IT अधिनियम 2000: धारा 65 और 66
अध्याय XI के पहले दो अपराध: कंप्यूटर स्रोत-कोड से छेड़छाड़ (धारा 65) और बेईमानी या कपट से किए गए कंप्यूटर-कृत्य (धारा 66), साथ में धारा 43 से रिश्ता और धारा 66A की स्थिति।
- धारा 65
- धारा 66
- computer source code
- धारा 43
- dishonestly / fraudulently
- धारा 66A
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि, धारानुसार): सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धाराएँ 65 और 66। परिभाषाएँ (धारा 1 और 2) पृष्ठ 1 पर, धारा 66B से 66F पृष्ठ 3 पर हैं। धारा 66 को समझने के लिए धारा 43 की उन क्रियाओं का सार भी यहाँ दिया है जिनका वह हवाला देती है।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2013 से 2024 तक के उपलब्ध पेपरों में धारा 65 या 66 पर सीधा प्रश्न नहीं मिला। फिर भी ये अपराध-अध्याय की शुरुआत हैं, और आगे की धाराएँ (66B से 66F) इन्हीं की भाषा पर चलती हैं।
- IT अधिनियम से पूछे गए तीनों प्रश्न परिभाषा-आधारित थे (2016, 2023, 2024)। अपराध-धाराओं पर पूछा जाए तो भी 2 अंक में "तत्व और सज़ा" ही माँगी जाएगी, इसलिए सज़ा के आँकड़े शब्दशः याद रखें।
- धारा 66 में "dishonestly" और "fraudulently" की व्याख्या दंड संहिता से जुड़ी है। पुरानी भारतीय दंड संहिता की जगह अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 है, इसलिए यहाँ दोनों संहिताओं का पुल दिया गया है।
अध्याय XI: अपराधों की ओर
अधिनियम किसी ग़लत काम का जवाब दो रास्तों से देता है। पहला रास्ता दीवानी (civil) है: नुक़सान हुआ तो भरपाई, यानी प्रतिकर (compensation)। दूसरा रास्ता फ़ौजदारी (criminal) है: कृत्य अपराध है तो कारावास या जुर्माना। रेल की मिसाल लीजिए: बिना टिकट यात्रा करने पर जुर्माना भरवाया जाता है, पर टिकट जाली बनाकर बेचने वाले पर मुक़दमा चलता है। पहले में ग़लती की भरपाई है, दूसरे में बेईमानी की सज़ा।
अध्याय IX (धारा 43 आदि) में पहला रास्ता है और अध्याय XI (धारा 65 से) में दूसरा। अध्याय XI का नाम "Offences" है और उसकी पहली धारा 65 है। धारा 65 और 66 पास-पास बैठी हैं, पर काम अलग हैं: 65 एक विशेष वस्तु, यानी स्रोत-कोड, की हिफ़ाज़त करती है; 66 धारा 43 की क्रियाओं को तब अपराध बनाती है जब उनके पीछे बेईमानी या कपट हो।
धारा 65: कंप्यूटर स्रोत दस्तावेज़ों से छेड़छाड़ (Tampering with computer source documents)
पाठ: "Whoever knowingly or intentionally conceals, destroys or alters or intentionally or knowingly causes another to conceal, destroy, or alter any computer source code used for a computer, computer program, computer system or computer network, when the computer source code is required to be kept or maintained by law for the time being in force, shall be punishable with imprisonment up to three years, or with fine which may extend up to two lakh rupees, or with both."
सरल भाषा में: कोई भी, जो जानते हुए या इरादे से, किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रोग्राम, कंप्यूटर सिस्टम या नेटवर्क के लिए प्रयुक्त स्रोत-कोड को छिपाए, नष्ट करे या बदले, या दूसरे से ऐसा कराए, और वह स्रोत-कोड उस समय लागू क़ानून द्वारा सुरक्षित रखा जाना अनिवार्य हो, तो वह इस धारा से दंडनीय है। सज़ा: तीन वर्ष तक का कारावास, या दो लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों।
स्रोत-कोड समझने के लिए रसोई की मिसाल काम की है। तैयार सब्ज़ी देखकर आप नहीं बता सकते कि कौन-सा मसाला कितना पड़ा; यह नुस्ख़े में लिखा होता है। सॉफ़्टवेयर में वही नुस्ख़ा स्रोत-कोड है। इसी कारण स्पष्टीकरण कहता है: "computer source code means the listing of programmes, computer commands, design and layout and programme analysis of computer resource in any form"। यानी प्रोग्रामों की सूची, कंप्यूटर आदेश, डिज़ाइन और लेआउट, और प्रोग्राम-विश्लेषण, किसी भी रूप में।
धारा 65 के अपराध के तत्व
| तत्व | पाठ में आधार | अर्थ |
|---|---|---|
| कृत्य | conceals, destroys or alters | छिपाना, नष्ट करना या बदलना; इनमें से कोई एक काफ़ी है |
| दूसरे से कराना | intentionally or knowingly causes another to conceal, destroy, or alter | स्वयं न करके दूसरे से कराने वाला भी बराबर दंडनीय है |
| मानसिक अवस्था | knowingly or intentionally | जानबूझकर या इरादे से; लापरवाही या अनजाने में नष्ट होना इसमें नहीं आता (विश्लेषण) |
| विषय-वस्तु | computer source code used for a computer, computer programme, computer system or computer network | किसी कंप्यूटर, प्रोग्राम, सिस्टम या नेटवर्क में प्रयुक्त स्रोत-कोड |
| सीमा-शर्त | when the computer source code is required to be kept or maintained by law for the time being in force | स्रोत-कोड तभी संरक्षित है जब क़ानून उसे रखने या बनाए रखने को अनिवार्य करे |
| सज़ा | imprisonment up to three years, or fine up to two lakh rupees, or both | तीन वर्ष तक कारावास, या दो लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों |
इस धारा की सबसे महत्त्वपूर्ण सीमा "required to be kept or maintained by law" है। हर स्रोत-कोड इस धारा से सुरक्षित नहीं है, केवल वही जिसे क़ानून ने रखना अनिवार्य किया हो। इसी कारण परीक्षा में तीन बातें साथ लिखना उचित है: कृत्य (conceal, destroy, alter), मानसिक अवस्था (knowingly or intentionally) और शर्त (क़ानून द्वारा अनिवार्य रूप से सुरक्षित)। कोई भी अन्य सॉफ़्टवेयर, जिसे रखना क़ानूनी बाध्यता नहीं है, उसकी चोरी या विनाश धारा 43 के खंड (j) और धारा 66 की दिशा में जा सकता है, धारा 65 की नहीं (विश्लेषण)।
धारा 66: कंप्यूटर संबंधी अपराध (Computer related offences)
पाठ: "If any person, dishonestly or fraudulently, does any act referred to in section 43, he shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to three years or with fine which may extend to five lakh rupees or with both."
धारा 66 अपना कोई नया कृत्य नहीं गढ़ती। वह धारा 43 से कृत्य उधार लेती है और उनमें एक शर्त जोड़ती है: कृत्य "dishonestly or fraudulently", यानी बेईमानी या कपट से किया गया हो। इस जुड़ाव को ऐसे समझिए: धारा 43 का कृत्य बिना अनुमति के किया जाए तो भरपाई देनी पड़ती है; वही कृत्य बेईमानी से किया जाए तो धारा 66 के अंतर्गत जेल या जुर्माना भी। सज़ा: तीन वर्ष तक का कारावास, या पाँच लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों।
धारा 43 में, बिना कंप्यूटर के स्वामी या प्रभारी व्यक्ति की अनुमति के, किए जाने वाले ये कृत्य गिनाए गए हैं (सार में, खंड (a) से (j))। इसी सूची के कृत्य धारा 66 के "any act referred to in section 43" हैं।
धारा 43 के कृत्य, जिनका हवाला धारा 66 देती है
| खंड | कृत्य (सार) | पाठ का मुख्य शब्द |
|---|---|---|
| (a) | कंप्यूटर, सिस्टम, नेटवर्क या कंप्यूटर संसाधन तक पहुँच या पहुँच प्राप्त करना | accesses or secures access |
| (b) | डेटा, डेटाबेस या सूचना को डाउनलोड, कॉपी या निकालना, हटाने योग्य माध्यम से भी | downloads, copies or extracts |
| (c) | कंप्यूटर कंटैमिनेंट या कंप्यूटर वायरस डालना | introduces computer contaminant or computer virus |
| (d) | कंप्यूटर, डेटा या प्रोग्राम को नुक़सान पहुँचाना | damages or causes to be damaged |
| (e) | कंप्यूटर, सिस्टम या नेटवर्क में व्यवधान डालना | disrupts or causes disruption |
| (f) | अधिकृत व्यक्ति की पहुँच रोकना | denies or causes the denial of access |
| (g) | अधिनियम के उल्लंघन में किसी को पहुँच दिलाने में सहायता देना | provides any assistance |
| (h) | कंप्यूटर में हेराफेरी करके सेवाओं का शुल्क किसी दूसरे के खाते में डलवाना | charges the services ... to the account of another person |
| (i) | कंप्यूटर संसाधन की सूचना को नष्ट, मिटाना या बदलना, या उसका मूल्य या उपयोगिता घटाना | destroys, deletes or alters any information |
| (j) | स्रोत-कोड की चोरी, छिपाना, नष्ट या परिवर्तन, नुक़सान पहुँचाने के इरादे से | steal, conceal, destroys or alters ... source code ... with an intention to cause damage |
सूची से स्पष्ट है कि हैकिंग (अनधिकृत पहुँच), डेटा-चोरी, वायरस डालना, सर्वर ठप करना और रिकॉर्ड मिटाना, सब धारा 43 के कृत्य हैं और बेईमानी से हों तो धारा 66 के अपराध। धारा 43 का मूल पाठ सिलेबस में नहीं है, इसलिए यह सूची समझाने भर के लिए दी गई है: परीक्षा में धारा 66 का उत्तर लिखते समय "धारा 43 में वर्णित कृत्य" लिख देना पर्याप्त है, सूची उदाहरण के रूप में जोड़ी जा सकती है।
स्पष्टीकरण दो शब्दों की व्याख्या देता है। "dishonestly" का अर्थ भारतीय दंड संहिता की धारा 24 के अनुसार और "fraudulently" का अर्थ धारा 25 के अनुसार है। अधिनियम का मुद्रित पाठ यही हवाला देता है। अब भारतीय दंड संहिता निरसित है (भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 358(1)) और वही परिभाषाएँ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 2 में हैं: खंड (7) "dishonestly" means doing anything with the intention of causing wrongful gain to one person or wrongful loss to another person, और खंड (9) "fraudulently" means doing anything with the intention to defraud but not otherwise। पुराने से नए नंबर का यह पुल केवल अध्ययन-सहायता है (IPC 24 और 25 से BNS 2(7) और 2(9))।
तुलना: धारा 43, धारा 65 और धारा 66
| बिंदु | धारा 43 | धारा 65 | धारा 66 |
|---|---|---|---|
| स्वरूप | दीवानी: प्रतिकर (damages by way of compensation) | फ़ौजदारी अपराध | फ़ौजदारी अपराध |
| कृत्य | बिना अनुमति पहुँच, कॉपी, वायरस, नुक़सान आदि (खंड (a)-(j)) | स्रोत-कोड को छिपाना, नष्ट करना या बदलना | धारा 43 में वर्णित कोई भी कृत्य |
| मानसिक अवस्था | अनुमति का अभाव काफ़ी | knowingly or intentionally | dishonestly or fraudulently |
| विशेष शर्त | कोई नहीं | स्रोत-कोड क़ानून द्वारा रखा जाना अनिवार्य | कृत्य धारा 43 का हो |
| कारावास | लागू नहीं | तीन वर्ष तक | तीन वर्ष तक |
| जुर्माना | प्रतिकर | दो लाख रुपये तक | पाँच लाख रुपये तक |
| "या" या "और" | कारावास या जुर्माना या दोनों | कारावास या जुर्माना या दोनों |
धारा 66A: 2015 में रद्द और 2023 में अधिनियम से हटाई गई
धारा 66 के ठीक बाद अधिनियम में कभी धारा 66A थी, "Punishment for sending offensive messages through communication service, etc."। सिलेबस में "66(B-F)" लिखा है, यानी 66A जानबूझकर छोड़ी गई है, इसलिए यहाँ उसका केवल एक पंक्ति का उल्लेख है। उसकी स्थिति दो चरणों में बदली। पहला, सर्वोच्च न्यायालय ने 24 मार्च 2015 को श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (AIR 2015 SC 1523) में उसे रद्द किया; भारत कोड की प्रति में इसका फ़ुटनोट है: "Section 66A has been struck down by Supreme Court's Order dated 24th March, 2015 in the Shreya Singhal vs. Union of India, AIR 2015 SC. 1523"। दूसरा, जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2023 की अनुसूची में लिखा है "Section 66A shall be omitted", और MeitY के अनुसार यह संशोधन 30 नवंबर 2023 से लागू है। इसलिए अब धारा 66A अधिनियम के वर्तमान पाठ में नहीं है।
श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (24 मार्च 2015) के निर्णय के निष्कर्ष में कहा गया कि धारा 66A पूर्णतः रद्द की जाती है, क्योंकि वह अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करती है और अनुच्छेद 19(2) की युक्तियुक्त पाबंदियों में नहीं आती। न्यायालय ने इस धारा को अस्पष्टता (vagueness) और अतिव्यापकता (overbreadth) की कसौटियों पर भी परखा। रद्द होने का व्यावहारिक अर्थ है कि वह प्रावधान लागू नहीं किया जा सकता था; 2023 के संशोधन ने उसे पाठ से भी हटा दिया।
परीक्षा में दो सावधानियाँ रखें: सज़ा के आँकड़ों की सूची में 66A को न जोड़ें, और यदि कोई प्रश्न "धारा 66 के बाद की धारा" या "रद्द की गई धारा" पूछे तो निर्णय का नाम और तारीख़ लिखें और जोड़ें कि 2023 में उसे अधिनियम से हटा दिया गया।
निर्णय-चित्र: कृत्य किस धारा में जाएगा
कृत्य हुआ
बिना अनुमति पहुँच, कॉपी, वायरस, विनाश, स्रोत-कोड से छेड़छाड़ आदि
क्या कृत्य धारा 43 का है?
खंड (a) से (j)
क्या कृत्य बेईमानी या कपट से हुआ?
हाँ: धारा 66 का अपराध; नहीं: केवल धारा 43 का प्रतिकर
क्या विषय स्रोत-कोड है जिसे क़ानून रखवाता है?
हाँ और जानबूझकर: धारा 65 भी
सज़ा
धारा 65: 3 वर्ष या 2 लाख रुपये या दोनों; धारा 66: 3 वर्ष या 5 लाख रुपये या दोनों
मुख्य तथ्य
- धारा 65 की सज़ा
- तीन वर्ष तक कारावास, या दो लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों
- धारा 65 की शर्त
- स्रोत-कोड वह होना चाहिए जिसे लागू क़ानून द्वारा रखा या बनाए रखा जाना आवश्यक हो
- "Computer source code" (धारा 65 का स्पष्टीकरण)
- प्रोग्रामों की सूची, कंप्यूटर आदेश, डिज़ाइन और लेआउट, प्रोग्राम-विश्लेषण, किसी भी रूप में
- धारा 66 की सज़ा
- तीन वर्ष तक कारावास, या पाँच लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों
- धारा 66 का स्पष्टीकरण
- "dishonestly" और "fraudulently" का अर्थ IPC की धारा 24 और 25 के अनुसार (मुद्रित पाठ); BNS, 2023 में धारा 2(7) और 2(9)
- धारा 66A
- श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ में 24 मार्च 2015 को रद्द (AIR 2015 SC 1523); जन विश्वास अधिनियम 2023 से अधिनियम से हटाई गई (30 नवंबर 2023 से)
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026 (भारत कोड की प्रति और जन विश्वास अधिनियम 2023 की अनुसूची का मिलान)
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- धारा 65 में "क़ानून द्वारा रखा जाना अनिवार्य" वाली शर्त भूल जाना। यह इस धारा की पहचान है।
- धारा 65 और 66 में सज़ा गड्ड-मड्ड कर देना। कारावास दोनों में तीन वर्ष तक है; जुर्माना 65 में दो लाख और 66 में पाँच लाख रुपये तक।
- "Or with both" के बजाय "और" लिख देना। इन दोनों धाराओं में सज़ा कारावास या जुर्माना या दोनों है, यानी अदालत के पास विकल्प है।
- धारा 66 में बेईमानी या कपट की शर्त छोड़ देना। इसके बिना कृत्य केवल धारा 43 का प्रतिकर-योग्य कृत्य है।
- धारा 66A को आज लागू धारा की तरह लिखना। वह 24 मार्च 2015 को श्रेया सिंघल मामले में रद्द हुई और 2023 में अधिनियम से हटा दी गई।
- धारा 66 में IPC की धाराएँ 24 और 25 का हवाला बिना यह बताए लिखना कि अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 2(7) और 2(9) संगत हैं।
सूचना
यह सामग्री परीक्षा की तैयारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। किसी वास्तविक मामले में अधिवक्ता से परामर्श लें।
धारा 43, 65 और 66 एक कहानी में (कल्पित उदाहरण)
उदाहरण (काल्पनिक)लॉजिस्टिक्स कंपनी का बर्ख़ास्त कर्मचारी
यह कल्पित उदाहरण है, किसी वास्तविक घटना का वर्णन नहीं। जयपुर की एक लॉजिस्टिक्स कंपनी के सॉफ़्टवेयर कर्मचारी को नौकरी से निकाला गया। जाने से पहले उसने कंपनी के सर्वर तक अपनी पहुँच का उपयोग किया, ग्राहकों की सूची की प्रति अपने पेन-ड्राइव में उतारी, कुछ लेन-देन के रिकॉर्ड मिटाए और बिलिंग सॉफ़्टवेयर के स्रोत-कोड को बदल दिया। बाद में उसने सूची एक प्रतिस्पर्धी कंपनी को बेच दी।
- प्रति उतारना
- यह धारा 43 के खंड (b) का कृत्य है: डेटा डाउनलोड, कॉपी या निकालना। उसकी पहुँच बर्ख़ास्तगी के बाद अनुमति-रहित हो चुकी थी, इसलिए खंड (a) भी लग सकता है।
- रिकॉर्ड मिटाना
- खंड (i): कंप्यूटर संसाधन में रखी सूचना को नष्ट करना या मिटाना।
- बिक्री का इरादा
- सूची बेचने का उद्देश्य बेईमानी (ग़लत लाभ और कंपनी की ग़लत हानि) दिखाता है। इसलिए ये कृत्य धारा 66 के अपराध बन सकते हैं: तीन वर्ष तक कारावास, या पाँच लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों।
- स्रोत-कोड बदलना
- धारा 65 तभी लगेगी जब वह स्रोत-कोड क़ानून द्वारा रखे जाने के लिए अनिवार्य हो। यदि केवल कंपनी की अपनी आवश्यकता से रखा गया था, तो धारा 65 नहीं, खंड (j) और धारा 66 की दिशा में विचार होगा। यह तथ्यों पर निर्भर है (विश्लेषण)।
सीख
एक ही घटना में धारा 43 (प्रतिकर), धारा 65 (स्रोत-कोड) और धारा 66 (बेईमानी का अपराध) अलग-अलग तत्वों से लगते हैं। उत्तर में हर कृत्य को उसके तत्व से जोड़कर लिखना सबसे सुरक्षित है। अधिनियम की धारा 77 के अनुसार प्रतिकर या दंड मिलने से अन्य क़ानूनों में दंड रुकता नहीं (पृष्ठ 5)।
कार्य-उदाहरण (कल्पित): तीन तथ्य, तीन धाराएँ
हल सहित उदाहरणकौन-सा तथ्य किस धारा की ओर जाता है
दिया है
- (क) एक व्यक्ति, बिना अनुमति, अपने पड़ोसी के वाई-फ़ाई से जुड़कर इंटरनेट चलाता है और कोई नुक़सान नहीं करता
- (ख) एक कर्मचारी जानबूझकर उस स्रोत-कोड को मिटा देता है जिसे क़ानून ने सुरक्षित रखना अनिवार्य किया है
- (ग) एक ठग किसी के बैंक-खाते में बिना अनुमति पहुँचकर पैसे अपने खाते में डलवाता है
- 1(क) बिना अनुमति पहुँच धारा 43 के खंड (a) का कृत्य है। कोई बेईमानी या कपट नहीं दिखता, इसलिए यह धारा 66 की ओर नहीं जाता। प्रतिकर का प्रश्न उठ सकता है, नुक़सान हुआ हो तो (विश्लेषण)।
- 2(ख) कृत्य: नष्ट करना; मानसिक अवस्था: जानबूझकर; विषय-वस्तु: स्रोत-कोड; शर्त: क़ानून द्वारा रखा जाना अनिवार्य। चारों पूरे हैं, इसलिए धारा 65। सज़ा: तीन वर्ष तक कारावास, या दो लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों।
- 3(ग) पहुँच (खंड (a)) बिना अनुमति और बेईमानी से है, इसलिए धारा 66। सज़ा: तीन वर्ष तक, या पाँच लाख रुपये तक, या दोनों। कृत्य अन्य क़ानूनों के अंतर्गत भी अपराध हो सकता है।
निष्कर्ष: (क) धारा 43 का प्रश्न; (ख) धारा 65; (ग) धारा 66।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
धारा 65 में 'computer source code' क्या है?
आदर्श उत्तर
धारा 65 के अनुसार: प्रोग्रामों की सूची, कंप्यूटर आदेश, डिज़ाइन-लेआउट और प्रोग्राम-विश्लेषण, किसी भी रूप में।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
धारा 66 के अंतर्गत सज़ा क्या है?
आदर्श उत्तर
धारा 66: तीन वर्ष तक कारावास, या पाँच लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
धारा 65 के आवश्यक तत्व बताइए।
आदर्श उत्तर
धारा 65 के तत्व: जानबूझकर या इरादे से स्रोत-कोड को छिपाना, नष्ट करना या बदलना, या दूसरे से कराना; कोड कंप्यूटर, प्रोग्राम, सिस्टम या नेटवर्क में प्रयुक्त हो; और उसे क़ानून द्वारा रखा जाना अनिवार्य हो। सज़ा तीन वर्ष तक कारावास, या दो लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
धारा 43 और धारा 66 में अंतर स्पष्ट कीजिए।
आदर्श उत्तर
धारा 43 में बिना अनुमति पहुँच, कॉपी, वायरस या नुक़सान जैसे कृत्य पर प्रतिकर देना पड़ता है। धारा 66 उन्हीं कृत्यों को तब अपराध बनाती है जब वे बेईमानी या कपट से किए जाएँ। सज़ा तीन वर्ष तक कारावास, या पाँच लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
IT Act की धारा 65 और 66 का तुलनात्मक विवरण दीजिए और धारा 66A की स्थिति बताइए।
आदर्श उत्तर
धारा 65 क़ानून द्वारा सुरक्षित रखे जाने योग्य कंप्यूटर स्रोत-कोड को जानबूझकर छिपाने, नष्ट करने या बदलने को दंडित करती है: तीन वर्ष तक कारावास, या दो लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों। धारा 66 धारा 43 में वर्णित कृत्यों को बेईमानी या कपट से करने पर लागू होती है: तीन वर्ष तक कारावास, या पाँच लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों। पहली में स्रोत-कोड की शर्त है, दूसरी में आशय की। धारा 66A को सर्वोच्च न्यायालय ने श्रेया सिंघल मामले में 24 मार्च 2015 को रद्द किया और 2023 में वह अधिनियम से हटा दी गई, इसलिए लागू नहीं है।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
नमूना प्रश्न: "IT Act 2000 की धारा 65 और 66 की तुलना कीजिए।" पहली पंक्ति में दोनों धाराओं को अध्याय XI के अपराध बताइए और कहिए कि एक स्रोत-कोड की रक्षा करती है, दूसरी बेईमानी से किए धारा 43 के कृत्यों को दंडित करती है।
मुख्य भाग
- धारा 65: कृत्य (छिपाना, नष्ट या परिवर्तन), मानसिक अवस्था (knowingly or intentionally), शर्त (क़ानून द्वारा रखा जाना अनिवार्य), सज़ा (3 वर्ष या 2 लाख रुपये या दोनों)
- धारा 66: धारा 43 का कोई भी कृत्य, dishonestly or fraudulently, सज़ा (3 वर्ष या 5 लाख रुपये या दोनों)
- अंतर: विशेष वस्तु बनाम सामान्य कृत्य; शर्त बनाम आशय; जुर्माने की सीमा
निष्कर्ष
निष्कर्ष: दोनों धाराएँ कंप्यूटर-तंत्र की अखंडता की रक्षा करती हैं; पहली स्रोत-कोड की, दूसरी व्यापक कंप्यूटर-कृत्यों की।
अतिरिक्त मूल्य
- धारा 43 (प्रतिकर) से रिश्ता एक पंक्ति में
- धारा 66A के रद्द होने का एक वाक्य
- स्पष्टीकरण के "dishonestly" और "fraudulently" का उल्लेख
त्वरित पुनरावृत्ति
- अध्याय XI (Offences) की शुरुआत धारा 65 से; अध्याय IX में धारा 43 (प्रतिकर)
- धारा 65: knowingly or intentionally, source code को conceal, destroy or alter, या दूसरे से कराना
- धारा 65 की शर्त: source code क़ानून द्वारा रखा या बनाए रखा जाना अनिवार्य
- धारा 65 सज़ा: 3 वर्ष तक कारावास, या 2 लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों
- "Computer source code": programmes की सूची, computer commands, design और layout, programme analysis
- धारा 66: धारा 43 का कोई भी कृत्य + dishonestly or fraudulently
- धारा 66 सज़ा: 3 वर्ष तक कारावास, या 5 लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों
- धारा 43 के कृत्य: access, download/copy, virus, damage, disruption, denial of access, assistance, charging services, destroy information, source code चोरी
- dishonestly: wrongful gain या wrongful loss का आशय; fraudulently: defraud करने का आशय (BNS 2(7), 2(9); IPC 24, 25)
- धारा 66A: श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ, 24 मार्च 2015 को रद्द; 2023 में अधिनियम से हटाई गई; सिलेबस में 66(B-F)
याद रखने योग्य शब्द
- धारा 65
- धारा 66
- computer source code
- धारा 43
- dishonestly
- fraudulently
- धारा 66A