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पेपर I · इकाई III (ख)

उद्देश्य द्वारा प्रबंध (Management by Objectives): अवधारणा, चरण, गुण और सीमाएँ

ड्रकर के विचार से लेकर चरण, गुण, सीमाएँ और सरकारी कामकाज में समानता तक: MBO का पूरा उत्तर-योग्य ढाँचा, कार्य-उदाहरण सहित।

  • ड्रकर
  • सहभागी लक्ष्य
  • चरण
  • गुण-सीमाएँ
  • RFD (विश्लेषण)
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग B (Management): "General Management: concept of management, managerial skills and levels, management functions; MBO; decision making: process, techniques and models." इस पृष्ठ पर "MBO" है; अवधारणा, कौशल-स्तर, कार्य और निर्णय के अलग पृष्ठ हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • MBO सिलेबस की पंक्ति में अलग से नाम लेकर लिखा है, इसलिए इसे सीधे परिभाषा, चरण, गुण-सीमा या आलोचनात्मक विवेचना के रूप में पूछा जा सकता है।
  • यह विषय नियोजन और नियंत्रण को जोड़ता है। लक्ष्य पहले तय होते हैं (नियोजन) और उन्हीं से परिणाम मापे जाते हैं (नियंत्रण)। "प्रबंध के कार्य" वाले पृष्ठ से इसे साथ पढ़ने पर उत्तर में गहराई आती है।
  • सरकारी कामकाज में परिणाम-आधारित प्रबंध की बात बार-बार होती है। MBO का तर्क समझ लें तो प्रशासनिक सुधार वाले उत्तरों में उदाहरण जोड़ना आसान हो जाता है (विश्लेषण)।

PYQ की स्थिति

2013-2024 के संकलित पेपरों में MBO पर कोई सीधा प्रश्न नहीं आया। नीचे के अभ्यास प्रश्न मौलिक हैं, PYQ नहीं।

पहले सरल भाषा में: साहब ने लक्ष्य थोपा या साथ बैठकर तय किया?

मान लीजिए किसी ज़िले में पंचायत समिति का विकास अधिकारी है। साल की शुरुआत में ज़िला स्तर से आदेश आता है: "इस साल इतने काम पूरे होने चाहिए।" अधिकारी को न पूछा गया, न उसकी कठिनाइयाँ सुनी गईं। साल के अंत में उसकी समीक्षा इसी आदेश के आधार पर होती है। ऐसे में अधिकतर लोग कागज़ पर आँकड़े पूरे करने में लग जाते हैं, काम की गुणवत्ता पीछे छूट जाती है।

अब दूसरी स्थिति सोचिए। ज़िला स्तर के अधिकारी और विकास अधिकारी साथ बैठते हैं। संगठन का बड़ा लक्ष्य सामने रखा जाता है, फिर तय होता है कि इस समिति का हिस्सा क्या होगा, किस संकेतक से मापा जाएगा, कब तक और किन साधनों से। बीच-बीच में प्रगति देखी जाती है और साल के अंत में परिणामों की चर्चा होती है। यही उद्देश्य द्वारा प्रबंध (MBO) का मूल विचार है: लक्ष्य साथ बैठकर तय हों, हर व्यक्ति को अपने लक्ष्य का स्वामित्व महसूस हो और मूल्यांकन उन्हीं लक्ष्यों के सापेक्ष हो।

यानी MBO में तीन बातें साथ चलती हैं: साझा लक्ष्य, उत्तरदायित्व का स्पष्ट बँटवारा और नियमित प्रतिपुष्टि (Feedback)। यह कोई अलग विभाग या अलग काम नहीं, बल्कि प्रबंध करने का एक ढंग है।

MBO का अर्थ और परीक्षा-योग्य परिभाषा

OpenStax की पाठ्यपुस्तक MBO को तीन रूपों में बताती है: एक प्रबंध-दर्शन, एक तकनीक और एक कर्मचारी-सहभागिता कार्यक्रम। इसकी मूल प्रक्रिया यह है कि प्रबंधक और कर्मचारी मिलकर लक्ष्य तय करें, एक कार्य-योजना बनाएँ, और फिर कर्मचारी स्वयं अपनी प्रगति देखकर आवश्यक सुधार करें।

परीक्षा के लिए सीधी परिभाषा इस तरह लिखी जा सकती है: "MBO वह प्रबंध-पद्धति है जिसमें संगठन के उद्देश्य ऊपर से नीचे तक सहभागिता द्वारा व्यक्तिगत लक्ष्यों में बदले जाते हैं, कार्य-योजना बनती है, और प्रदर्शन का मूल्यांकन तय लक्ष्यों की तुलना में किया जाता है।" इसमें तीन शब्द महत्त्वपूर्ण हैं: सहभागिता, लक्ष्य-आधारित मूल्यांकन और प्रतिपुष्टि।

एक जगह सावधानी रखें। MBO को कभी-कभी केवल "लक्ष्य तय करने" तक सीमित मान लिया जाता है। लेकिन केवल लक्ष्य थमा देने से MBO नहीं बनता; जब तक लक्ष्य संयुक्त चर्चा से न बनें और उनकी नियमित समीक्षा न हो, वह एकतरफ़ा आदेश-व्यवस्था ही रहती है। यही बात आगे सीमाओं वाले खंड में काम आएगी।

ड्रकर और 1954: विचार कहाँ से आया

MBO की जड़ें पीटर एफ़. ड्रकर की पुस्तक The Practice of Management (1954) में मानी जाती हैं। इंटरनेट आर्काइव के पुस्तक-रिकॉर्ड में इस पुस्तक का प्रकाशन-वर्ष 1954 दर्ज है और उसके विषय-क्रम में "Management by objectives and self-control" नाम का अध्याय दिखता है। ऑक्सफ़र्ड हैंडबुक ऑफ़ मैनेजमेंट के एक अध्याय का सार भी कहता है कि MBO 1954 में उभरा।

यहाँ दो बातें परीक्षा के लिए उपयोगी हैं। पहली, "आत्म-नियंत्रण" (Self-control) का विचार। ड्रकर के शीर्षक में ही यह शब्द है, यानी विचार यह था कि जब व्यक्ति को अपने लक्ष्य पता हों और वह अपनी प्रगति स्वयं माप सके, तब ऊपर से कड़ी निगरानी की ज़रूरत कम पड़ती है। दूसरी, MBO प्रबंध की दिशा बदलता है: "आदेश देकर काम कराना" से "लक्ष्य पर सहमति बनाकर परिणाम माँगना।"

परीक्षा की दृष्टि से इतना पर्याप्त है: पुस्तक का नाम, वर्ष 1954 और यह विचार। ड्रकर की जीवनी या उनकी अन्य पुस्तकों के वर्ष याद करने की ज़रूरत नहीं।

MBO के चार घटक

OpenStax के अनुसार MBO के चार मुख्य घटक हैं। पहला, विशिष्ट लक्ष्य: लक्ष्य अस्पष्ट न हो; "सेवा सुधारेंगे" की जगह "आवेदनों का निपटारा तय अवधि में करेंगे" जैसा मापने योग्य कथन हो। दूसरा, यथार्थवादी और स्वीकार्य लक्ष्य: जो इतना कठिन न हो कि असंभव लगे और इतना सरल न हो कि चुनौती ही न रहे, और जिसे करने वाला व्यक्ति स्वीकार करे। तीसरा, संयुक्त सहभागिता: लक्ष्य अधीनस्थ और वरिष्ठ दोनों की चर्चा से बनें। चौथा, प्रतिपुष्टि: प्रगति की जानकारी समय-समय पर मिलती रहे ताकि सुधार का अवसर रहे।

इन चारों में से कोई एक भी कमज़ोर हो तो पूरा ढाँचा लड़खड़ाता है। लक्ष्य अस्पष्ट हो तो मूल्यांकन विवादित होगा। सहभागिता न हो तो लक्ष्य "थोपा हुआ" लगेगा। प्रतिपुष्टि न हो तो अधिकारी को साल के अंत में पता चलेगा कि वह पिछड़ गया है, तब सुधार का समय निकल चुका होगा।

MBO की प्रक्रिया: चरण-दर-चरण

पाठ्यपुस्तकों में चरणों की गिनती अलग-अलग मिलती है, इसलिए परीक्षा में संख्या पर अटकने की जगह तर्क-क्रम लिखना सुरक्षित है। OpenStax की प्रक्रिया और नियोजन के सामान्य क्रम (NCERT का नियोजन-अध्याय) को मिलाकर यह क्रम बनता है।

चरण 1: संगठन के समग्र उद्देश्य तय करना। शीर्ष प्रबंधन यह बताता है कि संगठन को आने वाली अवधि में क्या पाना है। यहीं से बाक़ी सारे लक्ष्य निकलते हैं।

चरण 2: उद्देश्यों को नीचे के स्तरों तक पहुँचाना। हर विभाग और व्यक्ति के साथ चर्चा करके उसके हिस्से का लक्ष्य तय होता है। इसमें वरिष्ठ और अधीनस्थ दोनों की भूमिका होती है; वरिष्ठ दिशा देता है और अधीनस्थ व्यावहारिक कठिनाइयाँ बताता है।

चरण 3: कार्य-योजना बनाना। लक्ष्य के साथ यह भी तय होता है कि उसे कैसे और किन साधनों से पाया जाएगा, समय-सीमा क्या होगी, और प्रगति किन संकेतकों से मापी जाएगी।

चरण 4: क्रियान्वयन और स्वयं-निगरानी। कर्मचारी काम करता है और अपनी प्रगति को योजना से मिलाता रहता है। OpenStax के अनुसार इस चरण में कर्मचारी स्वयं निगरानी और सुधार करते हैं, जो ड्रकर के आत्म-नियंत्रण के विचार से मेल खाता है।

चरण 5: समीक्षा और प्रतिपुष्टि। तय अंतराल पर वरिष्ठ और अधीनस्थ साथ बैठते हैं, परिणाम की तुलना लक्ष्य से करते हैं, कारण खोजते हैं, और ज़रूरत हो तो लक्ष्य या योजना बदलते हैं।

चरण 6: मूल्यांकन और अगला चक्र। अवधि के अंत में समग्र मूल्यांकन होता है और उसी के आधार पर अगले चक्र के लक्ष्य बनते हैं। इस तरह MBO एक चक्र है, एकबारगी काम नहीं। यह नियोजन (लक्ष्य) और नियंत्रण (मापन और सुधार) को जोड़ने वाला चक्र है; NCERT में नियंत्रण का सार भी यही है कि वास्तविक परिणाम की तुलना मानक से हो और विचलन सुधारे जाएँ।

MBO के गुण: क्यों अपनाया जाता है

पहला गुण है स्पष्टता। जब हर व्यक्ति को पता हो कि उससे क्या अपेक्षित है और उसे किससे मापा जाएगा, तब भ्रम कम होता है और काम की प्राथमिकता तय रहती है।

दूसरा, प्रेरणा। OpenStax के अनुसार शीर्ष प्रबंधन की प्रतिबद्धता MBO की सफलता की कुंजी है, और सहभागिता से बने लक्ष्य को व्यक्ति अपना मानता है। अपना माना हुआ लक्ष्य पाने की इच्छा भी अधिक रहती है (विश्लेषण)।

तीसरा, बेहतर नियंत्रण। लक्ष्य पहले से मापने योग्य रूप में तय हों तो विचलन जल्दी दिखता है। वरिष्ठ को हर छोटे काम की निगरानी नहीं करनी पड़ती, केवल परिणाम और संकेतक देखने होते हैं।

चौथा, संचार और समन्वय। लक्ष्य ऊपर से नीचे तक जुड़े हों तो हर विभाग को पता रहता है कि उसका काम संगठन के बड़े लक्ष्य में कहाँ फिट होता है। इससे विभागों के बीच टकराव घटता है।

पाँचवाँ, मूल्यांकन में निष्पक्षता। व्यक्तिगत पसंद-नापसंद की जगह तय लक्ष्य के सापेक्ष प्रदर्शन देखा जाता है, इसलिए मूल्यांकन अधिक वस्तुनिष्ठ बनता है।

OpenStax एक अध्ययन-समीक्षा का हवाला देती है (Rodgers और Hunter): जाँचे गए 70 मामलों में से 68 में उत्पादकता बढ़ी और औसत वृद्धि 40 प्रतिशत से अधिक रही। यह आँकड़ा पाठ्यपुस्तक में उद्धृत एक समीक्षा का है; उसी स्रोत के अनुसार असर सबसे प्रबल वहाँ रहा जहाँ शीर्ष प्रबंधन पूरी तरह प्रतिबद्ध था। इसे उत्तर में लिखें तो "एक समीक्षा के अनुसार" लिखें, सार्वभौमिक नियम की तरह नहीं।

MBO की सीमाएँ और आलोचना

पहली सीमा, समय और कागज़ी बोझ। हर व्यक्ति के साथ लक्ष्य-चर्चा, योजना और समीक्षा में बहुत समय लगता है। बड़े सरकारी तंत्र में यह बोझ और बढ़ सकता है (विश्लेषण)।

दूसरी, केवल मापने योग्य लक्ष्यों पर ज़ोर। जो चीज़ गिनी जा सकती है वह प्राथमिकता पा जाती है और जो नहीं गिनी जा सकती, जैसे व्यवहार, नागरिक के साथ संवेदनशीलता या दीर्घकालिक क्षमता-निर्माण, उपेक्षित रह सकती है (विश्लेषण)।

तीसरी, अल्पकालिक झुकाव। लक्ष्य अक्सर एक साल के होते हैं, इसलिए ऐसे काम पीछे जा सकते हैं जिनका फल कई वर्षों बाद दिखेगा, जैसे संस्थागत सुधार (विश्लेषण)।

चौथी, लक्ष्य "आसान" रखने की प्रवृत्ति। यदि मूल्यांकन और पदोन्नति लक्ष्य-पूर्ति से जुड़ी हो तो कर्मचारी ऐसे लक्ष्य माँगते हैं जो सहज पूरे हो जाएँ। वरिष्ठ का काम है लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण पर यथार्थवादी रखना।

पाँचवीं, सहभागिता का दिखावा। कई बार लक्ष्य वास्तव में ऊपर से तय होते हैं और "चर्चा" औपचारिकता रह जाती है। तब MBO का मुख्य लाभ, यानी स्वामित्व की भावना, नहीं मिलता।

छठी, बदलती परिस्थितियों में कठोरता। यदि बाहरी स्थितियाँ बदल जाएँ, जैसे बजट में कटौती या नीति-परिवर्तन, और लक्ष्य समायोजित न हों, तो पुराने लक्ष्य से मूल्यांकन अन्याय बन सकता है। इसीलिए प्रतिपुष्टि और बीच में संशोधन की गुंजाइश MBO का अनिवार्य अंग है।

सीमाओं को पढ़कर यह निष्कर्ष न निकालें कि MBO बेकार है। OpenStax के अनुसार शीर्ष प्रबंधन की प्रतिबद्धता और सहभागिता जैसे घटक सही हों तो इसके लाभ मिलते हैं। संतुलित उत्तर में "गुण पहले, सीमा बाद में, और सीमा घटाने के उपाय अंत में" का क्रम रखें।

सरकारी कामकाज से समानता: RFD

यह खंड विश्लेषण है: MBO और सरकारी प्रणाली की तुलना किसी स्रोत का दावा नहीं है। स्रोत-आधारित तथ्य ये हैं। IIPA Digest (जनवरी-मार्च 2022) के अनुसार केंद्रीय मंत्रालय 2009-10 से "परिणाम-रूपरेखा दस्तावेज़" (Results-Framework Document, RFD) तैयार करते रहे हैं; इसकी शुरुआत मंत्रिमंडल सचिवालय की देखरेख में हुई, और उनमें सहमत उद्देश्य, सफलता-संकेतक और लक्ष्य दर्ज होते हैं। पूर्ण मूल्यांकन 2010-11 से शुरू हुआ। Performance Magazine के अनुसार प्रधानमंत्री ने 2009 में निष्पादन प्रबंधन और मूल्यांकन प्रणाली (PMES) को स्वीकृति दी, जिसमें प्रत्येक वर्ष RFD बनता है और मंत्रिमंडल सचिवालय का निष्पादन प्रबंधन प्रभाग उसे देखता है।

समानताएँ साफ़ हैं: पहले से तय उद्देश्य, मापने योग्य संकेतक, लक्ष्य, तय अवधि और अवधि के अंत में परिणाम की समीक्षा। MBO का तर्क यही है।

पर कुछ अंतर भी ध्यान रखें। MBO व्यक्ति और उसके वरिष्ठ के बीच की सहभागी चर्चा पर टिका है, जबकि RFD मंत्रालय या विभाग का दस्तावेज़ है। इसलिए उत्तर में लिखें "MBO के सिद्धांत से मेल खाने वाली व्यवस्था", यह नहीं कि RFD ही MBO है।

राज्य-स्तर के उदाहरण के लिए उत्तर में सामान्य रूप से "राज्य सरकार के विभागीय लक्ष्य और उनकी समीक्षा" लिखना पर्याप्त है; किसी योजना का नाम या आँकड़ा तभी लिखें जब वह आपको पक्का याद हो।

MBO और प्रबंध के अन्य पृष्ठों से संबंध

MBO नियोजन से सीधे जुड़ता है। NCERT नियोजन को निर्णय लेने की प्रक्रिया बताता है, और MBO उसी में उद्देश्य-निर्धारण का विशेष, सहभागी रूप है। निर्णय की प्रक्रिया पर अलग पृष्ठ है: "निर्णय-प्रक्रिया"।

प्रत्यायोजन (Delegation) से भी इसका रिश्ता है। जब लक्ष्य स्पष्ट हों तो वरिष्ठ अधिकार सौंपकर परिणाम माँग सकता है। देखें: लोक प्रशासन में "प्रत्यायोजन" और "नियंत्रण का क्षेत्र"।

समन्वय का भी यही मामला है। ऊपर से नीचे जुड़े लक्ष्य अपने आप समन्वय की नींव बनाते हैं। देखें: लोक प्रशासन में "समन्वय"। और जो प्रशासन परिणाम-आधारित सोच की ओर बढ़ा, उसकी चर्चा "नवीन लोक प्रबंधन" वाले पृष्ठ में है।

MBO: गुण और सीमाएँ एक नज़र में

पक्षगुणसीमा (विश्लेषण)
स्पष्टताहर व्यक्ति को अपनी अपेक्षा और माप पताजो नहीं गिना जा सकता, वह उपेक्षित हो सकता है
प्रेरणासहभागी लक्ष्य स्वामित्व की भावना देते हैंसहभागिता दिखावा बने तो यह लाभ नहीं मिलता
नियंत्रणविचलन जल्दी दिखता है, स्वयं-निगरानी संभवसमय और कागज़ी बोझ बढ़ता है
समन्वयऊपर से नीचे लक्ष्य जुड़े रहते हैंअल्पकालिक लक्ष्यों पर अधिक ज़ोर
मूल्यांकनतय लक्ष्य के सापेक्ष अधिक वस्तुनिष्ठआसान लक्ष्य माँगने की प्रवृत्ति

स्रोत-आधार: गुणों के लिए OpenStax; सीमाओं का वर्गीकरण विश्लेषण है

MBO चक्र

  1. संगठन के उद्देश्य

    शीर्ष प्रबंधन

  2. संयुक्त लक्ष्य-निर्धारण

    वरिष्ठ + अधीनस्थ

  3. कार्य-योजना

    साधन, समय, संकेतक

  4. क्रियान्वयन और स्वयं-निगरानी

    आत्म-नियंत्रण

  5. समीक्षा और प्रतिपुष्टि

    नियमित अंतराल

  6. मूल्यांकन

    अगले चक्र के लक्ष्य

चक्र के रूप में समझें: मूल्यांकन से अगले चक्र के लक्ष्य निकलते हैं।

मुख्य तथ्य

MBO की जड़ वाली पुस्तक
Peter F. Drucker, The Practice of Management, 1954
अध्याय का नाम
"Management by objectives and self-control" (पुस्तक के विषय-क्रम में)
MBO का उद्भव
1954 (ऑक्सफ़र्ड हैंडबुक के अध्याय का सार)
MBO के तीन रूप
प्रबंध-दर्शन, तकनीक, कर्मचारी-सहभागिता कार्यक्रम (OpenStax)
चार घटक
विशिष्ट लक्ष्य, यथार्थवादी और स्वीकार्य लक्ष्य, संयुक्त सहभागिता, प्रतिपुष्टि (OpenStax)
एक समीक्षा का निष्कर्ष
70 में से 68 मामलों में उत्पादकता-वृद्धि, औसत 40 प्रतिशत से अधिक (OpenStax में उद्धृत; एकल स्रोत)
RFD (केंद्र)
2009-10 से केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा; मंत्रिमंडल सचिवालय; पूर्ण मूल्यांकन 2010-11 से (IIPA Digest)
PMES की स्वीकृति
2009 में (Performance Magazine)
सिलेबस की पंक्ति
RPSC सिलेबस, 09-01-2026, पेपर I, इकाई III (ख)

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • MBO को केवल "लक्ष्य थोपना" लिखना। उसका केंद्र सहभागिता और प्रतिपुष्टि है।
  • ड्रकर की किसी अन्य पुस्तक या वर्ष को मिला देना। सुरक्षित पंक्ति: "The Practice of Management (1954)।"
  • सीमाओं के बिना केवल गुण लिख देना, या उल्टा। परीक्षक संतुलन देखता है।
  • RFD या सरकारी लक्ष्य-व्यवस्था को "MBO ही है" कह देना। सही शब्द: "MBO के सिद्धांत से मेल खाती व्यवस्था।"
  • 70 में से 68 मामलों वाले आँकड़े को सार्वभौमिक नियम की तरह लिखना। यह एक समीक्षा का निष्कर्ष है।