BNSS 2023: धारा 126 से 129, 148, 149 और 152, शांति की प्रतिभूति, जमाव हटाना और उपद्रव
BNSS 2023 की धारा 126 से 129, 148, 149 और 152: निवारक कार्यवाही, जमाव हटाने की सीढ़ी और उपद्रव हटाने का सशर्त आदेश।
- धारा 126
- धारा 129
- धारा 148
- धारा 149
- धारा 152
- सशर्त आदेश
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023: ... Sections ... 126-129, 148-149, 152, 163-167, 173, 174, 187, 194-196." इस पृष्ठ पर धारा 126 से 129 (शांति और सदाचार के लिए प्रतिभूति), धारा 148 और 149 (जमाव को हटाना) और धारा 152 (न्यूसेन्स हटाने के लिए सशर्त आदेश) हैं। धारा 1 से 3 पहले, धारा 14 से 17 और 41 से 43 दूसरे, धारा 163 से 167 चौथे, धारा 173, 174 और 187 पाँचवें तथा धारा 194 से 196 छठे पृष्ठ पर हैं। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2013 से 2024 के उपलब्ध पेपरों में BNSS या CrPC से कोई प्रश्न नहीं मिलता, क्योंकि BNSS 2026 के सिलेबस में पहली बार जुड़ी है। इसलिए इस पृष्ठ पर पिछले प्रश्न नहीं हैं; सिलेबस की धाराओं का सटीक पाठ ही तैयारी का आधार है।
- ये सात धाराएँ अपराध होने के बाद की नहीं, होने से पहले की कार्रवाई हैं: शांति-भंग की आशंका पर बंधपत्र (126 से 129), भीड़ को हटाना (148, 149) और न्यूसेन्स हटाना (152)। इन्हीं का उपयोग ज़िला मजिस्ट्रेट और उप-खंड मजिस्ट्रेट जैसे कार्यपालक मजिस्ट्रेट करते हैं, इसलिए ज़िला प्रशासन की इकाई से सीधा जुड़ाव है।
- 2013 से 2024 के पेपरों में विधि के प्रश्न 2 और 5 अंक के परिभाषा या सूची वाले देखे गए हैं। इन धाराओं में बहुत-सी गिनी जा सकने वाली चीज़ें हैं: अधिकतम अवधि (एक वर्ष, तीन वर्ष), सूचियाँ (धारा 129 के खंड, धारा 152 के छह आधार), इसलिए तालिकाएँ पक्की करें।
पहले सरल भाषा में
मान लीजिए गाँव के दो परिवारों में खेत की मेड़ को लेकर पुरानी दुश्मनी है और पंचायत में चर्चा है कि इस बार फ़सल कटाई पर मारपीट होगी। पुलिस रिपोर्ट तब बनती है जब मारपीट हो चुकी हो। पर समझदारी यह है कि पहले ही रोक लिया जाए। यही निवारक (preventive) कार्रवाई है। इसमें अपराध का मुक़दमा नहीं चलता; कार्यपालक मजिस्ट्रेट व्यक्ति से कहता है कि वह एक निश्चित अवधि तक शांति रखने या अच्छे आचरण का लिखित वचन दे, और उल्लंघन होने पर तय रक़म देनी होगी।
यह वचन बंधपत्र (bond) या ज़मानतपत्र (bail bond) होता है, जिन्हें पहले पृष्ठ की धारा 2(1)(d) और (e) में पढ़ा था। सिलेबस की धारा 126 से 129 अध्याय IX ("Security for Keeping the Peace and for Good Behaviour", धारा 125 से 143) की चार धाराएँ हैं। इसी अध्याय की धारा 125 दोषसिद्धि (conviction) के बाद प्रतिभूति लेने की है और सिलेबस में नहीं है; इसलिए धारा 126 का शीर्षक "अन्य दशाओं में" (in other cases) कहता है। धारा 148, 149 और 152 अध्याय XI ("Maintenance of Public Order and Tranquillity") से हैं: पहली दो "विधिविरुद्ध जमाव" (unlawful assemblies) पर और तीसरी "लोक न्यूसेन्स" (public nuisances) पर। ध्यान रहे कि धारा 1(2) के अनुसार अध्याय IX और XI नागालैंड और जनजातीय क्षेत्रों पर भी लागू रहते हैं।
धारा 126: अन्य दशाओं में परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति (Security for keeping peace in other cases)
जब किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट को सूचना मिले कि कोई व्यक्ति शांति भंग करने या लोक शांति में विघ्न डालने वाला है, या ऐसा कोई ग़लत कार्य करने वाला है जिससे शांति भंग या लोक शांति में विघ्न की संभावना हो, और मजिस्ट्रेट की राय में कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार हो, तो वह आगे बताई गई रीति से उस व्यक्ति से यह कारण बताने को कह सकता है कि उसे शांति रखने के लिए बंधपत्र या ज़मानतपत्र निष्पादित करने का आदेश क्यों न दिया जाए। यह अवधि एक वर्ष से अधिक नहीं हो सकती ("not exceeding one year"), और अवधि मजिस्ट्रेट उचित समझे।
उपधारा (2) यह तय करती है कि कार्यवाही किस मजिस्ट्रेट के सामने होगी। जब शांति-भंग या विघ्न की आशंका का स्थान उसकी स्थानीय अधिकारिता में हो, या उसकी अधिकारिता में कोई ऐसा व्यक्ति हो जो उस अधिकारिता के बाहर शांति भंग करने वाला है, तब किसी भी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने कार्यवाही हो सकती है। यानी स्थान से भी और व्यक्ति के निवास से भी अधिकारिता बनती है।
धारा 127: कतिपय बातों को फैलाने वाले व्यक्तियों से सदाचार के लिए प्रतिभूति (Security for good behaviour from persons disseminating certain matters)
यह धारा शब्दों और प्रकाशन से फैलने वाले ख़तरे से जुड़ी है। कार्यपालक मजिस्ट्रेट को सूचना मिले कि उसकी स्थानीय अधिकारिता में कोई व्यक्ति, चाहे वह अधिकारिता के भीतर कार्य करे या बाहर, इनमें से कुछ कर रहा है: (i) मौखिक रूप से, लिखित रूप से या किसी भी अन्य तरीक़े से जान-बूझकर ऐसी सामग्री फैलाता है, फैलाने का प्रयास करता है या फैलाने में दुष्प्रेरण करता है (क) जिसका प्रकाशन भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 152, 196, 197 या 299 के अंतर्गत दंडनीय है, या (ख) जो किसी न्यायाधीश के बारे में है, जब वह अपने सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा हो या कार्य करने का तात्पर्य रखता हो, और जो आपराधिक अभित्रास (criminal intimidation) या मानहानि (defamation) के बराबर हो; (ii) BNS की धारा 294 में बताई गई अश्लील सामग्री बनाता, तैयार करता, प्रकाशित करता, बिक्री के लिए रखता, आयात-निर्यात करता, पहुँचाता, बेचता, किराए पर देता, बाँटता, सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करता या किसी अन्य तरीक़े से प्रचलित करता है।
मजिस्ट्रेट की राय में कार्यवाही के पर्याप्त आधार हों तो वह उस व्यक्ति से कारण बताने को कह सकता है कि उसे अच्छे आचरण (good behaviour) के लिए बंधपत्र या ज़मानतपत्र क्यों न निष्पादित करना पड़े, एक वर्ष से अधिक की अवधि के लिए नहीं। उपधारा (2) प्रेस की सुरक्षा है: प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम, 1867 के नियमों के अनुसार पंजीकृत और संपादित, मुद्रित और प्रकाशित किसी प्रकाशन की सामग्री के संबंध में उसके संपादक, स्वामी, मुद्रक या प्रकाशक के विरुद्ध कार्यवाही केवल राज्य सरकार के आदेश या राज्य सरकार द्वारा इसके लिए सशक्त किसी अधिकारी के प्राधिकार से ही हो सकती है।
BNS की उपर्युक्त धाराओं के शीर्षक इस प्रकार हैं: धारा 152, राष्ट्र की संप्रभुता, एकता और अखंडता को ख़तरे में डालने वाला कार्य (acts endangering sovereignty, unity and integrity of India); धारा 196, धर्म, नस्ल, जन्म-स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों में शत्रुता बढ़ाना; धारा 197, राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल लांछन और प्राख्यान; धारा 294, अश्लील पुस्तकों आदि की बिक्री; धारा 299, किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से जान-बूझकर और विद्वेषपूर्ण कार्य। इनका विस्तार BNS के पृष्ठों में है।
धारा 128 और 129: संदिग्ध व्यक्ति और अभ्यासिक अपराधी (suspected persons and habitual offenders)
धारा 128 उस व्यक्ति के लिए है जो अपनी उपस्थिति छिपाने की सावधानी बरत रहा है। जब कार्यपालक मजिस्ट्रेट को सूचना मिले कि उसकी स्थानीय अधिकारिता में कोई ऐसा व्यक्ति है और यह मानने का कारण हो कि वह संज्ञेय अपराध (cognizable offence) करने के उद्देश्य से ऐसा कर रहा है, तो मजिस्ट्रेट उससे कारण बताने को कह सकता है कि उसे अच्छे आचरण के लिए बंधपत्र या ज़मानतपत्र निष्पादित करने का आदेश क्यों न दिया जाए, एक वर्ष से अधिक अवधि के लिए नहीं। यहाँ "संज्ञेय अपराध" का अर्थ धारा 2(1)(g) से लेना है।
धारा 129 आदतन अपराधियों के लिए है और बाक़ी तीनों से दो बातों में अलग है: अवधि तीन वर्ष तक, और यहाँ केवल ज़मानतपत्र (bail bond) माँगा जाता है, यानी ज़मानतदार अनिवार्य है। इस धारा के सात खंड (a) से (g) हैं। (a) आदतन लुटेरा (robber), गृहभेदक (सेंधमार), चोर या कूटरचयिता (जालसाज़); (b) चुराई हुई संपत्ति को, उसे चुराई हुई जानते हुए, आदतन प्राप्त करने वाला (प्राप्तकर्ता); (c) आदतन चोरों को संरक्षण या शरण देने वाला, या चुराई संपत्ति को छिपाने या बेचने में सहायता देने वाला; (d) आदतन व्यपहरण, अपहरण, उद्दापन, छल या रिष्टि का अपराध करने, प्रयास करने या दुष्प्रेरण करने वाला, या BNS के अध्याय X या धारा 178 से 181 के अंतर्गत दंडनीय अपराध करने वाला; (e) आदतन शांति-भंग वाले अपराध करने, प्रयास करने या दुष्प्रेरण करने वाला; (f) आदतन ओषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940, विदेशियों विषयक अधिनियम, 1946, कर्मचारी भविष्य-निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955, सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955, सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 या खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत अपराध करने, प्रयास करने या दुष्प्रेरण करने वाला, या जमाख़ोरी, मुनाफ़ाख़ोरी या खाद्य, औषधि के मिलावट अथवा भ्रष्टाचार को रोकने वाले किसी अन्य क़ानून के अंतर्गत दंडनीय अपराध करने वाला; (g) इतना उद्दंड और ख़तरनाक कि बिना प्रतिभूति के उसका खुला रहना समुदाय के लिए जोखिम भरा हो।
धारा 126 से 129 की तुलना
| धारा | शीर्षक (संक्षेप) | कब लागू | क्या माँगा जाता है | अधिकतम अवधि |
|---|---|---|---|---|
| 126 | अन्य दशाओं में शांति रखने की प्रतिभूति (keeping peace) | व्यक्ति शांति भंग या लोक शांति में विघ्न करने वाला है, या ऐसा ग़लत कार्य जिससे संभावना हो | बंधपत्र या ज़मानतपत्र, शांति रखने के लिए | एक वर्ष |
| 127 | कतिपय बातों को फैलाने वाले व्यक्तियों से सदाचार के लिए प्रतिभूति | BNS की धाराएँ 152, 196, 197, 299 की सामग्री, न्यायाधीश के बारे में अभित्रास या मानहानि, या धारा 294 की अश्लील सामग्री फैलाना | बंधपत्र या ज़मानतपत्र, अच्छे आचरण के लिए | एक वर्ष |
| 128 | संदिग्ध व्यक्तियों से सदाचार के लिए प्रतिभूति | उपस्थिति छिपाने की सावधानी, संज्ञेय अपराध के उद्देश्य से | बंधपत्र या ज़मानतपत्र, अच्छे आचरण के लिए | एक वर्ष |
| 129 | अभ्यासिक अपराधियों से सदाचार के लिए प्रतिभूति | सात श्रेणियाँ (a) से (g) | केवल ज़मानतपत्र, अच्छे आचरण के लिए | तीन वर्ष |
आधिकारिक हिंदी पाठ के शब्द (उत्तर में प्रयोग के लिए)
| अंग्रेज़ी पाठ | आधिकारिक हिंदी पाठ | सरल बोलचाल |
|---|---|---|
| peace; public tranquillity (धारा 126) | परिशांति; लोक प्रशांति | शांति; लोक शांति |
| security for good behaviour (धारा 127, 128, 129) | सदाचार के लिए प्रतिभूति | अच्छे आचरण की प्रतिभूति |
| bond; bail bond | बंधपत्र; ज़मानतपत्र | वचन-पत्र; ज़मानत सहित वचन-पत्र |
| habitual (धारा 129) | अभ्यासतः; अभ्यासिक अपराधी | आदतन अपराधी |
| house-breaker; forger; receiver (धारा 129(a), (b)) | गृहभेदक; कूटरचयिता; प्राप्तकर्ता | सेंधमार; जालसाज़; चोरी का माल लेने वाला |
| wrongful act (धारा 126) | सदोष कार्य | ग़लत कार्य |
| unlawful assembly (धारा 148) | विधिविरुद्ध जमाव | अवैध जमाव |
| civil force (धारा 148) | सिविल बल | नागरिक बल |
| officer in charge of a police station (धारा 148) | पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी | थाना प्रभारी |
| requisition (धारा 149) | अध्यपेक्षा | माँग |
| nuisance; public nuisance (धारा 152) | न्यूसेन्स; लोक न्यूसेन्स | उपद्रव |
| conditional order (धारा 152) | सशर्त आदेश | शर्त वाला आदेश |
भारत के राजपत्र (असाधारण) के हिंदी पाठ में प्रयुक्त शब्द; हिंदी पाठ में उपखंड (क), (ख), (ग) आदि हैं, अंग्रेज़ी में (a), (b), (c)।
निवारक कार्यवाही की चाल (धारा 126 से 130)
सूचना मिली
कार्यपालक मजिस्ट्रेट को सूचना कि व्यक्ति शांति भंग या अपराध करने वाला है (धाराएँ 126 से 129 के आधार)
पर्याप्त आधार?
मजिस्ट्रेट की राय में कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार होने चाहिए
कारण बताओ
व्यक्ति से कारण बताने को कहा जाता है कि बंधपत्र या ज़मानतपत्र क्यों न लिया जाए
लिखित आदेश (धारा 130)
सूचना का सार, बंधपत्र की रक़म, अवधि और ज़मानतदारों की संख्या (आगे की धारा; सिलेबस के बाहर)
बंधपत्र निष्पादित
एक वर्ष तक (धारा 126, 127, 128) या तीन वर्ष तक (धारा 129)
अध्याय XI: धारा 148 और 149, विधिविरुद्ध जमाव को हटाना (Dispersal of assembly)
धारा 148 "सिविल बल" (civil force) से जमाव हटाने की धारा है। उपधारा (1) में कौन आदेश दे सकता है: कोई भी कार्यपालक मजिस्ट्रेट, या थाने का प्रभारी अधिकारी, या उसकी अनुपस्थिति में उप-निरीक्षक (sub-inspector) या उससे ऊपर के रैंक का कोई पुलिस अधिकारी। आदेश किसे दिया जा सकता है: किसी भी विधिविरुद्ध जमाव (unlawful assembly) को, या पाँच या अधिक व्यक्तियों के ऐसे जमाव को जिससे लोक शांति भंग होने की संभावना हो। तब जमाव के सदस्यों का कर्तव्य है कि वे तितर-बितर हो जाएँ।
उपधारा (2): आदेश के बावजूद जमाव न हटे, या बिना आदेश के भी वह इस तरह आचरण करे कि हटने का इरादा न दिखे, तो उपधारा (1) में बताया गया मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी बल प्रयोग से जमाव को हटाने की कार्यवाही कर सकता है। वह किसी भी व्यक्ति से सहायता माँग सकता है, पर सशस्त्र बलों का अधिकारी या सदस्य बनकर कार्य करने वाला व्यक्ति इसमें नहीं आता। यदि आवश्यक हो तो जमाव के सदस्यों को गिरफ़्तार और निरुद्ध भी कर सकता है, ताकि जमाव हटे या वे क़ानून के अनुसार दंडित हों।
धारा 149 अगली सीढ़ी है: सशस्त्र बलों (armed forces) का प्रयोग। उपधारा (1) के अनुसार यह तब होता है जब धारा 148(1) में बताया गया कोई जमाव किसी और तरह से हटाया ही न जा सके और लोक सुरक्षा के लिए उसे हटाना आवश्यक हो। तब उपस्थित ज़िला मजिस्ट्रेट या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट उसे सशस्त्र बलों से हटवा सकता है। उपधारा (2) में वह सशस्त्र बलों के किसी समूह के कमान-अधिकारी से अपेक्षा कर सकता है कि वह अपनी कमान के बलों की मदद से जमाव हटाए और जमाव के उन सदस्यों को गिरफ़्तार और निरुद्ध करे जिन्हें मजिस्ट्रेट निर्देश दे, या जिन्हें जमाव हटाने अथवा क़ानून के अनुसार दंडित कराने के लिए गिरफ़्तार करना आवश्यक हो। उपधारा (3): सशस्त्र बल का अधिकारी इस माँग का पालन अपने विवेक की रीति से करेगा, पर उतना ही कम बल और व्यक्ति और संपत्ति को उतनी ही कम हानि पहुँचाएगा जितनी जमाव को हटाने और ऐसे व्यक्तियों को गिरफ़्तार और निरुद्ध करने के अनुरूप हो।
तुलना: धारा 148 और धारा 149
धारा 148: सिविल बल
कौन आदेश दे सकता हैकोई भी कार्यपालक मजिस्ट्रेट; थाना प्रभारी; उसकी अनुपस्थिति में उप-निरीक्षक या उससे ऊपर के रैंक का पुलिस अधिकारी
शर्तविधिविरुद्ध जमाव, या पाँच या अधिक व्यक्तियों का जमाव जिससे लोक शांति भंग होने की संभावना
बल की मात्राबल से हटाना; सहायता किसी भी व्यक्ति से (सशस्त्र बल का अधिकारी या सदस्य बनकर कार्य करने वाले को छोड़कर)
गिरफ़्तारीआवश्यक हो तो सदस्यों को गिरफ़्तार और निरुद्ध करना
क्रमपहला कदम
धारा 149: सशस्त्र बल
कौन आदेश दे सकता हैउपस्थित ज़िला मजिस्ट्रेट या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट
शर्तजमाव किसी और तरह से हटाया न जा सके और लोक सुरक्षा के लिए हटाना आवश्यक हो
बल की मात्रासशस्त्र बल का अधिकारी अपनी रीति से, पर न्यूनतम बल और न्यूनतम हानि
गिरफ़्तारीमजिस्ट्रेट के निर्देश पर या हटाने के लिए आवश्यक गिरफ़्तारी और निरोध
क्रमअंतिम उपाय
जमाव हटाने की सीढ़ी
आदेश (धारा 148(1))
मजिस्ट्रेट या थाना प्रभारी जमाव को हटने का आदेश देता है
सिविल बल (धारा 148(2))
जमाव न हटे या हटने का इरादा न दिखे तो बल प्रयोग, किसी की सहायता और गिरफ़्तारी
सशस्त्र बल (धारा 149)
और कोई उपाय न बचे, लोक सुरक्षा के लिए हटाना ज़रूरी हो: ज़िला मजिस्ट्रेट या उसके द्वारा प्राधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट
न्यूनतम बल (धारा 149(3))
जमाव हटाने और गिरफ़्तारी के अनुरूप कम से कम बल और हानि
धारा 152: न्यूसेन्स हटाने के लिए सशर्त आदेश (Conditional order for removal of nuisance)
कोई गली में अवैध ठेला लगा ले, कोई जर्जर इमारत सड़क पर झुकी हो, कोई पुराना कुआँ खुला पड़ा हो, तो हर बार अदालत का मुक़दमा चलाना व्यावहारिक नहीं। धारा 152 इसी के लिए कार्यपालक मजिस्ट्रेट को अधिकार देती है। यह अधिकार ज़िला मजिस्ट्रेट, उप-खंड मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार द्वारा इसके लिए विशेष रूप से सशक्त किसी अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास है। वह पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट या अन्य सूचना मिलने पर और जो साक्ष्य (यदि कोई) उचित समझे लेने पर यह निर्णय लेता है कि छह में से कोई स्थिति है।
छह स्थितियाँ ये हैं: (a) किसी सार्वजनिक स्थान या किसी ऐसे मार्ग, नदी या नाले से, जिसका वैध रूप से जनता उपयोग करती है या कर सकती है, कोई विधिविरुद्ध बाधा या न्यूसेन्स हटाना चाहिए; (b) कोई व्यापार या उपजीविका चलाना या कोई माल रखना समुदाय के स्वास्थ्य या शारीरिक सुख के लिए हानिकर है; (c) किसी इमारत का निर्माण या किसी पदार्थ का निपटान ऐसा है जिससे आग लगने या विस्फोट की संभावना हो; (d) कोई इमारत, तंबू, ढाँचा या पेड़ ऐसी हालत में है कि गिरकर पास रहने, व्यवसाय करने या गुज़रने वालों को चोट पहुँचा सकता है; (e) किसी ऐसे मार्ग या सार्वजनिक स्थान के पास का कोई टंकी, कुआँ या खुदाई जनता को ख़तरे से बचाने के लिए घेरी जानी चाहिए; (f) कोई ख़तरनाक पशु नष्ट किया जाए, बाँधा जाए या अन्यथा निपटाया जाए।
तब मजिस्ट्रेट सशर्त आदेश (conditional order) देता है। इसमें संबंधित व्यक्ति से, आदेश में तय समय के भीतर, छह में से उपयुक्त कार्य करने को कहा जाता है: (i) बाधा या न्यूसेन्स हटाना; (ii) व्यापार बंद करना या निर्देशानुसार हटाना या नियंत्रित करना, या माल हटाना या रखने की रीति नियंत्रित करना; (iii) निर्माण रोकना या पदार्थ के निपटान की रीति बदलना; (iv) इमारत, तंबू या ढाँचे को हटाना, मरम्मत करना या सहारा देना, या पेड़ हटाना या सहारा देना; (v) टंकी, कुएँ या खुदाई को घेरना; (vi) ख़तरनाक पशु को आदेश में बताई रीति से नष्ट करना, बाँधना या निपटाना। यदि व्यक्ति ऐसा करने पर आपत्ति करे, तो उसे स्वयं मजिस्ट्रेट के या उसके अधीनस्थ किसी अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने तय समय और स्थान पर उपस्थित होकर कारण बताना होगा कि आदेश को पूर्ण (absolute) क्यों न किया जाए।
उपधारा (2) कहती है कि इस धारा के अधीन विधिवत दिया गया मजिस्ट्रेट का आदेश किसी सिविल न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जा सकता। स्पष्टीकरण में "सार्वजनिक स्थान" (public place) का दायरा बढ़ाया गया है: उसमें राज्य की संपत्ति, पड़ाव-मैदान और स्वच्छता या मनोरंजन के लिए ख़ाली छोड़े गए मैदान भी शामिल हैं। इस आदेश के बाद की प्रक्रिया (जैसे आदेश की तामील और कारण बताने पर कार्यवाही) आगे की धाराओं में है, जो सिलेबस की सूची में नहीं हैं।
धारा 152(1): छह आधार और उनके उपाय
| खंड | आधार | आदेश के उपाय (i) से (vi) |
|---|---|---|
| (a) | सार्वजनिक स्थान या जन-उपयोग के मार्ग, नदी या नाले पर विधिविरुद्ध बाधा या न्यूसेन्स | (i) बाधा या न्यूसेन्स हटाना |
| (b) | व्यापार, उपजीविका या माल रखना, जो समुदाय के स्वास्थ्य या शारीरिक सुख के लिए हानिकर | (ii) व्यापार बंद करना या नियंत्रित करना, माल हटाना या रखना नियंत्रित करना |
| (c) | इमारत का निर्माण या पदार्थ का निपटान, जिससे आग या विस्फोट की संभावना | (iii) निर्माण रोकना, पदार्थ के निपटान की रीति बदलना |
| (d) | इमारत, तंबू, ढाँचा या पेड़ गिरने की हालत में | (iv) हटाना, मरम्मत या सहारा |
| (e) | मार्ग या सार्वजनिक स्थान के पास टंकी, कुआँ या खुदाई | (v) घेरना |
| (f) | ख़तरनाक पशु | (vi) नष्ट करना, बाँधना या निपटाना |
मुख्य तथ्य
- अध्याय IX
- "Security for Keeping the Peace and for Good Behaviour"; धारा 125 दोषसिद्धि पर, धारा 126 अन्य दशाओं में
- धारा 126, 127, 128
- बंधपत्र या ज़मानतपत्र; अवधि एक वर्ष से अधिक नहीं
- धारा 129
- केवल ज़मानतपत्र; अवधि तीन वर्ष से अधिक नहीं; सात खंड (a) से (g)
- धारा 127(1) की सामग्री
- BNS की धारा 152, 196, 197, 299 की सामग्री; न्यायाधीश के बारे में अभित्रास या मानहानि; धारा 294 की अश्लील सामग्री
- धारा 127(2)
- पंजीकृत प्रकाशन (प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम, 1867) के संपादक, स्वामी, मुद्रक या प्रकाशक पर कार्यवाही केवल राज्य सरकार के आदेश या प्राधिकार से
- धारा 148
- आदेश: कार्यपालक मजिस्ट्रेट, थाना प्रभारी, या उसकी अनुपस्थिति में उप-निरीक्षक या उससे ऊपर के रैंक का पुलिस अधिकारी; पाँच या अधिक व्यक्तियों का जमाव
- धारा 149
- सशस्त्र बल: उपस्थित ज़िला मजिस्ट्रेट या उसके द्वारा प्राधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट; न्यूनतम बल (उपधारा 3)
- धारा 152
- ज़िला मजिस्ट्रेट, उप-खंड मजिस्ट्रेट या विशेष रूप से सशक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट; छह आधार (a) से (f); सशर्त आदेश; सिविल न्यायालय में चुनौती नहीं
- BNS शीर्षक
- 152: संप्रभुता, एकता और अखंडता को ख़तरे में डालने वाला कार्य; 197: राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल लांछन; 294: अश्लील पुस्तकों आदि की बिक्री
- पुराने क्रमांक (अध्ययन-सहायता)
- धारा 126, 127, 128, 129 क्रमशः CrPC की 107, 108, 109, 110; धारा 148, 149, 152 क्रमशः CrPC की 129, 130, 133
- अंतिम जाँच
- 3 अक्टूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- चारों प्रतिभूति-धाराओं की अवधि एक जैसी लिख देना। 126, 127, 128 में एक वर्ष तक; 129 में तीन वर्ष तक।
- धारा 129 में "बंधपत्र या ज़मानतपत्र" लिख देना। इस धारा में केवल ज़मानतपत्र (bail bond) का उल्लेख है।
- धारा 126 को दोषसिद्धि पर लगने वाली धारा समझना। दोषसिद्धि पर प्रतिभूति धारा 125 में है; 126 "अन्य दशाओं में" है।
- धारा 127 में प्रेस के संपादक या प्रकाशक पर सीधे कार्यवाही बता देना। पंजीकृत प्रकाशन के लिए राज्य सरकार का आदेश या प्राधिकार चाहिए।
- धारा 148 और 149 में सशस्त्र बल का अधिकारी उलटना। 148 में कार्यपालक मजिस्ट्रेट या पुलिस; 149 में केवल ज़िला मजिस्ट्रेट या उसके द्वारा प्राधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट।
- धारा 149 में "न्यूनतम बल" का उपबंध (उपधारा 3) भूल जाना।
- धारा 152 को "सशर्त" की जगह "अंतिम" आदेश कहना, या यह भूल जाना कि कार्य न करने पर कारण बताने के लिए उपस्थित होना पड़ता है।
कार्य-उदाहरण (कल्पित): कौन-सी धारा लगेगी?
हल सहित उदाहरणचार स्थितियाँ और सही धारा
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; पात्र और घटनाएँ वास्तविक नहीं हैं।
- स्थिति 1: एक व्यक्ति के बारे में सूचना है कि वह मेले के दिन विरोधी पक्ष से मारपीट करने की धमकी देता घूम रहा है।
- स्थिति 2: एक व्यक्ति रात में किसी सूने मकान के आसपास छिपकर घूमता मिला और संदेह है कि वह चोरी करने की तैयारी में है।
- स्थिति 3: एक व्यक्ति पर पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आदतन चोरी करने और चोरी का माल ख़रीदने का आरोप है।
- स्थिति 4: एक व्यक्ति पर्चे छपवाकर बाँट रहा है, जिनकी सामग्री धर्मों के बीच शत्रुता बढ़ाने वाली बताई गई है।
- 1स्थिति 1 धारा 126: शांति भंग की आशंका। बंधपत्र या ज़मानतपत्र, अधिकतम एक वर्ष के लिए।
- 2स्थिति 2 धारा 128: उपस्थिति छिपाने की सावधानी और संज्ञेय अपराध करने का कारण-विश्वास। अधिकतम एक वर्ष, अच्छे आचरण के लिए।
- 3स्थिति 3 धारा 129(a) और (b): आदतन चोर और चुराई संपत्ति लेने वाला। केवल ज़मानतपत्र, अधिकतम तीन वर्ष। ज़मानतदार अनिवार्य।
- 4स्थिति 4 धारा 127(1)(i)(क): ऐसी सामग्री जिसका प्रकाशन BNS की धारा 196 (समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाना) के अंतर्गत दंडनीय है। अधिकतम एक वर्ष, अच्छे आचरण के लिए। यदि मामला किसी पंजीकृत प्रकाशन के संपादक या प्रकाशक का होता, तो कार्यवाही के लिए राज्य सरकार का आदेश या प्राधिकार चाहिए होता (धारा 127(2)).
निष्कर्ष: निष्कर्ष: पहले यह देखें कि आशंका क्या है (शांति-भंग, सामग्री फैलाना, छिपना या आदतन अपराध), फिर धारा चुनें। अवधि एक वर्ष है, केवल धारा 129 में तीन वर्ष; और केवल धारा 129 में ज़मानतपत्र ही माँगा जाता है।
केस स्टडी (कल्पित): जर्जर इमारत और सशर्त आदेश
उदाहरण (काल्पनिक)मुख्य मार्ग पर झुकी पुरानी हवेली
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; स्थान, व्यक्ति और घटना वास्तविक नहीं हैं। एक क़स्बे में मुख्य बाज़ार के मार्ग पर एक पुरानी हवेली की बाहरी दीवार झुक गई है। थाने ने उप-खंड मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट भेजी कि बारिश में दीवार गिर सकती है।
- अधिकार
- उप-खंड मजिस्ट्रेट धारा 152(1) के अधीन अधिकारी है; रिपोर्ट पर वह आवश्यक साक्ष्य ले सकता है।
- आधार
- मजिस्ट्रेट मान ले कि यह धारा 152(1)(d) की स्थिति है: इमारत ऐसी हालत में है कि गिरकर आसपास रहने या गुज़रने वालों को चोट पहुँचा सकती है, इसलिए उसकी मरम्मत, सहारा या हटाना ज़रूरी है।
- सशर्त आदेश
- मालिक को तय समय के भीतर इमारत की मरम्मत करने, उसे सहारा देने या हटाने का आदेश दिया जाता है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि यदि वह आपत्ति करता है तो तय समय और स्थान पर उपस्थित होकर कारण बताए कि आदेश पूर्ण क्यों न किया जाए।
- नियम (धारा 152(2))
- विधिवत किए गए इस आदेश को मालिक सिविल न्यायालय में चुनौती नहीं दे सकता; आगे की प्रक्रिया संहिता की बाद की धाराओं से चलेगी।
सीख
धारा 152 निवारक है: ख़तरा बनने से पहले ही आदेश। "सशर्त" का अर्थ है कि पहला आदेश अंतिम नहीं है; व्यक्ति कार्य करे या कारण बताए, फिर आदेश पूर्ण होता है।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
BNSS 2023 की धारा 129 के अंतर्गत प्रतिभूति की अधिकतम अवधि कितनी है?
आदर्श उत्तर
धारा 129 में अच्छे आचरण के लिए ज़मानतपत्र की अधिकतम अवधि तीन वर्ष है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
BNSS 2023 की धारा 152 में न्यूसेन्स हटाने का आदेश कौन दे सकता है?
आदर्श उत्तर
ज़िला मजिस्ट्रेट, उप-खंड मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से सशक्त कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
BNSS 2023 की धारा 128 में किस व्यक्ति से सदाचार की प्रतिभूति माँगी जा सकती है?
आदर्श उत्तर
जब कार्यपालक मजिस्ट्रेट को सूचना मिले कि उसकी अधिकारिता में कोई व्यक्ति अपनी उपस्थिति छिपा रहा है और विश्वास का कारण हो कि वह संज्ञेय अपराध के उद्देश्य से ऐसा कर रहा है, तो वह उससे कारण पूछ सकता है कि अच्छे आचरण के लिए एक वर्ष तक का बंधपत्र या ज़मानतपत्र क्यों न लिया जाए।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
BNSS 2023 की धारा 148 और 149 के अनुसार विधिविरुद्ध जमाव को हटाने की प्रक्रिया बताइए।
आदर्श उत्तर
धारा 148 में कार्यपालक मजिस्ट्रेट या थाना प्रभारी जमाव को हटने का आदेश देता है; न हटे तो बल प्रयोग और गिरफ़्तारी कर सकता है। धारा 149 में, जब और कोई उपाय न बचे, ज़िला मजिस्ट्रेट या उसका प्राधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट सशस्त्र बलों से जमाव हटवा सकता है, पर न्यूनतम बल प्रयोग अनिवार्य है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
BNSS 2023 की धारा 152 के अनुसार न्यूसेन्स हटाने के लिए सशर्त आदेश किन आधारों पर और कैसे दिया जाता है?
आदर्श उत्तर
धारा 152 में ज़िला या उप-खंड मजिस्ट्रेट, या विशेष रूप से सशक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट, पुलिस रिपोर्ट या सूचना पर छह आधारों पर सशर्त आदेश देता है: सार्वजनिक मार्ग पर अवैध अवरोध, हानिकर व्यापार या माल, आग या विस्फोट की आशंका, गिरने योग्य इमारत या पेड़, असुरक्षित कुआँ या खुदाई, और ख़तरनाक पशु। संबंधित व्यक्ति से तय समय में अवरोध हटाने, व्यापार रोकने, निर्माण रोकने, मरम्मत करने, घेरने या पशु निपटाने को कहा जाता है, अथवा आपत्ति होने पर उपस्थित होकर कारण बताने को। विधिवत किया गया आदेश किसी सिविल न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जा सकता।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "BNSS 2023 में शांति और सदाचार की प्रतिभूति से संबंधित प्रावधान समझाइए।" पहली पंक्ति में अध्याय IX और निवारक कार्यवाही का अर्थ लिखिए। (5 अंक के प्रश्न में यही ढाँचा 50 शब्दों में लिखें।)
मुख्य भाग
- धारा 126: शांति-भंग की आशंका; बंधपत्र या ज़मानतपत्र; एक वर्ष तक
- धारा 127: कुछ सामग्री फैलाने वाले; पंजीकृत प्रकाशन पर राज्य सरकार का आदेश; एक वर्ष तक
- धारा 128: उपस्थिति छिपाने वाले संदिग्ध; एक वर्ष तक
- धारा 129: आदतन अपराधी; केवल ज़मानतपत्र; तीन वर्ष तक
निष्कर्ष
निष्कर्ष: ये धाराएँ अपराध होने से पहले ही शांति बचाने का साधन हैं और इनका प्रयोग कार्यपालक मजिस्ट्रेट करता है, न कि न्यायिक मजिस्ट्रेट।
अतिरिक्त मूल्य
- ज़मानत, बंधपत्र और ज़मानतपत्र की परिभाषाओं (धारा 2) से जोड़ें
- एक तालिका में चारों धाराएँ बनाएँ
- धारा 125 से अंतर (दोषसिद्धि पर प्रतिभूति) एक पंक्ति में लिखें
संबंधित विषय
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भारतीय न्याय संहिता 2023, धारा 189 से 191: विधिविरुद्ध जमाव और बलवा
भारतीय न्याय संहिता 2023, धारा 194 से 197: हाथापाई, लोक सेवक पर हमला और समूहों में शत्रुता
भारतीय न्याय संहिता 2023, धारा 270 और 294 से 296: सार्वजनिक उपद्रव और अश्लीलता के अपराध
त्वरित पुनरावृत्ति
- अध्याय IX: धारा 126 से 129; कार्यपालक मजिस्ट्रेट; कारण बताओ और फिर बंधपत्र; धारा 125 दोषसिद्धि पर (सिलेबस के बाहर)
- 126: शांति-भंग की आशंका, एक वर्ष; अधिकारिता: स्थान या व्यक्ति के आधार पर (126(2))
- 127: BNS की 152, 196, 197, 299; न्यायाधीश पर अभित्रास या मानहानि; धारा 294 की अश्लील सामग्री; एक वर्ष; पंजीकृत प्रकाशन पर राज्य सरकार का प्राधिकार
- 128: उपस्थिति छिपाना, संज्ञेय अपराध का उद्देश्य; एक वर्ष
- 129: आदतन चोर, ग्राही, शरण देने वाला, व्यपहरण आदि, शांति-भंग, विशेष अधिनियम, ख़तरनाक व्यक्ति; केवल ज़मानतपत्र; तीन वर्ष
- 148: कार्यपालक मजिस्ट्रेट, थाना प्रभारी, उप-निरीक्षक; पाँच या अधिक व्यक्तियों का जमाव; बल और गिरफ़्तारी
- 149: ज़िला मजिस्ट्रेट या प्राधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट; सशस्त्र बल; न्यूनतम बल
- 152: DM, SDM या विशेष सशक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट; छह आधार (a) से (f); सशर्त आदेश; सिविल न्यायालय में चुनौती नहीं
- CrPC मेल (अध्ययन-सहायता): 126←107, 127←108, 128←109, 129←110, 148←129, 149←130, 152←133
याद रखने योग्य शब्द
- security for good behaviour
- habitual offender
- unlawful assembly
- civil force
- armed forces
- conditional order
- public nuisance
- show cause