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पेपर III · इकाई III · भाग ख (विधि)

घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, धारा 1 से 3: परिभाषाएँ और घरेलू हिंसा का अर्थ

घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 1 से 3: धारा 2 की बीस परिभाषाएँ, व्यथित व्यक्ति, घरेलू संबंध, प्रतिवादी, साझी गृहस्थी और धारा 3 में घरेलू हिंसा के चार रूप; चारों पिछले प्रश्न हल सहित।

  • व्यथित व्यक्ति
  • घरेलू संबंध
  • साझी गृहस्थी
  • घरेलू हिंसा
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Crimes against women and children: Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005: Sections 1-29, 31." इस पृष्ठ पर धारा 1 से 3 हैं: संक्षिप्त नाम और प्रारंभ, धारा 2 की परिभाषाएँ (व्यथित व्यक्ति, घरेलू संबंध, प्रतिवादी, साझी गृहस्थी आदि) और धारा 3 में घरेलू हिंसा का अर्थ। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं है; वास्तविक मामले में अधिकृत विधिक सहायता लें।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • इस अधिनियम पर 2016 से 2024 के बीच पाँच प्रश्न आए और उनमें से चार इसी पृष्ठ की धाराओं 2 और 3 से हैं: 2016 में 'व्यथित व्यक्ति', 2023 में 'लैंगिक दुर्व्यवहार', 2024 में 'विवाह-सदृश संबंध में महिला की सुरक्षा' और 2024 में 'साझी गृहस्थी'। सब 2 अंक (लगभग 15 शब्द) के हैं।
  • 2 अंक के इन प्रश्नों में अधिनियम की परिभाषा का सटीक अंग्रेज़ी पद और उसके मुख्य तत्त्व लिखने पर पूरे अंक मिलते हैं। इसलिए यहाँ हर परिभाषा तत्त्व-दर-तत्त्व तोड़कर दी गई है।
  • 2024 का 'साझी गृहस्थी' प्रश्न पेपर में POCSO अधिनियम के नीचे छपा था, जबकि यह पद DV अधिनियम की धारा 2(s) में परिभाषित है। POCSO की धारा 2(1)(k) में भी इसकी अपनी परिभाषा है; दोनों का अंतर इस पृष्ठ पर तालिका में रखा गया है।

पहले सरल भाषा में

घर को सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है, इसीलिए उसके भीतर की हिंसा बाहर दिखाई नहीं देती। दरवाज़े के पीछे की बात अक्सर 'घर का मामला' कहकर दबा दी जाती है। इस अधिनियम का मूल विचार यह है कि घर के भीतर होने वाली हिंसा भी राज्य और कानून का विषय है, और पीड़ित महिला को तुरंत सुरक्षा के साथ घर में टिके रहने का अधिकार मिलना चाहिए।

अधिनियम के उद्देश्य-कथन (Statement of Objects and Reasons) के अनुसार पहले पति या उसके रिश्तेदारों की क्रूरता भारतीय दंड संहिता की धारा 498-A के तहत अपराध थी, पर सिविल कानून इस समस्या को पूरी तरह नहीं सँभालता था। इसलिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 में दिए अधिकारों को ध्यान में रखकर एक ऐसा सिविल उपाय बनाया गया जो महिला को हिंसा से बचाए और आगे की हिंसा रोके। इसका अर्थ है कि मजिस्ट्रेट सुरक्षा, निवास, आर्थिक सहायता और बच्चों की अभिरक्षा जैसे आदेश दे सकता है, केवल सज़ा देना ही रास्ता नहीं है।

अधिनियम का पूरा नाम घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (The Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005) है, यह 2005 का अधिनियम संख्या 43 है। दीर्घ शीर्षक (long title) के अनुसार यह परिवार के भीतर होने वाली किसी भी प्रकार की हिंसा की शिकार महिलाओं के संविधान-प्रदत्त अधिकारों की 'अधिक प्रभावी सुरक्षा' (more effective protection) के लिए है। इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति 13 सितंबर 2005 को मिली और यह 26 अक्तूबर 2006 से लागू हुआ।

धारा 1: संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ

उप-धाराक्या कहती है
1(1)अधिनियम का नाम: The Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005।
1(2)विस्तार: पूरे भारत में। 'जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर' शब्द 2019 के अधिनियम 34 की धारा 95 और पाँचवीं अनुसूची से 31-10-2019 से हटा दिए गए।
1(3)प्रारंभ: उस तिथि से जो केंद्र सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा तय करे। व्यवहार में अधिसूचना S.O. 1776(E), दिनांक 17 अक्तूबर 2006 से अधिनियम 26 अक्तूबर 2006 को लागू हुआ।

धारा 2: परिभाषाएँ, खंड-दर-खंड

धारा 2 में अंग्रेज़ी वर्णमाला के (a) से (t) तक बीस परिभाषाएँ हैं। परीक्षा में प्रश्न किसी एक पद की परिभाषा पूछता है, इसलिए नीचे की तालिका एक नज़र में पूरी सूची देती है और उसके बाद चार सबसे अधिक पूछे जाने वाले पद विस्तार से समझाए गए हैं। 'Unless the context otherwise requires' (जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो) का अर्थ है कि ये अर्थ पूरे अधिनियम में तभी लागू रहते हैं जब किसी धारा का संदर्भ कुछ और न माँगे।

धारा 2 की बीस परिभाषाएँ

खंडपद (statutory term)अर्थ
(a)aggrieved person (व्यथित व्यक्ति)कोई भी महिला जो प्रतिवादी के साथ घरेलू संबंध में है या रही है और जिसका आरोप है कि प्रतिवादी ने उसके साथ घरेलू हिंसा का कोई कृत्य किया।
(b)child (बालक)18 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति; इसमें गोद लिया, सौतेला या पालित (foster) बालक भी आता है।
(c)compensation orderधारा 22 के अंतर्गत दिया गया आदेश।
(d)custody orderधारा 21 के अंतर्गत दिया गया आदेश।
(e)domestic incident reportघरेलू हिंसा की शिकायत मिलने पर व्यथित व्यक्ति के बारे में निर्धारित प्रपत्र में बनाई गई रिपोर्ट।
(f)domestic relationship (घरेलू संबंध)दो व्यक्तियों का वह संबंध जो साझी गृहस्थी में कभी भी साथ रहे हैं और रक्त-संबंध, विवाह, विवाह की प्रकृति के संबंध या गोद लेने से जुड़े हैं, या संयुक्त परिवार के सदस्य के रूप में साथ रहते हैं।
(g)domestic violenceवही अर्थ जो धारा 3 में दिया गया है।
(h)dowry (दहेज)वही अर्थ जो दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 2 में है।
(i)Magistrateप्रथम श्रेणी का न्यायिक मजिस्ट्रेट या महानगर मजिस्ट्रेट (दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अधीन), उस क्षेत्र में जहाँ व्यथित व्यक्ति अस्थायी या अन्यथा रहती है, या प्रतिवादी रहता है, या हिंसा होना आरोपित है।
(j)medical facilityराज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के लिए अधिसूचित चिकित्सा सुविधा।
(k)monetary relief (आर्थिक अनुतोष)वह प्रतिकर जो मजिस्ट्रेट प्रतिवादी को सुनवाई के किसी भी चरण में देने का आदेश दे, ताकि हिंसा से हुए खर्च और नुकसान की भरपाई हो।
(l)notificationराजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना।
(m)prescribedइस अधिनियम के अधीन बने नियमों द्वारा निर्धारित।
(n)Protection Officer (संरक्षण अधिकारी)धारा 8(1) के अधीन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी।
(o)protection orderधारा 18 के अधीन किया गया आदेश।
(p)residence orderधारा 19(1) के अधीन दिया गया आदेश।
(q)respondent (प्रतिवादी)कोई भी वयस्क पुरुष (adult male person) जो व्यथित व्यक्ति के साथ घरेलू संबंध में है या रहा है और जिसके विरुद्ध उसने इस अधिनियम में अनुतोष माँगा है। परंतुक: व्यथित पत्नी या विवाह की प्रकृति के संबंध में रह रही महिला पति या पुरुष साथी के रिश्तेदार के विरुद्ध भी शिकायत कर सकती है।
(r)service provider (सेवा प्रदाता)धारा 10(1) के अधीन पंजीकृत संस्था।
(s)shared household (साझी गृहस्थी)वह घर जहाँ व्यथित व्यक्ति घरेलू संबंध में रहती है या किसी भी अवस्था में रही है (अकेले या प्रतिवादी के साथ); विस्तृत अर्थ नीचे।
(t)shelter home (आश्रय-गृह)राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के लिए अधिसूचित आश्रय-गृह।

व्यथित व्यक्ति (aggrieved person), धारा 2(a): 2016 का प्रश्न

व्यथित व्यक्ति इस अधिनियम का केंद्रीय पात्र है, क्योंकि सारे अनुतोष उसी के लिए हैं। धारा 2(a) के अनुसार 'aggrieved person means any woman who is, or has been, in a domestic relationship with the respondent and who alleges to have been subjected to any act of domestic violence by the respondent'। इसमें तीन शर्तें एक साथ दिखती हैं।

पहली, वह 'कोई भी महिला' (any woman) हो। पाठ में पत्नी शब्द नहीं है; इसलिए माँ, बहन, विधवा, अकेली रहने वाली महिला और साथ रहने वाली साथी भी आ सकती हैं। उद्देश्य-कथन में भी बहनों, विधवाओं, माताओं और अकेली महिलाओं का उल्लेख है। दूसरी, वह प्रतिवादी के साथ घरेलू संबंध में 'है या रही है' (is, or has been), यानी संबंध टूट चुका हो या महिला घर छोड़ चुकी हो, तब भी वह पात्र है। तीसरी, वह 'आरोप लगाती है' (alleges) कि प्रतिवादी ने उसके साथ घरेलू हिंसा की। पाठ आवेदन के चरण पर आरोप को पर्याप्त मानता है, सिद्ध करने का प्रश्न सुनवाई में आता है। (यह अंतिम बात पाठ पर आधारित विश्लेषण है।)

घरेलू संबंध (domestic relationship), धारा 2(f)

घरेलू संबंध वह धुरी है जिस पर व्यथित व्यक्ति, प्रतिवादी और साझी गृहस्थी, तीनों टिके हैं। धारा 2(f) के अनुसार यह दो व्यक्तियों का ऐसा संबंध है जो 'live or have, at any point of time, lived together in a shared household' और जो पाँच में से किसी आधार से जुड़े हों। नीचे के आधार पाठ से लिए गए हैं।

घरेलू संबंध के पाँच आधार

आधार (पाठ का पद)आसान उदाहरण (समझने के लिए)
consanguinity (रक्त-संबंध)माँ और बेटा, भाई और बहन; साझे घर में रहने वाले रक्त-संबंधी।
marriage (विवाह)पति-पत्नी और विवाह से बने रिश्ते जो एक ही घर में रहे हों।
relationship in the nature of marriage (विवाह की प्रकृति का संबंध)विवाह के बिना पति-पत्नी की तरह साथ रहने का संबंध (लिव-इन); अधिनियम इस पद की परिभाषा नहीं देता, इसलिए न्यायालयों की व्याख्या देखें।
adoption (गोद लेना)गोद लेने से बने संबंध।
family members living together as a joint family (संयुक्त परिवार के सदस्य)संयुक्त परिवार में रहने वाले ससुराल पक्ष के सदस्य, जेठ, देवर, सास-ससुर आदि।

साझी गृहस्थी में कभी भी साथ रहना प्रत्येक आधार की सामान्य शर्त है।

2024 का प्रश्न 'विवाह-सदृश संबंध में रहने वाली महिला की सुरक्षा' इसी खंड से आता है। उत्तर की रीढ़ यह है कि 'relationship in the nature of marriage' घरेलू संबंध का एक आधार है, इसलिए ऐसी महिला 'व्यथित व्यक्ति' हो सकती है और धारा 12 से 22 के अनुतोष (संरक्षण, निवास, आर्थिक अनुतोष, अभिरक्षा, प्रतिकर) माँग सकती है। यह अधिनियम पाठ से ही लिव-इन महिला को स्थान देता है; यह आवश्यक नहीं कि वह विवाहिता हो। कौन-सा लिव-इन 'विवाह की प्रकृति का संबंध' माना जाएगा, इसकी कसौटियाँ न्यायालयों के निर्णयों में हैं (देखें: आधिकारिक निर्णय-पाठ); अधिनियम की बनावट में यही पद है।

प्रतिवादी (respondent), धारा 2(q)

पाठ में प्रतिवादी 'any adult male person' है जो व्यथित व्यक्ति के साथ घरेलू संबंध में है या रहा है और जिसके विरुद्ध उसने अनुतोष माँगा है। परंतुक (proviso) के अनुसार व्यथित पत्नी या विवाह की प्रकृति के संबंध में रह रही महिला पति या पुरुष साथी के 'relative' के विरुद्ध भी शिकायत कर सकती है। अधिनियम के उद्देश्य-कथन में लिखा है कि विधेयक पत्नी या महिला साथी को पति या पुरुष साथी के किसी भी रिश्तेदार के विरुद्ध शिकायत की अनुमति देता है, पर पति या पुरुष साथी की किसी महिला रिश्तेदार को पत्नी या महिला साथी के विरुद्ध शिकायत की अनुमति नहीं देता। अधिनियम के आधिकारिक पाठ में धारा 2(q) के ये शब्द आज भी ऐसे ही छपे हैं; संसद ने इस खंड में कोई संशोधन नहीं किया (2019 में केवल धारा 1(2) से जम्मू-कश्मीर वाले शब्द हटे)। 'वयस्क पुरुष' की संवैधानिक वैधता सर्वोच्च न्यायालय के 2016 के एक निर्णय में परखी गई है; उस निर्णय का सटीक प्रभाव और वर्तमान स्थिति देखें: आधिकारिक निर्णय-पाठ। परीक्षा में पहले धारा 2(q) का पाठ लिखें, फिर यह टिप्पणी जोड़ें।

साझी गृहस्थी (shared household), धारा 2(s): 2024 का प्रश्न

साझी गृहस्थी वह घर है जिसमें महिला का रहना उसकी सुरक्षा का आधार है। धारा 2(s) की परिभाषा लंबी है, इसे तीन हिस्सों में पढ़ें। पहला हिस्सा बुनियाद है: 'a household where the person aggrieved lives or at any stage has lived in a domestic relationship either singly or along with the respondent', यानी वह घर जहाँ व्यथित व्यक्ति घरेलू संबंध में रहती है या किसी अवस्था में रही है, अकेले या प्रतिवादी के साथ। इसके बाद 'includes' से इसमें तीन तरह के घर जोड़े गए हैं।

साझी गृहस्थी में कौन-से घर आते हैं

वर्गपाठ का आशय
संयुक्त स्वामित्व या किरायेदारीघर जो व्यथित व्यक्ति और प्रतिवादी का संयुक्त रूप से owned या tenanted है।
किसी एक के नाम का घरघर जो उनमें से किसी एक का owned या tenanted है और जिसमें व्यथित व्यक्ति, प्रतिवादी या दोनों का कोई right, title, interest या equity है।
संयुक्त परिवार का घरघर जो उस संयुक्त परिवार का है जिसका प्रतिवादी सदस्य है, चाहे प्रतिवादी या व्यथित व्यक्ति का उसमें कोई right, title या interest हो या न हो।

साझी गृहस्थी: DV अधिनियम और POCSO अधिनियम की परिभाषा

बिंदुDV अधिनियम 2005, धारा 2(s)POCSO अधिनियम 2012, धारा 2(1)(k)
किसका घरवह घर जहाँ व्यथित व्यक्ति (महिला) घरेलू संबंध में रहती है या रही है।वह घर जहाँ आरोपित व्यक्ति (person charged with the offence) बालक के साथ घरेलू संबंध में कभी रहा है या रहता है।
स्वामित्वस्वामित्व, किरायेदारी, अधिकार और संयुक्त परिवार के घर तक विस्तृत परिभाषा।स्वामित्व या किरायेदारी का उल्लेख नहीं; केवल घरेलू संबंध में रहना।
घरेलू संबंधधारा 2(f) में परिभाषित।POCSO की धारा 2(1)(e) कहती है कि इसका अर्थ वही है जो DV अधिनियम की धारा 2(f) में है।
उद्देश्यमहिला को घर में रहने और निकाले न जाने का अधिकार (धारा 17)।बालक के साथ एक ही या साझी गृहस्थी में रहने वाले आरोपित का अपराध गंभीर (aggravated) रूप में गिना जाना (धारा 5(n), 9(n))।

धारा 3: घरेलू हिंसा की परिभाषा, 2023 का प्रश्न

धारा 3 'घरेलू हिंसा' की परिभाषा देती है। यह परिभाषा 'for the purposes of this Act' है और प्रतिवादी के 'any act, omission or commission or conduct' पर टिकी है, यानी केवल मारपीट जैसा कृत्य ही नहीं, कुछ न करना (omission) और आचरण भी गिना जा सकता है। चार खंड (a) से (d) हैं और दो स्पष्टीकरण (Explanation) हैं।

धारा 3 के चार खंड

खंडघरेलू हिंसा कब माना जाएगा
(a)जब आचरण व्यथित व्यक्ति के स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन, अंग या कुशल-क्षेम (मानसिक या शारीरिक) को हानि पहुँचाए, चोट दे या संकट में डाले, या ऐसा करने की प्रवृत्ति रखे; इसमें शारीरिक दुर्व्यवहार, लैंगिक दुर्व्यवहार, मौखिक और भावनात्मक दुर्व्यवहार तथा आर्थिक दुर्व्यवहार शामिल हैं।
(b)जब दहेज या अन्य संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति की किसी अवैध माँग को पूरा कराने के लिए उसे या उससे संबंधित किसी व्यक्ति को सताया, हानि पहुँचाई, चोट दी या संकट में डाला जाए।
(c)जब खंड (a) या (b) के किसी आचरण से उसे या उससे संबंधित किसी व्यक्ति को धमकाने का प्रभाव पड़े।
(d)जब आचरण अन्यथा व्यथित व्यक्ति को शारीरिक या मानसिक चोट या हानि पहुँचाए।

खंड (a) में 'includes' शब्द है, इसलिए चार दुर्व्यवहार उदाहरण-सूची की तरह हैं और परिभाषा इन्हीं में बंद नहीं होती (विश्लेषण)। खंड (d) 'अन्यथा' (otherwise) हानि को भी पकड़ लेता है। स्पष्टीकरण II कहता है कि कोई आचरण घरेलू हिंसा है या नहीं, यह तय करते समय मामले के 'overall facts and circumstances' पर विचार किया जाएगा, यानी एक अलग घटना के बजाय पूरी परिस्थिति देखी जाती है। स्पष्टीकरण I में चार दुर्व्यवहारों के अर्थ दिए हैं।

स्पष्टीकरण I: चार प्रकार का दुर्व्यवहार

प्रकारपाठ के अनुसार अर्थसंक्षेप में याद रखें
physical abuse (शारीरिक)ऐसा कृत्य या आचरण जो शारीरिक पीड़ा, हानि या जीवन, अंग या स्वास्थ्य को संकट पहुँचाए, या व्यथित व्यक्ति के स्वास्थ्य या विकास को बिगाड़े; इसमें assault, criminal intimidation और criminal force शामिल हैं।शरीर को पीड़ा, हानि या संकट
sexual abuse (लैंगिक)'includes any conduct of a sexual nature that abuses, humiliates, degrades or otherwise violates the dignity of woman', यानी यौन प्रकृति का ऐसा कोई आचरण जो महिला की गरिमा का दुरुपयोग, अपमान, अवमानना या उल्लंघन करे।यौन प्रकृति का आचरण जो गरिमा भंग करे
verbal and emotional abuse (मौखिक और भावनात्मक)(a) insults, ridicule, humiliation, name calling, और विशेषकर संतान या पुत्र न होने पर अपमान या उपहास; (b) जिस व्यक्ति में व्यथित व्यक्ति की रुचि है, उसे शारीरिक पीड़ा पहुँचाने की बार-बार धमकियाँ।अपमान, ताने, बार-बार धमकी
economic abuse (आर्थिक)(a) कानून या रीति से मिलने वाले या आवश्यकता के आर्थिक साधनों से वंचित करना, जैसे घर की ज़रूरतें, स्त्रीधन, संपत्ति, साझी गृहस्थी का किराया और भरण-पोषण; (b) घरेलू सामान, चल-अचल संपत्ति, प्रतिभूतियों आदि का निपटान या अन्य-संक्रामण; (c) उन संसाधनों और सुविधाओं तक निरंतर पहुँच पर रोक, जिनमें साझी गृहस्थी तक पहुँच भी है।आर्थिक साधन से वंचित करना, संपत्ति बेचना, पहुँच रोकना

व्यथित व्यक्ति की जाँच: एक नज़र में

  1. महिला

    'any woman' (धारा 2(a))

  2. घरेलू संबंध

    रक्त, विवाह, विवाह की प्रकृति, गोद या संयुक्त परिवार (धारा 2(f))

  3. साझी गृहस्थी

    कभी भी साथ रहना (धारा 2(f), 2(s))

  4. आरोप

    प्रतिवादी ने घरेलू हिंसा की (धारा 3)

  5. अनुतोष

    संरक्षण, निवास, आर्थिक, अभिरक्षा, प्रतिकर आदेश (धारा 18 से 22)

व्यथित व्यक्ति, घरेलू संबंध और साझी गृहस्थी एक-दूसरे से जुड़ी तीन परिभाषाएँ हैं।

घरेलू हिंसा के चार रूप

घरेलू हिंसा, धारा 3

शारीरिक (physical)

  • शारीरिक पीड़ा, हानि, जीवन-अंग-स्वास्थ्य को संकट
  • assault, criminal intimidation, criminal force

लैंगिक (sexual)

  • यौन प्रकृति का आचरण
  • गरिमा का दुरुपयोग, अपमान, अवमानना, उल्लंघन

मौखिक और भावनात्मक

  • अपमान, उपहास, नाम-पुकार
  • संतान या पुत्र न होने पर ताने
  • अपने से जुड़े व्यक्ति को हानि की बार-बार धमकी

आर्थिक (economic)

  • साधनों से वंचित करना
  • संपत्ति का निपटान
  • साझी गृहस्थी तक पहुँच पर रोक

सहायता कहाँ मिलती है

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार Women Helpline का टोल-फ़्री नंबर 181 है और यह महिलाओं के लिए 24 घंटे की टेलीफ़ोन सेवा है, जो महिला को पुलिस, One Stop Centre, अस्पताल और विधिक सेवा प्राधिकरण जैसे प्राधिकारियों से जोड़ती है। यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है; संकट की स्थिति में स्थानीय पुलिस या अधिकृत सेवा से तुरंत संपर्क करें।

मुख्य तथ्य

अधिनियम
The Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005, अधिनियम संख्या 43; अधिनियमन 13 सितंबर 2005
India Code अभिलेख
अधिनियमन 13 सितंबर 2005; प्रवर्तन 26 अक्तूबर 2006
प्रारंभ
26 अक्तूबर 2006, अधिसूचना S.O. 1776(E) दिनांक 17 अक्तूबर 2006; नियम भी 26 अक्तूबर 2006 से लागू
विस्तार
पूरे भारत में; 'जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर' शब्द 31-10-2019 से हटे (2019 का अधिनियम 34)
धारा 2 की परिभाषाएँ
(a) से (t), कुल बीस खंड
बालक (child)
18 वर्ष से कम; गोद लिया, सौतेला और पालित बालक शामिल (धारा 2(b))
मजिस्ट्रेट
प्रथम श्रेणी का न्यायिक मजिस्ट्रेट या महानगर मजिस्ट्रेट (धारा 2(i))
घरेलू हिंसा के रूप
शारीरिक, लैंगिक, मौखिक और भावनात्मक, आर्थिक (धारा 3, स्पष्टीकरण I)
उद्देश्य-कथन
अनुच्छेद 14, 15 और 21 में दिए अधिकारों को ध्यान में रखकर सिविल उपाय; आधार: IPC 498-A के साथ सिविल कानून की कमी
उद्देश्य-कथन का सार
संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 में दिए अधिकारों को ध्यान में रखकर अधिनियम बना
Women Helpline
181, 24 घंटे की टेलीफ़ोन सेवा जो पुलिस, One Stop Centre, अस्पताल आदि से जोड़ती है
Women Helpline की भूमिका
24 घंटे की सेवा जो महिला को पुलिस, One Stop Centre, अस्पताल और विधिक सेवा प्राधिकरण जैसे प्राधिकारियों से जोड़ती है (PIB, 22 मार्च 2023)
अंतिम जाँच
2 अक्तूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • व्यथित व्यक्ति को केवल 'पत्नी' लिख देना। पाठ 'any woman' है, इसलिए माँ, बहन, विधवा और साथ रहने वाली साथी भी आती हैं।
  • घरेलू संबंध में 'साझी गृहस्थी में कभी साथ रहना' की शर्त भूल जाना; रक्त-संबंध या विवाह अकेले पर्याप्त नहीं, साथ रहना भी देखा जाता है।
  • घरेलू हिंसा को केवल मारपीट मान लेना। धारा 3 में चार रूप हैं और आर्थिक तथा मौखिक दुर्व्यवहार भी उसमें आते हैं।
  • लैंगिक दुर्व्यवहार की परिभाषा में 'conduct of a sexual nature' और 'dignity of woman' शब्द छोड़ देना; ये दोनों पद अंक दिलाते हैं।
  • साझी गृहस्थी को केवल पति के नाम की संपत्ति बता देना। संयुक्त परिवार का घर भी आता है, चाहे किसी का उसमें अधिकार न हो।
  • 2024 के 'shared household' प्रश्न को POCSO का मानकर केवल POCSO की परिभाषा लिखना। पेपर में छपे अधिनियम और पद की परिभाषा, दोनों का मिलान करके उत्तर दें।
  • अधिनियम के पाठ में आई IPC और CrPC की धाराओं को नई संहिताओं की धारा मान लेना। पाठ में अब भी पुरानी संहिताओं का हवाला है; BNS और BNSS का मिलान अगले पृष्ठों पर अध्ययन-सहायता की तरह दिया गया है।