भारतीय न्याय संहिता 2023, धारा 189 से 191: विधिविरुद्ध जमाव और बलवा
भारतीय न्याय संहिता 2023 के अध्याय XI की तीन धाराएँ: विधिविरुद्ध जमाव (धारा 189, नौ उप-धाराएँ), जमाव के हर सदस्य का दायित्व (धारा 190) और बलवा (धारा 191), हर सज़ा पाठ के अनुसार।
- BNS 2023
- धारा 189
- धारा 190
- धारा 191
- विधिविरुद्ध जमाव
- बलवा
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023: ... Sections 189-191, 194-197, 270, 294-296." इस पृष्ठ पर धारा 189 (विधिविरुद्ध जमाव, unlawful assembly), धारा 190 (जमाव के हर सदस्य का दायित्व) और धारा 191 (बलवा, rioting) हैं; पाठ राजपत्र (25-12-2023) के अंग्रेज़ी पाठ से लिया गया है। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं है; वास्तविक मामले में अधिकृत विधिक सहायता लें।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- पिछले पेपरों में (2013, 2016, 2018, 2021, 2023 और 2024, यानी जिन छह पेपरों के प्रश्न उपलब्ध हैं) इन धाराओं पर कोई प्रश्न नहीं आया। ये धाराएँ सिलेबस में 2026 में नई जुड़ी हैं, इसलिए तैयारी का आधार धारा का पाठ, उसकी उप-धाराएँ और सज़ा की अवधि है।
- धारा 189 की नौ उप-धाराएँ हैं और हर एक की अपनी सज़ा या शर्त है; किस उप-धारा में कितने महीने या वर्ष की सज़ा है, यह तालिका में याद करने लायक है। बीते पेपरों में विधि के प्रश्न अधिकतर परिभाषा या सज़ा के पाठ पर रहे (2 और 5 अंक), इसलिए 'विधिविरुद्ध जमाव की परिभाषा' और 'बलवे की सज़ा' जैसे प्रश्न इसी ढाँचे के हैं; यह परीक्षा का नियम नहीं, केवल रुझान है।
- तीनों धाराएँ एक क्रम में पढ़ी जाती हैं: जमाव अपने में अपराध हो सकता है (189), जमाव का हर सदस्य उसके साझा उद्देश्य से हुए अपराध का दोषी बन सकता है (190), और बल या हिंसा होते ही वही जमाव बलवा बन जाता है (191)।
पहले सरल भाषा में
किसी मेले में पाँच-सात लोग साथ खड़े हों तो यह भीड़ भर है। पर यदि वही लोग मिलकर किसी खेत पर ज़बरदस्ती कब्ज़ा करने या किसी की राह रोकने पर तुल जाएँ, तो कानून की नज़र में वह जमाव बदल जाता है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 का अध्याय XI (सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध, Offences against the public tranquillity) इसी स्थिति को तीन सीढ़ियों में बाँटता है। पहली सीढ़ी पाँच या अधिक लोगों का ऐसा जमाव है जिसका साझा उद्देश्य कानून द्वारा गिनाए पाँच उद्देश्यों में से कोई एक हो; इसे विधिविरुद्ध जमाव (unlawful assembly) कहते हैं (धारा 189)। दूसरी सीढ़ी यह है कि उस जमाव में कोई अपराध हो जाए तो उस समय जमाव में मौजूद हर सदस्य उसका दोषी माना जाए (धारा 190)। तीसरी सीढ़ी तब आती है जब जमाव या उसका कोई सदस्य साझे उद्देश्य के लिए बल या हिंसा करे: तब जमाव का हर सदस्य बलवे (rioting) का दोषी है (धारा 191)।
इन धाराओं का एक व्यावहारिक पक्ष है। 'पाँच या अधिक' की संख्या, 'साझा उद्देश्य' (common object), और 'बल या हिंसा' तीन कसौटियाँ हैं जो अलग-अलग धाराओं को चलाती हैं। जब पुलिस या मजिस्ट्रेट जमाव को बिखरने का आदेश देता है, तब आदेश के बाद वहाँ टिके रहना भी दंडनीय है (धारा 189(3) और (5))। परीक्षा में इन कसौटियों को पहचानना और हर उप-धारा की सज़ा याद रखना ही मुख्य काम है।
धारा 189(1): विधिविरुद्ध जमाव (unlawful assembly) की परिभाषा
| खंड | साझा उद्देश्य (common object) | अंग्रेज़ी पाठ का मुख्य अंश |
|---|---|---|
| (a) | आपराधिक बल या आपराधिक बल के प्रदर्शन से केंद्र सरकार, किसी राज्य सरकार, संसद, किसी राज्य के विधानमंडल, या अपनी वैध शक्ति का प्रयोग करते हुए किसी लोक सेवक को आतंकित करना। | to overawe by criminal force, or show of criminal force, the Central Government or any State Government or Parliament or the Legislature of any State, or any public servant in the exercise of the lawful power of such public servant |
| (b) | किसी कानून या वैध विधिक प्रक्रिया के निष्पादन का प्रतिरोध करना। | to resist the execution of any law, or of any legal process |
| (c) | कोई रिष्टि (mischief) या आपराधिक अतिचार (criminal trespass) या कोई अन्य अपराध करना। | to commit any mischief or criminal trespass, or other offence |
| (d) | आपराधिक बल या उसके प्रदर्शन से किसी संपत्ति पर कब्ज़ा लेना या किसी को रास्ते के अधिकार, पानी के उपयोग या अन्य अमूर्त अधिकार के उपभोग से वंचित करना, जो उसके कब्ज़े या उपभोग में है, या किसी अधिकार या कल्पित अधिकार को लागू कराना। | by means of criminal force, or show of criminal force, to any person, to take or obtain possession of any property, or to deprive any person of the enjoyment of a right of way, or of the use of water or other incorporeal right ... or to enforce any right or supposed right |
| (e) | आपराधिक बल या उसके प्रदर्शन से किसी व्यक्ति को वह करने के लिए बाध्य करना जिसे करने को वह कानूनन बाध्य नहीं है, या वह करने से रोकना जिसे करने का उसे कानूनन अधिकार है। | to compel any person to do what he is not legally bound to do, or to omit to do what he is legally entitled to do |
स्पष्टीकरण (Explanation): जो जमाव एकत्र होते समय विधिविरुद्ध नहीं था, वह बाद में विधिविरुद्ध जमाव बन सकता है (An assembly which was not unlawful when it assembled, may subsequently become an unlawful assembly)।
धारा 189(2) से (9): सज़ा और शर्तें, एक नज़र में
| उप-धारा | कौन दोषी है | सज़ा (पाठ के अनुसार) | IPC क्रम (अध्ययन-सहायक) |
|---|---|---|---|
| 189(2) | जो व्यक्ति उन तथ्यों को जानते हुए, जो किसी जमाव को विधिविरुद्ध बनाते हैं, जानबूझकर उसमें शामिल होता या बना रहता है: वह उसका सदस्य (member) कहलाता है | किसी भी प्रकार का कारावास (either description), छह माह तक, या जुर्माना, या दोनों | IPC 143 |
| 189(3) | जो ऐसे जमाव में शामिल होता या बना रहता है, यह जानते हुए कि उसे कानून में बताई रीति से बिखरने का आदेश दिया जा चुका है | किसी भी प्रकार का कारावास, दो वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों | IPC 145 |
| 189(4) | जो किसी घातक हथियार या ऐसी चीज़ से, जो हथियार की तरह प्रयोग होने पर मृत्यु कर सकती है, सशस्त्र होकर विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य है | किसी भी प्रकार का कारावास, दो वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों | IPC 144 |
| 189(5) | जो पाँच या अधिक व्यक्तियों के ऐसे जमाव में, जिससे लोक शांति भंग होने की संभावना है, बिखरने का वैध आदेश दिए जाने के बाद भी जानबूझकर शामिल होता या बना रहता है | किसी भी प्रकार का कारावास, छह माह तक, या जुर्माना, या दोनों; स्पष्टीकरण: यदि जमाव उप-धारा (1) का विधिविरुद्ध जमाव है तो अपराधी उप-धारा (3) के अंतर्गत दंडनीय | IPC 151 |
| 189(6) | जो किसी को विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य बनने के लिए किराये पर लेता, लगाता या नियोजित करता है, या ऐसे किराये, लगाने या नियोजन को बढ़ावा देता या उसमें मौन सहमति रखता है (promotes or connives at) | उसी रूप में दंडनीय जैसे वह स्वयं उस जमाव का सदस्य हो; और ऐसे व्यक्ति द्वारा उस भाड़े या नियोजन के अनुसरण में सदस्य के रूप में किए गए अपराध के लिए भी वैसे ही दंडनीय मानो उसने स्वयं वह अपराध किया हो | IPC 150 |
| 189(7) | जो अपने कब्ज़े, भार या नियंत्रण के किसी मकान या परिसर में ऐसे व्यक्तियों को शरण देता, स्वीकार करता या इकट्ठा करता है जिन्हें विधिविरुद्ध जमाव के सदस्य बनने के लिए किराये पर लिया जा चुका है या लिया जाने वाला है, यह जानते हुए | किसी भी प्रकार का कारावास, छह माह तक, या जुर्माना, या दोनों | IPC 157 |
| 189(8) | जो उप-धारा (1) में गिनाए कार्यों को करने या उनमें सहायता करने के लिए लगाया या किराये पर लिया जाता है या इसकी पेशकश या प्रयास करता है | किसी भी प्रकार का कारावास, छह माह तक, या जुर्माना, या दोनों | IPC 158 |
| 189(9) | जो उप-धारा (8) के अनुसार लगाया या किराये पर लिया गया हो और घातक हथियार या वैसी चीज़ के साथ सशस्त्र जाता है या जाने की पेशकश करता है | किसी भी प्रकार का कारावास, दो वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों | IPC 158 (तालिका: 'or to go armed') |
IPC क्रम केवल अध्ययन-सहायक है। परीक्षा-उत्तर में BNS की उप-धारा ही मुख्य रूप में लिखें।
धारा 189 को परतों में समझें
पहली परत संख्या की है: पाँच या अधिक लोग (five or more persons)। चार लोगों का साझा उद्देश्य कितना भी बुरा हो, यह धारा 189(1) के अर्थ में 'विधिविरुद्ध जमाव' नहीं होता। दूसरी परत उद्देश्य की है: पाँच उद्देश्य खंड (a) से (e) में गिनाए हैं। उद्देश्य साझा (common) होना चाहिए, यानी जमाव बनाने वाले व्यक्तियों का सामूहिक उद्देश्य। तीसरी परत जानकारी की है: उप-धारा (2) में सदस्य वही है जो उन तथ्यों को जानते हुए, जो जमाव को विधिविरुद्ध बनाते हैं, जानबूझकर शामिल होता है या उसमें बना रहता है। इसलिए अनजाने में किसी भीड़ में पहुँचा राहगीर इस उप-धारा का सदस्य नहीं है; शब्द 'being aware of facts' और 'intentionally' दोनों यही शर्त बताते हैं।
स्पष्टीकरण का एक सीधा उपयोग है: कोई सभा शुरू में वैध हो सकती है, जैसे कोई जनसभा या धरना, पर बाद में उसका उद्देश्य बदल जाए तो वही विधिविरुद्ध हो जाती है। उप-धारा (3) और (5) में बिखरने के आदेश का वर्णन है, जिसमें 'in the manner prescribed by law' (उप-धारा (3)) और 'lawfully commanded' (उप-धारा (5)) शब्द आदेश के वैध होने की शर्त जोड़ते हैं। उप-धारा (3) की सज़ा (दो वर्ष तक) उप-धारा (2) की सज़ा (छह माह तक) से भारी है, क्योंकि बिखरने का आदेश जान लेने के बाद भी टिके रहना अधिक गंभीर माना गया है।
उप-धारा (5) और (3) का फ़र्क़ समझना ज़रूरी है। उप-धारा (5) में जमाव का विधिविरुद्ध होना ज़रूरी नहीं: पाँच या अधिक लोगों का कोई भी जमाव, जिससे लोक शांति भंग होने की संभावना हो, बिखरने के वैध आदेश के बाद भी टिके रहने पर इस उप-धारा में आता है। पर स्पष्टीकरण कहता है कि यदि वही जमाव उप-धारा (1) का विधिविरुद्ध जमाव है, तो अपराधी का दंड उप-धारा (3) के अनुसार होगा, यानी दो वर्ष तक, छह माह तक नहीं।
उप-धारा (4) हथियार की बात करती है: घातक हथियार (deadly weapon) या ऐसी किसी चीज़ से सशस्त्र होना, जो हथियार की तरह प्रयोग होने पर मृत्यु कर सकती है। यानी लाठी जैसी साधारण चीज़ भी, यदि हथियार की तरह प्रयोग होने पर मृत्यु करने की संभावना रखती हो ('likely to cause death'), इस श्रेणी में आ सकती है; इसका निर्णय तथ्यों से होता है। उप-धारा (6) से (9) किराये की भीड़ से निपटती हैं: किराये पर लगाने वाला, उसे शरण देने वाला, और किराये पर लगाया गया व्यक्ति, तीनों के लिए अलग उपबंध हैं। उप-धारा (6) में किराये पर लेने वाला उसी तरह दंडनीय है जैसे वह स्वयं सदस्य हो, और भाड़े के किसी सदस्य के किए अपराध के लिए भी, मानो वह अपराध उसी ने किया हो।
धारा 190: जमाव के हर सदस्य का दायित्व (every member guilty of offence committed in prosecution of common object)
| तत्व | पाठ का आशय | याद रखने की कुंजी |
|---|---|---|
| कौन सा अपराध | जमाव के किसी भी सदस्य ने कोई अपराध किया हो | 'an offence is committed by any member of an unlawful assembly' |
| किसके अनुसरण में | या तो जमाव के साझा उद्देश्य के अनुसरण में, या ऐसा अपराध जिसके बारे में जमाव के सदस्य जानते थे कि साझे उद्देश्य के अनुसरण में उसके होने की संभावना है | 'in prosecution of the common object' या 'knew to be likely to be committed in prosecution of that object' |
| कौन दोषी | अपराध के समय उसी जमाव का हर सदस्य | 'at the time of the committing of that offence, is a member of the same assembly' |
| दोषी किसका | उसी अपराध का, यानी जिस अपराध को किसी सदस्य ने किया | 'is guilty of that offence' |
| अलग सज़ा? | इस धारा में अलग सज़ा नहीं दी गई; सज़ा उसी अपराध की धारा से निर्धारित होती है जो किया गया | धारा 190 दायित्व की धारा है, दंड की नहीं |
धारा 191: बलवा (rioting) और उसकी सज़ा
| उप-धारा | पाठ का आशय | सज़ा | IPC क्रम (अध्ययन-सहायक) |
|---|---|---|---|
| 191(1) | जब कोई विधिविरुद्ध जमाव, या उसका कोई सदस्य, जमाव के साझे उद्देश्य के अनुसरण में बल या हिंसा (force or violence) का प्रयोग करे, तब जमाव का प्रत्येक सदस्य बलवे (rioting) का दोषी है। | परिभाषा | IPC 146 |
| 191(2) | बलवे का दोषी। | किसी भी प्रकार का कारावास, दो वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों | IPC 147 |
| 191(3) | बलवे का दोषी जो घातक हथियार से, या ऐसी चीज़ से जो हथियार की तरह प्रयोग होने पर मृत्यु कर सकती है, सशस्त्र है। | किसी भी प्रकार का कारावास, पाँच वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों | IPC 148 |
BNS-IPC तालिका में धारा 191 के शीर्षक पर परिवर्तन ('Change') चिह्नित है।
तुलना: जमाव, बलवा और धारा 190 का दायित्व
| पहलू | विधिविरुद्ध जमाव (189) | बलवा (191) | सदस्यों का दायित्व (190) |
|---|---|---|---|
| संख्या | पाँच या अधिक व्यक्ति | वही विधिविरुद्ध जमाव जिसमें बल या हिंसा हुई | उसी जमाव का सदस्य |
| मुख्य कसौटी | साझा उद्देश्य खंड (a) से (e) में से कोई | साझे उद्देश्य के अनुसरण में बल या हिंसा | अपराध साझे उद्देश्य के अनुसरण में हुआ या उसकी संभावना ज्ञात थी |
| बल या हिंसा ज़रूरी? | नहीं (आपराधिक बल का 'प्रदर्शन' भी उद्देश्य में आ सकता है) | हाँ | जिस अपराध के लिए दायित्व है, उसी पर निर्भर |
| सज़ा | उप-धारा के अनुसार: छह माह, दो वर्ष तक | दो वर्ष तक; सशस्त्र पर पाँच वर्ष तक | उसी अपराध की सज़ा जो किया गया |
| IPC क्रम (अध्ययन-सहायक) | 141, 143, 144, 145, 150, 151, 157, 158 | 146, 147, 148 | 149 |
जमाव से बलवे तक: निर्णय का प्रवाह
पाँच या अधिक व्यक्तियों का जमाव?
नहीं: धारा 189(1) नहीं लगेगी
साझा उद्देश्य खंड (a) से (e) में से कोई?
आतंकित करना, कानून का प्रतिरोध, रिष्टि या अपराध, संपत्ति या अधिकार पर ज़बरदस्ती, किसी को बाध्य करना
विधिविरुद्ध जमाव बना
जानबूझकर शामिल होने या बने रहने पर सदस्य: छह माह तक (189(2))
बिखरने का वैध आदेश जानकर भी टिके?
दो वर्ष तक (189(3))
बल या हिंसा हुई?
हाँ: हर सदस्य बलवे का दोषी (191(1)); दो वर्ष तक (191(2))
घातक हथियार से सशस्त्र?
हाँ: पाँच वर्ष तक (191(3))
धारा 189(1) के पाँच साझा उद्देश्य
विधिविरुद्ध जमाव: पाँच उद्देश्य
(a) आतंकित करना
- केंद्र या राज्य सरकार, संसद, विधानमंडल
- वैध शक्ति का प्रयोग करता लोक सेवक
(b) प्रतिरोध
- किसी कानून के निष्पादन का
- किसी वैध विधिक प्रक्रिया का
(c) अपराध
- रिष्टि
- आपराधिक अतिचार
- कोई अन्य अपराध
(d) कब्ज़ा या अधिकार
- संपत्ति पर कब्ज़ा
- रास्ते या पानी के अधिकार से वंचित करना
- कल्पित अधिकार को लागू कराना
(e) बाध्य करना
- वह करवाना जिसे करने को वह बाध्य नहीं
- वह रोकना जिसे करने का उसे अधिकार है
मुख्य तथ्य
- विधिविरुद्ध जमाव (धारा 189(1))
- पाँच या अधिक व्यक्तियों का जमाव, साझा उद्देश्य खंड (a) से (e) में से कोई
- धारा 189(2)
- सदस्य: किसी भी प्रकार का कारावास छह माह तक, या जुर्माना, या दोनों (IPC 143)
- धारा 189(3)
- बिखरने का आदेश जानकर भी शामिल होने या बने रहने पर: दो वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों (IPC 145)
- धारा 189(4)
- घातक हथियार से सशस्त्र सदस्य: दो वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों (IPC 144)
- धारा 189(5)
- लोक शांति भंग करने वाले पाँच या अधिक के जमाव में, बिखरने के वैध आदेश के बाद: छह माह तक (IPC 151)
- धारा 189(6) से (9)
- किराये पर लगाना (IPC 150), शरण देना (छह माह, IPC 157), किराये पर लगना (छह माह, IPC 158), सशस्त्र किराये का (दो वर्ष, IPC 158)
- धारा 190
- साझे उद्देश्य के अनुसरण में किए अपराध के लिए उस समय जमाव का हर सदस्य दोषी (IPC 149)
- धारा 191
- बलवा: दो वर्ष तक (IPC 147); सशस्त्र पर पाँच वर्ष तक (IPC 148); परिभाषा IPC 146
- प्रारंभ
- BNS 1 जुलाई 2024 से लागू (धारा 106(2) को छोड़कर)
- अंतिम जाँच
- 2 अक्तूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- चार या उससे कम लोगों के जमाव को विधिविरुद्ध जमाव कहना। धारा 189(1) में 'five or more persons' की न्यूनतम सीमा है।
- धारा 189(2) और (3) की सज़ा मिला देना: सदस्य होने की सज़ा छह माह तक है, पर बिखरने का आदेश जानने के बाद भी टिके रहने की सज़ा दो वर्ष तक है।
- धारा 189(5) और (3) का फ़र्क़ भूलना: (5) में जमाव का विधिविरुद्ध होना ज़रूरी नहीं, पर स्पष्टीकरण के अनुसार यदि जमाव विधिविरुद्ध है तो दंड (3) से होगा।
- धारा 190 को सज़ा की धारा बता देना। यह दायित्व की धारा है; सज़ा उसी अपराध की धारा से आती है जो किया गया।
- बलवे के लिए जमाव का 'विधिविरुद्ध' होना और बल या हिंसा दोनों भूल जाना। धारा 191(1) में दोनों हैं: विधिविरुद्ध जमाव, और उसके या उसके किसी सदस्य द्वारा साझे उद्देश्य में बल या हिंसा।
- सिलेबस में सूचीबद्ध न की गई धाराओं को उत्तर में घुसा देना। इस पृष्ठ की सीमा धारा 189 से 191 है।
कार्य-उदाहरण (कल्पित): खेत की मेड़ पर विवाद
हल सहित उदाहरणजमाव से बलवे तक की सीढ़ी
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; इसमें कोई वास्तविक व्यक्ति, गाँव या घटना नहीं है। कल्पित स्थिति: किसी गाँव में सात लोग इकट्ठे होकर एक पड़ोसी की ज़मीन की मेड़ पर पहुँचते हैं ताकि ज़ोर दिखाकर उस पर कब्ज़ा लें। पुलिस अधिकारी विधिपूर्वक उन्हें बिखरने का आदेश देता है; दो लोग लौट जाते हैं, पर पाँच वहीं टिके रहते हैं और उनमें से एक लाठी से पड़ोसी पर हमला कर देता है।
- 1चरण 1: संख्या सात लोग हैं: पाँच या अधिक की शर्त पूरी है (धारा 189(1))।
- 2चरण 2: साझा उद्देश्य ज़ोर दिखाकर संपत्ति पर कब्ज़ा लेना: खंड (d), आपराधिक बल या उसके प्रदर्शन से संपत्ति पर कब्ज़ा।
- 3चरण 3: बिखरने का आदेश जो दो लोग आदेश के बाद लौट गए, वे उस जमाव में बने नहीं रहे। जो पाँच टिके रहे, उन पर धारा 189(3) (दो वर्ष तक); पाँच की संख्या अब भी बनी है, इसलिए जमाव विधिविरुद्ध ही रहा।
- 4चरण 4: बल या हिंसा लाठी से हमला साझे उद्देश्य के अनुसरण में बल का प्रयोग है, इसलिए धारा 191(1) से उस समय जमाव का हर सदस्य बलवे का दोषी है; लाठी जैसी चीज़ घातक हथियार की श्रेणी में आए तो धारा 191(3) की पाँच वर्ष तक की सज़ा।
- 5चरण 5: चोट का अपराध हमले से हुई चोट का अलग अपराध उसी जमाव के सदस्यों पर धारा 190 के सिद्धांत से लग सकता है, पर इसके लिए पहले यह देखना होगा कि वह साझे उद्देश्य के अनुसरण में हुआ या ऐसा था जिसकी संभावना सदस्य जानते थे।
निष्कर्ष: क्रम याद रखें: संख्या, फिर साझा उद्देश्य, फिर बिखरने का आदेश, फिर बल या हिंसा। हर चरण पर एक अलग उप-धारा या धारा लगती है।
केस स्टडी (कल्पित): वैध धरना जो विधिविरुद्ध जमाव बन गया
उदाहरण (काल्पनिक)स्पष्टीकरण का प्रयोग
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; इसमें कोई वास्तविक घटना, संगठन या व्यक्ति नहीं है। कल्पित स्थिति: किसी तहसील कार्यालय के बाहर बीस लोग अपनी माँगों के लिए शांतिपूर्वक धरने पर बैठे हैं। कुछ घंटे बाद उनमें से कुछ लोग नारे लगाकर कार्यालय का द्वार तोड़ने और कर्मचारियों को बाहर निकालने का आह्वान करते हैं और पूरा समूह द्वार की ओर बढ़ने लगता है। अधिकारी बिखरने का आदेश देता है, पर समूह आगे बढ़ता रहता है।
- शुरू में
- धरना शांतिपूर्ण था; पाठ का स्पष्टीकरण कहता है कि जो जमाव एकत्र होते समय विधिविरुद्ध नहीं था, वह बाद में विधिविरुद्ध बन सकता है।
- उद्देश्य बदला
- द्वार तोड़ना रिष्टि (mischief) या अपराध का उद्देश्य है, खंड (c); कर्मचारियों को बाहर निकलने के लिए बाध्य करना खंड (e) जैसा हो सकता है; और लोक सेवकों को आतंकित करना खंड (a)।
- आदेश के बाद
- बिखरने का आदेश जानने के बाद भी टिके और आगे बढ़ते रहने वालों पर धारा 189(3)।
- बल का प्रयोग
- यदि द्वार तोड़ने में बल या हिंसा हो गई, तो धारा 191(1) से जमाव का प्रत्येक सदस्य बलवे का दोषी।
सीख
जमाव की वैधता किसी एक क्षण की स्थिति नहीं है: उद्देश्य बदलने पर वही सभा विधिविरुद्ध बन सकती है, और बिखरने के आदेश के बाद टिके रहना अलग से दंडनीय है। लिखते समय स्पष्टीकरण (Explanation) और उप-धारा (3) का नाम दें।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अनुसार 'विधिविरुद्ध जमाव' (unlawful assembly) क्या है?
आदर्श उत्तर
पाँच या अधिक व्यक्तियों का जमाव, जिसका साझा उद्देश्य धारा 189(1) में गिनाए पाँच में से हो।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
भारतीय न्याय संहिता की धारा 191 में बलवे (rioting) की सज़ा क्या है?
आदर्श उत्तर
दो वर्ष तक कारावास या जुर्माना या दोनों; सशस्त्र होने पर पाँच वर्ष तक (धारा 191(2), (3))।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
धारा 190 का सिद्धांत समझाइए।
आदर्श उत्तर
यदि विधिविरुद्ध जमाव के किसी सदस्य ने साझे उद्देश्य के अनुसरण में कोई अपराध किया, या ऐसा अपराध किया जिसके होने की संभावना सदस्य जानते थे, तो अपराध के समय उसी जमाव का हर सदस्य उस अपराध का दोषी है। यह दायित्व की धारा है, अलग सज़ा की नहीं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
धारा 189(3) और 189(5) में अंतर बताइए।
आदर्श उत्तर
उप-धारा (3) उस सदस्य पर है जो जानता है कि विधिविरुद्ध जमाव को बिखरने का आदेश मिल चुका है; सज़ा दो वर्ष तक। उप-धारा (5) पाँच या अधिक के ऐसे जमाव पर है जिससे शांति भंग हो सकती है; सज़ा छह माह तक। जमाव विधिविरुद्ध हो तो (3) लगेगी।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
भारतीय न्याय संहिता के अनुसार विधिविरुद्ध जमाव और बलवे में अंतर स्पष्ट कीजिए। दोनों में सदस्यों की सज़ा लिखिए।
आदर्श उत्तर
धारा 189(1) में पाँच या अधिक व्यक्तियों का वह जमाव विधिविरुद्ध है जिसका साझा उद्देश्य खंड (a) से (e) में से कोई हो। बलवा तब बनता है जब ऐसा जमाव या उसका कोई सदस्य साझे उद्देश्य के अनुसरण में बल या हिंसा का प्रयोग करे; तब हर सदस्य दोषी है (धारा 191(1))। जमाव का सदस्य होने पर छह माह तक, बिखरने का आदेश जानकर भी टिकने पर दो वर्ष तक कारावास या जुर्माना या दोनों है। बलवे में दो वर्ष तक, और घातक हथियार से सशस्त्र होने पर पाँच वर्ष तक। इस प्रकार बल या हिंसा ही दोनों के बीच की रेखा है।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत विधिविरुद्ध जमाव और बलवे की विवेचना कीजिए।" पहली पंक्ति में धारा 189 और 191 के क्रमांक और अंग्रेज़ी शब्द (unlawful assembly, rioting) लिखें; सीमा 100 शब्द है, इसलिए हर उप-धारा नहीं, मुख्य सज़ाएँ दें।
मुख्य भाग
- विधिविरुद्ध जमाव: पाँच या अधिक व्यक्ति, साझा उद्देश्य खंड (a) से (e); सदस्य होने की सज़ा छह माह तक; बिखरने का आदेश जानकर टिकने पर दो वर्ष तक
- धारा 190: साझे उद्देश्य में हुए अपराध के लिए जमाव का हर सदस्य दोषी
- बलवा (धारा 191): बल या हिंसा; दो वर्ष तक, सशस्त्र पर पाँच वर्ष तक
निष्कर्ष
निष्कर्ष: संख्या और उद्देश्य से जमाव अपराध बनता है और बल या हिंसा से बलवा; इस प्रकार संहिता भीड़ की हिंसा में सामूहिक दायित्व तय करती है।
अतिरिक्त मूल्य
- अंग्रेज़ी शब्द: unlawful assembly, common object, rioting, deadly weapon
- IPC क्रम केवल अध्ययन-सहायक: 141, 149, 146 से 148
- स्पष्टीकरण: वैध जमाव बाद में विधिविरुद्ध हो सकता है
त्वरित पुनरावृत्ति
- धारा 189(1): पाँच या अधिक व्यक्ति; साझे उद्देश्य (a) आतंकित करना, (b) प्रतिरोध, (c) रिष्टि या अपराध, (d) कब्ज़ा या अधिकार, (e) बाध्य करना
- स्पष्टीकरण: जो जमाव शुरू में विधिविरुद्ध नहीं था, वह बाद में बन सकता है
- 189(2): सदस्य, छह माह तक; 189(3): बिखरने का आदेश जानकर टिके, दो वर्ष तक
- 189(4): घातक हथियार से सशस्त्र सदस्य, दो वर्ष तक
- 189(5): पाँच या अधिक का जमाव जो शांति भंग कर सकता है, बिखरने के आदेश के बाद, छह माह तक; विधिविरुद्ध हो तो (3)
- 189(6): किराये पर लगाने वाला सदस्य के समान दंडनीय; (7) शरण देने वाला, छह माह; (8) किराये पर लगने वाला, छह माह; (9) सशस्त्र किराये का, दो वर्ष
- धारा 190: साझे उद्देश्य में या संभावित अपराध में हर सदस्य दोषी
- धारा 191(1): बलवा = विधिविरुद्ध जमाव में बल या हिंसा; (2) दो वर्ष तक; (3) सशस्त्र, पाँच वर्ष तक
- IPC क्रम (अध्ययन-सहायक): 141, 143, 144, 145, 149, 150, 151, 157, 158, 146, 147, 148
याद रखने योग्य शब्द
- unlawful assembly
- common object
- rioting
- deadly weapon
- either description
- 189
- 190
- 191