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पेपर III · इकाई III · भाग ख (विधि)

BNSS 2023: धारा 194 से 196, आत्महत्या आदि पर जाँच, समन और मजिस्ट्रेट की जाँच

BNSS 2023 की धारा 194 से 196: अप्राकृतिक मृत्यु पर पुलिस का इन्क्वेस्ट, गवाहों को समन और मजिस्ट्रेट की जाँच।

  • धारा 194
  • धारा 195
  • धारा 196
  • इन्क्वेस्ट
  • विवाह के सात वर्ष
  • अभिरक्षा में मृत्यु
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023: ... Sections ... 187, 194-196." इस पृष्ठ पर धारा 194 (आत्महत्या आदि की पुलिस द्वारा जाँच और रिपोर्ट), 195 (व्यक्तियों को समन करने की शक्ति) और 196 (मृत्यु के कारण की मजिस्ट्रेट द्वारा जाँच) हैं। धारा 1 से 3 पहले, 14 से 17 और 41 से 43 दूसरे, 126 से 152 तीसरे, 163 से 167 चौथे तथा 173, 174 और 187 पाँचवें पृष्ठ पर हैं। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2013 से 2024 के उपलब्ध पेपरों में BNSS या CrPC से कोई प्रश्न नहीं मिलता, क्योंकि BNSS 2026 के सिलेबस में पहली बार जुड़ी है। इसलिए इस पृष्ठ पर पिछले प्रश्न नहीं हैं; तैयारी इन तीन छोटी धाराओं के सटीक पाठ पर टिकी है।
  • ये धाराएँ अप्राकृतिक मृत्यु की जाँच-प्रक्रिया बताती हैं: पुलिस मौक़े पर क्या करेगी, 24 घंटे में क्या भेजेगी, किन मामलों में शव चिकित्सक को भेजा जाएगा और किन मामलों में मजिस्ट्रेट की जाँच अनिवार्य है। इनसे जुड़े सवाल सूची और अवधि पर आधारित होते हैं, इसलिए तालिकाएँ याद रखें।
  • विवाह के सात वर्ष के भीतर महिला की मृत्यु और अभिरक्षा में मृत्यु या लापता होना, दोनों में मजिस्ट्रेट की जाँच का विशेष उपबंध है। ये दोनों बिंदु विधि और सामाजिक मुद्दों (दहेज, महिला उत्पीड़न) के बीच का सेतु हैं, जो इकाई III के अन्य भागों में भी आते हैं।

पहले सरल भाषा में

गाँव में किसी की लाश कुएँ में मिलती है। पुलिस, परिवार और पड़ोसी, सबके मन में सवाल है: यह आत्महत्या है, दुर्घटना है या किसी ने मार डाला? इसका उत्तर देने के लिए ही संहिता मृत्यु की प्रारंभिक जाँच (inquest) का ढाँचा देती है। पहला काम पुलिस का है: मौक़े पर जाना, पड़ोस के दो या अधिक प्रतिष्ठित निवासियों के सामने शव को देखना और मृत्यु के प्रकट कारण की रिपोर्ट बनाना। दूसरा काम मजिस्ट्रेट का है (इन्क्वेस्ट के लिए सशक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट, और अभिरक्षा के मामलों में स्थानीय अधिकारिता वाला मजिस्ट्रेट), जो कुछ मामलों में पुलिस की जाँच के साथ या उसकी जगह अपनी जाँच करता है। धारा 194 पुलिस की प्रक्रिया है, धारा 195 पुलिस को गवाहों को बुलाने की शक्ति देती है और धारा 196 मजिस्ट्रेट की जाँच है।

इन तीन धाराओं की ख़ास बात यह है कि इनमें सुरक्षा के दो अलग घेरे हैं। एक घेरा विवाह के सात वर्ष के भीतर महिला की मृत्यु के लिए है, जहाँ शव की जाँच के लिए चिकित्सक को भेजना और मजिस्ट्रेट की जाँच अनिवार्य ("shall") है। दूसरा घेरा अभिरक्षा के लिए है: पुलिस या न्यायालय/मजिस्ट्रेट द्वारा प्राधिकृत अभिरक्षा में किसी के मरने, लापता होने या महिला से बलात्कार के आरोप पर पुलिस की जाँच के अलावा मजिस्ट्रेट की भी जाँच होगी।

धारा 194: आत्महत्या आदि पर पुलिस की जाँच और रिपोर्ट (Police to enquire and report on suicide, etc.)

उपधारा (1): जब थाना प्रभारी, या राज्य सरकार द्वारा इसके लिए विशेष रूप से सशक्त कोई अन्य पुलिस अधिकारी, को सूचना मिले कि किसी व्यक्ति ने आत्महत्या की है, या उसे किसी अन्य व्यक्ति, किसी पशु, मशीनरी या दुर्घटना से मार डाला गया है, या उसकी मृत्यु ऐसी परिस्थितियों में हुई है जिनसे यह उचित संदेह होता है कि किसी अन्य व्यक्ति ने अपराध किया है, तो वह तुरंत निकटतम उस कार्यपालक मजिस्ट्रेट को सूचित करेगा जिसे इन्क्वेस्ट करने का अधिकार है। साथ ही, राज्य सरकार के किसी नियम या ज़िला मजिस्ट्रेट या उप-खंड मजिस्ट्रेट के किसी सामान्य या विशेष आदेश में अन्यथा निर्देश न हो, तो वह उस स्थान पर जाएगा जहाँ मृतक का शव है, और वहाँ पड़ोस के दो या अधिक प्रतिष्ठित निवासियों की उपस्थिति में अन्वेषण करेगा और मृत्यु के प्रकट कारण की रिपोर्ट तैयार करेगा। उसमें घाव, अस्थि-भंग, खरोंच और शरीर पर पाए गए अन्य निशानों का वर्णन होगा और यह भी कि वे किस रीति से या किस हथियार या औज़ार से (यदि किसी से) लगे प्रतीत होते हैं।

उपधारा (2): रिपोर्ट पर वह पुलिस अधिकारी और अन्य व्यक्ति, या उनमें से जितने सहमत हों, हस्ताक्षर करेंगे, और रिपोर्ट चौबीस घंटे के भीतर ज़िला मजिस्ट्रेट या उप-खंड मजिस्ट्रेट को भेजी जाएगी। उपधारा (3): पाँच स्थितियों में पुलिस अधिकारी, राज्य सरकार के नियमों के अधीन, शव को परीक्षण के लिए निकटतम सिविल सर्जन या राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किसी अन्य योग्य चिकित्सा-व्यक्ति के पास भेजेगा, बशर्ते मौसम और दूरी इतनी हो कि रास्ते में शव इतना न सड़े कि परीक्षण व्यर्थ हो जाए। उपधारा (4): इन्क्वेस्ट करने के लिए सशक्त मजिस्ट्रेट हैं: कोई ज़िला मजिस्ट्रेट या उप-खंड मजिस्ट्रेट, और कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट जिसे राज्य सरकार या ज़िला मजिस्ट्रेट ने इसके लिए विशेष रूप से सशक्त किया हो।

धारा 194(3): शव को चिकित्सक के पास भेजने की पाँच स्थितियाँ

खंडस्थितिक्या ध्यान रखें
(i)विवाह के सात वर्ष के भीतर महिला की आत्महत्यासात वर्ष की गणना विवाह से मृत्यु तक
(ii)विवाह के सात वर्ष के भीतर महिला की मृत्यु, ऐसी परिस्थितियों में कि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उससे संबंधित अपराध का उचित संदेह होआत्महत्या से भिन्न: यह संदिग्ध मृत्यु की स्थिति है
(iii)विवाह के सात वर्ष के भीतर महिला की मृत्यु और उसके किसी रिश्तेदार का इस आशय का अनुरोधअनुरोध रिश्तेदार का; "relative" का अर्थ धारा 196 के स्पष्टीकरण में
(iv)मृत्यु के कारण के बारे में कोई संदेहसंदेह का स्वरूप: कारण अस्पष्ट
(v)पुलिस अधिकारी किसी अन्य कारण से ऐसा करना समीचीन समझेअधिकारी का विवेक

धारा 195: व्यक्तियों को समन करने की शक्ति (Power to summon persons)

उपधारा (1): धारा 194 के अधीन कार्यवाही करने वाला पुलिस अधिकारी लिखित आदेश से "उक्त" दो या अधिक व्यक्तियों (यानी पड़ोस के प्रतिष्ठित निवासियों) को उस अन्वेषण के लिए समन कर सकता है, और ऐसे किसी भी अन्य व्यक्ति को भी जो मामले के तथ्यों से परिचित प्रतीत हो। जिसे समन किया गया है, वह उपस्थित होने और सभी प्रश्नों का सच-सच उत्तर देने को बाध्य है, केवल उन प्रश्नों को छोड़कर जिनका उत्तर उसे किसी आपराधिक आरोप, या शास्ति या समपहरण के लिए उजागर करने की प्रवृत्ति रखता हो।

पहला परंतुक सुविधा का है: पंद्रह वर्ष से कम आयु या साठ वर्ष से अधिक आयु के पुरुष, किसी महिला, मानसिक या शारीरिक रूप से दिव्यांग व्यक्ति या गंभीर बीमारी (acute illness) से पीड़ित व्यक्ति को उसके निवास स्थान के अलावा किसी स्थान पर उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। दूसरा परंतुक: यदि ऐसा व्यक्ति थाने में उपस्थित होकर उत्तर देने को तैयार हो, तो उसे ऐसा करने की अनुमति दी जा सकती है। उपधारा (2): यदि तथ्यों से ऐसा संज्ञेय अपराध प्रकट न हो जिस पर धारा 190 लागू होती है, तो पुलिस अधिकारी ऐसे व्यक्तियों से मजिस्ट्रेट के न्यायालय में उपस्थित होने की अपेक्षा नहीं करेगा। (धारा 190 वह है जिसमें साक्ष्य पर्याप्त होने पर मामला मजिस्ट्रेट को भेजा जाता है; यह सिलेबस की सूची में नहीं है।)

धारा 195(1) के परंतुक: कौन अपने निवास के अलावा कहीं उपस्थित होने को बाध्य नहीं

श्रेणीपाठ में शब्दअपवाद
पुरुष, कम आयुपंद्रह वर्ष से कम आयु का पुरुष (male person under fifteen years)यदि वह थाने में आने को तैयार हो तो अनुमति
पुरुष, अधिक आयुसाठ वर्ष से अधिक आयु का पुरुष (above sixty years)वही
महिलाकोई भी महिला (a woman)वही
दिव्यांगमानसिक या शारीरिक रूप से दिव्यांग व्यक्तिवही
गंभीर रूप से बीमारगंभीर बीमारी (acute illness) से पीड़ित व्यक्तिवही

धारा 196: मृत्यु के कारण की मजिस्ट्रेट द्वारा जाँच (Inquiry by Magistrate into cause of death)

उपधारा (1): यदि मामला धारा 194(3) के खंड (i) या (ii) का है, यानी विवाह के सात वर्ष के भीतर महिला की आत्महत्या या संदिग्ध मृत्यु का, तो निकटतम इन्क्वेस्ट-सशक्त मजिस्ट्रेट मृत्यु के कारण की जाँच करेगा ("shall"); और धारा 194(1) में बताए किसी अन्य मामले में कोई भी ऐसा सशक्त मजिस्ट्रेट जाँच कर सकता है ("may"), चाहे पुलिस अधिकारी के अन्वेषण के स्थान पर हो या उसके साथ। ऐसी जाँच में उसे वे सब शक्तियाँ होंगी जो उसे किसी अपराध की जाँच करते समय होतीं।

उपधारा (2): जहाँ (क) कोई व्यक्ति मर जाए या लापता हो जाए, या (ख) किसी महिला से बलात्कार का आरोप हो, और यह तब हुआ हो जब वह व्यक्ति या महिला पुलिस की अभिरक्षा में हो, या इस संहिता के अधीन मजिस्ट्रेट या न्यायालय द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अभिरक्षा में हो, तो पुलिस की जाँच या अन्वेषण के अलावा, जिस मजिस्ट्रेट की स्थानीय अधिकारिता में अपराध हुआ है, उसके द्वारा जाँच की जाएगी। उपधारा (3): जाँच करने वाला मजिस्ट्रेट उससे संबंधित लिए गए साक्ष्य को परिस्थितियों के अनुसार संहिता में बताई रीति से लिखेगा।

उपधारा (4): यदि मजिस्ट्रेट मृत्यु का कारण जानने के लिए किसी पहले ही दफ़नाए जा चुके व्यक्ति के शव की जाँच करना उचित समझे, तो वह शव को क़ब्र से निकलवाकर उसकी जाँच करा सकता है। उपधारा (5): जहाँ इस धारा के अधीन जाँच होनी हो, वहाँ मजिस्ट्रेट जहाँ व्यावहारिक हो, मृतक के उन रिश्तेदारों को, जिनके नाम और पते ज्ञात हों, सूचित करेगा और उन्हें जाँच में उपस्थित रहने की अनुमति देगा। उपधारा (6): उपधारा (2) के अधीन जाँच या अन्वेषण करने वाला मजिस्ट्रेट, कार्यपालक मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी मृत्यु के चौबीस घंटे के भीतर शव को परीक्षण के लिए निकटतम सिविल सर्जन या राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अन्य योग्य चिकित्सा-व्यक्ति को भेजेगा, जब तक लिखित कारणों से ऐसा करना संभव न हो। स्पष्टीकरण: इस धारा में "रिश्तेदार" (relative) का अर्थ माता-पिता, बच्चे, भाई-बहन और पति या पत्नी है।

तुलना: धारा 194 और धारा 196

धारा 194 (पुलिस)

कौनथाना प्रभारी या राज्य द्वारा विशेष सशक्त पुलिस अधिकारी

कबआत्महत्या, मार डाला जाना (व्यक्ति, पशु, मशीन, दुर्घटना), या अपराध का उचित संदेह

क्यामौक़े पर दो प्रतिष्ठित निवासियों के सामने अन्वेषण और प्रकट कारण की रिपोर्ट

24 घंटेरिपोर्ट ज़िला या उप-खंड मजिस्ट्रेट को 24 घंटे में (उपधारा 2)

रिश्तेदारों की भूमिकाखंड (iii) में रिश्तेदार का अनुरोध शव चिकित्सक को भेजने का आधार

धारा 196 (मजिस्ट्रेट)

कौननिकटतम इन्क्वेस्ट-सशक्त मजिस्ट्रेट; अभिरक्षा के मामले में स्थानीय अधिकारिता वाला मजिस्ट्रेट

कब194(3) के खंड (i), (ii) में अनिवार्य (shall); 194(1) के अन्य मामलों में वैकल्पिक (may); अभिरक्षा में मृत्यु, लापता होना या बलात्कार का आरोप: मजिस्ट्रेट की जाँच अनिवार्य

क्यामृत्यु के कारण की जाँच; साक्ष्य लिखना; आवश्यक हो तो शव निकलवाना

24 घंटेअभिरक्षा-जाँच में मृत्यु के 24 घंटे के भीतर शव चिकित्सक को (उपधारा 6)

रिश्तेदारों की भूमिकारिश्तेदारों को सूचना और उपस्थित रहने की अनुमति (उपधारा 5)

अप्राकृतिक मृत्यु की जाँच का क्रम (धारा 194 से 196)

  1. सूचना

    आत्महत्या, मार डाला जाना या संदिग्ध मृत्यु की सूचना थाना प्रभारी को (194(1))

  2. तत्काल सूचना और मौक़े पर जाँच

    निकटतम इन्क्वेस्ट-सशक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट को सूचना; दो या अधिक प्रतिष्ठित निवासियों के सामने शव की जाँच और रिपोर्ट

  3. गवाहों को समन (धारा 195)

    लिखित आदेश; निवास पर ही उपस्थित होने की छूट वाली श्रेणियाँ

  4. 24 घंटे में रिपोर्ट

    हस्ताक्षरित रिपोर्ट ज़िला या उप-खंड मजिस्ट्रेट को (194(2))

  5. शव चिकित्सक को

    पाँच स्थितियों में सिविल सर्जन को भेजना (194(3))

  6. मजिस्ट्रेट की जाँच (धारा 196)

    खंड (i), (ii) में अनिवार्य; अन्यथा वैकल्पिक; अभिरक्षा के मामलों में अनिवार्य

मुख्य तथ्य

धारा 194(1)
सूचना: आत्महत्या, व्यक्ति, पशु, मशीन या दुर्घटना से मृत्यु, या अपराध का उचित संदेह; दो या अधिक प्रतिष्ठित निवासियों के सामने जाँच
धारा 194(2)
रिपोर्ट पर हस्ताक्षर; ज़िला या उप-खंड मजिस्ट्रेट को चौबीस घंटे में
धारा 194(3)
शव सिविल सर्जन को भेजने की पाँच स्थितियाँ: (i) और (ii) में विवाह के सात वर्ष के भीतर महिला की आत्महत्या या संदिग्ध मृत्यु; (iii) रिश्तेदार का अनुरोध; (iv) कारण में संदेह; (v) अधिकारी की राय
धारा 194(4)
इन्क्वेस्ट के लिए सशक्त: ज़िला मजिस्ट्रेट, उप-खंड मजिस्ट्रेट और राज्य सरकार या ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा विशेष सशक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट
धारा 195(1) परंतुक
पंद्रह से कम या साठ से अधिक आयु का पुरुष, महिला, दिव्यांग या गंभीर रूप से बीमार: निवास स्थान के बाहर उपस्थित होने की बाध्यता नहीं
धारा 196(1)
खंड (i), (ii) के मामलों में मजिस्ट्रेट की जाँच अनिवार्य (shall); अन्य में वैकल्पिक (may)
धारा 196(2)
पुलिस या अन्य प्राधिकृत अभिरक्षा में मृत्यु, लापता होना या महिला से बलात्कार का आरोप: मजिस्ट्रेट की जाँच अनिवार्य
धारा 196(6)
मृत्यु के 24 घंटे के भीतर शव चिकित्सक को, जब तक लिखित कारणों से असंभव न हो
धारा 196 का स्पष्टीकरण
"रिश्तेदार": माता-पिता, बच्चे, भाई-बहन और पति या पत्नी
पुराने क्रमांक (अध्ययन-सहायता)
धारा 194, 195, 196 क्रमशः CrPC की 174, 175, 176
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • धारा 196 को धारा 195 बता देना, या दोनों के शीर्षक उलटना। 195 "समन करने की शक्ति" है; 196 "मृत्यु के कारण की मजिस्ट्रेट द्वारा जाँच" है।
  • धारा 194(3) की पाँच स्थितियों में केवल महिला वाली स्थितियाँ याद रखना। (iv) "कारण में संदेह" और (v) "अधिकारी की राय" भी हैं।
  • "सात वर्ष" को विवाह से अलग किसी और आधार पर गिनना। पाठ में "within seven years of her marriage" है, यानी गणना विवाह से है।
  • धारा 194(2) की चौबीस घंटे (रिपोर्ट भेजना) और धारा 196(6) की चौबीस घंटे (शव चिकित्सक को भेजना) को एक बता देना; दोनों अलग उद्देश्यों के लिए हैं।
  • धारा 195 के परंतुक में केवल "महिला और बुज़ुर्ग" लिखना; पाठ में पंद्रह से कम और साठ से अधिक आयु का पुरुष, महिला, दिव्यांग और गंभीर रूप से बीमार, सब हैं।
  • धारा 196(1) में खंड (i), (ii) पर जाँच को वैकल्पिक बताना। वहाँ "shall" है, अन्य मामलों में "may"।
  • अभिरक्षा के मामलों में केवल "पुलिस की अभिरक्षा" लिखना; पाठ में "या मजिस्ट्रेट या न्यायालय द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अभिरक्षा" भी है।