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राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956: धारा 128 से 137, वार्षिक रजिस्टर, नामांतरण और उत्तराधिकार

3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Rajasthan Land Revenue Act, 1956: Sections 1, 2; Section 3 interpretation (land record officer, municipality, nazul land, panchayat circle, revenue appellate authority, settlement officer, village); Sections 4-36, 40A, 74-87, 106-137, 142-183." इस पृष्ठ पर धारा 128 से 137 हैं: सीमा-चिह्नों का रख-रखाव, वार्षिक रजिस्टर, उत्तराधिकार और क़ब्ज़े के परिवर्तन की रिपोर्ट (नामांतरण), त्रुटि-सुधार और संपदाओं का उत्तराधिकार। अधिनियम के छह पृष्ठ: (1) धारा 1 से 3; (2) धारा 4 से 36; (3) धारा 40A और 74 से 87; (4) धारा 106 से 127; (5) धारा 128 से 137; (6) धारा 142 से 183। यह सामग्री परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • इसी भाग से दो प्रश्न आ चुके हैं। 2024 (पेपर III) का 5 अंक का प्रश्न "Mutation under Rajasthan Land Revenue Act 1956" और 2018 (पेपर III) का 5 अंक का प्रश्न कि क्या "वार्षिक रजिस्टर" की अभिव्यक्ति "अधिकार अभिलेख" से विस्तृत है। दोनों के हल इस पृष्ठ पर हैं।
  • "Mutation" शब्द धाराओं के पाठ में नहीं है; वह केवल प्रथम अनुसूची की न्यायिक मामलों की सूची की मद 7 ("Mutation upon succession, transfer or otherwise") में आता है (देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ)। यह पृष्ठ दिखाता है कि वही प्रक्रिया किन धाराओं (132(2), 133, 134, 135, 136) में बँटी है, ताकि किसी भी रूप में पूछा गया प्रश्न हल हो सके।
  • यहाँ तीन महीने की रिपोर्ट-अवधि, दस रुपये तक का दंड और तीस दिन की चेतावनी जैसी संख्याएँ हैं, जो सीधे वस्तुनिष्ठ और लघु प्रश्न बनती हैं।

पहले सरल भाषा में

मान लीजिए किसी किसान का निधन हो गया और उसकी ज़मीन उसके बेटों के पास आ गई। काग़ज़ में अब भी पिता का नाम चलता रहे तो क्या होगा? बेटे ज़मीन बेचना चाहें तो ख़रीदार को पुराना नाम दिखेगा, बैंक ऋण नहीं देगा, और विवाद उठे तो सबूत कमज़ोर होगा। इसलिए ज़रूरी है कि हर बदलाव अभिलेख में चढ़े। इसी चढ़ाने की प्रक्रिया को आम बोलचाल में नामांतरण (mutation) कहते हैं।

धारा 128 से 137 इसी कारोबार का हिस्सा हैं। पहले अभिलेख बन जाता है (पिछला पृष्ठ), फिर उसे सालों-साल सही रखना पड़ता है। इसके तीन खंभे हैं: सीमा-चिह्न सलामत रहें (धारा 128 से 131), रजिस्टर हर साल बदलावों के साथ तैयार हों (धारा 132), और जिसे ज़मीन का नया हक़ या क़ब्ज़ा मिले वह रिपोर्ट करे और तहसीलदार उसे दर्ज करे (धारा 133 से 135)। अंत में ग़लतियाँ सुधारने (धारा 136) और संपदाओं के उत्तराधिकार (धारा 137) के नियम हैं।

सीमा-चिह्नों के नियम: धारा 128 से 131

धारा 128: सीमा के सभी विवाद भूमि अभिलेख अधिकारी धारा 111 की रीति से तय करता है। परंतुक: खेतों की सीमा के संबंध में जहाँ कोई विवाद नहीं है, पर सही सीमा-चिह्न न होने से विवाद की आशंका है, वहाँ आवेदन तहसीलदार के पास दिए और उसी से निपटाए जा सकते हैं।

धारा 129(1): गाँवों, संपदाओं और खेतों के सभी धारक अपने ख़र्च पर वैध रूप से लगाए स्थायी सीमा-चिह्नों को बनाए रखने और मरम्मत कराने को बाध्य हैं। भूमि अभिलेख अधिकारी कभी भी उन्हें आदेश दे सकता है कि (a) उचित सीमा-चिह्न लगाएँ, या (b) जिस रूप और सामग्री में वह निर्धारित करे, उसमें चिह्नों की मरम्मत या नवीनीकरण करें। धारा 129(2): आदेश के संप्रेषण से तीस दिन के भीतर पालन न हो, तो वही अधिकारी चिह्न लगवाता, मरम्मत या नवीनीकरण कराता है और ख़र्च संबंधित धारकों से उचित अनुपात में वसूलता है। धारा 129(3): जहाँ खेतों की सीमाओं पर कोई विवाद नहीं है, वहाँ उप-धारा (1) और (2) की कार्रवाई तहसीलदार आवेदन पर या स्वयं कर सकता है।

धारा 130: जो व्यक्ति जानबूझकर सीमा-चिह्न या सर्वेक्षण-चिह्न मिटाए, हटाए या बिगाड़े, उसे भूमि अभिलेख अधिकारी चिह्न की बहाली और सूचना देने वाले को पुरस्कार के लिए आवश्यक राशि भरने का आदेश दे सकता है। यह राशि प्रत्येक चिह्न पर एक अधिकतम सीमा तक रहेगी (राशि के लिए देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ)। राशि वसूल न हो सके या अपराधी न मिले, तो अधिकारी चिह्न स्वयं बहाल करके उसका ख़र्च सटे हुए गाँवों, संपदाओं या खेतों के धारकों से, जिन्हें वह उचित समझे, वसूलता है।

धारा 131: सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही पूरी होने के बाद नक़्शा और क्षेत्र-पुस्तिका भूमि अभिलेख अधिकारी राज्य सरकार के नियमों के अनुसार बनाए रखता है। वह हर साल, या राज्य सरकार जितने लंबे अंतराल निर्धारित करे, उनमें गाँव, संपदा या खेत की सीमाओं के सब बदलाव दर्ज कराता है और नक़्शे या क्षेत्र-पुस्तिका की सिद्ध त्रुटियाँ सुधारता है।

वार्षिक रजिस्टर: धारा 132

धारा 132(1): भूमि अभिलेख अधिकारी अधिकार अभिलेख को बनाए रखता है और इसके लिए हर वर्ष, या राज्य सरकार जितने लंबे अंतराल निर्धारित करे, उन रजिस्टरों का एक सेट या संशोधित सेट तैयार कराता है जो धारा 114 और 120 में गिनाए गए हैं। इस प्रकार तैयार रजिस्टरों का नाम "वार्षिक रजिस्टर" (annual registers) है।

धारा 132(2): भूमि अभिलेख अधिकारी निर्धारित ढंग से वार्षिक रजिस्टरों में वे सब बदलाव और वे सब लेन-देन दर्ज कराता है जो दर्ज अधिकारों या हितों को प्रभावित करें। यानी वार्षिक रजिस्टर "जीवित" दस्तावेज़ हैं, जो हर साल उतना ही बदलते हैं जितनी ज़मीन पर हलचल होती है।

वार्षिक रजिस्टर का पूरा जीवन तीन चरणों में है: धारा 114 और 120 के रजिस्टर बनाना, उन्हें हर वर्ष नए सेट के रूप में तैयार करना, और बीच-बीच में हर बदलाव, यानी नामांतरण, उनमें दर्ज करना। इसी तीसरे चरण का विस्तार धारा 133 से 135 में है।

नामांतरण की प्रक्रिया: धारा 133 से 135

"Mutation" शब्द धाराओं के पाठ में नहीं, प्रथम अनुसूची की मद 7 (न्यायिक मामले, धारा 23) में है। जिस प्रक्रिया को नामांतरण कहा जाता है, उसका क़ानूनी आधार धारा 132(2) और धारा 133, 134, 135 हैं: उत्तराधिकार, अंतरण या अन्य प्रकार से क़ब्ज़ा या अधिकार पाने की रिपोर्ट, रिपोर्ट न देने पर दंड, और तहसीलदार द्वारा जाँच और अभिलेख में प्रविष्टि।

धारा 133(1): हर व्यक्ति जो उत्तराधिकार, अंतरण या अन्य प्रकार से किसी भूमि में किसी संपत्ति या अन्य अधिकार या हित, या उसके लाभ का क़ब्ज़ा पाए, जिसे इस अधिनियम या नियमों के अधीन वार्षिक रजिस्टरों में दर्ज किया जाना है, वह (i) इस तथ्य को गाँव के पटवारी की जानकारी में लाएगा, और (ii) उस तहसील के तहसीलदार को रिपोर्ट करेगा जिसमें भूमि है, सीधे या गाँव के पटवारी अथवा भूमि अभिलेख निरीक्षक के माध्यम से। यह क़ब्ज़ा पाने की तारीख़ से तीन महीने के भीतर करना है। धारा 133(2): अगर वह व्यक्ति अवयस्क या अन्यथा अयोग्य है, तो उसका अभिभावक या उसकी संपत्ति का प्रभारी व्यक्ति रिपोर्ट करेगा।

धारा 134: धारा 133 की रिपोर्ट न देने वाला व्यक्ति अधिकतम दस रुपये (rupees ten) के जुर्माने का दायी है। धारा 135(1): रिपोर्ट मिलने पर, या तथ्यों की जानकारी अन्यथा मिलने पर, तहसीलदार आवश्यक जाँच करता है और विवादरहित मामलों में, यदि उत्तराधिकार, अंतरण या अन्य अर्जन होता प्रतीत हो, तो उसे वार्षिक रजिस्टरों में दर्ज करता है। धारा 135(2): अगर वह विवादित है, तो तहसीलदार, यदि इस अधिनियम या किसी अन्य लागू विधि के अधीन सक्षम है, विधि के अनुसार विवाद का निर्णय करता है, और यदि सक्षम नहीं तो उसे किसी अन्य सक्षम अधिकारी को निर्णय के लिए भेज देता है।

ध्यान दें कि धारा 135(1) में "undisputed cases" यानी विवादरहित मामलों में प्रविष्टि सीधी है, पर विवाद होते ही प्रक्रिया बदल जाती है: तहसीलदार या तो स्वयं निर्णय करता है या सक्षम अधिकारी को भेजता है। इसीलिए नामांतरण स्वामित्व का निर्णय नहीं, अभिलेख में दर्ज होने की प्रक्रिया है। विवाद का अंतिम अधिकार-निर्णय अलग मंच से होता है।

त्रुटि-सुधार और संपदाओं का उत्तराधिकार: धारा 136 और 137

धारा 136: भूमि अभिलेख अधिकारी कभी भी निर्धारित ढंग से अधिकार अभिलेख या रजिस्टर की लिपिकीय त्रुटियों को, और उन त्रुटियों को जिन्हें संबंधित पक्ष स्वीकारें कि हुई हैं, या जिन्हें निरीक्षण में कोई राजस्व अधिकारी देखे, सुधार सकता है या सुधरवा सकता है। परंतुक: जब त्रुटि किसी राजस्व अधिकारी ने निरीक्षण में देखी हो, तो पक्षों को कारण बताओ नोटिस दिए बिना कोई त्रुटि नहीं सुधारी जाएगी।

धारा 137: इस अधिनियम में कुछ भी लिखा हो, किसी संपदा (estate) का उत्तराधिकार और अंतरण उस स्थानीय क्षेत्र की विधि, रूढ़ि या प्रथा से शासित और निर्धारित होगा जिसमें संपदा स्थित है, और वह विधि, रूढ़ि या प्रथा धारा 263 के बावजूद इसी प्रयोजन के लिए लागू रहेगी। यानी अधिनियम स्वयं उत्तराधिकार के नियम नहीं बनाता, वह स्थानीय विधि और प्रथा पर छोड़ देता है।

नामांतरण की कड़ी: धारा 132(2) और 133 से 135

चरणकौनक्याधारा
1क़ब्ज़ा पाने वाला व्यक्तिपटवारी को सूचित करे और तहसीलदार को रिपोर्ट दे, सीधे या पटवारी या भूमि अभिलेख निरीक्षक के माध्यम से133(1)
2समय-सीमाक़ब्ज़ा पाने की तारीख़ से तीन महीने133(1)
3अवयस्क या अयोग्य के मामले मेंअभिभावक या संपत्ति का प्रभारी व्यक्ति रिपोर्ट करे133(2)
4रिपोर्ट न देने परअधिकतम दस रुपये का जुर्माना134
5तहसीलदारआवश्यक जाँच; विवादरहित हो तो वार्षिक रजिस्टर में प्रविष्टि135(1)
6विवाद हो तोसक्षम हो तो तहसीलदार निर्णय करे, अन्यथा सक्षम अधिकारी को भेजे135(2)
7रजिस्टर में बदलावभूमि अभिलेख अधिकारी निर्धारित ढंग से सब बदलाव दर्ज कराए132(2)

धारा-वार सार: धारा 128 से 137

धाराविषयमुख्य बात
128सीमा-विवादभूमि अभिलेख अधिकारी, धारा 111 की रीति; विवादरहित खेत-सीमा पर तहसीलदार
129सीमा-चिह्न की ज़िम्मेदारीधारकों के ख़र्च पर; आदेश के बाद तीस दिन; फिर अधिकारी स्वयं कराकर वसूले
130चिह्न मिटाने की सज़ाप्रति चिह्न राशि की अधिकतम सीमा; अपराधी न मिले तो सटे धारकों से वसूली
131नक़्शा और क्षेत्र-पुस्तिकासीमा के बदलाव हर साल या निर्धारित अंतराल पर दर्ज
132वार्षिक रजिस्टरहर वर्ष या निर्धारित अंतराल पर नया या संशोधित सेट; सब बदलाव दर्ज
133क़ब्ज़े की रिपोर्टतीन महीने; पटवारी को सूचना, तहसीलदार को रिपोर्ट
134रिपोर्ट न देने परअधिकतम दस रुपये
135रिपोर्ट पर कार्रवाईजाँच; विवादरहित में प्रविष्टि; विवाद में निर्णय या संदर्भ
136त्रुटि-सुधारभूमि अभिलेख अधिकारी; निरीक्षण में देखी त्रुटि पर कारण बताओ नोटिस
137संपदाओं का उत्तराधिकारस्थानीय विधि, रूढ़ि या प्रथा से

अधिकार अभिलेख और वार्षिक रजिस्टर: तुलना

अधिकार अभिलेख (धारा 113, 114)

कब बनता हैसर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही या अभिलेख-कार्यवाही के दौरान

कौन बनाता हैभूमि अभिलेख अधिकारी

क्या हैखेवट, खतौनी, लगान-मुक्त धारकों का रजिस्टर और अन्य निर्धारित रजिस्टर

उद्देश्यअधिकारों का मूल अभिलेख

वार्षिक रजिस्टर (धारा 132)

कब बनता हैहर वर्ष, या राज्य सरकार जितने लंबे अंतराल निर्धारित करे

कौन बनाता हैभूमि अभिलेख अधिकारी (धारा 132(1))

क्या हैधारा 114 के (और धारा 120 के) रजिस्टरों का नया या संशोधित सेट

उद्देश्यमूल अभिलेख को अद्यतन रखना और हर बदलाव दर्ज करना (धारा 132(2))

नामांतरण का प्रवाह: धारा 133 से 135

  1. क़ब्ज़ा, अधिकार या हित मिला

    उत्तराधिकार, अंतरण या अन्य प्रकार से

  2. पटवारी को सूचना और तहसीलदार को रिपोर्ट

    तीन महीने के भीतर; अवयस्क के लिए अभिभावक; धारा 133

  3. रिपोर्ट न दी तो

    अधिकतम दस रुपये का जुर्माना, धारा 134

  4. तहसीलदार की जाँच

    धारा 135(1)

  5. विवादरहित: वार्षिक रजिस्टर में प्रविष्टि

    धारा 135(1), 132(2)

  6. विवादित: निर्णय या संदर्भ

    सक्षम तहसीलदार स्वयं; अन्यथा सक्षम अधिकारी को, धारा 135(2)

"Mutation" केवल प्रथम अनुसूची की मद 7 में आता है; यह प्रवाह उसी प्रक्रिया की धाराएँ हैं।

मुख्य तथ्य

सीमा-चिह्न की मरम्मत का आदेश
अनुपालन के लिए आदेश के संप्रेषण से तीस दिन, धारा 129(2)
चिह्न मिटाने पर राशि
प्रति चिह्न की अधिकतम राशि के लिए: आधिकारिक अधिनियम पाठ देखें, धारा 130
वार्षिक रजिस्टर
हर वर्ष या राज्य सरकार जितने लंबे अंतराल निर्धारित करे, धारा 132(1)
क़ब्ज़े की रिपोर्ट
तीन महीने, पटवारी को सूचना और तहसीलदार को रिपोर्ट, धारा 133(1)
रिपोर्ट न देने पर
अधिकतम दस रुपये, धारा 134
अवयस्क के लिए रिपोर्ट
अभिभावक या संपत्ति का प्रभारी, धारा 133(2)
त्रुटि-सुधार
भूमि अभिलेख अधिकारी; निरीक्षण में देखी त्रुटि पर कारण बताओ नोटिस, धारा 136
संपदा का उत्तराधिकार
स्थानीय विधि, रूढ़ि या प्रथा से, धारा 137
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026

राजस्थान का पहलू

राजस्थान में नामांतरण की रिपोर्ट गाँव के पटवारी और तहसील के तहसीलदार के पास जाती है, और पटवारी वार्षिक रजिस्टर रखने वाली ग्राम-स्तर की कड़ी है (धारा 31, 133)। नामांतरण स्वामित्व का फ़ैसला नहीं करता, वह अभिलेख की प्रविष्टि है; विवाद होने पर निर्णय अलग से होता है (धारा 135(2)).

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • अधिनियम में "mutation" की कोई धारा-संख्या गढ़ना। सही उत्तर धारा 133 से 135 और धारा 132(2) से बनता है, और बताना चाहिए कि शब्द केवल प्रथम अनुसूची की मद 7 में आता है।
  • रिपोर्ट की अवधि तीस दिन या दो महीने लिखना। धारा 133(1) में तीन महीने है। तीस दिन धारा 129(2) में सीमा-चिह्न के आदेश की अवधि है।
  • धारा 134 के जुर्माने की राशि ग़लत लिखना। अधिकतम दस रुपये है।
  • नामांतरण को स्वामित्व का अंतिम निर्णय समझ लेना। तहसीलदार विवादरहित मामले में प्रविष्टि करता है, विवाद में विधि के अनुसार निर्णय करता है या भेजता है (धारा 135).
  • वार्षिक रजिस्टर और अधिकार अभिलेख को एक मान लेना। अधिकार अभिलेख मूल अभिलेख है, वार्षिक रजिस्टर उसके रजिस्टरों के हर साल के नए या संशोधित सेट हैं (धारा 132).