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पेपर I · इकाई III (B)

रणनीतिक नियंत्रण और मूल्यांकन (Strategic Control and Evaluation)

चार रणनीतिक नियंत्रण, नियंत्रण की बाधाएँ, मूल्यांकन-मापदंड, KPI और बैलेंस्ड स्कोरकार्ड, कल्पित राज्य निगम के उदाहरण के साथ, उत्तर-लेखन की दृष्टि से।

  • नियंत्रण के प्रकार
  • KPI
  • स्कोरकार्ड
  • मूल्यांकन
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग B (Management): "Strategic Management: concept and scope; business environment and SWOT analysis; strategy formulation and implementation; strategic control and evaluation." इस पृष्ठ पर "strategic control and evaluation" है। प्रशासन-नियंत्रण (विधायी, न्यायिक, CAG आदि) लोक प्रशासन के अलग पृष्ठों में है; यहाँ केवल रणनीति के संदर्भ का नियंत्रण है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • रणनीति-प्रबंधन की प्रक्रिया का यह अंतिम चरण है और ICAI इसे "रणनीति को बनाने और लागू करने के दौरान जाँचने की प्रक्रिया" कहती है। इसलिए कोई भी पूरा रणनीति-प्रश्न नियंत्रण और मूल्यांकन पर बात किए बिना अधूरा रहता है।
  • 2013 से 2024 तक के RAS मुख्य परीक्षा प्रश्न-पत्रों में रणनीतिक नियंत्रण पर सीधा प्रश्न नहीं पूछा गया है। पास का विषय "नियंत्रण" का सामान्य प्रबंधकीय कार्य है, जिस पर 2016 में प्रश्न आया था; उसका उत्तर प्रबंध-कार्यों के पृष्ठ पर है।
  • चार प्रकार के रणनीतिक नियंत्रण और बैलेंस्ड स्कोरकार्ड के चार दृष्टिकोण, ये दोनों चार-चार की सूचियाँ याद करने में सरल हैं और उत्तर में तुरंत ढाँचा दे देती हैं।

पहले सरल भाषा में: रेल-यात्रा और रेल-मार्ग की जाँच

मान लीजिए आपने जयपुर से दिल्ली की यात्रा की योजना बनाई। चलने के बाद आप बीच-बीच में देखते हैं कि गाड़ी समय पर है या नहीं, मौसम या पटरी की कोई ख़बर तो नहीं, और अगर अचानक कोई रुकावट आ जाए तो वैकल्पिक रास्ता क्या होगा। रणनीतिक नियंत्रण यही काम संगठन की दीर्घकालीन योजना के लिए करता है: चलते-चलते जाँचना कि दिशा सही है या नहीं, और ज़रूरत हो तो रास्ता बदलना (यह तुलना समझाने के लिए है, विश्लेषण)।

सामान्य नियंत्रण में लक्ष्य तय होते हैं, परिणाम नापे जाते हैं और अंतर सुधारे जाते हैं। रणनीतिक नियंत्रण में एक क़दम और जुड़ता है: यह भी देखना कि जिन मान्यताओं पर रणनीति टिकी थी, वे अब भी सही हैं या नहीं।

नियंत्रण के तीन स्तर और रणनीतिक नियंत्रण की जगह

ICAI के अनुसार संगठन में नियंत्रण मुख्यतः तीन प्रकार का होता है: संचालन-स्तर का नियंत्रण (operational control), प्रबंधकीय नियंत्रण (management control) और रणनीतिक नियंत्रण (strategic control)। संचालन-स्तर का नियंत्रण अलग-अलग कार्यों या लेन-देन पर ध्यान देता है, जैसे भंडार नियंत्रण, उत्पादन नियंत्रण, गुणवत्ता नियंत्रण, लागत नियंत्रण और बजट नियंत्रण। इन जगहों पर लागत और उत्पादन के बीच संबंध साफ़ और मापने योग्य होता है।

प्रबंधकीय नियंत्रण ज़्यादा व्यापक है। वह किसी पूरे विभाग, प्रभाग या संगठन की गतिविधियों को जोड़कर देखता है और यह सुनिश्चित करता है कि संसाधन प्राप्त हों और उद्देश्यों की पूर्ति में प्रभावी और कुशल ढंग से लगें। ICAI इस परिभाषा को रॉबर्ट एंथोनी (Robert Anthony) से जोड़ती है।

रणनीतिक नियंत्रण इन दोनों से अलग है, क्योंकि उसका सरोकार दिशा से है। ICAI के उद्धरण के अनुसार वह दो सवाल पूछता है: क्या रणनीति योजना के अनुसार लागू हो रही है, और क्या उसके परिणाम वही हैं जो चाहे गए थे? रणनीति बनने और लागू होने के बीच समय का अंतर रहता है, इसलिए इस बीच बाहर और भीतर के हालात बदल सकते हैं। ऐसे बदलावों को पकड़ने के लिए चेतावनी-प्रणाली चाहिए, और रणनीतिक नियंत्रण वही प्रणाली है।

रणनीतिक नियंत्रण के चार प्रकार

ICAI और INFLIBNET, दोनों चार प्रकार गिनाते हैं: मान्यता-नियंत्रण, रणनीतिक निगरानी, विशेष चेतावनी-नियंत्रण और कार्यान्वयन-नियंत्रण। ICAI इन्हें जॉन पियर्स, रिचर्ड रॉबिन्सन और अमिता मित्तल की पुस्तक के एक चित्र से जोड़ती है, जिसमें समय के साथ ये चारों रणनीति-निर्माण से कार्यान्वयन तक साथ-साथ चलते दिखाए गए हैं।

पहला, मान्यता-नियंत्रण (premise control)। हर रणनीति कुछ मान्यताओं पर बनती है, जैसे महँगाई, ब्याज-दर, तकनीक, सामाजिक रुझान और क़ानूनी-नियामक ढाँचे के बारे में अनुमान, या उद्योग के बारे में, जैसे प्रतिस्पर्धी, आपूर्तिकर्ता और विकल्प। समय के साथ ये मान्यताएँ ग़लत साबित हो सकती हैं। मान्यता-नियंत्रण इन्हीं की व्यवस्थित और लगातार निगरानी है। ICAI कहती है कि हर मान्यता को एक जैसा नियंत्रित करना न संभव है, न ज़रूरी; प्रबंधक वही मान्यताएँ चुनें जिनके बदलने की संभावना हो और जिनका रणनीति पर गहरा असर पड़े।

दूसरा, रणनीतिक निगरानी (strategic surveillance)। यह मान्यता-नियंत्रण के उलट केंद्रित नहीं, बल्कि सामान्य प्रकार की है। इसमें अख़बार, पत्रिकाएँ, बैठकें और सम्मेलन जैसे अनेक स्रोतों पर नज़र रखी जाती है ताकि ऐसी अनपेक्षित जानकारी मिल जाए जिसका रणनीति पर असर हो। ICAI इसे "ढीला" रूप कहती है, पर यह भी मानती है कि यह रणनीति से जुड़ी जानकारी उजागर कर सकता है।

तीसरा, विशेष चेतावनी-नियंत्रण (special alert control)। कभी अचानक कोई घटना रणनीति पर तुरंत और गहन पुनर्विचार करवा देती है। ICAI के अनुसार सरकार में अचानक बदलाव, प्राकृतिक आपदा, आतंकी हमला, प्रतिस्पर्धी का अप्रत्याशित विलय या अधिग्रहण और औद्योगिक दुर्घटना ऐसी घटनाएँ हैं। इनसे निपटने के लिए संगठन संकट-प्रबंधन दल (crisis management team) बनाते हैं।

चौथा, कार्यान्वयन-नियंत्रण (implementation control)। प्रबंधक बड़ी योजनाओं को क्रमवार छोटे-छोटे क़दमों में बाँटकर लागू करते हैं। कार्यान्वयन-नियंत्रण यह परखता है कि इन क़दमों से जो परिणाम और घटनाएँ सामने आ रही हैं, उन्हें देखते हुए मूल रणनीति में बदलाव की ज़रूरत है या नहीं। यह संचालन-नियंत्रण का विकल्प नहीं है; संचालन-नियंत्रण जहाँ नियमित कार्यों को देखता है, कार्यान्वयन-नियंत्रण रणनीति की बुनियादी दिशा पर नज़र रखता है। इसके दो रूप हैं: रणनीतिक धक्कों की निगरानी (monitoring strategic thrusts) और मील-पत्थर समीक्षाएँ (milestone reviews)। मील-पत्थर समीक्षा में रणनीति को लागू करने वाली मुख्य गतिविधियों को समय, घटनाओं या बड़े संसाधन-आवंटन के आधार पर बाँटा जाता है, और आमतौर पर रणनीति का पूरा पुनर्मूल्यांकन होता है।

चारों रणनीतिक नियंत्रणों की तुलना

नियंत्रणमुख्य सवालस्वरूपउदाहरणार्थ चेतावनी-संकेत
मान्यता-नियंत्रणजिन मान्यताओं पर रणनीति बनी, वे अब भी सही हैं?केंद्रित, लगातारब्याज-दर या नियम में बदलाव
रणनीतिक निगरानीबाहर कोई ऐसी बात तो नहीं चल रही जिसका असर हो?सामान्य, खुलीउद्योग की ख़बर, सम्मेलन
विशेष चेतावनी-नियंत्रणअचानक घटना के बाद क्या रणनीति टिकेगी?घटना पर आधारित, तुरंतआपदा, अधिग्रहण, सरकार-परिवर्तन
कार्यान्वयन-नियंत्रणअब तक के क़दम बताते हैं कि दिशा ठीक है?चरणबद्ध, समीक्षा-आधारितमील-पत्थर चूकना

संकेत-स्तंभ में उदाहरण समझाने के लिए गढ़े गए हैं (विश्लेषण); ICAI के उदाहरण मूल पाठ में देखें।

रणनीतिक नियंत्रण की प्रक्रिया और उसकी बाधाएँ

INFLIBNET की सामग्री रणनीतिक नियंत्रण की प्रक्रिया को तीन चरणों में रखती है: मूल्यांकन के मापदंड तय करना, कार्य-निष्पादन का मूल्यांकन और फ़ीडबैक। मापदंड मात्रात्मक भी हो सकते हैं और गुणात्मक भी। मात्रात्मक मापदंड ज़्यादातर बीते आँकड़ों से तुलना हैं, जबकि गुणात्मक मूल्यांकन चलते-चलते किया जाने वाला आकलन है जिसमें बीच रास्ते सुधार किया जा सकता है। ICAI की सामान्य नियंत्रण-प्रक्रिया में भी यही तत्त्व हैं: मापने योग्य मानक, निगरानी की व्यवस्था, वास्तविक की मानक से तुलना और विचलन पता चलने पर सुधार की सूचना लौटाना।

INFLIBNET तीन बाधाएँ भी बताती है। पहली, मूल्यांकन का विरोध: लोग रणनीति के मूल्यांकन को अपना व्यक्तिगत मूल्यांकन मान लेते हैं, जबकि उद्देश्य यह देखना है कि रणनीति सही दिशा में है या नहीं। दूसरी, अल्पकालिक सोच: संगठन तात्कालिक लक्ष्य पूरे करने में दीर्घकालीन उद्देश्य भूल सकता है। तीसरी, नियंत्रण की सीमा: बहुत ज़्यादा नियंत्रण से कर्मचारी अपनी क्षमता और सृजनशीलता का पूरा प्रयोग नहीं करते, और बहुत कम नियंत्रण से वे काम के प्रति गंभीर नहीं रहते।

इन बाधाओं के लिए INFLIBNET की सलाह है कि लोगों को शुरू से संगठन के उद्देश्यों में भरोसा दिलाया जाए और रणनीतिक आशय को सभी स्तरों और बाहरी हितधारकों तक पहुँचाया जाए। यह सलाह लोक प्रशासन की निगरानी-व्यवस्थाओं, जैसे सोशल ऑडिट, पर भी लागू होती है, जहाँ जाँच का डर दिखाने के बजाय सहभागिता बढ़ाना ज़्यादा टिकाऊ रास्ता हो सकता है (विश्लेषण)।

मूल्यांकन: रणनीति कितनी कारगर रही?

INFLIBNET के अनुसार रणनीतिक मूल्यांकन में तीन बुनियादी काम आते हैं: रणनीति के आधारों की जाँच, अपेक्षित और वास्तविक परिणामों की तुलना, और ज़रूरत पड़ने पर सुधारात्मक कार्रवाई। उसी सामग्री में यह भी कहा गया है कि सही समय पर और पर्याप्त फ़ीडबैक प्रभावी मूल्यांकन की नींव है, और मूल्यांकन उतना ही अच्छा होता है जितनी उसकी जानकारी।

मूल्यांकन और नियंत्रण अक्सर साथ बोले जाते हैं, पर पूरी तरह एक नहीं हैं। INFLIBNET के अनुसार मूल्यांकन यह पता लगाना है कि क्या चल रहा है, यानी जानकारी जुटाकर विश्लेषण करना; उसके बाद क्या क़दम उठाया जाए, यह नियंत्रण का काम है। यदि आंतरिक और बाहरी कारक नहीं बदले और संगठन उद्देश्यों की ओर संतोषजनक गति से बढ़ रहा है, तो सुधार की ज़रूरत नहीं पड़ती।

मापदंड मात्रात्मक और गुणात्मक, दोनों होने चाहिए। INFLIBNET के अनुसार वित्तीय अनुपात सबसे ज़्यादा प्रयुक्त मात्रात्मक मापदंड हैं: निवेश पर प्रतिफल (ROI), इक्विटी पर प्रतिफल (ROE), लाभ-मार्जिन, बाज़ार-हिस्सा, ऋण-इक्विटी अनुपात, प्रति शेयर आय, बिक्री-वृद्धि और परिसंपत्ति-वृद्धि। ये तुलना तीन तरह से कराते हैं: संगठन की अपनी पिछली अवधियों से, प्रतिस्पर्धियों से और उद्योग के औसत से। पर इनकी सीमाएँ हैं, जैसे ये ज़्यादातर वार्षिक लक्ष्यों के लिए उपयोगी हैं और लेखा-पद्धतियाँ अलग होने से परिणाम अलग निकल सकते हैं। इसीलिए अनुपस्थिति, कर्मचारी-पलायन, गुणवत्ता और कर्मचारी-संतुष्टि जैसे गुणात्मक मापदंड भी देखे जाते हैं।

INFLIBNET मूल्यांकन के दो दृष्टिकोण भी बताती है। पहला दृष्टिकोण सीधे लक्ष्यों से शुरू करता है और जाँचता है कि क्या वे वर्तमान परिस्थितियों में उचित हैं। दूसरा पूरी रणनीतिक योजना के आधार से शुरू करता है और जाँचता है कि योजना ही वैध है या नहीं; यह ज़्यादा व्यापक पर समय-साध्य और महँगा है। समीक्षा की गहराई भी समस्या के महत्त्व पर निर्भर बताई गई है: बड़ी समस्या वाले क्षेत्र में बड़े पैमाने की समीक्षा, कुछ मुद्दों वाले क्षेत्र में मध्यम, और निश्चिंत क्षेत्र में छोटी।

KPI और रणनीतिक कार्य-निष्पादन मापदंड

ICAI के अनुसार रणनीतिक कार्य-निष्पादन मापदंड (strategic performance measures) वे प्रमुख संकेतक हैं जिनसे संगठन अपनी रणनीति की प्रभावशीलता जाँचता है और संसाधन-आवंटन के फ़ैसले करता है। ICAI यह भी कहती है कि संकेतकों और रणनीतिक परिणामों के बीच कारण-परिणाम का स्पष्ट संबंध होना चाहिए और संकेतक सोच-समझकर चुने जाएँ, क्योंकि वे संगठन के लोगों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अति-विश्लेषण से लकवा (paralysis by over analysis) न हो जाए।

ICAI की सूची में मापदंड के छह वर्ग हैं: वित्तीय (राजस्व-वृद्धि, ROI, लाभ-मार्जिन), ग्राहक-संतुष्टि, बाज़ार (हिस्सा, नए ग्राहक), कर्मचारी (संतुष्टि, पलायन-दर, जुड़ाव), नवाचार (अनुसंधान-व्यय, पेटेंट, नए उत्पाद) और पर्यावरण (ऊर्जा-खपत, कचरा-कमी, कार्बन-उत्सर्जन)। उचित मापदंड चुनने की कसौटियाँ भी बताई गई हैं: प्रासंगिकता, डेटा की उपलब्धता, गुणवत्ता और समयबद्धता। ICAI के अनुसार ऐसे मापदंड लक्ष्यों से तालमेल, संसाधन-आवंटन, निरंतर सुधार और बाहरी जवाबदेही में मदद करते हैं।

सरकारी संदर्भ में यही चीज़ें निष्पादन-सूचक या आउटकम-संकेतक कहलाती हैं; यह जोड़ना उत्तर को प्रशासनिक संदर्भ से जोड़ता है (विश्लेषण)।

बैलेंस्ड स्कोरकार्ड (Balanced Scorecard)

HBS Online के अनुसार बैलेंस्ड स्कोरकार्ड 1992 में हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल के प्रोफ़ेसर रॉबर्ट कैप्लन (Robert Kaplan) और डेविड नॉर्टन (David Norton) ने विकसित किया। HBR का मूल लेख जनवरी-फ़रवरी 1992 अंक में छपा था। लेख की भूमिका के अनुसार ROI और प्रति शेयर आय जैसे पारंपरिक वित्तीय माप निरंतर सुधार और नवाचार के बारे में भ्रामक संकेत दे सकते हैं; उनके शब्द हैं: "जो आप नापते हैं, वही आपको मिलता है" (What you measure is what you get)।

HBS Online के अनुसार स्कोरकार्ड पारंपरिक वित्तीय दृष्टिकोण के साथ तीन और दृष्टिकोण जोड़ता है, यानी कुल चार: वित्तीय (क्या योजनाएँ आर्थिक मूल्य बढ़ाती हैं), ग्राहक (लक्ष्य-समूह उत्पाद और सेवा को कैसे देखता है), आंतरिक प्रक्रिया (क्या संगठन की प्रक्रियाएँ ग्राहक के लिए मूल्य बनाती हैं) और सीखना व वृद्धि (क्या संगठन मानव-पूँजी, सूचना-पूँजी और संगठनात्मक पूँजी का उपयोग कर रहा है)। HBS Online इसे रणनीति-मानचित्र (strategy map) के साथ प्रयोग करने की सलाह देता है, जिसमें सीखना व वृद्धि सबसे नीचे आधार पर रखा जाता है और तीर ऊपर की ओर प्रक्रिया, ग्राहक और वित्त तक जाते हैं। उसके अनुसार रणनीति-मानचित्र के बिना स्कोरकार्ड केवल मापों की सूची रह जाता है।

परीक्षा में याद रखने की बात यह है कि स्कोरकार्ड का तर्क "संतुलन" है: वित्तीय परिणाम पीछे की ओर देखते हैं, जबकि ग्राहक, प्रक्रिया और सीखने के माप भविष्य के प्रदर्शन के संकेत देते हैं (विश्लेषण)।

रणनीतिक नियंत्रण का चक्र

  1. 1. मानक तय करें

    उद्देश्य मापने योग्य मानकों में

  2. 2. निगरानी और माप

    मान्यताएँ, मील-पत्थर, KPI

  3. 3. तुलना

    वास्तविक बनाम मानक; विचलन की पहचान

  4. 4. कारण-खोज

    समस्या रणनीति में है या उसके अमल में?

  5. 5. सुधारात्मक कार्रवाई

    योजना, मान्यता या मानक बदलना

  6. 6. फ़ीडबैक

    सीख अगली योजना में वापस

ICAI की नियंत्रण-प्रक्रिया के चार तत्त्वों और INFLIBNET के तीन चरणों को पढ़ने की सुविधा के लिए एक चक्र में रखा गया है (विश्लेषण)।

एक नज़र में: नियंत्रण और मूल्यांकन

रणनीतिक नियंत्रण

चार प्रकार

  • मान्यता
  • निगरानी
  • विशेष चेतावनी
  • कार्यान्वयन

कार्यान्वयन-नियंत्रण के रूप

  • धक्कों की निगरानी
  • मील-पत्थर समीक्षा

बाधाएँ

  • मूल्यांकन का विरोध
  • अल्पकालिक सोच
  • नियंत्रण की सीमा

मापदंड

  • वित्तीय अनुपात
  • गुणात्मक मापदंड
  • KPI के छह वर्ग

बैलेंस्ड स्कोरकार्ड

  • वित्तीय
  • ग्राहक
  • आंतरिक प्रक्रिया
  • सीखना और वृद्धि

मुख्य तथ्य

रणनीतिक नियंत्रण के प्रकार
चार: मान्यता, निगरानी, विशेष चेतावनी, कार्यान्वयन (ICAI और INFLIBNET दोनों)
कार्यान्वयन-नियंत्रण के रूप (ICAI)
रणनीतिक धक्कों की निगरानी; मील-पत्थर समीक्षाएँ
नियंत्रण के तीन स्तर (ICAI)
संचालन, प्रबंधकीय और रणनीतिक
नियंत्रण-प्रक्रिया के चरण (INFLIBNET)
मूल्यांकन-मापदंड, कार्य-निष्पादन मूल्यांकन, फ़ीडबैक
मूल्यांकन के तीन काम (INFLIBNET)
आधारों की जाँच; अपेक्षित बनाम वास्तविक; सुधारात्मक कार्रवाई
KPI के वर्ग (ICAI)
वित्तीय, ग्राहक, बाज़ार, कर्मचारी, नवाचार, पर्यावरण
बैलेंस्ड स्कोरकार्ड का वर्ष
1992; HBR का जनवरी-फ़रवरी 1992 अंक
स्कोरकार्ड के रचयिता और दृष्टिकोण
रॉबर्ट कैप्लन और डेविड नॉर्टन; वित्तीय, ग्राहक, आंतरिक प्रक्रिया, सीखना व वृद्धि

पिछले वर्षों के प्रश्नों पर टिप्पणी

2013 से 2024 तक के RAS मुख्य परीक्षा प्रश्न-पत्रों में "रणनीतिक नियंत्रण और मूल्यांकन" पर सीधा प्रश्न नहीं पूछा गया है, इसलिए इस पृष्ठ में हल किए गए पिछले प्रश्न नहीं हैं। पास का एक प्रश्न 2016 के पेपर I, इकाई III भाग B में "नियंत्रण प्रबन्ध कार्य सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण क्यों है?" (2 अंक) था; वह सामान्य प्रबंधकीय नियंत्रण का प्रश्न है और उसका उत्तर प्रबंध-कार्यों के पृष्ठ पर है।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • रणनीतिक नियंत्रण को केवल बजट-नियंत्रण या लागत-नियंत्रण लिख देना; ये संचालन-स्तर के औज़ार हैं, रणनीतिक नियंत्रण दिशा की जाँच है।
  • मान्यता-नियंत्रण और रणनीतिक निगरानी का फ़र्क़ भूल जाना; पहला केंद्रित और चुनी हुई मान्यताओं पर है, दूसरी खुली और सामान्य है।
  • विशेष चेतावनी-नियंत्रण में केवल आपदा लिखना; ICAI की सूची में सरकार-परिवर्तन, अधिग्रहण और औद्योगिक दुर्घटना भी हैं।
  • बैलेंस्ड स्कोरकार्ड को केवल वित्तीय माप समझना; उसका पूरा उद्देश्य वित्त के साथ ग्राहक, प्रक्रिया और सीखने के दृष्टिकोण जोड़ना है।
  • सामान्य प्रशासन-नियंत्रण (CAG, संसदीय समितियाँ) और रणनीतिक नियंत्रण को मिला देना; दोनों के ढाँचे अलग हैं, पर उत्तर में तुलना करना लाभकारी हो सकता है (विश्लेषण)।