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RTI अधिनियम 2005: धारा 6 से 11, आवेदन, निपटारा, छूट (धारा 8), पृथक्करण और तृतीय पक्ष

3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Right to Information Act, 2005: Sections 1-20." इस पृष्ठ पर धारा 6 (सूचना पाने का अनुरोध), 7 (अनुरोध का निपटारा), 8 (सूचना के प्रकटीकरण से छूट), 9 (कतिपय मामलों में पहुँच अस्वीकार करने के आधार), 10 (पृथक्करण) और 11 (तृतीय पक्ष की सूचना) हैं। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • दो प्रश्न इन्हीं धाराओं से आए हैं: 2024 में ब्रांडेड मिठाइयों की हानिकारक सामग्री के बारे में RTI अनुरोध (2 अंक) और 2023 में विदेशी सरकार से विश्वास में प्राप्त सूचना (2 अंक)। पहला (विश्लेषण) धारा 2, 6, 8(1)(d) और 11 को जोड़ता है, दूसरा सीधे धारा 8(1)(f) है।
  • धारा 8 अधिनियम का सबसे अधिक पूछा जा सकने वाला हिस्सा है, क्योंकि इसमें दस खंड हैं और हर खंड पर 2 अंक का प्रश्न बन सकता है। खंड का अक्षर और उसका मुख्य पद याद रखें।
  • धारा 8(1)(j) हाल में बदला है और इस पर सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती लंबित है। आज का पाठ, पुराना पाठ और चुनौती की स्थिति, तीनों एक अनुच्छेद में लिख पाना उत्तर को अलग बनाता है।

पहले सरल भाषा में

रेल का टिकट-काउंटर सोचिए। आप फ़ॉर्म भरते हैं, शुल्क देते हैं, रसीद मिलती है और निश्चित समय में टिकट मिलना तय है। कभी-कभी काउंटर कहता है कि इस गाड़ी में सीट उपलब्ध नहीं; तब भी उसे कारण बताना पड़ता है और शिकायत कहाँ करनी है, यह भी। RTI के आवेदन की यात्रा ऐसी ही है। धारा 6 फ़ॉर्म भरने की है, धारा 7 समय पर टिकट देने या मना करने की, धारा 8 और 9 मना करने के जायज़ कारणों की, धारा 10 यह कहती है कि पूरा मना करने की जगह जितना दिया जा सकता है उतना दो, और धारा 11 उस स्थिति की है जब माँगी गई सूचना किसी तीसरे की है।

यानी इस पृष्ठ की छह धाराएँ आवेदन, उत्तर और इनकार की पूरी कहानी हैं। परीक्षा में अक्सर आख़िरी तीन (8, 10, 11) से प्रश्न बनते हैं, पर समय-सीमाएँ धारा 6 और 7 से आती हैं।

धारा 6: सूचना पाने का अनुरोध (Request for obtaining information)

उप-धारा (1): जो व्यक्ति सूचना चाहता है, वह लिखित में या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अंग्रेज़ी, हिंदी या उस क्षेत्र की राजभाषा में, विहित शुल्क के साथ, अनुरोध करे। अनुरोध (a) संबंधित लोक प्राधिकारी के PIO या (b) सहायक PIO को जाए, और उसमें माँगी गई सूचना का विवरण (particulars) साफ़ लिखा हो। परंतुक: जहाँ अनुरोध लिखित रूप में नहीं हो सकता, वहाँ PIO मौखिक अनुरोध करने वाले व्यक्ति को उसे लिखित रूप देने में उचित सहायता करेगा।

उप-धारा (2): आवेदक से सूचना माँगने का कोई कारण नहीं पूछा जाएगा, और संपर्क के लिए आवश्यक ब्योरे के अलावा कोई अन्य व्यक्तिगत विवरण भी नहीं। (An applicant shall not be required to give any reason for requesting the information or any other personal details except those necessary for contacting him.) यह उप-धारा बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि "आप यह क्यों जानना चाहते हैं" कहकर आवेदन लौटाना अधिनियम के विपरीत है।

उप-धारा (3): यदि आवेदन ऐसी सूचना के बारे में है जो (i) किसी अन्य लोक प्राधिकारी के पास है, या (ii) जिसका विषय किसी अन्य लोक प्राधिकारी के कार्यों से अधिक निकट से जुड़ा है, तो जिस प्राधिकारी को आवेदन मिला है वह आवेदन या उसका उचित भाग उस अन्य प्राधिकारी को अंतरित करेगा और आवेदक को तुरंत सूचित करेगा। परंतुक: अंतरण यथाशीघ्र, पर किसी भी दशा में आवेदन मिलने की तिथि से पाँच दिन के बाद नहीं होगा।

धारा 7: अनुरोध का निपटारा (Disposal of request)

धारा 7(1) का दिल है 30 दिन। PIO अनुरोध मिलने पर यथाशीघ्र, और किसी भी दशा में अनुरोध मिलने के तीस दिन के भीतर, या तो विहित शुल्क लेकर सूचना देगा या धारा 8 और 9 में बताए कारणों में से किसी के आधार पर अनुरोध अस्वीकार करेगा। परंतुक: यदि माँगी गई सूचना किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता (life or liberty) से जुड़ी है, तो वह अनुरोध मिलने के 48 घंटे के भीतर दी जाएगी। यह उप-धारा धारा 5(2) के परंतुक (APIO के मामले में 5 दिन अतिरिक्त) और धारा 6(3) के परंतुक के अधीन है।

उप-धारा (2) चुप्पी की स्थिति सँभालती है: यदि PIO उपरोक्त अवधि में निर्णय नहीं देता, तो वह अनुरोध को अस्वीकार करने वाला माना जाएगा (deemed refusal)। यही स्थिति अपील का रास्ता खोलती है। उप-धारा (3): यदि सूचना देने के लिए और शुल्क लगना है तो PIO आवेदक को सूचना भेजेगा जिसमें (a) अतिरिक्त शुल्क का ब्योरा और उसकी गणना, और (b) शुल्क की राशि या पहुँच के रूप की समीक्षा के अधिकार की जानकारी, अपीलीय प्राधिकारी, समय-सीमा और प्रक्रिया सहित हो। शुल्क-सूचना भेजने से लेकर भुगतान होने तक का अंतराल तीस दिन की गिनती से बाहर रखा जाएगा।

उप-धारा (4): यदि आवेदक संवेदी रूप से विकलांग (sensorily disabled) है तो PIO पहुँच के लिए सहायता देगा, निरीक्षण में उपयुक्त सहायता सहित। उप-धारा (5): मुद्रित या इलेक्ट्रॉनिक रूप में सूचना देने पर आवेदक उपधारा (6) के अधीन विहित शुल्क देगा। परंतुक: शुल्क उचित होगा और ग़रीबी रेखा से नीचे (below poverty line) के व्यक्तियों से, जैसा उपयुक्त सरकार तय करे, कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। उप-धारा (6): यदि लोक प्राधिकारी धारा 7(1) की समय-सीमाओं का पालन नहीं करता, तो आवेदक को सूचना निःशुल्क दी जाएगी।

उप-धारा (7): उप-धारा (1) के अधीन कोई निर्णय लेने से पहले PIO धारा 11 के अधीन तृतीय पक्ष का प्रतिवेदन ध्यान में लेगा। उप-धारा (8): अनुरोध अस्वीकार होने पर PIO आवेदक को (i) अस्वीकृति के कारण, (ii) अपील की अवधि और (iii) अपीलीय प्राधिकारी का ब्योरा बताएगा। उप-धारा (9): सूचना सामान्यतः उसी रूप में दी जाएगी जिसमें माँगी गई है, जब तक कि इससे लोक प्राधिकारी के संसाधनों का असंगत विपथन न हो या संबंधित अभिलेख की सुरक्षा या संरक्षण को हानि न हो।

धारा 7 एक नज़र में

उप-धाराविषयमुख्य बिंदु
7(1)निपटारे की अवधि30 दिन; जीवन या स्वतंत्रता की सूचना 48 घंटे
7(2)चुप्पीअवधि में निर्णय न देने पर अनुरोध अस्वीकृत माना जाएगा (deemed refusal)
7(3)अतिरिक्त शुल्कगणना सहित सूचना; भुगतान तक का अंतराल 30 दिन से बाहर; समीक्षा के अधिकार की जानकारी
7(4)संवेदी विकलांग आवेदकपहुँच के लिए सहायता
7(5)शुल्कउचित शुल्क; ग़रीबी रेखा से नीचे वालों से कोई शुल्क नहीं
7(6)समय-सीमा चूकने परसूचना निःशुल्क
7(7)तृतीय पक्षनिर्णय से पहले धारा 11 का प्रतिवेदन ध्यान में लेना
7(8)अस्वीकृतिकारण, अपील की अवधि और अपीलीय प्राधिकारी बताना
7(9)रूपसामान्यतः जिस रूप में माँगी गई; अपवाद: संसाधनों का असंगत विपथन, अभिलेख की सुरक्षा

आवेदन से निपटारे तक की यात्रा

  1. आवेदन [धारा 6(1)]

    लिखित या इलेक्ट्रॉनिक, विहित शुल्क के साथ, PIO या APIO को; कारण बताना ज़रूरी नहीं [6(2)]

  2. अंतरण [धारा 6(3)]

    सूचना अन्य प्राधिकारी के पास हो तो 5 दिन के भीतर अंतरण, आवेदक को तुरंत सूचना

  3. तृतीय पक्ष [धारा 11]

    यदि तीसरे की गोपनीय सूचना देनी हो तो 5 दिन में नोटिस; 40 दिन में निर्णय

  4. निर्णय [धारा 7(1)]

    30 दिन (जीवन या स्वतंत्रता: 48 घंटे): सूचना दें या धारा 8 और 9 के आधार पर अस्वीकार करें

  5. आंशिक पहुँच [धारा 10]

    छूट वाला भाग अलग कर शेष सूचना दी जा सकती है

  6. अस्वीकृति या चुप्पी [धारा 7(8), 7(2)]

    कारण, अपील की अवधि और अपीलीय प्राधिकारी बताएँ; चुप्पी का अर्थ अनुमानित अस्वीकृति

अपील के चरण पाँचवें पृष्ठ (धारा 19) पर हैं।

धारा 8: सूचना के प्रकटीकरण से छूट (Exemption from disclosure of information)

धारा 8 की शुरुआत इन शब्दों से होती है: "Notwithstanding anything contained in this Act, there shall be no obligation to give any citizen" यानी इस अधिनियम में किसी भी बात के होते हुए, किसी नागरिक को ये सूचनाएँ देने का दायित्व नहीं होगा। इसके बाद खंड (a) से (j) तक दस श्रेणियाँ हैं। ध्यान दें: "no obligation to give" का अर्थ यह है कि देना बाध्यता नहीं है, पर उप-धारा (2) में लोकहित का रास्ता भी खुला है।

दस खंडों को अक्षर-क्रम में याद रखने की जगह चार समूहों में याद करना आसान है: राज्य और सुरक्षा (a, f), न्यायालय और विधान-मंडल (b, c), वाणिज्यिक और प्रत्ययी हित (d, e), व्यक्ति, जाँच और मंत्रिमंडल (g, h, i, j)। नीचे की तालिका सभी खंडों को उनकी शर्तों के साथ देती है।

धारा 8(1) के दस खंड

खंडछूट प्राप्त सूचना (सार)विशेष शर्त या अपवाद
(a)जिसके प्रकटीकरण से भारत की प्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, रणनीतिक, वैज्ञानिक या आर्थिक हित, विदेशी राज्य से संबंध पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े या अपराध के लिए उकसावा होधारा 8(3) में बीस वर्ष वाला नियम इस खंड पर लागू नहीं होता
(b)जिसके प्रकाशन पर किसी न्यायालय या अधिकरण ने स्पष्ट रोक लगाई हो, या जिसके प्रकटीकरण से न्यायालय की अवमानना हो सकती होकोई लोकहित-अपवाद नहीं लिखा
(c)जिसके प्रकटीकरण से संसद या राज्य विधान-मंडल के विशेषाधिकार का भंग होधारा 8(3) का बीस वर्ष नियम इस खंड पर लागू नहीं होता
(d)वाणिज्यिक विश्वास, व्यापार-गोपनीयता या बौद्धिक संपदा समेत सूचना, जिसके प्रकटीकरण से तृतीय पक्ष की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को हानि होजब तक सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट न हो कि बड़ा लोकहित प्रकटीकरण माँगता है
(e)किसी व्यक्ति को प्रत्ययी संबंध (fiduciary relationship) में उपलब्ध सूचनाजब तक सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट न हो कि बड़ा लोकहित प्रकटीकरण माँगता है
(f)विदेशी सरकार से विश्वास में प्राप्त सूचना (information received in confidence from foreign Government)सीधे कोई अपवाद नहीं लिखा; धारा 8(2) का सामान्य लोकहित-रास्ता है
(g)जिसके प्रकटीकरण से किसी व्यक्ति का जीवन या शारीरिक सुरक्षा ख़तरे में पड़े या विधि-प्रवर्तन या सुरक्षा के लिए विश्वास में दी सूचना या सहायता के स्रोत की पहचान होकोई अपवाद नहीं लिखा
(h)जो अपराधियों की जाँच, गिरफ़्तारी या अभियोजन की प्रक्रिया में बाधा डालेकोई अपवाद नहीं लिखा
(i)मंत्रिमंडल के काग़ज़ात, जिनमें मंत्रिपरिषद, सचिवों और अन्य अधिकारियों के विचार-विमर्श के अभिलेख शामिलपरंतुक 1: निर्णय पूरा होने और मामला समाप्त होने के बाद मंत्रिपरिषद के निर्णय, उनके कारण और आधार-सामग्री सार्वजनिक हों। परंतुक 2: इस धारा के अपवादों में आने वाले मामले प्रकट नहीं होंगे
(j)व्यक्तिगत सूचना (वर्तमान पाठ: "information which relates to personal information;")पुराना पाठ और वर्तमान स्थिति अगले खंड में

धारा 8(1)(j): पहले और अब

मूल पाठ (2005) में खंड (j) में तीन बातें थीं: व्यक्तिगत सूचना जिसका किसी लोक गतिविधि या हित से कोई संबंध नहीं, या जिससे व्यक्ति की निजता का अनुचित अतिक्रमण हो; जब तक PIO, राज्य PIO या अपीलीय प्राधिकारी संतुष्ट न हो कि बड़ा लोकहित प्रकटीकरण को उचित ठहराता है; और एक परंतुक कि जो सूचना संसद या राज्य विधान-मंडल को देने से मना नहीं की जा सकती, वह किसी भी व्यक्ति को देने से मना नहीं की जाएगी।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (2023 का 22) की धारा 44(3) ने RTI अधिनियम की धारा 8 की उप-धारा (1) में खंड (j) की जगह नया खंड रखा: "information which relates to personal information;" यानी व्यक्तिगत सूचना। केंद्रीय सूचना आयोग का संशोधित पाठ (18 नवंबर 2025 तक) यह प्रतिस्थापन 13 नवंबर 2025 से प्रभावी बताता है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की अधिसूचना G.S.R. 843(E) (13 नवंबर 2025) ने DPDP अधिनियम की धारा 44 की उप-धाराएँ (1) और (3) उसी दिन से प्रवृत्त कीं; उप-धारा (2) अधिसूचना की तिथि से अठारह माह बाद प्रवृत्त होनी है। पुराने खंड की "लोक गतिविधि से संबंध नहीं", "निजता का अनुचित अतिक्रमण", "बड़ा लोकहित" और संसद वाला परंतुक वर्तमान पाठ में नहीं हैं।

स्थिति (2 अक्टूबर 2026 तक): इस संशोधन को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार 16 फ़रवरी 2026 को पीठ ने नोटिस जारी किया और अंतरिम रोक से इनकार किया; 7 अगस्त 2026 को केंद्र को जवाब के लिए दो सप्ताह मिले। सुनवाई जारी है, इसलिए यह स्थिति बदल सकती है। देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश। विश्लेषण: धारा 8(2) का वाक्य, कि लोकहित हानि से अधिक हो तो लोक प्राधिकारी पहुँच दे सकता है, अधिनियम के पाठ में बना हुआ है; वह व्यक्तिगत सूचना पर कितना लागू होगा, यह अदालत में तय होना शेष है।

धारा 8(1)(j): मूल पाठ और वर्तमान पाठ

बिंदुमूल पाठ (2005 से)वर्तमान पाठ (13 नवंबर 2025 से, DPDP धारा 44(3))
शब्दinformation which relates to personal information the disclosure of which has no relationship to any public activity or interest, or which would cause unwarranted invasion of the privacy of the individualinformation which relates to personal information;
लोकहित की शर्तजब तक PIO या अपीलीय प्राधिकारी संतुष्ट न हो कि larger public interest प्रकटीकरण को उचित ठहराता हैखंड में नहीं
संसद वाला परंतुकजो सूचना संसद या राज्य विधान-मंडल को देने से मना नहीं की जा सकती, वह किसी को भी दी जाएगीखंड में नहीं
स्थितिप्रतिस्थापितप्रभावी; सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती लंबित, अंतरिम रोक नहीं (फ़रवरी और अगस्त 2026 की रिपोर्टें)

धारा 8(2) और 8(3): लोकहित का रास्ता और पुरानी सूचना

धारा 8(2) कहती है कि शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 में या उप-धारा (1) की किसी भी छूट के होते हुए, लोक प्राधिकारी पहुँच दे सकता है यदि प्रकटीकरण में लोकहित संरक्षित हितों की हानि से अधिक है (if public interest in disclosure outweighs the harm to the protected interests)। यह शब्द "may allow" का है, अर्थात अनुमति-रूप।

धारा 8(3) पुरानी सूचना का नियम है। खंड (a), (c) और (i) के अधीन रहते हुए, जो घटना, मामला या बात आवेदन की तिथि से बीस वर्ष पहले हुई, उसकी सूचना अनुरोध करने वाले किसी भी व्यक्ति को दी जाएगी। परंतुक: बीस वर्ष की गिनती किस तिथि से हो, इस पर प्रश्न उठे तो केंद्र सरकार का निर्णय अंतिम होगा, अधिनियम की सामान्य अपीलों के अधीन।

यहाँ दो बारीकियाँ ध्यान दें। पहली, बीस वर्ष का नियम खंड (a), (c) और (i) की छूटों को नहीं हटाता, यानी राज्य की सुरक्षा, विधान-मंडल के विशेषाधिकार और मंत्रिमंडल के काग़ज़ों वाली सूचना पर बीस वर्ष बाद भी वही नियम चलते हैं। दूसरी, बाक़ी खंडों की सूचना बीस वर्ष बाद देने योग्य हो जाती है।

धारा 9 और धारा 10

धारा 9 (Grounds for rejection to access in certain cases) सीधी सी है: धारा 8 के प्रति पूर्वाग्रह के बिना, PIO अनुरोध अस्वीकार कर सकता है यदि पहुँच देने में ऐसे व्यक्ति के कॉपीराइट का उल्लंघन हो जो राज्य नहीं है (infringement of copyright subsisting in a person other than the State)। यानी सरकार की अपनी कॉपीराइट वाली सामग्री इस आधार पर नहीं रोकी जा सकती, पर किसी निजी लेखक या प्रकाशक की कॉपीराइट वाली सामग्री रोकी जा सकती है।

धारा 10 (Severability) अधिनियम की एक मानवीय व्यवस्था है। यदि अनुरोध इसलिए अस्वीकृत हुआ कि सूचना छूट-प्राप्त है, तब भी अभिलेख के उस भाग तक पहुँच दी जा सकती है जिसमें छूट वाली सूचना नहीं है और जिसे युक्तियुक्त रूप से अलग किया जा सकता है। यह ऐसा है जैसे फ़ाइल के कुछ पन्नों पर काली पट्टी लगाकर बाक़ी पन्ने दे दिए जाएँ।

उप-धारा (2) कहती है कि भाग देने पर PIO आवेदक को सूचना देगा कि (a) केवल अभिलेख का वह भाग दिया जा रहा है जो छूट वाली सूचना से अलग किया गया; (b) निर्णय के कारण, तथ्य के किसी भी प्रमुख प्रश्न पर निष्कर्ष और उनका आधार; (c) निर्णय देने वाले का नाम और पदनाम; (d) गणना किया गया शुल्क और जमा की जाने वाली राशि; (e) समीक्षा के अधिकार का विवरण, धारा 19(1) के वरिष्ठ अधिकारी या आयोग का ब्योरा, समय-सीमा और प्रक्रिया सहित।

धारा 11: तृतीय पक्ष की सूचना (Third party information)

मान लीजिए आवेदक ने किसी सरकारी ठेके के दस्तावेज़ माँगे हैं जिनमें ठेकेदार कंपनी की दी हुई गोपनीय सामग्री है। कंपनी पर प्रभाव पड़ेगा, पर आवेदन उसके पास नहीं गया। धारा 11 इसी असंतुलन को ठीक करती है: तीसरे पक्ष को बोलने का मौक़ा देना।

उप-धारा (1): जब PIO ऐसी सूचना या अभिलेख (या उसका भाग) देना चाहे जो किसी तृतीय पक्ष से संबंधित है या उसके द्वारा दी गई है और जिसे उस तृतीय पक्ष ने गोपनीय माना है (treated as confidential), तो वह अनुरोध मिलने के पाँच दिन के भीतर तृतीय पक्ष को लिखित नोटिस देगा, जिसमें अनुरोध और सूचना देने के इरादे की बात हो, और तृतीय पक्ष को लिखित या मौखिक प्रतिवेदन देने के लिए आमंत्रित करेगा। तृतीय पक्ष का प्रतिवेदन निर्णय में ध्यान में रखा जाएगा। परंतुक: व्यापार या वाणिज्यिक रहस्यों को छोड़कर, जो विधि से संरक्षित हैं, प्रकटीकरण की अनुमति दी जा सकती है यदि लोकहित में प्रकटीकरण का महत्त्व तृतीय पक्ष को संभावित किसी हानि या क्षति से अधिक है।

उप-धारा (2): नोटिस मिलने की तिथि से दस दिन के भीतर तृतीय पक्ष को प्रस्तावित प्रकटीकरण के विरुद्ध प्रतिवेदन देने का अवसर दिया जाएगा। उप-धारा (3): धारा 7 के होते हुए भी, यदि तृतीय पक्ष को धारा (2) के अधीन अवसर दिया गया है, तो PIO अनुरोध मिलने के चालीस दिन के भीतर यह निर्णय लेगा कि सूचना दी जाए या नहीं, और निर्णय की लिखित सूचना तृतीय पक्ष को देगा। उप-धारा (4): इस नोटिस में यह कथन होगा कि तृतीय पक्ष को धारा 19 के अधीन निर्णय के विरुद्ध अपील करने का अधिकार है।

धारा 11 की समय-सारणी

चरणसमय-सीमाउप-धारा
PIO तृतीय पक्ष को लिखित नोटिस देता हैअनुरोध मिलने से 5 दिन के भीतर11(1)
तृतीय पक्ष को प्रतिवेदन का अवसरनोटिस मिलने से 10 दिन के भीतर11(2)
PIO का निर्णय और तृतीय पक्ष को लिखित सूचनाअनुरोध मिलने से 40 दिन के भीतर (धारा 7 की 30 दिन की अवधि के बावजूद)11(3)
नोटिस में अपील के अधिकार का उल्लेखनिर्णय की सूचना के साथ11(4); अपील का ब्योरा धारा 19(2), पाँचवें पृष्ठ पर

तुलना: धारा 8, 9, 10 और 11

किस बात की

8सूचना की श्रेणी छूट-प्राप्त (दस खंड)

9कॉपीराइट, राज्य से भिन्न व्यक्ति का

10छूट वाले भाग का पृथक्करण

11तृतीय पक्ष की गोपनीय सूचना

परिणाम

8देने की बाध्यता नहीं; 8(2) में लोकहित का रास्ता; 8(3) में बीस वर्ष का नियम

9PIO अनुरोध अस्वीकार कर सकता है

10शेष अभिलेख तक पहुँच, कारण और अपील की सूचना सहित

115 दिन में नोटिस, 10 दिन में प्रतिवेदन, 40 दिन में निर्णय

मुख्य तथ्य

धारा 6(2)
आवेदक से सूचना माँगने का कारण नहीं पूछा जाएगा
धारा 6(3) का परंतुक
अन्य प्राधिकारी को अंतरण, आवेदन मिलने से अधिकतम 5 दिन में
धारा 7(1)
30 दिन; जीवन या स्वतंत्रता की सूचना 48 घंटे
धारा 7(5) और 7(6)
ग़रीबी रेखा से नीचे वालों से शुल्क नहीं; समय-सीमा चूकने पर सूचना निःशुल्क
धारा 8(1)(j)
13 नवंबर 2025 से "information which relates to personal information;" (DPDP अधिनियम 2023, धारा 44(3)); सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती लंबित (2026)
DPDP धारा 44(3) का प्रारंभ
अधिसूचना G.S.R. 843(E), 13 नवंबर 2025: धारा 44(1) और (3) तुरंत; 44(2) अठारह माह बाद (2025)
धारा 8(3)
बीस वर्ष पुरानी सूचना; खंड (a), (c), (i) के अधीन
धारा 11
5 दिन में नोटिस; 10 दिन में प्रतिवेदन; 40 दिन में निर्णय
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026 (CIC का 18 नवंबर 2025 तक का संशोधित पाठ; 8(1)(j) पर सुनवाई की रिपोर्टें अगस्त 2026 तक)

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • 30 दिन और 48 घंटे को आपस में उलझाना। 48 घंटे केवल जीवन या स्वतंत्रता की सूचना के लिए हैं।
  • धारा 11 की तीनों संख्याएँ (5, 10, 40) गड़बड़ाना। 5 दिन नोटिस के लिए, 10 दिन तृतीय पक्ष के प्रतिवेदन के लिए, 40 दिन निर्णय के लिए।
  • धारा 8(1)(j) का पुराना पाठ आज का पाठ बताना, या इसके उलट। मूल पाठ में लोकहित की शर्त और निजता का अनुचित अतिक्रमण था; वर्तमान पाठ केवल "personal information" कहता है, और चुनौती लंबित है।
  • धारा 8(1)(d) और (e) में लोकहित का अपवाद है, पर (f) की सीधी भाषा में नहीं। (f) के लिए केवल "विदेशी सरकार से विश्वास में प्राप्त" लिखें और धारा 8(2) की सामान्य लोकहित-व्यवस्था का अलग उल्लेख करें।
  • धारा 9 को धारा 8 की तरह छूटों की सूची समझना। धारा 9 में केवल कॉपीराइट का एक आधार है।
  • सूचना माँगने का कारण बताना अनिवार्य लिख देना। धारा 6(2) इसके उलट है।