मुख्य सामग्री पर जाएं
पेपर I · इकाई III (ख)

प्रबंधकीय कौशल और प्रबंध के स्तर: तकनीकी, मानवीय, वैचारिक कौशल और दस भूमिकाएँ

शीर्ष, मध्यम और पर्यवेक्षीय स्तर का काम, कैट्ज़ के तीन कौशल और स्तर के साथ उनका बदलता महत्त्व, और मिंट्ज़बर्ग की दस भूमिकाएँ।

  • प्रबंध के स्तर
  • कैट्ज़
  • तकनीकी कौशल
  • मानवीय कौशल
  • वैचारिक कौशल
  • मिंट्ज़बर्ग
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग B (Management): "General Management: concept of management, managerial skills and levels, management functions; MBO; decision making: process, techniques and models." इस पृष्ठ पर "managerial skills and levels" है; अवधारणा, कार्य, MBO और निर्णय के अलग पृष्ठ हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • सिलेबस में "managerial skills and levels" एक अलग पंक्ति है, पर 2013-2024 के संकलित छह पेपरों में इस पर सीधा प्रश्न नहीं आया। इसलिए यह "तैयार रखने" वाला विषय है: प्रश्न आए तो संभवतः 2 या 5 अंक का वर्णन-आधारित होगा (अनुमान)।
  • यह पृष्ठ आगे के कई विषयों का आधार है: नेतृत्व, निर्णय-निर्माण और संगठन-व्यवहार में बार-बार पूछा जाता है कि किस स्तर पर कौन-सा कौशल ज़्यादा काम आता है।
  • कैट्ज़ का मॉडल सिविल सेवा के करियर से भी सीधे जुड़ता है: तकनीकी जानकार से नीति-निर्माता बनने में कौशल का मिश्रण बदलता है। प्रशासन-संबंधी उत्तरों में इसका उदाहरण अलग से अंक दिला सकता है (विश्लेषण)।

PYQ की स्थिति

2013-2024 के संकलित पेपरों में इस विषय का कोई सीधा प्रश्न नहीं आया। नीचे के अभ्यास प्रश्न मौलिक हैं, PYQ नहीं।

पहले सरल भाषा में: सहकारी दूध-डेयरी की तीन सीढ़ियाँ

एक सहकारी डेयरी की कल्पना कीजिए। सबसे ऊपर प्रबंध-निदेशक है, जिसे तय करना है कि अगले पाँच साल में डेयरी नए ज़िलों तक पहुँचेगी या नहीं, दूध के दाम पर बाज़ार कैसा रहेगा और पूँजी कहाँ से आएगी। बीच में संयंत्र-प्रबंधक है, जो इस बड़ी योजना को हर महीने के उत्पादन-लक्ष्य में बदलता है और विपणन, गुणवत्ता तथा लेखा विभाग के बीच तालमेल बिठाता है। सबसे नीचे पाली-पर्यवेक्षक है, जो आज की पाली में चिलिंग प्लांट, पैकिंग और सफ़ाई पर सीधे नज़र रखता है।

तीनों प्रबंधक हैं, फिर भी तीनों के काम की भाषा अलग है। शीर्ष पर दृष्टि और दिशा चाहिए, बीच में तालमेल और क्रियान्वयन, नीचे में तकनीक का सटीक ज्ञान और कर्मचारियों से रोज़ का संवाद। इसी भेद को दो तरह से समझाया जाता है: प्रबंध के स्तर (कौन कहाँ बैठा है) और प्रबंधकीय कौशल (कौन-सी योग्यता कहाँ ज़्यादा काम आती है)।

प्रबंध के तीन स्तर

NCERT के अनुसार संगठन में प्रबंधक अधिकार और उत्तरदायित्व के रिश्ते से बँधे पदानुक्रम (hierarchy) में काम करते हैं, और इसी से सामान्यतः तीन स्तर बनते हैं: शीर्ष (Top), मध्यम (Middle) और पर्यवेक्षीय या संचालन (Supervisory/Operational) प्रबंध।

शीर्ष प्रबंध में सबसे वरिष्ठ अधिकारी आते हैं, जैसे अध्यक्ष (चेयरमैन), मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), मुख्य परिचालन अधिकारी (COO), प्रेसीडेंट और उपाध्यक्ष। यह अधिकतर एक टीम होती है, जिसमें वित्त, विपणन आदि के कार्यात्मक प्रमुख होते हैं। इनका मूल काम अलग-अलग तत्वों को जोड़ना और विभागों की गतिविधियों का संगठन के समग्र उद्देश्यों के अनुसार समन्वय करना है। ये व्यावसायिक वातावरण का विश्लेषण करते हैं, समग्र लक्ष्य और उन्हें पाने की रणनीति बनाते हैं और संगठन के बचे रहने तथा कल्याण के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। NCERT यह भी कहता है कि शीर्ष स्तर के प्रबंधक निचले स्तर के प्रबंधकों से ज़्यादा समय नियोजन और संगठन में लगाते हैं।

मध्यम प्रबंध शीर्ष और निचले स्तर के बीच की कड़ी है। ये विभागाध्यक्ष या प्रभाग-प्रमुख होते हैं, जैसे उत्पादन प्रबंधक। इनका काम शीर्ष प्रबंध की बनाई नीतियों और योजनाओं को लागू और नियंत्रित करना है। इसके लिए ये शीर्ष की नीतियों की व्याख्या करते हैं, विभाग में ज़रूरी कर्मचारी सुनिश्चित करते हैं, उनमें कर्तव्य बाँटते हैं, उन्हें अभिप्रेरित करते हैं और स्कीम चलाने के लिए अन्य विभागों से सहयोग करते हैं। साथ ही ये पर्यवेक्षीय प्रबंधकों की सभी गतिविधियों के लिए उत्तरदायी हैं।

पर्यवेक्षीय या संचालन प्रबंध में फ़ोरमैन और पर्यवेक्षक आते हैं। ये श्रमिकों के प्रयासों की सीधी देखरेख करते हैं। इनका अधिकार और उत्तरदायित्व शीर्ष प्रबंध की योजनाओं की सीमा में है। पर महत्त्व कम नहीं: ये मध्यम प्रबंध के निर्देश कर्मचारियों तक पहुँचाते हैं और इन्हीं के प्रयास से उत्पाद की गुणवत्ता बनी रहती है, सामग्री की बर्बादी घटती है और सुरक्षा-मानक पूरे होते हैं।

प्रबंध के तीन स्तर: एक नज़र में

स्तरविशिष्ट पद (NCERT)मूल कामसहायक टिप्पणी
शीर्ष प्रबंधअध्यक्ष, CEO, COO, प्रेसीडेंट, उपाध्यक्ष, वित्त/विपणन प्रमुखसमग्र लक्ष्य और रणनीति, विभागों का समन्वय, संगठन का अस्तित्वसबसे ज़्यादा समय नियोजन और संगठन में
मध्यम प्रबंधविभाग या प्रभाग-प्रमुख, जैसे उत्पादन प्रबंधकनीतियों की व्याख्या और क्रियान्वयन, कर्मचारी-व्यवस्था, अभिप्रेरण, अंतर-विभागीय सहयोगशीर्ष और निचले स्तर के बीच की कड़ी
पर्यवेक्षीय / संचालन प्रबंधफ़ोरमैन, पर्यवेक्षककार्यबल की सीधी देखरेख, निर्देशों का संप्रेषण, गुणवत्ता, बर्बादी में कमी, सुरक्षाश्रमिकों से सीधे संपर्क में

आधार: NCERT, कक्षा 12 Business Studies, अध्याय 1, पृ. 17-19; तालिका की रचना विश्लेषण है।

कैट्ज़ के तीन कौशल

रॉबर्ट एल. कैट्ज़ ने "Skills of an Effective Administrator" नामक लेख में तीन बुनियादी कौशल बताए, जो हर सफल प्रबंधक में कम-ज़्यादा मात्रा में चाहिए। लेख मूल रूप से 1955 में लिखा गया था और 1974 में Harvard Business Review ने उसे क्लासिक के रूप में दोबारा छापा। ERIC के अभिलेख के अनुसार तीनों कौशल प्रबंध के स्तर के हिसाब से अलग-अलग अनुपात में चाहिए।

तकनीकी कौशल (Technical Skill) किसी विशिष्ट प्रकार के काम या गतिविधि का ज्ञान और उसमें दक्षता है, जैसे लेखाकार का लेखा-ज्ञान, इंजीनियर का तकनीकी ज्ञान या चिकित्सक की चिकित्सा-विशेषज्ञता। इसमें उस क्षेत्र के औज़ारों और तकनीकों का उपयोग भी शामिल है।

मानवीय कौशल (Human Skill) लोगों के साथ और उनके माध्यम से काम करने की समझ और क्षमता है: सुनना, समझाना, टीम बनाना, टकराव सुलझाना और अलग-अलग स्वभाव के लोगों से पटरी बैठाना। यह किसी भी स्तर पर ज़रूरी है, क्योंकि प्रबंधक का काम दूसरों से कराना है।

वैचारिक कौशल (Conceptual Skill) विचारों और अवधारणाओं के साथ काम करने की क्षमता है: संगठन को पूरे ढाँचे के रूप में देखना, उसके अलग-अलग हिस्सों के आपसी संबंध समझना, भविष्य की दिशा और दृष्टि गढ़ना और आर्थिक-सामाजिक शक्तियों का असर पहचानना।

ध्यान दें कि कैट्ज़ का मॉडल ऊपर वर्णित स्तरों से जुड़ा है। जो प्रबंधक जितना ऊपर जाता है, उसके लिए वैचारिक कौशल की भूमिका उतनी बढ़ती है और तकनीकी कौशल की अपनी भूमिका घटती है, क्योंकि वह अपने नीचे के विशेषज्ञों पर निर्भर रहता है। मानवीय कौशल हर स्तर पर चाहिए। पर्यवेक्षक के लिए तकनीकी और मानवीय कौशल सबसे ज़रूरी हैं। मध्यम स्तर पर तीनों का संतुलन चाहिए। शीर्ष पर वैचारिक और मानवीय कौशल मुख्य हैं। यह सामान्यीकरण पाठ्य-सामग्री का है, इसलिए उत्तर में "कैट्ज़ के मॉडल के अनुसार सामान्यतः" लिखना ठीक रहता है; सटीक प्रतिशत देना ठीक नहीं।

स्तर और कौशल: सापेक्ष महत्त्व

कौशलपर्यवेक्षीय स्तरमध्यम स्तरशीर्ष स्तर
तकनीकीअत्यंत ज़रूरीज़रूरी, पर कमकम ज़रूरी; विशेषज्ञों पर निर्भरता
मानवीयअत्यंत ज़रूरीअत्यंत ज़रूरीअत्यंत ज़रूरी
वैचारिककम ज़रूरीज़रूरीसबसे ज़रूरी

आधार: Katz (1955/1974) का सामान्यीकरण, जैसा Northouse (SAGE) में दिया है; "सापेक्ष" शब्द विश्लेषण है, सटीक अनुपात स्रोतों में नहीं दिए गए हैं।

एक पुरानी पुष्टि: फ़ेयोल की क्षमता-तालिका

कैट्ज़ से कई दशक पहले फ़ेयोल ने भी यही निष्कर्ष निकाला था, यद्यपि शब्द अलग थे। उनकी पुस्तक (अंग्रेज़ी अनुवाद 1949) के अध्याय II के निष्कर्षों के अनुसार कर्मचारी की सबसे महत्त्वपूर्ण क्षमता तकनीकी है, पर जैसे-जैसे कोई पदक्रम में ऊपर जाता है, प्रबंधकीय क्षमता का सापेक्ष महत्त्व बढ़ता है और तकनीकी का घटता है। प्रबंधक की सबसे महत्त्वपूर्ण क्षमता प्रबंधकीय है और अधिकार का स्तर जितना ऊँचा, यह क्षमता उतनी हावी।

परीक्षा में यह जोड़ने से उत्तर की गहराई बढ़ती है: "यह विचार फ़ेयोल के यहाँ भी मिलता है", पर फ़ेयोल की तालिका की संख्याएँ न लिखें, क्योंकि वे उनके अपने आकलन हैं और स्वयं फ़ेयोल मानते हैं कि उन पर चर्चा हो सकती है।

आज का प्रबंधक: कठोर और कोमल कौशल

NCERT आज के वैश्विक प्रबंधक को "कठोर" (hard) और "कोमल" (soft) दोनों तरह के कौशल वाला बताता है। कठोर कौशल में विश्लेषण, रणनीति, इंजीनियरिंग और तकनीक की समझ आती है। कोमल कौशल में यह समझ आती है कि टीमें कैसे काम करती हैं, संगठन कैसे चलता है और लोग कैसे अभिप्रेरित होते हैं। NCERT के अनुसार तकनीकी और विश्लेषणात्मक समझ वाले प्रबंधकों की अब भी ज़रूरत है, पर वैश्विक सफलता के लिए सबसे अहम वे लोग हैं जो टीम, संगठन और अभिप्रेरण को समझते हैं।

इसे कैट्ज़ की भाषा में यों जोड़ा जा सकता है: कठोर कौशल मोटे तौर पर तकनीकी और विश्लेषणात्मक पक्ष से मेल खाते हैं, और कोमल कौशल मानवीय पक्ष से (विश्लेषण)। NCERT यह भी कहता है कि वैश्विक प्रबंधक की भूमिका एक सीमित व्यावसायिक संदर्भ की एकआयामी भूमिका से बदलकर बहुआयामी हो गई है, जिसमें तकनीकी कौशल, कोमल प्रबंध-कौशल और अलग-अलग संस्कृतियों के अनुभव को आत्मसात करने की क्षमता चाहिए। परीक्षा में आधुनिक प्रवृत्तियों का प्रश्न आए तो यह एक पंक्ति कैट्ज़ के पुराने मॉडल को ताज़ा करती है।

पदोन्नति, प्रशिक्षण और कौशल का मिश्रण (विश्लेषण)

कौशल और स्तर का रिश्ता केवल सिद्धांत नहीं, प्रशिक्षण की रूपरेखा भी तय करता है। जो कर्मचारी तकनीकी रूप से सबसे दक्ष है, उसे पर्यवेक्षक बनाना स्वाभाविक है, क्योंकि वहाँ तकनीकी और मानवीय दोनों काम आते हैं। पर उसे मध्यम स्तर पर पहुँचाने से पहले योजना बनाने, अंतर-विभागीय तालमेल और लोगों को प्रेरित करने का प्रशिक्षण चाहिए, वरना वह हर समस्या को ख़ुद सुलझाने की पुरानी आदत में अटका रहेगा।

शीर्ष की तैयारी में सबसे बड़ा बदलाव सोच का है: कार्य के ब्योरे से हटकर संगठन के समग्र चित्र की ओर देखना। इसी कारण प्रशिक्षण-संस्थान ऊपरी पदों के लिए नीति, रणनीति और नेतृत्व के पाठ्यक्रम चलाते हैं। यह सब एक तार्किक निष्कर्ष है, किसी एक स्रोत का दावा नहीं, इसलिए उत्तर में इसे "इसका अर्थ है" जैसे शब्दों से जोड़ें।

मिंट्ज़बर्ग की दस प्रबंधकीय भूमिकाएँ

हेनरी मिंट्ज़बर्ग ने अपनी पुस्तक The Nature of Managerial Work (1973) में यह जाँचा कि प्रबंधक वास्तव में दिन भर करते क्या हैं। पाठ्यपुस्तकों की धारणा थी कि प्रबंधक शांत बैठकर दीर्घकालिक योजनाएँ बनाता है। मिंट्ज़बर्ग ने देखा कि उसका दिन टुकड़ों में बँटा, तेज़ गति वाला और बाधाओं से भरा होता है, और उसके काम को दस भूमिकाओं के तीन समूहों में रखा जा सकता है।

पारस्परिक (Interpersonal) भूमिकाएँ औपचारिक अधिकार से निकलती हैं और लोगों से संबंध की हैं। प्रतीक-प्रमुख (Figurehead) के रूप में प्रबंधक संगठन का औपचारिक चेहरा होता है, जैसे समारोहों में उपस्थित होना। नेता (Leader) के रूप में वह अपनी इकाई के कार्य और लोगों के लिए ज़िम्मेदार होता है और उन्हें प्रेरित करता है। संपर्क-अधिकारी (Liaison) के रूप में वह अपनी कमांड-श्रृंखला के बाहर, समकक्षों और अन्य लोगों से संपर्क बनाकर रखता है।

सूचनात्मक (Informational) भूमिकाएँ सूचना से जुड़ी हैं। निगरानीकर्ता (Monitor) के रूप में प्रबंधक वातावरण को खंगालता है और जानकारी जुटाता है। प्रसारक (Disseminator) के रूप में वह विशेष सूचना सीधे अधीनस्थों तक पहुँचाता है। प्रवक्ता (Spokesperson) के रूप में वह संगठन के बाहर के लोगों को सूचना देता है, जैसे भाषण देना या मीडिया से बात करना।

निर्णयात्मक (Decisional) भूमिकाएँ चार हैं। उद्यमी (Entrepreneur) के रूप में वह परिवर्तन की पहल और रूपरेखा बनाता है। बाधा-निवारक (Disturbance Handler) के रूप में वह अप्रत्याशित संकटों और अनियमित घटनाओं पर प्रतिक्रिया करता है। संसाधन-आवंटक (Resource Allocator) के रूप में वह तय करता है कि किसे क्या, कितना और कब मिलेगा। वार्ताकार (Negotiator) के रूप में वह बजट, श्रमिक-अनुबंध या विवादों पर वार्ता करता है।

याद रखने का सूत्र: संबंध (पारस्परिक) से सूचना (सूचनात्मक) मिलती है और सूचना से निर्णय (निर्णयात्मक) निकलते हैं। मिंट्ज़बर्ग के अनुसार सभी प्रबंधकीय काम में ये भूमिकाएँ होती हैं, पर हर पद में किसी भूमिका की प्रमुखता अलग होती है। जैसे बिक्री-प्रबंधक में संपर्क और प्रवक्ता की भूमिका ज़्यादा, उत्पादन-प्रबंधक में संसाधन-आवंटक और बाधा-निवारक की (विश्लेषण)।

मिंट्ज़बर्ग की दस भूमिकाएँ

समूहभूमिकामूल काम
पारस्परिकप्रतीक-प्रमुख (Figurehead)संगठन का औपचारिक प्रतिनिधित्व और समारोह
पारस्परिकनेता (Leader)अधीनस्थों को प्रेरित करना, प्रयास को एकजुट करना
पारस्परिकसंपर्क-अधिकारी (Liaison)पदानुक्रम के बाहर पार्श्व संपर्क बनाए रखना
सूचनात्मकनिगरानीकर्ता (Monitor)सूचना के प्रवाहों की निगरानी
सूचनात्मकप्रसारक (Disseminator)अधीनस्थों तक सूचना पहुँचाना
सूचनात्मकप्रवक्ता (Spokesperson)बाहरी लोगों तक सूचना पहुँचाना
निर्णयात्मकउद्यमी (Entrepreneur)परिवर्तन की पहल और रूपरेखा
निर्णयात्मकबाधा-निवारक (Disturbance Handler)अनियमित घटनाओं और संकटों को संभालना
निर्णयात्मकसंसाधन-आवंटक (Resource Allocator)तय करना कि किसे क्या मिलेगा, कौन क्या करेगा
निर्णयात्मकवार्ताकार (Negotiator)वार्ता और समझौते

आधार: Thinkers50 की सूची और OpenStax, Principles of Management, खंड 1.2; हिंदी नाम रूपांतर हैं।

कौशल, स्तर और भूमिकाएँ: तीनों को जोड़कर लिखना

एक ही उत्तर में ये तीनों अवधारणाएँ मिलाकर लिखना चाहें तो तर्क यह बनता है: स्तर बताता है कि प्रबंधक कहाँ है, कौशल बताता है कि उसे क्या आना चाहिए, और भूमिकाएँ बताती हैं कि वह रोज़ क्या करता है। शीर्ष पर बैठे व्यक्ति में वैचारिक कौशल की माँग इसलिए ज़्यादा है कि उसकी भूमिकाओं में उद्यमी और संसाधन-आवंटक का हिस्सा बड़ा है। पर्यवेक्षक में तकनीकी कौशल इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि उसका बड़ा काम बाधा-निवारक का और कार्य की सीधी निगरानी का है। यह जोड़ विश्लेषण है, स्रोतों का सीधा कथन नहीं, इसलिए इसे "इस तरह देखा जा सकता है" जैसे शब्दों में रखें।

सरकारी क्षेत्र के संदर्भ में भी यही चित्र उपयोगी है, पर उपमा सावधानी से दें। किसी विभाग में सचिव-स्तर का अधिकारी नीति और संसाधन की दिशा तय करता है (शीर्ष), निदेशालय या संभाग-स्तर का अधिकारी उसे योजनाओं में उतारता और समन्वय करता है (मध्यम), और कार्यालय-अधीक्षक या पर्यवेक्षक रोज़ का काम सीधे कराते हैं (पर्यवेक्षीय)। यह उपमा केवल समझाने के लिए है; सरकारी पदों के दायित्व प्रत्येक विभाग के नियमों से तय होते हैं (विश्लेषण)।

कौशल और स्तर: बदलता मिश्रण

  1. पर्यवेक्षीय स्तर

    तकनीकी + मानवीय सबसे ज़्यादा

  2. मध्यम स्तर

    तीनों का संतुलन

  3. शीर्ष स्तर

    वैचारिक + मानवीय सबसे ज़्यादा

  4. हर स्तर पर

    मानवीय कौशल अनिवार्य

ऊपर जाते हुए तकनीकी कौशल की भूमिका घटती और वैचारिक की बढ़ती है; मानवीय कौशल हर जगह चाहिए (Katz, SAGE)।

प्रबंधकीय भूमिकाओं का नक्शा

मिंट्ज़बर्ग की 10 भूमिकाएँ

पारस्परिक

संबंध

  • प्रतीक-प्रमुख
  • नेता
  • संपर्क-अधिकारी

सूचनात्मक

सूचना

  • निगरानीकर्ता
  • प्रसारक
  • प्रवक्ता

निर्णयात्मक

निर्णय

  • उद्यमी
  • बाधा-निवारक
  • संसाधन-आवंटक
  • वार्ताकार

मुख्य तथ्य

कैट्ज़ का लेख
"Skills of an Effective Administrator": मूल 1955; HBR में पुनर्प्रकाशन सितंबर-अक्टूबर 1974
कैट्ज़ के तीन कौशल
तकनीकी, मानवीय, वैचारिक; स्तर के अनुसार भिन्न अनुपात
प्रबंध के स्तर
तीन: शीर्ष, मध्यम, पर्यवेक्षीय/संचालन
मिंट्ज़बर्ग की पुस्तक
The Nature of Managerial Work, 1973 (Harper & Row)
मिंट्ज़बर्ग की भूमिकाएँ
दस, तीन समूहों में: पारस्परिक 3, सूचनात्मक 3, निर्णयात्मक 4
फ़ेयोल की क्षमता-तालिका
ऊपर जाने पर प्रबंधकीय क्षमता का महत्त्व बढ़ता, तकनीकी का घटता (अनुवाद 1949, अध्याय II)
सिलेबस की पंक्ति
RPSC सिलेबस, 09-01-2026, पेपर I, इकाई III (ख)

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • कैट्ज़ को तीनों कौशल केवल शीर्ष प्रबंधकों के लिए बता देना। मॉडल का सार यह है कि अनुपात स्तर के साथ बदलता है; मानवीय कौशल हर स्तर पर चाहिए।
  • तकनीकी कौशल को "ग़ैर-ज़रूरी" बता देना। शीर्ष पर वह कम ज़रूरी है, शून्य नहीं; और निचले स्तर पर वह सबसे अहम है।
  • प्रबंध के स्तर और कार्य को गड्ड-मड्ड करना। स्तर संगठन में स्थिति बताता है, कार्य (नियोजन, संगठन आदि) वह प्रक्रिया बताता है जो सब स्तरों पर होती है, मात्रा में फ़र्क़ के साथ।
  • मिंट्ज़बर्ग की भूमिकाओं के समूह में गड़बड़ी: संपर्क-अधिकारी पारस्परिक है, प्रवक्ता सूचनात्मक, वार्ताकार और संसाधन-आवंटक निर्णयात्मक।
  • कौशल-स्तर तालिका में प्रतिशत गढ़ देना। स्रोतों में सटीक अनुपात नहीं हैं; "अधिक/कम" की भाषा ही सुरक्षित है।