भारतीय न्याय संहिता 2023, धारा 270 और 294 से 296: सार्वजनिक उपद्रव और अश्लीलता के अपराध
भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 270 (सार्वजनिक उपद्रव की परिभाषा) और धारा 294 से 296 (अश्लील वस्तुओं की बिक्री और प्रसार, बालक को ऐसी वस्तुएँ, और सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य और गीत), सज़ा और अपवाद पाठ के अनुसार।
- BNS 2023
- धारा 270
- धारा 294
- धारा 295
- धारा 296
- सार्वजनिक उपद्रव
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023: ... Sections 189-191, 194-197, 270, 294-296." इस पृष्ठ पर धारा 270 (सार्वजनिक उपद्रव, public nuisance) और धारा 294, 295 और 296 (अश्लील पुस्तकों आदि की बिक्री, बालक को अश्लील वस्तुओं की बिक्री, और अश्लील कृत्य और गीत) हैं। पाठ राजपत्र (25-12-2023) के अंग्रेज़ी पाठ से लिया गया है। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं है; वास्तविक मामले में अधिकृत विधिक सहायता लें।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- पिछले पेपरों में (2013, 2016, 2018, 2021, 2023 और 2024, यानी जिन छह पेपरों के प्रश्न उपलब्ध हैं) इन धाराओं पर कोई प्रश्न नहीं आया। ये धाराएँ 2026 के सिलेबस में नई जुड़ी हैं, इसलिए तैयारी का आधार धारा का पाठ, खंड और सज़ा की सीमा है।
- धारा 270 परिभाषा की धारा है और उसमें सज़ा नहीं है; धारा 294 और 295 में पहली दोषसिद्धि और बाद की दोषसिद्धि की सज़ा अलग-अलग है, और उनमें कारावास और जुर्माना दोनों हैं ('and'), जबकि धारा 296 में कारावास या जुर्माना या दोनों। यही फ़र्क़ विधि के उन प्रश्नों में काम आएगा जो बीते पेपरों के रुझान के अनुसार परिभाषा और सज़ा पर पूछे गए हैं (2013 से 2024 के पेपरों में देखा गया, यह परीक्षा का नियम नहीं)।
- धारा 295 में 'बालक' का अर्थ धारा 2(3) की परिभाषा (अठारह वर्ष से कम) से लेना है, इसलिए पहले पृष्ठ की परिभाषाएँ यहाँ सीधे काम आती हैं। धारा 294 की 'अश्लील' की परिभाषा में इलेक्ट्रॉनिक रूप में सामग्री का प्रदर्शन भी शामिल है।
पहले सरल भाषा में
गाँव की साझा गली में कोई ईंटों का ढेर लगा दे जिससे सबका आना-जाना रुके, तो नुकसान किसी एक का नहीं, पूरे मोहल्ले का है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 का अध्याय XV (लोक स्वास्थ्य, सुरक्षा, सुविधा, शालीनता और नैतिकता को प्रभावित करने वाले अपराध, Offences affecting the public health, safety, convenience, decency and morals) ऐसे ही साझे नुकसान और समाज की शालीनता की रक्षा करता है। इसकी धारा 270 बताती है कि सार्वजनिक उपद्रव (public nuisance) किसे कहेंगे। धारा 294 से 296 शालीनता से जुड़ी हैं: अश्लील पुस्तकों और वस्तुओं की बिक्री या प्रसार, बालक को ऐसी वस्तुएँ देना, और सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य या गीत।
इनमें दो तरह की भाषा मिलती है। सार्वजनिक उपद्रव में कसौटी 'सबको होने वाली हानि, ख़तरा या परेशानी' (common injury, danger or annoyance) है। शालीनता की धाराओं में कसौटी 'अश्लीलता' है, जिसे धारा 294(1) ने परिभाषित किया है। परीक्षा में पहले यह पहचानना ज़रूरी है कि प्रश्न किस तरह का है: साझे उपद्रव का, अश्लील वस्तु के प्रसार का, बालक को ऐसी वस्तु देने का, या सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य का।
धारा 270: सार्वजनिक उपद्रव (public nuisance) के तत्व
| तत्व | पाठ का आशय | अंग्रेज़ी पाठ का मुख्य अंश |
|---|---|---|
| कृत्य | कोई कार्य करना या कोई अवैध लोप (illegal omission) का दोषी होना | does any act or is guilty of an illegal omission |
| परिणाम (पहला रूप) | जनता को, या आसपास रहने या संपत्ति रखने वाले आम लोगों को, कोई सामान्य हानि, ख़तरा या परेशानी | causes any common injury, danger or annoyance to the public or to the people in general who dwell or occupy property in the vicinity |
| परिणाम (दूसरा रूप) | ऐसे व्यक्तियों को, जिन्हें किसी सार्वजनिक अधिकार का प्रयोग करना पड़ सकता है, अवश्यंभावी रूप से हानि, बाधा, ख़तरा या परेशानी | which must necessarily cause injury, obstruction, danger or annoyance to persons who may have occasion to use any public right |
| बचाव नहीं | सार्वजनिक उपद्रव इस आधार पर क्षम्य नहीं कि उससे कुछ सुविधा या लाभ भी होता है | a common nuisance is not excused on the ground that it causes some convenience or advantage |
| IPC क्रम (अध्ययन-सहायक) | IPC 268 ('Public nuisance') | BNS-IPC तालिका में 270 से 268 का मिलान |
'अवैध' (illegal) का अर्थ धारा 2(15) से: जो अपराध है, या कानून से निषिद्ध है, या दीवानी कार्रवाई का आधार देता है। धारा 270 केवल परिभाषा है; इसमें सज़ा नहीं है, दंड की धारा इस सिलेबस-सूची में नहीं है।
धारा 270 को कैसे समझें
धारा 270 की सबसे महत्त्वपूर्ण कसौटी 'common' यानी सामूहिक है। यदि हानि किसी एक पड़ोसी तक सीमित है तो वह व्यक्तिगत विवाद है, सार्वजनिक उपद्रव नहीं। यदि वही हानि पूरे मोहल्ले या सार्वजनिक रास्ते का उपयोग करने वाले सब लोगों को होती है, तो सार्वजनिक उपद्रव बनता है। इसके दो रूप पाठ में हैं: पहला रूप आसपास रहने या संपत्ति रखने वाले आम लोगों की हानि है (जैसे बदबू, शोर, धुआँ जैसी सामूहिक परेशानी), और दूसरा रूप उन लोगों की बाधा है जो किसी सार्वजनिक अधिकार का प्रयोग करते हैं (जैसे सार्वजनिक मार्ग का उपयोग)।
दूसरी बात 'अवैध लोप' की है। केवल कोई कार्य करना ही नहीं, कुछ न करना भी उपद्रव बन सकता है, यदि वह 'illegal omission' हो। धारा 2(15) के अनुसार कानून जिस चीज़ को निषिद्ध करता है या जो अपराध है, वह अवैध है और व्यक्ति उस काम को करने के लिए 'विधिक रूप से बाध्य' (legally bound to do) तब कहलाता है जब उसे न करना अवैध हो। विश्लेषण: इसलिए जिस व्यक्ति पर कानून ने किसी सार्वजनिक ख़तरे को हटाने का दायित्व डाला है, उसका उसे न हटाना भी उपद्रव का आधार बन सकता है।
तीसरी बात उस अंतिम खंड की है जिसे परीक्षा में अक्सर भुला दिया जाता है: 'a common nuisance is not excused on the ground that it causes some convenience or advantage'। मान लीजिए किसी ने सार्वजनिक रास्ते पर अपना ठेला लगा दिया है, जिससे उसकी रोज़ी चलती है और कुछ ग्राहकों को सुविधा भी होती है। फिर भी, यदि वह रास्ते का उपयोग करने वालों के लिए अवश्यंभावी बाधा है, तो 'कुछ लोगों को सुविधा होती है' इसका बचाव नहीं है। धारा 270 स्वयं दंड नहीं बताती; वह केवल यह परिभाषित करती है कि उपद्रव क्या है।
धारा 294: अश्लील पुस्तकों आदि की बिक्री (sale, etc., of obscene books, etc.)
| उप-धारा | विषय | पाठ का आशय | IPC क्रम (अध्ययन-सहायक) |
|---|---|---|---|
| 294(1) | अश्लील की परिभाषा | कोई पुस्तक, पैम्फ़लेट, कागज़, लेख, चित्र, पेंटिंग, निरूपण, आकृति या अन्य वस्तु, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक रूप में किसी सामग्री का प्रदर्शन भी शामिल है, 'अश्लील' मानी जाएगी यदि वह कामोत्तेजक (lascivious) है या कामुक रुचि (prurient interest) को उकसाती है, या यदि उसका प्रभाव (या कई अलग वस्तुओं में से किसी एक का प्रभाव), समग्र रूप से लेने पर, उन व्यक्तियों को जो सभी संबंधित परिस्थितियों को देखते हुए उसे पढ़ने, देखने या सुनने की संभावना रखते हैं, भ्रष्ट और पथभ्रष्ट करने की प्रवृत्ति रखता है। यह परिभाषा केवल उप-धारा (2) के प्रयोजन के लिए है। | IPC 292 (शीर्षक में समान) |
| 294(2)(a) | बिक्री आदि | बेचना, किराये पर देना, वितरित करना, सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना, किसी भी तरह प्रचलन में डालना, या बिक्री, किराये, वितरण, प्रदर्शन या प्रचलन के लिए बनाना, तैयार करना या अपने पास रखना, कोई अश्लील वस्तु | IPC 292 |
| 294(2)(b) | आयात-निर्यात | इन प्रयोजनों के लिए, या यह जानते या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वस्तु बेची, किराये पर दी, वितरित या प्रदर्शित की जाएगी, अश्लील वस्तु का आयात, निर्यात या परिवहन | IPC 292 |
| 294(2)(c) | कारोबार में भाग | ऐसे किसी कारोबार में भाग लेना या उससे लाभ प्राप्त करना जिसके बारे में वह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि उसमें अश्लील वस्तुएँ उक्त प्रयोजनों के लिए बनाई, खरीदी, रखी, आयात-निर्यात की, परिवहन की या प्रदर्शित की जाती हैं | IPC 292 |
| 294(2)(d) | विज्ञापन | किसी भी साधन से यह विज्ञापित करना या बताना कि कोई व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत अपराध वाला कार्य करने में लगा है या तैयार है, या ऐसी अश्लील वस्तु किसी व्यक्ति के माध्यम से मिल सकती है | IPC 292 |
| 294(2)(e) | प्रस्ताव या प्रयास | इस धारा के अंतर्गत अपराध वाले किसी कार्य की पेशकश या उसका प्रयास करना | IPC 292 |
सज़ा (294(2)): पहली दोषसिद्धि पर किसी भी प्रकार का कारावास दो वर्ष तक और जुर्माना पाँच हज़ार रुपये तक; दूसरी या बाद की दोषसिद्धि पर कारावास पाँच वर्ष तक और जुर्माना दस हज़ार रुपये तक (पाठ में 'and')। अपवाद (Exception): धारा 294 लागू नहीं होती (a) ऐसी पुस्तक, पैम्फ़लेट, कागज़, लेख, चित्र, पेंटिंग, निरूपण या आकृति पर जिसका प्रकाशन विज्ञान, साहित्य, कला या विद्या या सामान्य हित के अन्य उद्देश्यों के हित में होने के कारण लोकहित में उचित सिद्ध हो, या जो धार्मिक प्रयोजनों के लिए सद्भावपूर्वक (bona fide) रखी या प्रयुक्त हो; (b) प्राचीन स्मारक और पुरातत्त्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के अर्थ में किसी प्राचीन स्मारक पर, या किसी मंदिर या देवमूर्तियों को ले जाने वाले रथ पर, या धार्मिक प्रयोजन के लिए रखे या प्रयुक्त किसी भी वस्तु पर तराशा, उकेरा, चित्रित या अन्य रूप से निरूपित कोई भी निरूपण।
धारा 295 और 296: बालक को अश्लील वस्तु और अश्लील कृत्य और गीत
| धारा | अपराध | पाठ का आशय | सज़ा | IPC क्रम (अध्ययन-सहायक) |
|---|---|---|---|---|
| 295 | बालक को अश्लील वस्तुओं की बिक्री आदि (sale, etc., of obscene objects to child) | जो कोई धारा 294 में उल्लिखित ऐसी अश्लील वस्तु किसी बालक को बेचता, किराये पर देता, वितरित करता, प्रदर्शित करता या प्रचलित करता है, या ऐसा करने की पेशकश या प्रयास करता है | पहली दोषसिद्धि पर किसी भी प्रकार का कारावास तीन वर्ष तक और जुर्माना दो हज़ार रुपये तक; बाद की दोषसिद्धि पर कारावास सात वर्ष तक और जुर्माना पाँच हज़ार रुपये तक | IPC 293 (तालिका में शीर्षक: 'young person') |
| 296(a) | अश्लील कृत्य (obscene acts) | दूसरों को परेशान करते हुए (to the annoyance of others) किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई अश्लील कृत्य करना | किसी भी प्रकार का कारावास तीन माह तक, या जुर्माना एक हज़ार रुपये तक, या दोनों | IPC 294 |
| 296(b) | अश्लील गीत (obscene songs) | दूसरों को परेशान करते हुए किसी सार्वजनिक स्थान पर या उसके पास कोई अश्लील गीत, लोकगीत (ballad) या शब्द गाना, सुनाना या उच्चारित करना | वही: तीन माह तक, या जुर्माना एक हज़ार रुपये तक, या दोनों | IPC 294 |
BNS-IPC तालिका में धारा 294 और 296 के शीर्षक पर परिवर्तन ('Change') चिह्नित है। IPC 293 के शीर्षक में 'young person' है; BNS की धारा 295 में 'child' है, जिसका अर्थ धारा 2(3) से अठारह वर्ष से कम आयु है।
तीनों धाराओं की सज़ा का मिलान
| धारा | पहली दोषसिद्धि | दूसरी या बाद की दोषसिद्धि | कारावास और जुर्माना कैसे जुड़े हैं |
|---|---|---|---|
| 294(2) | कारावास दो वर्ष तक और जुर्माना ₹5,000 तक | कारावास पाँच वर्ष तक और जुर्माना ₹10,000 तक | दोनों ('and') |
| 295 | कारावास तीन वर्ष तक और जुर्माना ₹2,000 तक | कारावास सात वर्ष तक और जुर्माना ₹5,000 तक | दोनों ('and') |
| 296 | कारावास तीन माह तक, या जुर्माना ₹1,000 तक, या दोनों | अलग से नहीं बताई गई | या ('or'), या दोनों |
| 270 | सज़ा नहीं (परिभाषा की धारा) | लागू नहीं | लागू नहीं |
कारावास 'either description' (किसी भी प्रकार का) है। 295 में बालक को बेचने पर सज़ा 294 से भारी है (तीन और सात वर्ष, बनाम दो और पाँच वर्ष), जबकि जुर्माना कम है (₹2,000 और ₹5,000, बनाम ₹5,000 और ₹10,000)।
धारा 294(2) के पाँच कृत्य
अश्लील वस्तु: कौन-से कृत्य अपराध हैं
(a) बिक्री और प्रचलन
- बेचना, किराये पर देना, वितरित करना
- सार्वजनिक प्रदर्शन या प्रचलन
- बिक्री आदि के लिए बनाना या पास रखना
(b) आयात-निर्यात
- आयात, निर्यात या परिवहन
- उक्त प्रयोजनों के लिए या ज्ञान के साथ
(c) कारोबार में भाग
- कारोबार में भाग लेना
- लाभ प्राप्त करना
(d) विज्ञापन
- किसी व्यक्ति के इस कार्य में लगे होने का विज्ञापन
- अश्लील वस्तु कहाँ मिलेगी, यह बताना
(e) प्रस्ताव या प्रयास
- पेशकश करना
- प्रयास करना
किस स्थिति में कौन-सी धारा
कोई कार्य या अवैध लोप जिससे जनता को सामान्य हानि, ख़तरा, बाधा या परेशानी?
हाँ: धारा 270 (परिभाषा; सुविधा या लाभ बचाव नहीं)
अश्लील वस्तु की बिक्री, प्रचलन, आयात-निर्यात, विज्ञापन या कारोबार?
हाँ: धारा 294(2); अपवाद देखें; दो वर्ष और ₹5,000 तक, बाद में पाँच वर्ष और ₹10,000
वही वस्तुएँ किसी बालक को?
हाँ: धारा 295; तीन वर्ष और ₹2,000 तक, बाद में सात वर्ष और ₹5,000
सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य या उसके पास अश्लील गीत, दूसरों को परेशान करते हुए?
हाँ: धारा 296; तीन माह तक, या ₹1,000 तक जुर्माना, या दोनों
मुख्य तथ्य
- धारा 270
- सार्वजनिक उपद्रव की परिभाषा; सुविधा या लाभ बचाव नहीं (IPC 268)
- धारा 294(1)
- अश्लील: कामोत्तेजक या कामुक रुचि को उकसाने वाली, या भ्रष्ट और पथभ्रष्ट करने की प्रवृत्ति वाली; इलेक्ट्रॉनिक रूप में सामग्री का प्रदर्शन भी (IPC 292)
- धारा 294(2)
- पहली दोषसिद्धि: कारावास दो वर्ष तक और जुर्माना ₹5,000 तक; बाद की: पाँच वर्ष तक और ₹10,000 तक
- धारा 295
- बालक को अश्लील वस्तु: पहली दोषसिद्धि: तीन वर्ष तक और ₹2,000 तक; बाद की: सात वर्ष तक और ₹5,000 तक (IPC 293)
- धारा 296
- सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य या उसके पास अश्लील गीत: तीन माह तक, या ₹1,000 तक जुर्माना, या दोनों (IPC 294)
- धारा 2(3)
- बालक: अठारह वर्ष से कम आयु का कोई भी व्यक्ति
- IPC क्रम
- 270 से 268; 294 से 292; 295 से 293; 296 से 294 (अध्ययन-सहायक)
- प्रारंभ
- BNS 1 जुलाई 2024 से लागू (धारा 106(2) को छोड़कर)
- अंतिम जाँच
- 2 अक्तूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- धारा 270 में सज़ा लिख देना। यह केवल परिभाषा की धारा है; इसमें दंड नहीं बताया गया।
- सार्वजनिक उपद्रव के लिए 'कुछ लोगों को सुविधा मिलती है' को बचाव मानना। पाठ का अंतिम खंड कहता है कि सामूहिक उपद्रव इस आधार पर क्षम्य नहीं।
- धारा 294(2) की सज़ा में 'या' लिख देना। पहली दोषसिद्धि पर कारावास 'और' जुर्माना दोनों हैं, और बाद की दोषसिद्धि पर भी (पाँच वर्ष और ₹10,000 तक)।
- धारा 295 और 294 की सज़ाएँ आपस में बदल देना: बालक को बेचने पर कारावास अधिक (तीन और सात वर्ष) पर जुर्माना कम (₹2,000 और ₹5,000) है।
- धारा 294 का अपवाद भूल जाना: विज्ञान, साहित्य, कला या विद्या के हित में उचित सिद्ध प्रकाशन, धार्मिक प्रयोजन से सद्भावपूर्वक रखी वस्तु, प्राचीन स्मारक, मंदिर या रथ पर निरूपण।
- धारा 296 में 'सार्वजनिक स्थान' की शर्त छोड़ना और 'दूसरों को परेशान करते हुए' (to the annoyance of others) शब्द न लिखना। ये दोनों कसौटियाँ पाठ में हैं।
कार्य-उदाहरण (कल्पित): सज़ा की सीढ़ी
हल सहित उदाहरणधारा 294 और 295 में पहली और बाद की दोषसिद्धि
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; इसमें कोई वास्तविक व्यक्ति या घटना नहीं है। कल्पित स्थिति: एक दुकानदार ने पहली बार किसी अश्लील वस्तु की बिक्री का अपराध किया और धारा 294(2) में दोषसिद्ध हुआ। बाद में उसी दुकानदार ने फिर ऐसा अपराध किया, और इस बार उसने कुछ वस्तुएँ एक बालक को भी बेचीं।
- 1चरण 1: पहली दोषसिद्धि धारा 294(2): कारावास दो वर्ष तक और जुर्माना पाँच हज़ार रुपये तक।
- 2चरण 2: दूसरे अपराध में सामान्य बिक्री यदि दूसरा अपराध भी सामान्य बिक्री का है, तो धारा 294(2) की 'second or subsequent conviction' वाली सज़ा: पाँच वर्ष तक और दस हज़ार रुपये तक का जुर्माना।
- 3चरण 3: बालक को बिक्री जिन वस्तुओं की बिक्री बालक (अठारह वर्ष से कम) को हुई, उन पर धारा 295 लगेगी। यदि यह पहली दोषसिद्धि है तो तीन वर्ष तक और दो हज़ार रुपये तक जुर्माना; यदि बाद की है तो सात वर्ष तक और पाँच हज़ार रुपये तक।
- 4चरण 4: बालक की आयु आयु का निर्धारण धारा 2(3) से: 'below the age of eighteen years'।
निष्कर्ष: सज़ा चुनते समय तीन बातें देखें: कौन-सी धारा (294, 295 या 296), पहली दोषसिद्धि है या बाद की, और कारावास के साथ जुर्माना 'और' है या 'या'।
केस स्टडी (कल्पित): विज्ञान की पुस्तक और मंदिर की मूर्ति
उदाहरण (काल्पनिक)धारा 294 का अपवाद कैसे काम करता है
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; इसमें कोई वास्तविक घटना या व्यक्ति नहीं है। कल्पित स्थिति: एक चिकित्सा महाविद्यालय का प्रकाशक शरीर-रचना (anatomy) की पाठ्यपुस्तक छापता है जिसमें मानव शरीर के चित्र हैं। दूसरी ओर, एक पुराने मंदिर की दीवार पर प्राचीन मूर्तिकला है जिसका फ़ोटो एक कला-पुस्तक में छपा है। एक व्यक्ति आपत्ति करता है कि दोनों अश्लील हैं।
- पहले परिभाषा
- धारा 294(1): अश्लील वही है जो कामोत्तेजक हो या कामुक रुचि को उकसाए, या जिसका समग्र प्रभाव पाठक, दर्शक या श्रोता को भ्रष्ट और पथभ्रष्ट करने की प्रवृत्ति वाला हो।
- अपवाद (a)(i)
- यदि पुस्तक का प्रकाशन 'विज्ञान, साहित्य, कला या विद्या' के हित में होने के कारण लोकहित में उचित सिद्ध हो, तो धारा 294 लागू नहीं होती। उचित सिद्ध करना ('is proved to be justified') ज़रूरी है।
- अपवाद (b)(i) और (ii)
- प्राचीन स्मारक (1958 के अधिनियम के अर्थ में) या मंदिर पर, या देवमूर्तियों को ले जाने वाले रथ पर, या धार्मिक प्रयोजन के लिए रखी या प्रयुक्त किसी वस्तु पर तराशा, उकेरा या चित्रित निरूपण भी इस धारा से बाहर है।
सीख
अश्लीलता का प्रश्न केवल चित्र या शब्द देखकर नहीं, धारा 294(1) की कसौटी (कामोत्तेजक, कामुक रुचि, भ्रष्ट और पथभ्रष्ट करने की प्रवृत्ति) और अपवादों के साथ पढ़कर तय होता है। उत्तर में परिभाषा के बाद अपवाद ज़रूर लिखें।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 270 के अनुसार 'सार्वजनिक उपद्रव' (public nuisance) क्या है?
आदर्श उत्तर
आम लोगों को सामान्य हानि, ख़तरा या परेशानी देने वाला कार्य या अवैध लोप (धारा 270)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
धारा 296 में अश्लील कृत्य और गीत की सज़ा क्या है?
आदर्श उत्तर
तीन माह तक कारावास, या ₹1,000 तक जुर्माना, या दोनों; दूसरों को परेशान करते हुए (धारा 296)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
धारा 294(1) के अनुसार कोई वस्तु 'अश्लील' कब मानी जाती है?
आदर्श उत्तर
धारा 294(1) के अनुसार पुस्तक, चित्र, निरूपण या कोई वस्तु, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक रूप में सामग्री का प्रदर्शन भी आता है, अश्लील तब है जब वह कामोत्तेजक हो या कामुक रुचि को उकसाए, या समग्र रूप से उसे पढ़ने, देखने या सुनने की संभावना वाले व्यक्तियों को भ्रष्ट और पथभ्रष्ट करने की प्रवृत्ति रखे।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
धारा 294 और 295 में अंतर बताइए।
आदर्श उत्तर
धारा 294(2) अश्लील वस्तुओं की बिक्री, वितरण, प्रदर्शन, आयात-निर्यात और विज्ञापन आदि पर है; पहली दोषसिद्धि पर दो वर्ष और ₹5,000 तक, बाद में पाँच वर्ष और ₹10,000 तक। धारा 295 वही वस्तुएँ बालक को देने पर है; तीन वर्ष और ₹2,000 तक, बाद में सात वर्ष और ₹5,000 तक।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
भारतीय न्याय संहिता की धारा 294 में अश्लील सामग्री के प्रसार से जुड़े अपराध, सज़ा और अपवाद की विवेचना कीजिए।
आदर्श उत्तर
धारा 294(1) अश्लील को परिभाषित करती है: कामोत्तेजक या कामुक रुचि को उकसाने वाली, या भ्रष्ट और पथभ्रष्ट करने की प्रवृत्ति वाली वस्तु, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक सामग्री का प्रदर्शन भी आता है। धारा 294(2) में बेचना, वितरित करना, प्रदर्शित करना, बनाना या रखना, आयात-निर्यात, कारोबार में भाग, विज्ञापन और प्रस्ताव या प्रयास अपराध हैं। पहली दोषसिद्धि पर कारावास दो वर्ष तक और जुर्माना ₹5,000 तक; बाद की पर पाँच वर्ष तक और ₹10,000 तक। विज्ञान, साहित्य, कला या विद्या के हित में उचित सिद्ध प्रकाशन, धार्मिक प्रयोजन के लिए सद्भावपूर्वक रखी वस्तु, प्राचीन स्मारक, मंदिर और रथ पर निरूपण अपवाद हैं।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 294, 295 और 296 के अंतर्गत अपराध और दंड की विवेचना कीजिए।" पहली पंक्ति में तीनों धाराओं के शीर्षक अंग्रेज़ी में लिखें; सीमा 100 शब्द है, इसलिए हर धारा की एक पंक्ति और सज़ाएँ दें।
मुख्य भाग
- 294: अश्लील की परिभाषा और कृत्य (बिक्री, प्रदर्शन, आयात-निर्यात, विज्ञापन); सज़ा 2 वर्ष और ₹5,000, बाद में 5 वर्ष और ₹10,000; अपवाद
- 295: बालक (18 वर्ष से कम) को ऐसी वस्तुएँ; सज़ा 3 वर्ष और ₹2,000, बाद में 7 वर्ष और ₹5,000
- 296: सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य या गीत, दूसरों को परेशान करते हुए; सज़ा 3 माह तक, या ₹1,000 तक जुर्माना, या दोनों
निष्कर्ष
निष्कर्ष: बालक के मामले में सज़ा अधिक कठोर रखकर संहिता सार्वजनिक शालीनता और बालकों की सुरक्षा दोनों की रक्षा करती है।
अतिरिक्त मूल्य
- अंग्रेज़ी शब्द: lascivious, prurient interest, deprave and corrupt, to the annoyance of others
- IPC क्रम केवल अध्ययन-सहायक: 292, 293, 294
- धारा 2(3): बालक, अठारह वर्ष से कम
त्वरित पुनरावृत्ति
- धारा 270: सार्वजनिक उपद्रव; कार्य या अवैध लोप; जनता को सामान्य हानि, ख़तरा या परेशानी; सुविधा या लाभ बचाव नहीं; (IPC 268)
- धारा 294(1): अश्लील = कामोत्तेजक या कामुक रुचि को उकसाने वाली, या भ्रष्ट और पथभ्रष्ट करने की प्रवृत्ति; इलेक्ट्रॉनिक प्रदर्शन भी (IPC 292)
- धारा 294(2): (a) बिक्री आदि, (b) आयात-निर्यात, (c) कारोबार में भाग, (d) विज्ञापन, (e) प्रस्ताव या प्रयास
- 294(2) की सज़ा: 2 वर्ष और ₹5,000 तक; बाद में 5 वर्ष और ₹10,000 तक
- 294 का अपवाद: विज्ञान, साहित्य, कला, विद्या; धार्मिक प्रयोजन; प्राचीन स्मारक; मंदिर और रथ
- धारा 295: बालक को; 3 वर्ष और ₹2,000 तक; बाद में 7 वर्ष और ₹5,000 तक (IPC 293)
- धारा 296: सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य, या उसके पास अश्लील गीत; 3 माह तक, या ₹1,000 तक, या दोनों (IPC 294)
- बालक: अठारह वर्ष से कम (धारा 2(3))
याद रखने योग्य शब्द
- public nuisance
- obscene
- lascivious
- prurient interest
- child
- annoyance of others
- 270
- 294
- 295
- 296