BNSS 2023: धारा 14 से 17 और 41 से 43, कार्यपालक मजिस्ट्रेट और गिरफ़्तारी
BNSS 2023 की धारा 14 से 17 और 41 से 43: कार्यपालक मजिस्ट्रेटों का ढाँचा, मजिस्ट्रेट की गिरफ़्तारी, सशस्त्र बलों को संरक्षण और गिरफ़्तारी की विधि।
- धारा 14
- धारा 15
- धारा 41
- धारा 42
- धारा 43
- हथकड़ी
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023: ... Sections 3(2)(a),(b), 14-17, 41-43, 126-129, 148-149, 152, 163-167, 173, 174, 187, 194-196." इस पृष्ठ पर धारा 14 से 17 (कार्यपालक मजिस्ट्रेट) और धारा 41 से 43 (मजिस्ट्रेट द्वारा गिरफ़्तारी, सशस्त्र बलों को संरक्षण, गिरफ़्तारी कैसे की जाए) हैं। धारा 1, 2 और 3(2) पहले पृष्ठ पर हैं; आगे की धाराएँ अगले चार पृष्ठों पर। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2013 से 2024 के उपलब्ध पेपरों में BNSS या CrPC से कोई प्रश्न नहीं मिलता, क्योंकि BNSS इस सिलेबस में 2026 में जुड़ी है। इसलिए इस पृष्ठ पर पिछले प्रश्न नहीं हैं; धाराओं का सीधा पाठ और उसका ढाँचा ही तैयारी है।
- धारा 14 से 17 वही ढाँचा बताती हैं जिसे आप इकाई II (ज़िला प्रशासन: ज़िला कलक्टर, विधि-व्यवस्था) में भी पढ़ते हैं: ज़िला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट और उप-खंड मजिस्ट्रेट। यहाँ उनकी नियुक्ति और अधीनता का क़ानूनी आधार मिलता है।
- धारा 43 से 2 या 5 अंक के उत्तर बनते हैं: हथकड़ी किन अपराधों में, महिला की गिरफ़्तारी कैसे और कब, बल कहाँ तक। इन्हें सूची की तरह याद करना काम आता है।
पहले सरल भाषा में
किसी ज़िले को दो हाथों की तरह सोचिए। एक हाथ अदालतें हैं, जहाँ न्यायिक मजिस्ट्रेट मुक़दमे सुनते हैं और सज़ा तय करते हैं। दूसरा हाथ प्रशासन है, जहाँ कलक्टर और उप-खंड अधिकारी शांति बनाए रखते हैं, भीड़ को हटाते हैं, लाइसेंस देते हैं और झगड़ों को बिगड़ने से रोकते हैं। इस दूसरे हाथ के अधिकारियों को संहिता कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) कहती है। धारा 14 से 17 बताती हैं कि इनकी नियुक्ति कैसे होगी, कौन किसके अधीन रहेगा और किसका क्षेत्र कहाँ तक होगा।
दूसरी बात गिरफ़्तारी की है। गिरफ़्तारी किसी की आज़ादी छीनती है, इसलिए संहिता तय करती है कि कौन गिरफ़्तार कर सकता है और कैसे। धारा 41 मजिस्ट्रेट को अपनी आँखों के सामने हुए अपराध में गिरफ़्तारी की शक्ति देती है। धारा 42 सशस्त्र बलों के सदस्यों को उनकी ड्यूटी में किए गए काम पर बिना सरकार की सहमति के गिरफ़्तार होने से बचाती है। धारा 43 गिरफ़्तारी की विधि बताती है: कैसे पकड़ा जाए, कब बल लगे, कब हथकड़ी और महिला के मामले में कौन-से नियम।
धारा 14: कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrates)
धारा 14 छह उपधाराओं में पूरा पदानुक्रम खड़ा करती है। उपधारा (1) में राज्य सरकार हर ज़िले में उतने व्यक्तियों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकती है जितने उचित समझे, और उनमें से एक को ज़िला मजिस्ट्रेट (District Magistrate) बनाना राज्य सरकार के लिए अनिवार्य है ("shall appoint")। यानी नियुक्त करने की संख्या सरकार की मर्ज़ी पर, पर ज़िला मजिस्ट्रेट का पद हर ज़िले में होना ही है।
उपधारा (2) कहती है कि राज्य सरकार किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट को अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट (Additional District Magistrate) बना सकती है, और उसे ज़िला मजिस्ट्रेट की उतनी शक्तियाँ मिलेंगी जितनी राज्य सरकार निर्देश दे, चाहे वे इस संहिता में हों या किसी अन्य क़ानून में। उपधारा (3) रिक्ति की स्थिति सँभालती है: जब ज़िला मजिस्ट्रेट का पद ख़ाली हो जाए और कोई अधिकारी अस्थायी रूप से ज़िले का कार्यकारी प्रशासन सँभाले, तो राज्य सरकार के आदेश आने तक वह ज़िला मजिस्ट्रेट की सारी शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग करेगा।
उपधारा (4) में राज्य सरकार किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट को उप-खंड का प्रभारी बना सकती है और आवश्यकता पर हटा सकती है; ऐसा प्रभारी उप-खंड मजिस्ट्रेट (Sub-divisional Magistrate) कहलाता है। उपधारा (5) राज्य सरकार को यह छूट देती है कि वह सामान्य या विशेष आदेश से, अपने नियंत्रण और निर्देश की शर्त पर, उपधारा (4) की यह शक्ति ज़िला मजिस्ट्रेट को सौंप दे। उपधारा (6) कहती है कि राज्य सरकार किसी अन्य क़ानून के अंतर्गत पुलिस आयुक्त (Commissioner of Police) को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की सभी या कुछ शक्तियाँ दे सकती है; यह धारा उसमें रोक नहीं बनेगी।
धारा 14 की उपधाराएँ एक नज़र में
| उपधारा | विषय | मुख्य बात |
|---|---|---|
| (1) | कार्यपालक मजिस्ट्रेट और ज़िला मजिस्ट्रेट | राज्य सरकार जितने उचित समझे उतने कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त करे; उनमें से एक को ज़िला मजिस्ट्रेट अवश्य बनाए |
| (2) | अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट | ज़िला मजिस्ट्रेट की उतनी शक्तियाँ जितनी राज्य सरकार निर्देश दे, संहिता या किसी अन्य क़ानून की |
| (3) | रिक्ति में अस्थायी उत्तराधिकारी | ज़िले का कार्यकारी प्रशासन अस्थायी रूप से सँभालने वाला अधिकारी राज्य सरकार के आदेश तक ज़िला मजिस्ट्रेट की सभी शक्तियाँ और कर्तव्य निभाए |
| (4) | उप-खंड मजिस्ट्रेट | उप-खंड का प्रभारी कार्यपालक मजिस्ट्रेट; राज्य सरकार लगा या हटा सकती है |
| (5) | शक्ति का प्रत्यायोजन | राज्य सरकार सामान्य या विशेष आदेश से उपधारा (4) की शक्ति ज़िला मजिस्ट्रेट को सौंप सकती है |
| (6) | पुलिस आयुक्त | अन्य क़ानून के अंतर्गत पुलिस आयुक्त को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ देना संभव |
धारा 15, 16 और 17: विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट, क्षेत्राधिकार और अधीनता
धारा 15 विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Special Executive Magistrates) की व्यवस्था है। राज्य सरकार जितने समय के लिए उचित समझे, कार्यपालक मजिस्ट्रेटों को या किसी भी पुलिस अधिकारी को, जो पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) या समकक्ष पद से नीचे न हो, विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकती है। यह नियुक्ति विशेष क्षेत्रों के लिए या विशेष कार्यों के निष्पादन के लिए होती है, और उन्हें वे शक्तियाँ दी जाती हैं जो संहिता में कार्यपालक मजिस्ट्रेटों को दी जा सकती हैं, जितनी सरकार उचित समझे। उदाहरण के लिए, किसी मेले या त्योहार के क्षेत्र में भीड़-नियंत्रण के लिए ऐसा अधिकारी तय किया जा सकता है।
धारा 16 में क्षेत्राधिकार की बात है। राज्य सरकार के नियंत्रण के अधीन ज़िला मजिस्ट्रेट समय-समय पर उन क्षेत्रों की सीमाएँ तय कर सकता है जिनके भीतर कार्यपालक मजिस्ट्रेट अपनी शक्तियों का प्रयोग करेंगे। जब तक ऐसी परिभाषा से अन्यथा निर्धारित न हो, हर कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अधिकारिता और शक्तियाँ पूरे ज़िले में फैली रहेंगी। यानी डिफ़ॉल्ट पूरा ज़िला है; सीमाएँ तय करने पर वही सीमाएँ चलेंगी।
धारा 17 में अधीनता का नियम है। सभी कार्यपालक मजिस्ट्रेट ज़िला मजिस्ट्रेट के अधीन हैं। जो कार्यपालक मजिस्ट्रेट किसी उप-खंड में शक्तियों का प्रयोग करता है (उप-खंड मजिस्ट्रेट को छोड़कर), वह उप-खंड मजिस्ट्रेट के भी अधीन है, लेकिन ज़िला मजिस्ट्रेट के सामान्य नियंत्रण की शर्त पर। उपधारा (2) में ज़िला मजिस्ट्रेट अपने अधीनस्थ कार्यपालक मजिस्ट्रेटों के बीच कार्य के वितरण या आवंटन के लिए संहिता से असंगत न होने वाले नियम बना सकता है या विशेष आदेश दे सकता है।
कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की श्रेणी (धारा 14 से 17)
राज्य सरकार
नियुक्त करती है (धारा 14(1)); विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट भी (धारा 15)
ज़िला मजिस्ट्रेट (DM)
हर ज़िले में अनिवार्य; क्षेत्र-सीमाएँ तय करता है (धारा 16); कार्य बाँटने के नियम बनाता है (धारा 17(2))
अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट (ADM)
DM की उतनी शक्तियाँ जितनी राज्य सरकार निर्देश दे (धारा 14(2))
उप-खंड मजिस्ट्रेट (SDM)
उप-खंड का प्रभारी (धारा 14(4)); DM के अधीन
उप-खंड में काम करने वाले अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट
DM और SDM दोनों के अधीन, DM के सामान्य नियंत्रण में (धारा 17(1))
तुलना: ज़िला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट, उप-खंड मजिस्ट्रेट और विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट
| पद | कौन नियुक्त करता है | आधार | विशेष बात |
|---|---|---|---|
| ज़िला मजिस्ट्रेट (District Magistrate) | राज्य सरकार | धारा 14(1) | हर ज़िले में अनिवार्य; अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट उसके अधीन (धारा 17(1)) |
| अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट (Additional District Magistrate) | राज्य सरकार, किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट को | धारा 14(2) | शक्तियाँ उतनी जितनी राज्य सरकार निर्देश दे |
| उप-खंड मजिस्ट्रेट (Sub-divisional Magistrate) | राज्य सरकार, या आदेश से सौंपने पर ज़िला मजिस्ट्रेट | धारा 14(4) और (5) | उप-खंड का प्रभारी; उप-खंड के अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट उसके भी अधीन |
| विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Special Executive Magistrate) | राज्य सरकार | धारा 15 | कार्यपालक मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक या समकक्ष से कम न रैंक का पुलिस अधिकारी; विशेष क्षेत्र या कार्य के लिए; निश्चित अवधि |
| पुलिस आयुक्त (Commissioner of Police) | राज्य सरकार किसी अन्य क़ानून से शक्तियाँ दे | धारा 14(6) | कार्यपालक मजिस्ट्रेट की सभी या कुछ शक्तियाँ संभव |
धारा 41: मजिस्ट्रेट द्वारा गिरफ़्तारी (Arrest by Magistrate)
आम तौर पर गिरफ़्तारी पुलिस करती है, पर धारा 41 मजिस्ट्रेट को भी यह शक्ति देती है और यह शक्ति कार्यपालक और न्यायिक, दोनों मजिस्ट्रेटों के पास है ("whether Executive or Judicial")। उपधारा (1) कहती है कि जब किसी मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में, उसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर, कोई अपराध किया जाए, तब वह स्वयं अपराधी को गिरफ़्तार कर सकता है या किसी को गिरफ़्तार करने का आदेश दे सकता है, और फिर ज़मानत से जुड़े उपबंधों के अधीन रहकर उसे अभिरक्षा में सौंप सकता है।
उपधारा (2) एक अलग स्थिति के लिए है। कोई भी मजिस्ट्रेट, कार्यपालक या न्यायिक, किसी भी समय अपनी उपस्थिति में, अपनी स्थानीय अधिकारिता के भीतर ऐसे व्यक्ति को गिरफ़्तार कर सकता है या उसकी गिरफ़्तारी का निर्देश दे सकता है जिसके लिए वह उस समय और उन परिस्थितियों में वारंट जारी करने में सक्षम हो। दोनों उपधाराओं की कसौटी एक है: कार्रवाई मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में और उसकी स्थानीय अधिकारिता (local jurisdiction) के भीतर हो।
धारा 42: सशस्त्र बलों के सदस्यों को गिरफ़्तारी से संरक्षण (Protection of members of Armed Forces from arrest)
उपधारा (1) में "धारा 35 और धारा 39 से 41 में कुछ भी हो, फिर भी" (notwithstanding) कहकर नियम बनाया गया है: संघ के सशस्त्र बलों का कोई सदस्य अपनी सरकारी ड्यूटी के निर्वहन में किए गए या किए जाने के लिए तात्पर्यित किसी काम के लिए केंद्र सरकार की सहमति मिलने के बाद ही गिरफ़्तार किया जाएगा, उससे पहले नहीं। उपधारा (2) राज्य सरकार को अधिसूचना निकालकर यह निर्देश देने की अनुमति देती है कि यही संरक्षण लोक व्यवस्था बनाए रखने के काम में लगे बल के किसी वर्ग या श्रेणी के सदस्यों पर, वे जहाँ भी सेवा में हों, लागू हो। तब उपधारा (1) में "केंद्र सरकार" की जगह "राज्य सरकार" पढ़ा जाएगा।
इसे यूँ समझिए: ड्यूटी करते हुए किए गए कार्य पर अगर हर कोई तुरंत गिरफ़्तारी कर ले तो बलों का काम ठप हो जाएगा। इसलिए संहिता कहती है कि पहले सरकार की सहमति ली जाए। ध्यान रहे कि संरक्षण केवल ड्यूटी के निर्वहन में किए गए या किए जाने के लिए तात्पर्यित कार्य पर है, हर अपराध पर नहीं।
धारा 43: गिरफ़्तारी कैसे की जाए (Arrest how made)
धारा 43 की पाँच उपधाराएँ गिरफ़्तारी की पूरी विधि बताती हैं। उपधारा (1): गिरफ़्तार करने वाला पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति गिरफ़्तार होने वाले के शरीर को वास्तव में छुएगा या घेरेगा, जब तक कि वह शब्द या कार्य से अभिरक्षा में समर्पण न कर दे। महिला की गिरफ़्तारी पर इसी उपधारा का परंतुक है: जब तक परिस्थितियाँ उलटा न दर्शाएँ, मौखिक सूचना पर उसका अभिरक्षा में समर्पण मान लिया जाएगा, और जब तक परिस्थितियाँ अन्यथा आवश्यक न हों या पुलिस अधिकारी महिला न हो, पुलिस अधिकारी गिरफ़्तारी के लिए महिला के शरीर को स्पर्श नहीं करेगा।
उपधारा (2): यदि व्यक्ति गिरफ़्तारी का बलपूर्वक प्रतिरोध करे या बचने का प्रयास करे तो गिरफ़्तार करने वाला सभी आवश्यक साधन अपना सकता है। उपधारा (3): पुलिस अधिकारी अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए गिरफ़्तारी के समय या अदालत में पेश करते समय हथकड़ी (handcuff) लगा सकता है, पर केवल ऐसे व्यक्ति पर जो आदतन या बार-बार का अपराधी हो, या अभिरक्षा से भाग चुका हो, या जिसने संगठित अपराध, आतंकवादी कृत्य, नशीले पदार्थ से जुड़ा अपराध, या अवैध रूप से हथियार और गोला-बारूद रखने, हत्या, बलात्कार, तेज़ाब हमला, सिक्कों और करेंसी नोटों की कूटरचना, मानव तस्करी, बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध, या राज्य के विरुद्ध अपराध किया हो।
उपधारा (4): यह धारा किसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु कारित करने का अधिकार नहीं देती जिस पर मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध का आरोप नहीं है। उपधारा (5): असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर किसी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ़्तार नहीं किया जाएगा; और जहाँ ऐसी असाधारण परिस्थितियाँ हों, वहाँ महिला पुलिस अधिकारी लिखित रिपोर्ट बनाकर, जिस प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की स्थानीय अधिकारिता में अपराध हुआ है या गिरफ़्तारी होनी है, उसकी पूर्व अनुमति लेगी।
धारा 43 की उपधाराएँ एक नज़र में
| उपधारा | क्या कहती है | याद रखने का सूत्र |
|---|---|---|
| (1) | शरीर को छूना या घेरना, जब तक समर्पण न हो; महिला के लिए परंतुक: मौखिक सूचना पर समर्पण माना जाए, महिला अधिकारी न हो तो स्पर्श नहीं | स्पर्श या समर्पण |
| (2) | बलपूर्वक प्रतिरोध या बचने के प्रयास पर सभी आवश्यक साधन | आवश्यक साधन |
| (3) | हथकड़ी: अपराध की प्रकृति और गंभीरता देखकर; आदतन, बार-बार का, भागा हुआ, संगठित अपराध, आतंकवादी कृत्य, नशीला पदार्थ, हथियार, हत्या, बलात्कार, तेज़ाब हमला, मुद्रा की कूटरचना, मानव तस्करी, बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध, राज्य के विरुद्ध अपराध | हथकड़ी की सूची |
| (4) | मृत्यु कारित करने का अधिकार नहीं, जब तक अभियुक्त पर मृत्यु या आजीवन कारावास का अपराध न हो | मृत्यु पर रोक |
| (5) | सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच महिला की गिरफ़्तारी नहीं, असाधारण परिस्थिति को छोड़कर; तब महिला पुलिस अधिकारी की लिखित रिपोर्ट और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति | रात और महिला |
गिरफ़्तारी की विधि (धारा 43) का क्रम
गिरफ़्तारी का प्रयास
शरीर को छूना या घेरना (धारा 43(1)); महिला के लिए मौखिक सूचना पर समर्पण माना जाता है
समर्पण हुआ?
शब्द या कार्य से अभिरक्षा स्वीकार की तो स्पर्श आवश्यक नहीं
प्रतिरोध या बचने का प्रयास
सभी आवश्यक साधन (धारा 43(2)); पर मृत्यु कारित करने का अधिकार नहीं, जब तक अभियुक्त पर मृत्यु या आजीवन कारावास का आरोप न हो (धारा 43(4))
हथकड़ी?
केवल उपधारा (3) की श्रेणियों में, अपराध की प्रकृति और गंभीरता देखकर
महिला की गिरफ़्तारी का समय
सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले नहीं; असाधारण स्थिति में लिखित रिपोर्ट और मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति (धारा 43(5))
मुख्य तथ्य
- ज़िला मजिस्ट्रेट
- हर ज़िले में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त होना अनिवार्य ("shall appoint"), धारा 14(1)
- उप-खंड मजिस्ट्रेट
- धारा 14(4) में उप-खंड का प्रभारी कार्यपालक मजिस्ट्रेट; धारा 14(5) में नियुक्ति की यह शक्ति ज़िला मजिस्ट्रेट को सौंपी जा सकती है
- विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट
- पुलिस अधिकारी भी, पर पुलिस अधीक्षक या समकक्ष पद से कम नहीं (धारा 15)
- अधीनता
- सभी कार्यपालक मजिस्ट्रेट ज़िला मजिस्ट्रेट के अधीन (धारा 17(1))
- धारा 41
- कार्यपालक या न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में और स्थानीय अधिकारिता के भीतर
- धारा 42
- सशस्त्र बलों के सदस्य: ड्यूटी में किए कार्य पर केंद्र सरकार की सहमति के बाद ही गिरफ़्तारी; राज्य अधिसूचना से लोक-व्यवस्था बल पर विस्तार
- धारा 43(3)
- हथकड़ी: आदतन या बार-बार का अपराधी, अभिरक्षा से भागा हुआ, और संगठित अपराध से राज्य के विरुद्ध अपराध तक की सूची के अपराधी; अपराध की प्रकृति और गंभीरता देखकर
- धारा 43(5)
- महिला की गिरफ़्तारी सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले नहीं; असाधारण स्थिति में लिखित रिपोर्ट और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति
- पुराने क्रमांक (अध्ययन-सहायता)
- धारा 14, 15, 16, 17 क्रमशः CrPC की 20, 21, 22, 23; धारा 41, 42, 43 क्रमशः CrPC की 44, 45, 46
- महानगर मजिस्ट्रेट
- CrPC की महानगर क्षेत्र और महानगर मजिस्ट्रेट वाली श्रेणियाँ BNSS में हटा दी गई हैं (अनावश्यक वर्गीकरण हटाने का उद्देश्य)
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- धारा 14(1) में सरकार के "may appoint" और "shall appoint" का अंतर चूक जाना: कार्यपालक मजिस्ट्रेट जितने उचित समझे उतने (may), पर ज़िला मजिस्ट्रेट एक अनिवार्य (shall)।
- धारा 15 में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट बनने वाले पुलिस अधिकारी की रैंक भूल जाना: पुलिस अधीक्षक या समकक्ष से नीचे नहीं।
- धारा 17(1) में उप-खंड के अन्य मजिस्ट्रेटों को केवल ज़िला मजिस्ट्रेट के अधीन बताना। वे उप-खंड मजिस्ट्रेट के भी अधीन हैं, ज़िला मजिस्ट्रेट के सामान्य नियंत्रण की शर्त पर।
- धारा 41 को केवल न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्ति बताना। पाठ में "whether Executive or Judicial" है।
- धारा 42 में सहमति देने वाली सरकार उलटना: संघ के सशस्त्र बलों के लिए केंद्र सरकार; राज्य अधिसूचना वाले बल के लिए राज्य सरकार।
- धारा 43(5) में केवल "महिला पुलिस अधिकारी की लिखित रिपोर्ट" लिख देना और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति छोड़ देना।
- हथकड़ी की सूची में अपराधों की संख्या ग़लत गिनना; पाठ को पढ़कर श्रेणियाँ याद करें, संख्या का अंदाज़ा न लगाएँ।
कार्य-उदाहरण (कल्पित): रात में महिला की गिरफ़्तारी
हल सहित उदाहरणअसाधारण परिस्थिति में उपधारा (5) की प्रक्रिया
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; घटना और पात्र वास्तविक नहीं हैं।
- रात के साढ़े ग्यारह बजे पुलिस को पता चलता है कि एक गंभीर अपराध की आरोपी महिला, जिसके फ़रार होने की आशंका है, एक बस में बैठकर दूसरे राज्य के लिए निकलने वाली है।
- 1चरण 1: सामान्य नियम धारा 43(5) के अनुसार असाधारण परिस्थिति के बिना सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले महिला को गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता। इसलिए पुलिस पहले यह देखे कि क्या सच में असाधारण परिस्थिति है, जैसे फ़रार होने का वास्तविक ख़तरा।
- 2चरण 2: महिला पुलिस अधिकारी संहिता यह प्रक्रिया महिला पुलिस अधिकारी पर डालती है: वही लिखित रिपोर्ट बनाएगी, जिसमें असाधारण परिस्थिति के कारण दर्ज हों।
- 3चरण 3: पूर्व अनुमति रिपोर्ट के आधार पर उस प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति लेनी होगी जिसकी स्थानीय अधिकारिता में अपराध हुआ है या गिरफ़्तारी होनी है। अनुमति पहले, गिरफ़्तारी बाद में।
- 4चरण 4: गिरफ़्तारी की विधि धारा 43(1) के परंतुक के अनुसार महिला को पुलिस अधिकारी मौखिक सूचना देगी और उसका समर्पण माना जाएगा; जब तक परिस्थितियाँ अन्यथा आवश्यक न हों या अधिकारी महिला न हो, पुरुष अधिकारी उसके शरीर को छूकर गिरफ़्तार नहीं करेगा।
निष्कर्ष: निष्कर्ष: रात की गिरफ़्तारी अपवाद है, नियम नहीं। असाधारण परिस्थिति, महिला पुलिस अधिकारी की लिखित रिपोर्ट और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति, तीनों शर्तें एक साथ चाहिए।
केस स्टडी (कल्पित): मेले में मजिस्ट्रेट के सामने हुई मारपीट
उदाहरण (काल्पनिक)धारा 41 और धारा 15 का एक साथ प्रयोग
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; स्थान, अधिकारी और घटना वास्तविक नहीं हैं। एक ज़िले में वार्षिक मेला है और राज्य सरकार ने मेला-क्षेत्र के लिए पुलिस अधीक्षक स्तर के एक अधिकारी को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया है।
- नियुक्ति (धारा 15)
- राज्य सरकार ने पुलिस अधीक्षक या समकक्ष पद से कम रैंक न रखने वाले अधिकारी को निश्चित अवधि के लिए, विशेष क्षेत्र (मेला-क्षेत्र) और विशेष कार्य (भीड़-नियंत्रण) हेतु, कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ दी हैं।
- घटना
- मेले के बीच उस अधिकारी की आँखों के सामने एक व्यक्ति दूसरे पर प्राणघातक हमला करता है। हमला मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में और उसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर हुआ है।
- धारा 41(1) का प्रयोग
- वह स्वयं हमलावर को गिरफ़्तार कर सकता है या किसी को गिरफ़्तार करने का आदेश दे सकता है, और फिर ज़मानत से जुड़े उपबंधों के अधीन उसे अभिरक्षा में सौंप सकता है।
- गिरफ़्तारी की विधि (धारा 43)
- गिरफ़्तारी में शरीर को छूना या घेरना होगा; प्रतिरोध पर आवश्यक साधन लगेंगे, पर जब तक अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय न हो, मृत्यु कारित करने का अधिकार नहीं। हथकड़ी तभी जब अपराध की श्रेणी उपधारा (3) में आए।
सीख
धारा 41 कार्यपालक और न्यायिक दोनों मजिस्ट्रेटों को सीधी गिरफ़्तारी की शक्ति देती है, पर उसकी कसौटी उपस्थिति और स्थानीय अधिकारिता है; विधि के नियम धारा 43 से आते हैं।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
BNSS 2023 की धारा 14 के अनुसार ज़िला मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कैसे होती है?
आदर्श उत्तर
राज्य सरकार हर ज़िले में कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त करती है; उनमें से एक ज़िला मजिस्ट्रेट बनाना अनिवार्य।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
BNSS 2023 की धारा 42 किसे और क्या संरक्षण देती है?
आदर्श उत्तर
सशस्त्र बलों के सदस्य ड्यूटी के कार्य पर केंद्र सरकार की सहमति बिना गिरफ़्तार नहीं होंगे।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
BNSS 2023 की धारा 15 के अनुसार विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट कौन हो सकते हैं?
आदर्श उत्तर
राज्य सरकार निश्चित अवधि के लिए कार्यपालक मजिस्ट्रेटों को, या पुलिस अधीक्षक अथवा समकक्ष से कम रैंक न रखने वाले किसी पुलिस अधिकारी को, विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकती है। नियुक्ति विशेष क्षेत्रों या कार्यों के लिए होती है; उन्हें उतनी शक्तियाँ मिलती हैं जितनी सरकार उचित समझे।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
BNSS 2023 की धारा 43 के अनुसार हथकड़ी कब लगाई जा सकती है?
आदर्श उत्तर
पुलिस अधिकारी अपराध की प्रकृति और गंभीरता देखकर गिरफ़्तारी या अदालत में पेशी के समय हथकड़ी लगा सकता है, परंतु केवल आदतन या बार-बार के अपराधी, अभिरक्षा से भागे व्यक्ति, या संगठित अपराध, आतंकवादी कृत्य, नशीले पदार्थ, हथियार, हत्या, बलात्कार, तेज़ाब हमला, मुद्रा-कूटरचना, मानव तस्करी, बच्चों के यौन अपराध या राज्य के विरुद्ध अपराध करने वाले पर।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
BNSS 2023 की धारा 43 के आधार पर महिला की गिरफ़्तारी से जुड़े प्रावधान समझाइए।
आदर्श उत्तर
धारा 43 महिला की गिरफ़्तारी पर दो सुरक्षाएँ देती है। उपधारा (1) के परंतुक के अनुसार जब तक परिस्थितियाँ उलटा न दर्शाएँ, मौखिक सूचना पर महिला का अभिरक्षा में समर्पण माना जाएगा, और जब तक परिस्थितियाँ अन्यथा आवश्यक न हों या अधिकारी महिला न हो, पुलिस अधिकारी उसके शरीर को स्पर्श नहीं करेगा। उपधारा (5) के अनुसार असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी महिला की गिरफ़्तारी नहीं होगी; ऐसी परिस्थितियों में महिला पुलिस अधिकारी लिखित रिपोर्ट बनाकर प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति लेगी।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "BNSS 2023 के अनुसार ज़िले में कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की व्यवस्था और उनकी अधीनता बताइए।" पहली पंक्ति में कार्यपालक मजिस्ट्रेट का अर्थ लिखें। (5 अंक में यही ढाँचा 50 शब्दों में लिखें।)
मुख्य भाग
- नियुक्ति: राज्य सरकार; ज़िला मजिस्ट्रेट अनिवार्य (धारा 14(1))
- अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट और उप-खंड मजिस्ट्रेट (धारा 14(2), (4)); विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (धारा 15)
- क्षेत्राधिकार: ज़िला मजिस्ट्रेट सीमाएँ तय करे, डिफ़ॉल्ट पूरा ज़िला (धारा 16)
- अधीनता: सब ज़िला मजिस्ट्रेट के अधीन; उप-खंड के अन्य मजिस्ट्रेट उप-खंड मजिस्ट्रेट के भी अधीन; कार्य-आवंटन के नियम (धारा 17)
निष्कर्ष
निष्कर्ष: ये धाराएँ ज़िले में प्रशासनिक मजिस्ट्रेटों की स्पष्ट श्रेणी बनाती हैं, जो न्यायिक मजिस्ट्रेटों से अलग है।
अतिरिक्त मूल्य
- श्रेणी का एक छोटा प्रवाह-चित्र बनाएँ
- धारा 14(6) के पुलिस आयुक्त को एक पंक्ति में जोड़ें
- इकाई II के ज़िला प्रशासन से संबंध की ओर संकेत करें
त्वरित पुनरावृत्ति
- धारा 14: राज्य सरकार कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त करे; ज़िला मजिस्ट्रेट अनिवार्य; ADM, SDM; पुलिस आयुक्त को शक्ति संभव (उपधारा 6)
- धारा 14(3): रिक्ति में अस्थायी उत्तराधिकारी ज़िला मजिस्ट्रेट की सभी शक्तियाँ निभाए; 14(5): SDM नियुक्ति की शक्ति DM को सौंपी जा सकती है
- धारा 15: विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट; पुलिस अधिकारी SP या समकक्ष से नीचे नहीं; विशेष क्षेत्र या कार्य के लिए
- धारा 16: DM क्षेत्र-सीमाएँ तय करे; अन्यथा अधिकारिता पूरे ज़िले में
- धारा 17: सभी DM के अधीन; उप-खंड के अन्य मजिस्ट्रेट SDM के भी अधीन; DM कार्य-आवंटन के नियम बनाए
- धारा 41: कार्यपालक या न्यायिक मजिस्ट्रेट; उपस्थिति में अपराध पर स्वयं गिरफ़्तार या आदेश; वारंट-सक्षम व्यक्ति की उपस्थिति में गिरफ़्तारी
- धारा 42: सशस्त्र बल: केंद्र की सहमति; राज्य अधिसूचना से लोक-व्यवस्था बल पर लागू, तब "राज्य सरकार"
- धारा 43(1) से (5): स्पर्श या समर्पण; आवश्यक साधन; हथकड़ी की सूची; मृत्यु कारित करने का अधिकार नहीं; महिला रात में नहीं, अपवाद में रिपोर्ट और मजिस्ट्रेट की अनुमति
- CrPC मेल (अध्ययन-सहायता): 14←20, 15←21, 16←22, 17←23, 41←44, 42←45, 43←46
याद रखने योग्य शब्द
- Executive Magistrate
- District Magistrate
- Sub-divisional Magistrate
- Special Executive Magistrate
- local jurisdiction
- handcuff
- sunset and sunrise
- Armed Forces