- धारा 196(1)
- शत्रुता बढ़ाना: तीन वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों (IPC 153A)
- धारा 196(2)
- पूजा-स्थल या धार्मिक सभा में: पाँच वर्ष तक कारावास और जुर्माने का भी दायी
- धारा 197(1)
- राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल आरोप और कथन: तीन वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों (IPC 153B)
- धारा 197(2)
- पूजा-स्थल या धार्मिक सभा में: पाँच वर्ष तक कारावास और जुर्माने का भी दायी
- IPC 153AA
- BNS-IPC तालिका में 'Deleted' (BNS में समकक्ष धारा नहीं दिखाई गई)
- प्रारंभ
- BNS 1 जुलाई 2024 से लागू (धारा 106(2) को छोड़कर)
- अंतिम जाँच
- 2 अक्तूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- हाथापाई की सज़ा तीन वर्ष लिख देना। धारा 194(2) में एक माह तक का कारावास या एक हज़ार रुपये तक का जुर्माना या दोनों है।
- धारा 195(1) का जुर्माना भूलना। पाठ में 'shall not be less than twenty-five thousand rupees' है, यानी जुर्माने की न्यूनतम सीमा है; और उप-धारा (2) में सज़ा एक वर्ष तक है।
- धारा 195 को हर लोक सेवक पर हमले की धारा मान लेना। इसकी शर्त है कि लोक सेवक अपने कर्तव्य में जमाव बिखराने या बलवा या हाथापाई दबाने का प्रयास कर रहा हो।
- धारा 196 और 197 की सज़ा में फ़र्क़ ढूँढना। दोनों की उप-धारा (1) में तीन वर्ष तक और उप-धारा (2) में पूजा-स्थल या धार्मिक सभा पर पाँच वर्ष तक और जुर्माना है।
- धारा 196(1)(a) में 'शब्दों से' तक सीमित रहना। पाठ में बोले या लिखे शब्द, संकेत, दृश्य निरूपण और 'electronic communication' के साथ 'or otherwise' भी है।
- IPC के पुराने क्रमांक (153A, 153B, 152) को मुख्य उत्तर बनाना। वर्तमान कानून BNS है; IPC केवल अध्ययन-सहायक है।
कार्य-उदाहरण (कल्पित): मेले की भिड़ंत
हल सहित उदाहरणधारा 194 से 195 तक का वर्गीकरण
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; इसमें कोई वास्तविक व्यक्ति, स्थान या घटना नहीं है। कल्पित स्थिति: किसी मेले के बीच बाज़ार में दो ग्राहक एक-दूसरे से भिड़ जाते हैं और दुकानदार तथा राहगीर घबराकर भागने लगते हैं। एक पुलिसकर्मी भिड़ंत को दबाने पहुँचता है और उनमें से एक ग्राहक उसे धक्का देकर रोकने की कोशिश करता है।
- 1चरण 1: दो ग्राहकों की भिड़ंत दो व्यक्ति, सार्वजनिक स्थान (बाज़ार), लड़ाई, और लोक शांति भंग: ये धारा 194(1) के तत्व हैं। सज़ा धारा 194(2): एक माह तक, या जुर्माना एक हज़ार रुपये तक, या दोनों।
- 2चरण 2: पुलिसकर्मी पुलिसकर्मी लोक सेवक है (धारा 2(28))। वह अपने कर्तव्य में हाथापाई दबाने का प्रयास कर रहा है, यानी धारा 195 की शर्त पूरी है।
- 3चरण 3: धक्का देकर रोकना धक्का आपराधिक बल है या बाधा, यह तथ्यों से तय होगा। यदि यह बल या बाधा है तो धारा 195(1); यदि केवल धमकी या प्रयास है तो धारा 195(2)।
- 4चरण 4: सज़ा धारा 195(1): तीन वर्ष तक, या जुर्माना जो पच्चीस हज़ार रुपये से कम नहीं, या दोनों। धारा 195(2): एक वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों।
निष्कर्ष: एक ही घटना में दो अलग धाराएँ लग सकती हैं, क्योंकि पहली मारपीट सार्वजनिक शांति का अपराध है और दूसरी लोक सेवक के कर्तव्य में बाधा। उत्तर में हर कृत्य के सामने उसकी धारा लिखें।
केस स्टडी (कल्पित): इलेक्ट्रॉनिक संदेश और धारा 196 का खंड (a)
उदाहरण (काल्पनिक)संदेश, माध्यम और आधार
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; इसमें कोई वास्तविक घटना, समुदाय या व्यक्ति नहीं है, केवल कानूनी वर्गीकरण दिखाया गया है। कल्पित स्थिति: किसी क़स्बे में समुदाय 'क' और समुदाय 'ख' के बीच एक ज़मीन को लेकर तनाव है। एक व्यक्ति मोबाइल पर बने एक समूह में ऐसा संदेश भेजता है जिसमें समुदाय 'ख' के विरुद्ध घृणा की बातें हैं, और संदेश फैल जाता है। बाद में क़स्बे में दोनों पक्षों के बीच टकराव का ख़तरा बन जाता है।
- माध्यम
- संदेश 'electronic communication' से भेजा गया। धारा 196(1)(a) में यह माध्यम स्पष्ट लिखा है।
- आधार
- समुदाय (community) या कोई भी अन्य आधार: दोनों में से कोई भी पर्याप्त है।
- कृत्य
- असामंजस्य या घृणा की भावना को बढ़ावा देना या बढ़ावा देने का प्रयास; प्रयास भी अपराध है।
- सज़ा
- तीन वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों (196(1)); यदि संदेश किसी पूजा-स्थल या धार्मिक सभा में दिया गया होता तो पाँच वर्ष तक और जुर्माना (196(2))।
सीख
धारा 196(1)(a) के लिए संदेश का 'हिंसा तक पहुँचना' ज़रूरी नहीं; शत्रुता को बढ़ावा देना या उसका प्रयास ही अपराध है, और माध्यम में इलेक्ट्रॉनिक संचार शामिल है। खंड (b) में पर्याप्त होने के लिए कृत्य के साथ लोक शांति भंग होना या होने की संभावना चाहिए।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अनुसार 'हाथापाई' (affray) क्या है?
आदर्श उत्तर
सार्वजनिक स्थान पर दो या अधिक व्यक्तियों की लड़ाई से शांति भंग हो, तो हाथापाई (धारा 194(1))।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
धारा 195(1) में जुर्माने की क्या सीमा है?
आदर्श उत्तर
जुर्माना पच्चीस हज़ार रुपये से कम नहीं होगा; कारावास तीन वर्ष तक, या दोनों (धारा 195(1))।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
धारा 196 के अंतर्गत समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाने का अपराध समझाइए।
आदर्श उत्तर
धारा 196(1) में धर्म, मूलवंश, भाषा, जाति, समुदाय या किसी भी आधार पर शब्दों, संकेतों, दृश्य निरूपण या इलेक्ट्रॉनिक संचार से विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता या असामंजस्य को बढ़ावा देना, सौहार्द के प्रतिकूल कार्य, या हिंसा का अभ्यास अपराध है; सज़ा तीन वर्ष तक, पूजा-स्थल में पाँच वर्ष।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
धारा 196 और 197 में अंतर बताइए।
आदर्श उत्तर
धारा 196 समूहों के बीच शत्रुता, असामंजस्य और हिंसा के अभ्यास को दंडित करती है। धारा 197 राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल आरोपों पर है: किसी वर्ग की निष्ठा पर संदेह, नागरिक अधिकारों से वंचित करने की माँग, और संप्रभुता को संकट में डालने वाली झूठी सूचना। दोनों में सज़ा तीन वर्ष तक, पूजा-स्थल में पाँच वर्ष।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
भारतीय न्याय संहिता की धारा 194 से 197 में वर्णित अपराधों और उनकी सज़ाओं की विवेचना कीजिए।
आदर्श उत्तर
धारा 194 में हाथापाई: सार्वजनिक स्थान पर दो या अधिक के लड़ने से शांति भंग; एक माह तक या एक हज़ार रुपये तक जुर्माना या दोनों। धारा 195 में बलवा या हाथापाई दबाते लोक सेवक पर हमला, बाधा या बल: तीन वर्ष तक या कम से कम पच्चीस हज़ार रुपये जुर्माना या दोनों; धमकी या प्रयास पर एक वर्ष तक। धारा 196 में समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाना और धारा 197 में राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल आरोप और झूठी सूचना: तीन वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों; पूजा-स्थल या धार्मिक सभा में पाँच वर्ष तक और जुर्माना। ये अपराध सार्वजनिक शांति और एकता की रक्षा करते हैं।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 196 और 197 के अंतर्गत अपराध और दंड बताइए।" पहली पंक्ति में दोनों धाराओं के शीर्षक अंग्रेज़ी में लिखें; सीमा 100 शब्द है, इसलिए खंडों के नाम और सज़ाएँ दें।
मुख्य भाग
- धारा 196(1): शत्रुता बढ़ाना (a), सौहार्द के प्रतिकूल कार्य (b), हिंसा का अभ्यास (c); सज़ा तीन वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों
- धारा 197(1): वर्ग की निष्ठा पर आरोप (a), नागरिक अधिकारों से वंचित करना (b), दायित्व पर वैमनस्य बढ़ाने वाला कथन (c), एकता के विरुद्ध झूठी सूचना (d); सज़ा तीन वर्ष तक
- उप-धारा (2) दोनों में: पूजा-स्थल या धार्मिक सभा में पाँच वर्ष तक कारावास और जुर्माना
निष्कर्ष
निष्कर्ष: ये धाराएँ शब्द और इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से भी फैलने वाली नफ़रत और झूठी सूचना से सार्वजनिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता की रक्षा करती हैं।
अतिरिक्त मूल्य
- अंग्रेज़ी शब्द: promotes enmity, prejudicial to national integration, electronic communication
- IPC क्रम केवल अध्ययन-सहायक: 153A, 153B
- धारा 195(1) का जुर्माना: पच्चीस हज़ार रुपये से कम नहीं
त्वरित पुनरावृत्ति
- धारा 194(1): दो या अधिक, सार्वजनिक स्थान, लड़ाई, लोक शांति भंग = हाथापाई (IPC 159)
- धारा 194(2): एक माह तक कारावास, या जुर्माना एक हज़ार रुपये तक, या दोनों (IPC 160)
- धारा 195(1): जमाव बिखराते या बलवा-हाथापाई दबाते लोक सेवक पर हमला, बाधा, बल: तीन वर्ष तक, या जुर्माना कम से कम पच्चीस हज़ार रुपये, या दोनों (IPC 152)
- धारा 195(2): धमकी या प्रयास: एक वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों
- धारा 196(1): (a) शत्रुता बढ़ाना, (b) सौहार्द के प्रतिकूल कार्य जो शांति भंग करे, (c) हिंसा का अभ्यास; तीन वर्ष तक (IPC 153A)
- धारा 197(1): (a) निष्ठा पर आरोप, (b) नागरिक अधिकारों से वंचित करना, (c) दायित्व पर वैमनस्य बढ़ाने वाला कथन, (d) एकता और सुरक्षा के विरुद्ध झूठी सूचना; तीन वर्ष तक (IPC 153B)
- 196(2) और 197(2): पूजा-स्थल या धार्मिक सभा में पाँच वर्ष तक कारावास और जुर्माना
- माध्यम: शब्द (बोले या लिखे), संकेत, दृश्य निरूपण, इलेक्ट्रॉनिक संचार, or otherwise
- IPC 153AA: तालिका में 'Deleted'
याद रखने योग्य शब्द
- affray
- public servant
- promotes enmity
- national integration
- electronic communication
- 194
- 195
- 196
- 197