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पेपर III · इकाई III · भाग ख (विधि)

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007, धारा 9 से 25: आदेश, अपील, वृद्धाश्रम और अपराध

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 की धारा 9 से 25: भरण-पोषण का आदेश, ब्याज, अपील अधिकरण और अपील, भरण-पोषण अधिकारी, वृद्धाश्रम, चिकित्सा, संपत्ति के अंतरण का शून्य होना, परित्याग का अपराध और विचारण।

  • भरण-पोषण आदेश
  • अपील अधिकरण
  • वृद्धाश्रम
  • धारा 23
  • परित्याग
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007: Sections 1-25." इस पृष्ठ पर धारा 9 से 25 हैं: भरण-पोषण का आदेश (धारा 9 से 14), अपील अधिकरण और अपील (धारा 15 और 16), विधिक प्रतिनिधित्व और भरण-पोषण अधिकारी (धारा 17 और 18), वृद्धाश्रम (धारा 19), चिकित्सा (धारा 20), जागरूकता (धारा 21), प्राधिकारी (धारा 22), संपत्ति का अंतरण (धारा 23), परित्याग का अपराध (धारा 24) और संज्ञान (धारा 25)। धारा 1 से 8 पिछले पृष्ठ पर हैं। अधिनियम-पाठ का मूल संदर्भ दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) का है; उसकी जगह अब BNSS 2023 है, इसलिए उन संदर्भों के वर्तमान क्रमांक के लिए देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं है; वास्तविक मामले में अधिकृत विधिक सहायता लें।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • इस पृष्ठ की धाराओं (9 से 25) पर पिछले पेपरों में कोई प्रश्न नहीं आया। अधिनियम के दोनों प्रश्न (2023 में 'Children' और 2021 में 'Relative') धारा 2 की परिभाषाओं पर थे, जो पिछले पृष्ठ पर हल सहित हैं। इसलिए इस पृष्ठ की तैयारी पाठ पर टिकी है: समय-सीमाएँ, राशियाँ और कौन-सा प्राधिकारी क्या करता है।
  • बीते पेपरों में विधि के अधिकांश प्रश्न परिभाषा या धारा के पाठ पर आए (2013 से 2024 के पेपरों में देखा गया रुझान, परीक्षा का नियम नहीं)। इस पृष्ठ में सबसे अधिक पाठ-योग्य अंश हैं: भत्ते की अधिकतम सीमा (₹10,000 प्रतिमाह), अपील की अवधि (साठ दिन), जमा करने की अवधि (तीस दिन), ब्याज की सीमा (पाँच से अठारह प्रतिशत), वृद्धाश्रम का प्रावधान, और परित्याग की सज़ा।
  • यह पृष्ठ अधिनियम की व्यावहारिक रीढ़ है: भरण-पोषण के आदेश से लेकर संपत्ति के अंतरण को शून्य घोषित करने (धारा 23) तक। 10 अंक के प्रश्न में अधिनियम के उपायों का क्रम लिखने के लिए यही धाराएँ काम आएँगी।

पहले सरल भाषा में

पिछले पृष्ठ पर तय हुआ कि कौन माँग सकता है और अधिकरण में दावा कैसे चलता है। अब सवाल है: अधिकरण क्या आदेश देगा, आदेश न माना जाए तो क्या होगा, और यदि कोई पक्ष संतुष्ट न हो तो आगे कहाँ जाएगा। धारा 9 से 18 यही बताती हैं: मासिक भत्ते का आदेश, उसमें बदलाव, उसका पालन, तीस दिन में जमा करना, ब्याज, और असंतोष की स्थिति में ज़िला स्तर का अपील अधिकरण, जिसकी अध्यक्षता ज़िला मजिस्ट्रेट से निम्न पद का अधिकारी नहीं करता।

इसके बाद अधिनियम का दूसरा पहलू शुरू होता है: कल्याण। राज्य सरकार को ज़िले-ज़िले में वृद्धाश्रम खोलने की छूट (धारा 19), सरकारी अस्पतालों में बुज़ुर्गों के लिए बिस्तर, अलग कतार और वृद्धावस्था-चिकित्सा की सुविधा (धारा 20), जागरूकता और प्रशिक्षण (धारा 21), और ज़िला मजिस्ट्रेट के माध्यम से जीवन और संपत्ति की रक्षा की कार्ययोजना (धारा 22)। इसी में एक शक्तिशाली उपाय है: यदि बुज़ुर्ग ने इस शर्त पर संपत्ति दी कि लेने वाला उनकी बुनियादी ज़रूरतें पूरी करेगा, और वह ऐसा नहीं करता, तो अंतरण को अधिकरण शून्य घोषित कर सकता है (धारा 23)। अंत में दो अपराध-संबंधी धाराएँ: बुज़ुर्ग को पूरी तरह छोड़ देने (परित्याग) का दंड (धारा 24) और ऐसे अपराध की प्रकृति तथा विचारण (धारा 25)।

धारा 9 से 14: भरण-पोषण का आदेश और उसका पालन

धाराविषयपाठ का आशयमुख्य शब्द
9(1)भरण-पोषण का आदेशयदि बच्चे या नातेदार अपने भरण-पोषण में असमर्थ वरिष्ठ नागरिक की उपेक्षा करें या उससे इनकार करें, तो अधिकरण, इसे संतुष्ट होने पर, उन्हें ऐसी मासिक दर पर भत्ता देने का आदेश दे सकता है जो वह उचित समझे और वह वरिष्ठ नागरिक को उस रीति से दिया जाएगा जो अधिकरण समय-समय पर निर्देशित करे।neglect or refuse to maintain; monthly allowance at such monthly rate ... as the Tribunal may deem fit
9(2)अधिकतम भत्ताअधिकरण द्वारा दिया जा सकने वाला अधिकतम भरण-पोषण भत्ता वह होगा जो राज्य सरकार विहित करे, और वह दस हज़ार रुपये प्रतिमाह से अधिक नहीं होगा।shall not exceed ten thousand rupees per month
10भत्ते में परिवर्तनभरण-पोषण पाने वाले व्यक्ति की ओर से भूल, तथ्य की ग़लती या परिस्थिति में परिवर्तन साबित होने पर अधिकरण भत्ते में उचित परिवर्तन कर सकता है। यदि किसी सक्षम दीवानी न्यायालय के निर्णय के कारण आदेश रद्द या परिवर्तित होना चाहिए, तो अधिकरण वैसा करेगा।misrepresentation or mistake of fact or a change in the circumstances
11आदेश का प्रवर्तनआदेश की प्रति, कार्यवाही के खर्च के आदेश सहित, वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता को बिना शुल्क दी जाएगी; आदेश वहाँ के अधिकरण द्वारा प्रवर्तित हो सकता है जहाँ वह व्यक्ति रहता है जिसके विरुद्ध आदेश है। भरण-पोषण आदेश का प्रभाव और बल दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अध्याय IX के आदेश जैसा है और उसी रीति से निष्पादित होगा।without payment of any fee; same force and effect as an order passed under Chapter IX of the Code of Criminal Procedure, 1973
12विकल्पयदि वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता दंड प्रक्रिया संहिता के उसी अध्याय के अंतर्गत भी और इस अधिनियम के अंतर्गत भी भरण-पोषण पाने के अधिकारी हों, तो वे किसी एक में दावा कर सकते हैं, दोनों में नहीं।under either of those Acts but not under both
13राशि जमा करनाआदेश होने पर, बच्चे या नातेदार आदेश की घोषणा की तिथि से तीस दिन के भीतर पूरी राशि अधिकरण द्वारा निर्देशित रीति से जमा करेंगे।within thirty days of the date of announcing the order
14ब्याजआदेश के साथ अधिकरण भरण-पोषण की राशि के अतिरिक्त साधारण ब्याज (simple interest) देने का निर्देश दे सकता है, जो आवेदन की तिथि से पहले की तिथि से नहीं होगा, और जिसकी दर पाँच प्रतिशत से कम और अठारह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। परंतुक: प्रारंभ के समय किसी न्यायालय में दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय IX का भरण-पोषण का आवेदन लंबित हो तो माता-पिता के अनुरोध पर वह वापस लेने दिया जाएगा और वे अधिकरण में आवेदन कर सकेंगे।not less than five per cent. and not more than eighteen per cent.

धारा 15 से 18: अपील अधिकरण, अपील, प्रतिनिधित्व और भरण-पोषण अधिकारी

धाराविषयपाठ का आशयमुख्य शब्द
15अपील अधिकरण का गठनराज्य सरकार राजपत्र अधिसूचना द्वारा प्रत्येक ज़िले के लिए एक अपील अधिकरण गठित कर सकती है। उसकी अध्यक्षता ज़िला मजिस्ट्रेट से निम्न पद का अधिकारी नहीं करेगा।one Appellate Tribunal for each district; presided over by an officer not below the rank of District Magistrate
16(1)अपील की अवधिअधिकरण के आदेश से व्यथित वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता आदेश की तिथि से साठ दिन के भीतर अपील अधिकरण में अपील कर सकते हैं। पहला परंतुक: अपील में भी जिन बच्चों या नातेदार को राशि देनी है, वे अपील अधिकरण की बताई रीति से राशि देते रहेंगे। दूसरा परंतुक: पर्याप्त कारण से देर होने पर अपील अधिकरण साठ दिन बाद भी अपील स्वीकार कर सकता है।within sixty days from the date of the order; shall continue to pay; prevented by sufficient cause
16(2) से (4)अपील की कार्यवाहीअपील मिलने पर प्रत्यर्थी को नोटिस; अपील अधिकरण अधिकरण की कार्यवाही का अभिलेख मँगा सकता है; अपील और अभिलेख की जाँच के बाद अपील स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है।cause a notice to be served upon the respondent; either allow or reject the appeal
16(5)निर्णय और अंतिमताअपील अधिकरण अपील का निर्णय करेगा और उसका आदेश अंतिम होगा। परंतुक: किसी भी अपील को तब तक अस्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक दोनों पक्षों को स्वयं या विधिवत प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से सुनवाई का अवसर न दिया गया हो।the order of the Appellate Tribunal shall be final
16(6), (7)समय और प्रतिअपील अधिकरण अपील मिलने के एक माह के भीतर लिखित आदेश सुनाने का प्रयास करेगा; उप-धारा (5) के आदेश की प्रति दोनों पक्षों को निःशुल्क भेजी जाएगी।endeavour to pronounce its order in writing within one month; free of cost
17विधिक प्रतिनिधित्वकिसी भी कानून में कुछ भी होते हुए, अधिकरण या अपील अधिकरण की कार्यवाही का कोई पक्ष विधि-व्यवसायी (legal practitioner) के माध्यम से प्रतिनिधित्व नहीं कराएगा।no party ... shall be represented by a legal practitioner
18भरण-पोषण अधिकारीराज्य सरकार ज़िला समाज कल्याण अधिकारी या उससे अन्यून पद के अधिकारी को भरण-पोषण अधिकारी (Maintenance Officer) नामित करेगी। यह अधिकारी माता-पिता के चाहने पर अधिकरण या अपील अधिकरण की कार्यवाही में उनका प्रतिनिधित्व करेगा।designate the District Social Welfare Officer or an officer not below the rank ... as Maintenance Officer

तुलना: अधिकरण और अपील अधिकरण

भरण-पोषण अधिकरण (धारा 7)

स्तरउप-खंड (प्रत्येक उप-खंड के लिए एक या अधिक)

अध्यक्षउपखंड अधिकारी (SDO) से निम्न पद का नहीं

गठन की भाषा'shall ... constitute', अधिनियम के प्रारंभ से छह माह के भीतर

कार्यधारा 5 के अंतर्गत भरण-पोषण के आदेश का निर्णय

समय-सीमाएँअंतरिम आवेदन 90 दिन (एक बार 30 दिन बढ़ सकता है); सुलह अधिकारी का निष्कर्ष एक माह

आदेश की प्रकृतिअपील योग्य

अपील अधिकरण (धारा 15)

स्तरज़िला (प्रत्येक ज़िले के लिए एक)

अध्यक्षज़िला मजिस्ट्रेट से निम्न पद का नहीं

गठन की भाषा'may ... constitute'

कार्यअधिकरण के आदेश के विरुद्ध अपील पर निर्णय

समय-सीमाएँअपील 60 दिन में (देरी का कारण पर्याप्त हो तो बाद में भी); आदेश सुनाने का प्रयास एक माह में

आदेश की प्रकृतिअंतिम (धारा 16(5))

धारा 19 से 22: कल्याण, चिकित्सा, जागरूकता और संरक्षण

धाराविषयपाठ का आशयमुख्य शब्द
19(1)वृद्धाश्रमराज्य सरकार आवश्यकतानुसार, चरणबद्ध रूप में, सुलभ स्थानों पर वृद्धाश्रम स्थापित और संचालित कर सकती है, जिसकी शुरुआत प्रत्येक ज़िले में कम से कम एक से हो, ताकि उनमें न्यूनतम एक सौ पचास निर्धन (indigent) वरिष्ठ नागरिकों को ठहराया जा सके।at least one in each district to accommodate ... a minimum of one hundred fifty senior citizens who are indigent
19(2)प्रबंधन की योजनाराज्य सरकार वृद्धाश्रमों के प्रबंधन की योजना विहित कर सकती है, जिसमें मानक और चिकित्सा देखभाल और मनोरंजन के साधनों वाली सेवाओं के प्रकार हों। स्पष्टीकरण: 'indigent' वह वरिष्ठ नागरिक है जिसके पास, राज्य सरकार के समय-समय पर निर्धारण के अनुसार, अपना भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं।scheme for management of old age homes; 'indigent'
20चिकित्सा सहायताराज्य सरकार सुनिश्चित करेगी कि: (i) सरकारी या पूर्णतः या आंशिक रूप से सरकार-वित्तपोषित अस्पताल यथासंभव सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए बिस्तर दें; (ii) उनके लिए अलग कतारें हों; (iii) दीर्घकालिक, असाध्य और क्षयकारी रोगों के उपचार की सुविधा का विस्तार हो; (iv) वृद्धावस्था के दीर्घकालिक रोगों और बुढ़ापे पर शोध का विस्तार हो; (v) प्रत्येक ज़िला अस्पताल में वृद्धावस्था-रोगियों (geriatric) के लिए आरक्षित सुविधाएँ हों, जिनका नेतृत्व वृद्धावस्था-चिकित्सा में अनुभवी चिकित्सा अधिकारी करे।beds for all senior citizens as far as possible; separate queues; geriatric patients in every district hospital
21प्रचार और जागरूकताराज्य सरकार सुनिश्चित करेगी कि: (i) टेलीविज़न, रेडियो और मुद्रित माध्यमों से नियमित अंतराल पर अधिनियम का व्यापक प्रचार हो; (ii) केंद्र और राज्य के अधिकारियों (पुलिस और न्यायिक सेवा के सदस्यों सहित) को समय-समय पर संवेदनशीलता और जागरूकता का प्रशिक्षण मिले; (iii) विधि, गृह, स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े मंत्रालयों और विभागों की सेवाओं में प्रभावी समन्वय और उसकी आवधिक समीक्षा हो।wide publicity; periodic sensitization and awareness training; effective co-ordination
22(1)प्राधिकारीराज्य सरकार ज़िला मजिस्ट्रेट को ऐसी शक्तियाँ और कर्तव्य दे सकती है जो अधिनियम के उचित पालन के लिए आवश्यक हों; ज़िला मजिस्ट्रेट अपने अधीनस्थ अधिकारी को निर्दिष्ट कर सकता है जो वे शक्तियाँ और कर्तव्य निभाएगा।confer such powers and impose such duties on a District Magistrate
22(2)कार्ययोजनाराज्य सरकार वरिष्ठ नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए एक व्यापक कार्ययोजना (comprehensive action plan) विहित करेगी।comprehensive action plan for providing protection of life and property of senior citizens

धारा 23: संपत्ति का अंतरण कुछ परिस्थितियों में शून्य

उप-धारापाठ का आशयमुख्य शब्द
23(1)जो वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के प्रारंभ के बाद अपनी संपत्ति दान या अन्य प्रकार से इस शर्त पर अंतरित करता है कि अंतरिती उसे बुनियादी सुविधाएँ और बुनियादी शारीरिक ज़रूरतें देगा, और अंतरिती ऐसा करने से इनकार करता है या विफल रहता है, तो वह अंतरण धोखे, दबाव या अनुचित प्रभाव से किया गया माना जाएगा और अंतरक के विकल्प पर अधिकरण द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता है।transferred by way of gift or otherwise ... subject to the condition that the transferee shall provide the basic amenities and basic physical needs ... deemed to have been made by fraud or coercion or under undue influence ... declared void by the Tribunal
23(2)यदि वरिष्ठ नागरिक को किसी संपदा से भरण-पोषण पाने का अधिकार है और वह संपदा या उसका भाग अंतरित हो जाए, तो भरण-पोषण का अधिकार अंतरिती के विरुद्ध लागू कराया जा सकता है यदि अंतरिती को अधिकार की सूचना थी या अंतरण निःशुल्क था; पर प्रतिफल देने वाले और बिना सूचना वाले अंतरिती के विरुद्ध नहीं।if the transferee has notice of the right, or if the transfer is gratuitous; but not against the transferee for consideration and without notice of right
23(3)यदि वरिष्ठ नागरिक उप-धारा (1) और (2) के अधिकारों को लागू कराने में अक्षम है, तो धारा 5(1) के स्पष्टीकरण में बताए संगठनों में से कोई उसकी ओर से कार्रवाई कर सकता है।action may be taken on his behalf by any of the organisation

धारा 24 और 25: अपराध, दंड और विचारण

धाराविषयपाठ का आशयमुख्य शब्द
24वरिष्ठ नागरिक का परित्याग (exposure and abandonment)जिस व्यक्ति पर वरिष्ठ नागरिक की देखभाल या संरक्षण का दायित्व है और जो उसे पूरी तरह छोड़ देने के आशय से किसी स्थान पर छोड़ देता है, उसे किसी भी प्रकार का कारावास, तीन माह तक, या जुर्माना, पाँच हज़ार रुपये तक, या दोनों से दंडित किया जाएगा।having the care or protection of senior citizen leaves such senior citizen in any place with the intention of wholly abandoning; three months or fine which may extend to five thousands rupees or with both
25(1)अपराध की प्रकृतिदंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में कुछ भी होते हुए, इस अधिनियम का प्रत्येक अपराध संज्ञेय और जमानतीय होगा।every offence under this Act shall be cognizable and bailable
25(2)विचारणइस अधिनियम का अपराध मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षेप में (summarily) विचारित होगा।tried summarily by a Magistrate

जुर्माने की सीमा पाठ में 'five thousands rupees' लिखी है (₹5,000)।

कौन क्या करता है: प्राधिकारियों की तालिका

प्राधिकारीभूमिकाधारा
भरण-पोषण अधिकरण (उपखंड स्तर)आवेदन पर जाँच, अंतरिम और अंतिम भत्ते का आदेश, ब्याज, आदेश में परिवर्तन, संपत्ति के अंतरण को शून्य घोषित करना5, 9, 10, 14, 23
अपील अधिकरण (ज़िला स्तर)अधिकरण के आदेश के विरुद्ध अपील पर अंतिम निर्णय15, 16
भरण-पोषण अधिकारीमाता-पिता के चाहने पर कार्यवाही में उनका प्रतिनिधित्व; राज्य द्वारा नामित18 (और 6(6) के स्पष्टीकरण में सुलह अधिकारी)
ज़िला मजिस्ट्रेटराज्य सरकार द्वारा दी गई शक्तियों और कर्तव्यों का निर्वहन; अपने अधीनस्थ अधिकारी को निर्दिष्ट कर सकता है22(1)
राज्य सरकारअधिकरण और अपील अधिकरण का गठन, वृद्धाश्रम, चिकित्सा, प्रचार, कार्ययोजना, नियम7, 15, 18, 19 से 22
मजिस्ट्रेटपरित्याग जैसे अपराधों का संक्षिप्त विचारण25(2)

आदेश से लेकर अपील तक: ज़रूरी बारीकियाँ

धारा 9(2) की अधिकतम सीमा दो परतों में है: भत्ता वही हो सकता है जो राज्य सरकार के नियमों में विहित हो, और वह किसी हालत में दस हज़ार रुपये प्रतिमाह से अधिक नहीं। यानी राज्य सरकार की सीमा इससे कम हो सकती है, पर इससे अधिक नहीं। परीक्षा में 'Rs 10,000 per month' के साथ 'as may be prescribed by the State Government' भी लिखें।

धारा 11(2) और 12 मिलकर बताती हैं कि इस अधिनियम का भत्ता और पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय IX (भरण-पोषण, जिसमें माता-पिता भी आते थे) का भत्ता एक जैसा बल रखता है, पर बुज़ुर्ग दोनों में से एक ही रास्ता चुन सकते हैं, दोनों नहीं (धारा 12)। यह प्रावधान एक ही बात के लिए दोहरी वसूली रोकता है। (पाठ का संदर्भ CrPC 1973 का है; वर्तमान क्रमांक के लिए देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ।)

धारा 13 और 14 आदेश के बाद का क्रम बाँधती हैं: आदेश की घोषणा से तीस दिन के भीतर पूरी राशि जमा करनी है, और अधिकरण चाहे तो भत्ते के ऊपर साधारण ब्याज भी दे सकता है, जो पाँच से अठारह प्रतिशत के बीच होगा और आवेदन की तिथि से पहले से नहीं लगेगा। 'साधारण ब्याज' का अर्थ है कि ब्याज केवल मूल राशि पर लगता है, ब्याज पर ब्याज नहीं।

अपील में तीन बातें याद रखने लायक हैं। पहली, केवल वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता को अपील का अधिकार धारा 16(1) में लिखा है। दूसरी, अपील के दौरान भी बच्चे या नातेदार को अपील अधिकरण की बताई रीति से राशि देते रहना है (पहला परंतुक); यानी अपील करना भुगतान रोकने का तरीक़ा नहीं है। तीसरी, अपील अधिकरण का आदेश अंतिम है (धारा 16(5)), और किसी अपील को बिना सुनवाई का अवसर दिए अस्वीकार नहीं किया जा सकता।

धारा 17 सबसे अलग है: अधिकरण या अपील अधिकरण में कोई भी पक्ष अधिवक्ता के माध्यम से प्रतिनिधित्व नहीं कराएगा। जिनके पास पैसा या साधन कम है, उनके लिए यह कार्यवाही को सरल रखने का तरीक़ा है। इसी कमी की भरपाई धारा 18 का भरण-पोषण अधिकारी करता है, जो माता-पिता के चाहने पर कार्यवाही में उनका प्रतिनिधित्व करता है।

धारा 23 में अंतरण को शून्य घोषित करने का अधिकार अधिकरण को है, और वह अंतरक के विकल्प पर है: यानी वरिष्ठ नागरिक चाहे तो अंतरण को बने रहने दे सकता है। धारा 23(1) की मुख्य कसौटियाँ तीन हैं: अंतरण 'अधिनियम के प्रारंभ के बाद' हो, उसमें 'बुनियादी सुविधाएँ और बुनियादी शारीरिक ज़रूरतें' पूरी करने की शर्त हो, और अंतरिती ऐसा करने से इनकार करे या विफल रहे। तब कानून मान लेता है कि अंतरण धोखे, दबाव या अनुचित प्रभाव से हुआ।

धारा 24 का दंड हल्का है (तीन माह तक कारावास या पाँच हज़ार रुपये तक जुर्माना या दोनों), पर कसौटी सख़्त है: जिसके पास वरिष्ठ नागरिक की देखभाल या संरक्षण है, और जो उसे 'पूरी तरह छोड़ देने के आशय' (intention of wholly abandoning) से किसी स्थान पर छोड़ देता है। धारा 25 के अनुसार अपराध संज्ञेय (police बिना वारंट कार्रवाई कर सकती है) और जमानतीय है और मजिस्ट्रेट संक्षेप में उसका विचारण करता है।

आदेश से अपील तक का क्रम

  1. अधिकरण का भत्ता-आदेश (धारा 9)

    राशि राज्य के नियम से विहित; अधिकतम ₹10,000 प्रतिमाह

  2. आदेश की घोषणा के तीस दिन के भीतर जमा (धारा 13)

    साधारण ब्याज: पाँच से अठारह प्रतिशत (धारा 14)

  3. आदेश का प्रवर्तन (धारा 11)

    प्रति निःशुल्क; दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय IX जैसा बल

  4. असंतोष: अपील अधिकरण को साठ दिन में (धारा 16(1))

    ज़िला स्तर; अध्यक्ष ज़िला मजिस्ट्रेट से निम्न नहीं (धारा 15)

  5. अपील अधिकरण का आदेश अंतिम (धारा 16(5))

    एक माह में आदेश सुनाने का प्रयास (धारा 16(6))

कल्याण और संरक्षण के उपाय (धारा 19 से 25)

वरिष्ठ नागरिकों का कल्याण और संरक्षण

वृद्धाश्रम (धारा 19)

  • हर ज़िले में कम से कम एक से शुरुआत
  • न्यूनतम 150 निर्धन वरिष्ठ नागरिक
  • प्रबंधन की योजना और मानक

चिकित्सा (धारा 20)

  • बिस्तर और अलग कतार
  • दीर्घकालिक रोगों का उपचार और शोध
  • ज़िला अस्पताल में वृद्धावस्था-रोगियों की सुविधा

जागरूकता (धारा 21)

  • टीवी, रेडियो, मुद्रित माध्यम
  • पुलिस और न्यायिक सेवा का प्रशिक्षण
  • विभागों में समन्वय

संरक्षण (धारा 22 और 23)

  • ज़िला मजिस्ट्रेट और कार्ययोजना
  • संपत्ति का अंतरण शून्य घोषित

अपराध (धारा 24 और 25)

  • परित्याग: तीन माह तक या ₹5,000 तक या दोनों
  • संज्ञेय, जमानतीय, संक्षिप्त विचारण

मुख्य तथ्य

भत्ते की अधिकतम सीमा (धारा 9(2))
राज्य द्वारा विहित, और दस हज़ार रुपये प्रतिमाह से अधिक नहीं
जमा करने की अवधि (धारा 13)
आदेश की घोषणा से तीस दिन
ब्याज (धारा 14)
साधारण ब्याज, पाँच प्रतिशत से कम नहीं और अठारह प्रतिशत से अधिक नहीं
अपील अधिकरण (धारा 15)
प्रत्येक ज़िले के लिए एक; अध्यक्ष ज़िला मजिस्ट्रेट से निम्न पद का अधिकारी नहीं
अपील की अवधि (धारा 16(1))
आदेश की तिथि से साठ दिन; पर्याप्त कारण पर देरी क्षम्य; अपील अधिकरण का आदेश अंतिम (16(5))
विधिक प्रतिनिधित्व (धारा 17)
अधिकरण या अपील अधिकरण में विधि-व्यवसायी से प्रतिनिधित्व नहीं
वृद्धाश्रम (धारा 19)
हर ज़िले में कम से कम एक से शुरुआत; न्यूनतम 150 निर्धन वरिष्ठ नागरिकों के लिए
संपत्ति का अंतरण (धारा 23)
बुनियादी सुविधाएँ देने की शर्त पूरी न हो तो अंतरक के विकल्प पर अधिकरण द्वारा शून्य
परित्याग (धारा 24)
तीन माह तक कारावास, या ₹5,000 तक जुर्माना, या दोनों
अपराध की प्रकृति (धारा 25)
संज्ञेय और जमानतीय; मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त विचारण
अंतिम जाँच
2 अक्तूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • भत्ते की अधिकतम सीमा ₹10,000 को निश्चित राशि बताना। धारा 9(2) में राशि राज्य सरकार द्वारा विहित होती है और वह ₹10,000 प्रतिमाह से अधिक नहीं हो सकती।
  • अपील की अवधि तीस दिन या नब्बे दिन लिखना। धारा 16(1) में साठ दिन है (पर्याप्त कारण पर देरी क्षम्य); तीस दिन जमा करने की अवधि है (धारा 13) और नब्बे दिन अंतरिम आवेदन के निपटारे की अवधि (धारा 5(4))।
  • अधिकरण और अपील अधिकरण की अध्यक्षता का पद उलट देना: अधिकरण में उपखंड अधिकारी (SDO) से निम्न नहीं; अपील अधिकरण में ज़िला मजिस्ट्रेट से निम्न नहीं।
  • धारा 17 में अधिवक्ता से प्रतिनिधित्व की अनुमति मानना। पाठ में विधि-व्यवसायी के माध्यम से प्रतिनिधित्व पर रोक है।
  • धारा 23 में अंतरण अपने आप शून्य मान लेना। शर्त पूरी न होने पर अधिकरण 'at the option of the transferor' शून्य घोषित कर सकता है।
  • परित्याग के लिए 'हर बार छोड़ने' पर दंड समझना। धारा 24 की शर्त 'पूरी तरह छोड़ देने का आशय' (intention of wholly abandoning) है और दंड तीन माह या ₹5,000 या दोनों है।
  • इस अधिनियम का अपराध असंज्ञेय या अजमानतीय लिखना। धारा 25(1): संज्ञेय और जमानतीय; धारा 25(2): संक्षिप्त विचारण।