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पेपर I · इकाई III (B) · प्रबंधन

प्रशिक्षण: आवश्यकता, विधियाँ, मूल्यांकन और प्रबंधकीय विकास

प्रशिक्षण की पाँच क़दम की प्रक्रिया, कार्य के दौरान और कार्य से बाहर की विधियाँ, प्रबंधकीय विकास, किर्कपैट्रिक के चार स्तर और एक हल उदाहरण, सरल हिंदी में।

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3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग B (Management): "Human Resource Management: concept and scope; HR planning, recruitment, selection, placement and training; performance appraisal system; modern trends in HRM." इस पृष्ठ पर "training" है: प्रशिक्षण का अर्थ, आवश्यकता-विश्लेषण, कार्य के दौरान और कार्य से बाहर की विधियाँ, मूल्यांकन और प्रबंधकीय विकास। सरकारी सेवा में प्रशिक्षण-व्यवस्था लोक प्रशासन के पृष्ठ "कार्मिक भर्ती, प्रशिक्षण और पदोन्नति" में अलग से है; यहाँ कारोबारी (HRM) दृष्टि है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • प्रशिक्षण भर्ती और आगमन के बाद का अगला क़दम है, और प्रदर्शन-मूल्यांकन से निकली कमियाँ भी प्रशिक्षण-ज़रूरतों के रूप में यहीं लौटती हैं।
  • 2013-2024 के RAS मुख्य परीक्षा प्रश्न-पत्रों में इस शीर्षक पर सीधा प्रश्न नहीं आया; फिर भी "प्रशिक्षण बनाम विकास", "कार्य के दौरान बनाम कार्य से बाहर की विधियाँ" और "प्रशिक्षण का मूल्यांकन" मानक परीक्षा-प्रश्न हैं।
  • ऊँचे अंक के लिए तालिका में विधियाँ, एक उदाहरण और किर्कपैट्रिक के चार स्तर जोड़ें; यह पृष्ठ तीनों देता है।

सरल भाषा में: साइकिल सिखाने का तरीक़ा

बच्चे को साइकिल सिखानी हो तो दो रास्ते हैं। एक, उसे सीधे सड़क के किनारे साइकिल पर बैठाकर, पीछे से सँभालते हुए सिखाना (कार्य के दौरान सीखना)। दो, पहले किसी ख़ाली मैदान या पार्क में अभ्यास कराना, जहाँ गिरने का ख़तरा कम हो (कार्य से बाहर सीखना)। दोनों में लक्ष्य एक है: ठीक ढंग से साइकिल चलाना। प्रशिक्षण (training) कर्मचारियों के लिए यही काम करता है: उन्हें किसी विशेष काम के लिए तैयार करता है।

फ़र्क़ यह भी है कि साइकिल चलाना सिखाना प्रशिक्षण है, पर बड़े होकर बच्चे का आत्मविश्वासी, फ़ैसले लेने वाला इंसान बनना विकास (development) है। NCERT ने भी यही भेद किया है: प्रशिक्षण छोटी अवधि की प्रक्रिया है और विशेष काम की क्षमता बढ़ाता है, जबकि विकास निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और प्रशिक्षण को अपने भीतर समेटता है।

अर्थ, उद्देश्य और महत्त्व

NCERT के अनुसार प्रशिक्षण और विकास कर्मचारी की क्षमता सीखने के ज़रिये बढ़ाकर उसके वर्तमान या भावी प्रदर्शन को सुधारने का प्रयास है, आमतौर पर उसके रवैये को बदलकर या कौशल और ज्ञान बढ़ाकर। INFLIBNET की सामग्री प्रशिक्षण को ऐसा नियोजित प्रयास बताती है जो कर्मचारियों को पद से जुड़ी दक्षताएँ (ज्ञान, कौशल, व्यवहार) सिखाता है, और यह भी कहती है कि प्रशिक्षण प्रदर्शन सुधारने के कई संभावित उपायों में से एक है; दूसरे उपाय हैं पद बदलना या वेतन और प्रोत्साहन से प्रेरणा बढ़ाना। यानी हर समस्या का इलाज प्रशिक्षण नहीं है।

INFLIBNET प्रशिक्षण के चार तरह के उद्देश्य गिनाती है: व्यक्तिगत (कर्मचारी के निजी लक्ष्यों में सहायता), संगठनात्मक (व्यक्तिगत प्रभावशीलता के ज़रिये संगठन के मुख्य उद्देश्य में सहायता), कार्यात्मक (विभाग का योगदान संगठन की ज़रूरत के स्तर पर रखना) और सामाजिक (नैतिक और सामाजिक रूप से उत्तरदायी बने रहना)।

लाभ दो तरह से गिनाए जाते हैं। NCERT के अनुसार संगठन को: व्यवस्थित सीखना अटकल-पद्धति से बेहतर है, उत्पादकता (मात्रा और गुणवत्ता) बढ़ती है, भावी प्रबंधक तैयार होते हैं, मनोबल सुधरता है और अनुपस्थिति तथा छोड़ने की दर घटती है, और तकनीक व अर्थव्यवस्था में तेज़ बदलाव का जवाब देना आसान होता है। कर्मचारी को: बेहतर कौशल से बेहतर कैरियर, बढ़ा हुआ प्रदर्शन और अधिक आय, मशीनों पर बेहतर पकड़ और इसलिए कम दुर्घटनाएँ, तथा अधिक संतोष और मनोबल। INFLIBNET इसमें कम पर्यवेक्षण, कम दुर्घटनाओं और पदोन्नति की संभावना को भी गिनती है।

प्रशिक्षण, शिक्षा और विकास में अंतर

आधारप्रशिक्षणशिक्षाविकास
अर्थविशेष काम के कौशल और ज्ञान में वृद्धिज्ञान और समझ बढ़ानाव्यक्ति का सर्वांगीण विकास
अवधि और प्रकृतिछोटी अवधि की प्रक्रियासमझ और विवेक विकसित करने की प्रक्रियानिरंतर चलने वाली प्रक्रिया
झुकावकाम-केंद्रित; संगठन के लक्ष्यों से बँधासिद्धांतों की समझ; विश्लेषण-क्षमताकैरियर-केंद्रित; भावी क्षमता
दायरासबसे संकीर्णप्रशिक्षण से व्यापकसबसे व्यापक; प्रशिक्षण इसमें शामिल
उदाहरण (कल्पित)नई बिलिंग मशीन चलाना सीखनावाणिज्य की डिग्रीलेखा-सहायक का भावी वित्त-प्रबंधक बनना

आधार: NCERT, अध्याय 6, "Training, Development and Education" और INFLIBNET, Employee Training and Executive Development I; उदाहरण कल्पित

प्रशिक्षण की प्रक्रिया: पाँच क़दम

INFLIBNET की सामग्री प्रशिक्षण की रचना को व्यवस्थित प्रक्रिया बताती है। उससे पहले यह सवाल आता है कि प्रशिक्षण कब दिया जाए। सामग्री चार आधार गिनाती है: संगठन में नए आए लोगों को मिशन, नियमों और कार्य-स्थितियों से परिचित कराना; मौजूदा कर्मचारियों का ज्ञान ताज़ा करना; तकनीक या उपकरण बदलने पर नए तरीक़े सिखाना (जैसे नई मशीन या कंप्यूटर आने पर); और पदोन्नति तथा कैरियर-वृद्धि के समय ऊँचे पद की ज़िम्मेदारी के लिए तैयार करना। सामग्री के अनुसार प्रशिक्षण केवल नए कर्मचारियों के लिए नहीं है; चल रहे प्रशिक्षण से मौजूदा कर्मचारी बदलती कार्य-माँगों के अनुरूप ढलते हैं। पहला क़दम आवश्यकता-आकलन (needs assessment) है: यह जानना कि प्रशिक्षण की ज़रूरत है भी या नहीं, और किस प्रकार की। इसके लिए सर्वेक्षण, अवलोकन, साक्षात्कार और ग्राहकों की टिप्पणियों जैसी तकनीकों का उपयोग होता है; सामग्री के अनुसार ग्राहक असंतोष, कम मनोबल, कम उत्पादकता और अधिक छोड़ने की दर प्रशिक्षण-ज़रूरत के संकेत हैं। सामग्री के कुछ प्रश्न हैं: प्रशिक्षण क्यों, क्या, कब, कहाँ, किसे और कौन देगा, कैसे दिया जाएगा? आवश्यकता-आकलन को हर प्रशिक्षण का आरंभ-बिंदु और पहला क़दम कहा गया है।

दूसरा क़दम यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारियों में सीखने की प्रेरणा और बुनियादी कौशल है; इसके लिए स्पष्ट कार्य-विवरण और मानक प्रक्रियाएँ बनाई जाती हैं। तीसरा क़दम सीखने का वातावरण बनाना है: प्रशिक्षक तय करना और विधि चुनना (एक-से-एक, कार्य के दौरान, समूह, सेमिनार, कार्यशाला)। अच्छे प्रशिक्षक में विषय पढ़ाने की इच्छा, विषय का कार्यकारी ज्ञान और प्रतिभागियों को सीखने के लिए प्रेरित करने की क्षमता चाहिए। चौथा क़दम यह देखना है कि प्रशिक्षु प्रशिक्षण की सामग्री को अपने काम में लगा रहे हैं या नहीं। पाँचवाँ क़दम कार्यक्रम का मूल्यांकन है, जिसे सामग्री ने प्रक्रिया का सबसे महत्त्वपूर्ण क़दम कहा है।

प्रशिक्षण की प्रक्रिया

  1. आवश्यकता-आकलन

    क्यों, क्या, कब, किसे

  2. प्रेरणा और आधार

    कार्य-विवरण, मानक

  3. सीखने का वातावरण

    प्रशिक्षक और विधि का चयन

  4. कार्य में प्रयोग

    सीखे का उपयोग

  5. मूल्यांकन

    प्रभावशीलता और लागत

प्रशिक्षण की विधियाँ: कार्य के दौरान और कार्य से बाहर

NCERT प्रशिक्षण-विधियों को दो समूहों में बाँटती है: कार्य के दौरान (on-the-job), जो कार्यस्थल पर काम करते हुए दी जाती हैं ("करते हुए सीखना"), और कार्य से बाहर (off-the-job), जो कार्यस्थल से दूर दी जाती हैं ("करने से पहले सीखना")। OpenStax भी यही दो वर्ग देती है।

कार्य के दौरान की विधियों में NCERT चार गिनाती है। प्रशिक्षुता (apprenticeship) में प्रशिक्षु किसी निपुण कारीगर की देखरेख में उच्च स्तर का कौशल सीखता है; प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन या लोहार जैसे कुशल कामों के लिए यह आम है। कोचिंग में वरिष्ठ प्रशिक्षक की भूमिका निभाता है, आपसी सहमति से लक्ष्य तय करता है और प्रगति की समीक्षा करता है। इंटर्नशिप शिक्षण-संस्थाओं और व्यावसायिक फ़र्मों का संयुक्त कार्यक्रम है जिसमें पढ़ाई के साथ किसी फ़ैक्टरी या दफ़्तर में काम भी होता है। कार्य-चक्रण (job rotation) में प्रशिक्षु को एक विभाग या कार्य से दूसरे में भेजा जाता है, जिससे वह पूरे संगठन की समझ पाता है और पदोन्नति, प्रतिस्थापन या स्थानांतरण के समय संगठन का काम आसान होता है। INFLIBNET इसके अलावा मार्गदर्शन (mentoring), जो वरिष्ठ और कनिष्ठ कर्मचारी के बीच चलने वाला संबंध है, और कार्य-निर्देश तकनीक (JIT: योजना, प्रस्तुति, प्रयास और अनुवर्ती) भी बताती है।

INFLIBNET औपचारिक और अनौपचारिक कार्य-के-दौरान प्रशिक्षण में भी फ़र्क़ करती है। अनौपचारिक रूप में सब कुछ तदर्थ चलता है: न तय प्रक्रिया होती है, न लक्ष्य, प्रशिक्षक के पास प्रशिक्षण की औपचारिक योग्यता नहीं होती और चुनाव केवल तकनीकी जानकारी के आधार पर होता है। औपचारिक कार्यक्रम में पहले श्रेष्ठ तकनीकी ज्ञान वाले कर्मचारी की पहचान की जाती है, जो एक-से-एक संवाद से सिखा सके। क्रम यह है: प्रशिक्षु अनुभवी प्रशिक्षक को काम करते देखता है; काम की विधि और तकनीक पर काम से पहले, दौरान और बाद में चर्चा होती है; तैयार होने पर वह कार्यस्थल पर स्वयं काम शुरू करता है; प्रशिक्षक लगातार निर्देश और प्रतिक्रिया देता है; और प्रशिक्षु को धीरे-धीरे अधिक काम सौंपा जाता है ताकि वह काम निर्दोष ढंग से करने लगे। साथ ही सामग्री मार्गदर्शन (mentoring) और कोचिंग का भेद भी बताती है: मार्गदर्शन वरिष्ठ और कनिष्ठ के बीच चलने वाला संबंध है जिसकी बैठकें कोचिंग जितनी नियमित और ढाँचाबद्ध नहीं होतीं, और वह प्रायः संगठन के भीतर के व्यक्ति से मिलता है।

कार्य से बाहर की विधियों में NCERT छह गिनाती है: कक्षा-व्याख्यान और सम्मेलन (नियम, प्रक्रियाएँ जैसी विशिष्ट जानकारी देने के लिए), फ़िल्में (उन कौशलों को दिखाने के लिए जो अन्य तरीक़ों से नहीं दिखते), केस स्टडी (संगठनों के वास्तविक अनुभवों से लिए गए मामले, जिनमें प्रशिक्षु समस्या पहचानते, कारण खोजते और समाधान चुनते हैं), कंप्यूटर मॉडलिंग (कार्य-परिवेश की नक़ल, जिसमें वास्तविक जीवन की ग़लती की लागत या जोखिम नहीं उठाना पड़ता), वेस्टिब्यूल प्रशिक्षण (कारख़ाने के फ़र्श से दूर कक्षा में वही उपकरण और सामग्री, जटिल मशीनों के लिए) और क्रमादेशित निर्देश (programmed instruction: सामग्री को छोटी इकाइयों में तार्किक क्रम से बाँटकर प्रश्न-उत्तर या रिक्त-स्थान के ज़रिये पढ़ाना)। INFLIBNET इसमें संवेदनशीलता प्रशिक्षण, लेन-देन विश्लेषण, खेल और सिमुलेशन (व्यावसायिक खेल, भूमिका-निर्वाह, इन-बास्केट तकनीक) भी जोड़ती है।

कार्य के दौरान बनाम कार्य से बाहर का प्रशिक्षण

कार्य के दौरान (On-the-job)

स्थानकार्यस्थल, असली उपकरणों पर

सीखने का स्वरूपकरते हुए सीखना

उदाहरण (NCERT)प्रशिक्षुता, कोचिंग, इंटर्नशिप, कार्य-चक्रण

लाभ (INFLIBNET)सामान्यतः सबसे सस्ता; प्रशिक्षु उत्पादक रहता है; तत्काल प्रतिक्रिया

सीमाअनौपचारिक रूप में योजनाहीन और बेतरतीब हो सकता है (INFLIBNET)

कार्य से बाहर (Off-the-job)

स्थानकार्यस्थल से दूर: कक्षा, प्रयोगशाला, सिमुलेटर

सीखने का स्वरूपकरने से पहले सीखना

उदाहरण (NCERT)व्याख्यान और सम्मेलन, फ़िल्में, केस स्टडी, कंप्यूटर मॉडलिंग, वेस्टिब्यूल, क्रमादेशित निर्देश

लाभ (INFLIBNET)काम से हटकर प्रशिक्षण पर पूरा ध्यान; अवधारणाएँ बैठाने में अधिक प्रभावी माना गया

सीमाप्रशिक्षु उस दौरान सीधे उत्पादक नहीं रहता; व्याख्यान में लंबी निष्क्रियता

आधार: NCERT, अध्याय 6; INFLIBNET, Employee Training and Executive Development I; OpenStax, Introduction to Business 8.4

प्रबंधकीय विकास (Management/Executive Development)

INFLIBNET की सामग्री के अनुसार प्रबंधकीय या कार्यकारी विकास वह व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसके ज़रिये प्रबंधक ज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण और अंतर्दृष्टि पाकर अपना काम कुशलता से करते हैं। यह भावी-उन्मुख है और प्रशिक्षण की तुलना में शिक्षा से अधिक जुड़ा है। सामग्री इसे नियोजित, निरंतर और दीर्घकालिक प्रक्रिया कहती है, क्योंकि प्रबंधकीय कौशल रातोंरात नहीं बनते। उद्देश्य हैं: पूरे कैरियर में प्रबंधकों का प्रदर्शन बनाए रखना, आर्थिक, तकनीकी और संस्थागत शक्तियों को समझना, उत्तरदायी नेता तैयार करना और प्रबंधन-तकनीकों में दक्षता बढ़ाना।

विधियाँ: कारोबारी खेल, केस स्टडी, भूमिका-निर्वाह, संवेदनशीलता प्रशिक्षण, कार्य का अनुभव, कोचिंग, कार्य-चक्रण, विशेष पाठ्यक्रम और ज्ञान-विशिष्ट अध्ययन। सामग्री में विकास की प्रक्रिया पाँच क़दमों में है: विकास-आवश्यकताओं का विश्लेषण, मौजूदा प्रबंधकीय प्रतिभा का मूल्यांकन, व्यक्ति-विशेष की विकास-योजना, प्रशिक्षण और विकास कार्यक्रम की स्थापना, और कार्यक्रमों का मूल्यांकन। सामग्री यह भी कहती है कि प्रशिक्षण-विकास का उपयोग अब कई संगठन प्रतिधारण (retention) की रणनीति के रूप में करते हैं।

कैरियर-विकास इसी से जुड़ा है। INFLIBNET इसे ऐसा संगठित तरीक़ा बताती है जिसमें कर्मचारी के लक्ष्यों को संगठन की ज़रूरतों से मिलाया जाता है। इसके उद्देश्य हैं आत्म-जागरूकता, लचीलापन, शिक्षा और विविधता के प्रति संवेदनशीलता। सामग्री का यह कथन भी है कि अधिकतर पेशेवर कैरियर में वृद्धि के अभाव में संगठन छोड़ते हैं; यह सामग्री का सामान्य कथन है, किसी आँकड़े पर आधारित नहीं।

प्रशिक्षण का मूल्यांकन और किर्कपैट्रिक के चार स्तर

INFLIBNET के अनुसार मूल्यांकन तीन कारणों से ज़रूरी है: प्रशिक्षक के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया, लागत-प्रभावशीलता का पता चलना, और कार्यक्रम की कुल प्रभावशीलता का आकलन। मूल्यांकन के स्तर इस सामग्री में प्रतिक्रिया-स्तर, तात्कालिक, मध्यवर्ती और अंतिम स्तर बताए गए हैं; आँकड़े प्रश्नावली, साक्षात्कार, अवलोकन और डेस्क अनुसंधान से जुटाए जाते हैं।

इसके अलावा प्रशिक्षण-मूल्यांकन का सबसे प्रचलित ढाँचा किर्कपैट्रिक मॉडल है। Kirkpatrick Partners और Training Industry के अनुसार इसमें चार स्तर हैं: प्रतिक्रिया (Reaction), सीखना (Learning), व्यवहार (Behavior) और परिणाम (Results)। Kirkpatrick Partners के अनुसार यह मॉडल डॉ. डोनाल्ड किर्कपैट्रिक ने 1950 के दशक में बनाया और बाद में उसमें संशोधन हुए; परीक्षा में केवल दशक लिखना काफ़ी है। स्तर 1 (प्रतिक्रिया) देखता है कि प्रतिभागी अनुभव को अनुकूल, रोचक और प्रासंगिक पाते हैं या नहीं। स्तर 2 (सीखना) जाँचता है कि इच्छित ज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण, आत्मविश्वास और प्रतिबद्धता मिली या नहीं; परंपरागत रूप से पूर्व और पश्च परीक्षण से। स्तर 3 (व्यवहार) देखता है कि सीखा हुआ काम पर लगाया जा रहा है या नहीं, और स्तर 4 (परिणाम) देखता है कि संगठन को अपेक्षित परिणाम मिले या नहीं।

किर्कपैट्रिक के चार स्तर

स्तरक्या जाँचता हैनापने के साधन (उदाहरण)
1. प्रतिक्रियाप्रतिभागी को कार्यक्रम अनुकूल, रोचक और प्रासंगिक लगा या नहींफ़ीडबैक-फ़ॉर्म, कार्यक्रम के दौरान त्वरित जाँच
2. सीखनाज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण, आत्मविश्वास और प्रतिबद्धता मिली या नहींपूर्व और पश्च परीक्षण, भूमिका-निर्वाह
3. व्यवहारसीखे हुए का काम पर उपयोग हो रहा है या नहींपर्यवेक्षक की जाँच, अवलोकन
4. परिणामसंगठन के लक्ष्यों पर असर पड़ा या नहींत्रुटि-दर, उत्पादकता, बिक्री जैसे संकेतक

आधार: Kirkpatrick Partners और Training Industry; साधनों के उदाहरण कल्पित और सामान्य

प्रशिक्षण: एक नज़र में

प्रशिक्षण

कार्य के दौरान

  • प्रशिक्षुता
  • कोचिंग
  • इंटर्नशिप
  • कार्य-चक्रण

कार्य से बाहर

  • व्याख्यान
  • फ़िल्में
  • केस स्टडी
  • कंप्यूटर मॉडलिंग
  • वेस्टिब्यूल
  • क्रमादेशित निर्देश

प्रबंधकीय विकास

  • विकास-आवश्यकता
  • प्रतिभा का मूल्यांकन
  • व्यक्तिगत योजना
  • कार्यक्रम
  • मूल्यांकन

मूल्यांकन

  • प्रतिक्रिया
  • सीखना
  • व्यवहार
  • परिणाम

मुख्य तथ्य

प्रशिक्षण-विधियों के दो वर्ग
कार्य के दौरान और कार्य से बाहर (NCERT, OpenStax)
कार्य के दौरान (NCERT)
प्रशिक्षुता, कोचिंग, इंटर्नशिप, कार्य-चक्रण
कार्य से बाहर (NCERT)
व्याख्यान और सम्मेलन, फ़िल्में, केस स्टडी, कंप्यूटर मॉडलिंग, वेस्टिब्यूल, क्रमादेशित निर्देश
प्रशिक्षण की प्रक्रिया (INFLIBNET)
आवश्यकता-आकलन से लेकर मूल्यांकन तक पाँच क़दम
प्रबंधकीय विकास की प्रक्रिया (INFLIBNET)
आवश्यकता, प्रतिभा-मूल्यांकन, व्यक्तिगत योजना, कार्यक्रम, मूल्यांकन
किर्कपैट्रिक मॉडल
चार स्तर: प्रतिक्रिया, सीखना, व्यवहार, परिणाम; 1950 के दशक में बना
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026

पिछले वर्षों के प्रश्नों पर टिप्पणी

2013-2024 के RAS मुख्य परीक्षा प्रश्न-पत्रों में प्रशिक्षण पर सीधा प्रश्न नहीं आया, इसलिए इस पृष्ठ पर हल किए गए पिछले प्रश्न नहीं हैं। नीचे के प्रश्न मौलिक अभ्यास-प्रश्न हैं।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • प्रशिक्षण और विकास को एक ही मान लेना; प्रशिक्षण काम-केंद्रित और छोटी अवधि का, विकास कैरियर-केंद्रित और निरंतर है।
  • कार्य के दौरान और कार्य से बाहर की विधियाँ आपस में उलट देना; वेस्टिब्यूल और कंप्यूटर मॉडलिंग कार्य से बाहर की विधियाँ हैं।
  • आवश्यकता-आकलन को छोड़ देना; सारा प्रशिक्षण यहीं से शुरू होता है।
  • मूल्यांकन में केवल "फ़ीडबैक" लिखना; किर्कपैट्रिक के चारों स्तर लिखें।
  • सरकारी प्रशिक्षण-संस्थाओं की सूची यहाँ घसीट लेना; वह लोक प्रशासन के अलग पृष्ठ का विषय है।