निर्णय-प्रक्रिया (Decision Making Process): चरण, प्रकार, बाधाएँ और साइमन
निर्णय लेने की छह-चरणीय प्रक्रिया, निर्णयों के प्रकार, बाधाएँ और साइमन की सीमित तर्कसंगतता, एक कार्य-उदाहरण और उत्तर-लेखन ढाँचे के साथ।
- छह चरण
- नियमित और अनियमित निर्णय
- सीमित तर्कसंगतता
- साइमन
- संतोषजनक चयन (satisficing)
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग B (Management): "General Management: concept of management, managerial skills and levels, management functions; MBO; decision making: process, techniques and models." इस पृष्ठ पर "decision making: process" है और मॉडलों की झलक है; तकनीकों और मॉडलों का विस्तार "निर्णय-तकनीक और मॉडल" पृष्ठ पर है।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- सिलेबस में निर्णय की "प्रक्रिया" अलग से लिखी है, इसलिए छह चरणों को क्रम से, एक-एक वाक्य की व्याख्या के साथ लिखना आना चाहिए।
- निर्णय हर प्रशासनिक पद का रोज़ का काम है। अच्छा उत्तर चरणों को सरकारी उदाहरण से जोड़ता है, जैसे कलेक्टर या खंड विकास अधिकारी का किसी समस्या पर निर्णय (विश्लेषण)।
- साइमन की सीमित तर्कसंगतता लोक प्रशासन के "प्रशासनिक व्यवहार" वाले भाग में भी आती है। यहाँ प्रबंध की दृष्टि से और वहाँ प्रशासन की दृष्टि से पढ़ने पर एक ही विचार दो उत्तरों में काम आता है।
PYQ की स्थिति
2013-2024 के संकलित पेपरों में निर्णय-प्रक्रिया पर कोई सीधा प्रश्न नहीं आया। नीचे के अभ्यास प्रश्न मौलिक हैं, PYQ नहीं।
पहले सरल भाषा में: बरसात से पहले गाँव का रास्ता
मान लीजिए किसी ब्लॉक के विकास अधिकारी के पास सीमित राशि है। तीन गाँवों से माँग आई है: एक में रास्ता टूटा है, दूसरे में पानी की टंकी की मरम्मत चाहिए और तीसरे में विद्यालय की छत टपकती है। राशि किसी एक काम के लिए ही पूरी है। अब उसे निर्णय करना है।
समझदार अधिकारी पहले यह देखेगा कि समस्या असल में क्या है और किसकी क्या ज़रूरत है। फिर वह विकल्प गिनेगा: तीनों में से एक चुनना, या राशि बाँटकर आंशिक काम करना, या ऊपर से अतिरिक्त राशि माँगना। इसके बाद वह हर विकल्प को लागत, ज़रूरत की तीव्रता, समय और लाभार्थियों की संख्या पर तौलेगा। फिर एक विकल्प चुनेगा, उसे लागू करेगा और कुछ समय बाद देखेगा कि परिणाम कैसा रहा।
यही निर्णय-प्रक्रिया का सार है: समस्या पहचानना, विकल्प बनाना, विश्लेषण करना, चुनना, लागू करना और मूल्यांकन करना। हर निर्णय में इन सबके लिए समय नहीं होता, पर जहाँ निर्णय बड़ा और नया हो वहाँ इस क्रम को छोड़ना ख़तरनाक है।
निर्णय क्या है और प्रबंधन में इसका स्थान
OpenStax के अनुसार निर्णय लेना संभावित विकल्पों पर सोचकर उनमें से एक को चुनने की क्रिया या प्रक्रिया है। प्रबंधक लगातार निर्णय लेते रहते हैं और उनके निर्णयों की गुणवत्ता संगठन और उससे प्रभावित लोगों पर असर डालती है। शीर्ष प्रबंधन के निर्णय संगठन के भविष्य को प्रभावित करते हैं, जबकि निचले स्तर के प्रबंधकों के निर्णय उनके विभाग और कर्मचारियों पर असर डालते हैं।
NCERT नियोजन को "निर्णय लेने की प्रक्रिया" कहता है, क्योंकि उसमें वैकल्पिक कार्य-विधियों में से चुनाव करना होता है। उसके नियोजन के सात चरणों में "विकल्पों का चयन" वह बिंदु बताया गया है जिसे वास्तविक निर्णय का क्षण माना गया है। इसका मतलब है कि नियोजन, संगठन, निर्देशन, नियंत्रण, सभी कार्य निर्णयों से बनते हैं। "प्रबंध के कार्य" वाले पृष्ठ में यह जुड़ाव दिखता है।
OpenStax एक व्यावहारिक बात भी कहती है: प्रबंधकीय निर्णय परीक्षा के बहुविकल्पीय प्रश्न जैसे नहीं होते, जिनमें एक ही सही उत्तर हो। कई बार सभी विकल्प अच्छे होते हैं, कई बार सभी बुरे और काम नुक़सान घटाने का होता है; और अक्सर विभिन्न हितों के कारण किसी न किसी को असंतोष होगा। साथ ही, यह तय करना भी एक निर्णय है कि कितनी जानकारी पर्याप्त है। ज़्यादा देर करना उतना ही हानिकारक हो सकता है जितनी जल्दबाज़ी।
कुछ निर्णयों के नैतिक पक्ष भी होते हैं, जब किसी के हित को हानि पहुँच सकती हो। OpenStax के अनुसार इसलिए निर्णय के प्रभाव, केवल अल्पकालिक लाभ के आधार पर नहीं, दीर्घकाल और सभी हितधारकों पर भी देखने चाहिए। सरकारी निर्णयों में यह बात और भी लागू होती है, क्योंकि प्रभावित वर्ग समाज का बड़ा हिस्सा होता है (विश्लेषण)।
निर्णयों के प्रकार: नियमित और अनियमित
OpenStax निर्णयों को दो मुख्य प्रकार में बाँटती है। पहला, नियमित (Programmed) निर्णय: जो बार-बार होते हैं और जिनके लिए नियम बनाए जा सकते हैं। इनके मानदंड ज्ञात होते हैं या क़रीब-क़रीब आँके जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, कितनी कच्ची सामग्री मँगानी है, यह अनुमानित उत्पादन, मौजूदा भंडार और आपूर्ति के समय से तय हो सकता है। इन्हें दिनचर्या या निम्न-सहभागिता वाले निर्णय भी कहा जाता है, क्योंकि इनमें गहरी सोच की ज़रूरत नहीं पड़ती। इन्हें दूसरे को सिखाना भी आसान है, क्योंकि नियम और मानदंड स्पष्ट रूप से बताए जा सकते हैं।
दूसरा, अनियमित (Nonprogrammed) निर्णय: जो नए, असंरचित होते हैं और जिनके मानदंड स्पष्ट नहीं होते। जानकारी अधूरी या अस्पष्ट हो सकती है और निर्णयकर्ता को विवेक और रचनात्मकता लगानी पड़ती है। नई तकनीक अपनाने का निर्णय इसका उदाहरण है, जहाँ अज्ञात बातें हमेशा रहेंगी। इन्हें असामान्य या उच्च-सहभागिता वाले निर्णय भी कहा गया है।
सरकारी तंत्र में तुलना सहज है (विश्लेषण): स्वीकृत नियमों के अंतर्गत पेंशन-प्रकरण का निपटारा नियमित निर्णय के क़रीब है, जबकि किसी आपदा के बाद अचानक राहत की रणनीति तय करना अनियमित निर्णय के क़रीब है। इसका फ़र्क़ व्यवहार में यह है कि नियमित निर्णय नियम-पुस्तिका और प्रक्रिया-सूची से हो जाते हैं, अनियमित निर्णय में अधिकारी का विवेक, परामर्श और पूरी छह-चरणीय प्रक्रिया लगती है।
OpenStax के अनुसार नियमित निर्णयों में प्रबंधक अक्सर अनुमान-विधियाँ (Heuristics) बना लेते हैं, यानी मानसिक शॉर्टकट। ये समय बचाती हैं और आम तौर पर अच्छा, पर सर्वोत्तम न हो सकने वाला, हल देती हैं। इसके विपरीत अनियमित निर्णयों में व्यवस्थित प्रक्रिया अपनानी चाहिए। इस भेद को दो पंक्तियों में याद रखें: नियमित निर्णय में नियम, अनियमित निर्णय में प्रक्रिया।
निर्णय-प्रक्रिया के छह चरण
OpenStax के अनुसार निर्णय-प्रक्रिया छह चरणों में बाँटी जा सकती है: निर्णय की ज़रूरत पहचानना, अनेक विकल्प बनाना, विकल्पों का विश्लेषण, एक विकल्प का चयन, चयनित विकल्प का क्रियान्वयन और उसकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन। नीचे हर चरण की परीक्षा-योग्य व्याख्या है।
चरण 1: निर्णय की ज़रूरत पहचानना। यह देखना कि कोई समस्या है या कोई अवसर आया है जिस पर निर्णय चाहिए। OpenStax के अनुसार अप्रभावी प्रबंधक कई बार समस्या को इसलिए नज़रअंदाज़ करते हैं कि उन्हें हल का रास्ता नहीं सूझता, पर इससे समस्याएँ बढ़ती हैं। प्रभावी प्रबंधक समस्याओं और अवसरों दोनों के प्रति सजग रहते हैं।
चरण 2: अनेक विकल्प बनाना। OpenStax कहती है कि प्रबंधक अक्सर दो विकल्प बनाकर जल्दी आगे बढ़ जाते हैं, और हो सकता है कि कोई बेहतर विकल्प सोचा ही न गया हो। अनियमित निर्णय में इस चरण पर जल्दबाज़ी न करें। अधिक विकल्प सामने आने पर अच्छा निर्णय होने की संभावना बढ़ती है। इसमें दूसरों से बात करना और रचनात्मक सोच मदद करती है। इसी चरण में आगे वाले पृष्ठ की ब्रेनस्टॉर्मिंग और डेल्फ़ाई जैसी विधियाँ काम आती हैं।
चरण 3: विकल्पों का विश्लेषण। हर विकल्प की लागत, लाभ, जोखिम, समय और प्रभावित पक्षों का आकलन किया जाता है। OpenStax यहाँ साक्ष्य-आधारित निर्णय, आलोचनात्मक सोच, दूसरों से परामर्श, और दीर्घकालिक तथा नैतिक प्रभावों पर विचार की बात करती है। साक्ष्य-आधारित निर्णय का अर्थ है कि प्रबंधक उपलब्ध सर्वोत्तम साक्ष्य व्यवस्थित रूप से जुटाएँ।
चरण 4: एक विकल्प का चयन। NCERT के नियोजन-अध्याय के अनुसार यही निर्णय का असली क्षण है। चुनाव अकेले विश्लेषण से नहीं, बल्कि विश्लेषण और विवेक से होता है। पूर्ण जानकारी कभी नहीं मिलती, इसलिए यह भी एक निर्णय है कि कब रुककर चुनना है।
चरण 5: क्रियान्वयन। चुना हुआ विकल्प कार्य-योजना में बदलता है: कौन करेगा, कब तक, किन साधनों से। निर्णय कितना भी अच्छा हो, लागू न हो तो बेकार है। यहाँ से "प्रबंध के कार्य" वाले पृष्ठ के संगठन और निर्देशन जुड़ते हैं।
चरण 6: मूल्यांकन। देखना कि निर्णय से अपेक्षित परिणाम मिला या नहीं और यदि नहीं तो क्यों। OpenStax के अनुसार प्रभावी प्रबंधक यह जानते हैं कि कुछ विफलताएँ अपरिहार्य हैं, इसलिए बुरे निर्णय को जल्दी पहचानकर सुधारना बेहतर है। यही चरण अगले निर्णय के लिए अनुभव देता है और नियंत्रण के कार्य से जुड़ता है।
ध्यान रहे, OpenStax यह भी कहती है कि लोग अक्सर कुछ चरण छोड़ देते हैं या किसी चरण पर बहुत कम समय देते हैं। परीक्षा में चरणों के साथ यह चेतावनी जोड़ना उत्तर को सजीव बनाता है।
निर्णय में बाधाएँ
OpenStax निर्णय-प्रक्रिया में कई बाधाएँ गिनाती है: सीमित तर्कसंगतता, प्रतिबद्धता की वृद्धि, समय की बाधा, अनिश्चितता, व्यक्तिगत पूर्वाग्रह और संघर्ष।
सीमित तर्कसंगतता (Bounded rationality): जटिल मुद्दों पर निर्णयकर्ता पूरी तरह तर्कसंगत नहीं हो सकता, क्योंकि वह सभी संभावित विकल्पों और हर विकल्प के सभी परिणामों को पूरी तरह नहीं समझ सकते। मस्तिष्क की सूचना-संसाधन की सीमा है, और अक्सर समय या जानकारी भी अधूरी होती है। यह विचार साइमन से जुड़ा है, जिनकी चर्चा आगे है।
प्रतिबद्धता की वृद्धि (Escalation of commitment): निर्णयकर्ता का ग़लत निर्णय पर डटे रहना, जबकि उससे परिणाम बिगड़ते जा रहे हों। एक बार निर्णय लेने के बाद उसकी तटस्थ पुनर्समीक्षा कठिन हो जाती है, क्योंकि पुराने रास्ते पर चलते रहना "स्वीकार करने" से आसान लगता है। OpenStax का सबक: ग़लत रास्ते पर बढ़ना प्रगति नहीं है।
समय की बाधा: समय कम हो तो मनुष्य गहरी सोच की जगह अनुमान-विधियाँ अपनाता है। अनिश्चितता: चुनने से पहले हर विकल्प का परिणाम पता नहीं होता, और एक विकल्प चुनने का मतलब बाक़ी छोड़ना है। व्यक्तिगत पूर्वाग्रह: अपने जैसे या परिचित पक्ष की ओर झुकाव और पुष्टि-पूर्वाग्रह (Confirmation bias), यानी उस सूचना पर अधिक ध्यान देना जो पहले से बनी धारणा के अनुकूल हो। ये पूर्वाग्रह भर्ती से लेकर आपूर्तिकर्ता चुनने तक हर निर्णय में दिख सकते हैं। संघर्ष (Conflict): ज़्यादातर लोग टकराव से बचते हैं, पर OpenStax के अनुसार कठिन निर्णयों में कभी-कभी टकराव अपरिहार्य होता है।
इन्हें दूर करने के लिए OpenStax के सुझाव ये हैं: छह चरणों का पालन, दूसरों से परामर्श, रचनात्मकता, साक्ष्य-आधारित निर्णय, आलोचनात्मक सोच, दीर्घकालिक और नैतिक प्रभावों पर ध्यान। अनुभव भी मदद करता है, क्योंकि अनुभवी प्रबंधक जानते हैं कि और कौन-सी जानकारी चाहिए।
साइमन, सीमित तर्कसंगतता और संतोषजनक चयन
हर्बर्ट ए. साइमन को 1978 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार "आर्थिक संगठनों के भीतर निर्णय-प्रक्रिया पर उनके अग्रणी शोध के लिए" मिला। नोबेल की तथ्य-पुस्तिका में उनका जीवनकाल 1916-2001 दर्ज है। ब्रिटैनिका के अनुसार उनकी पुस्तक Administrative Behavior 1947 की है और उन्होंने "सैटिसफ़ाइसिंग" (Satisficing) की अवधारणा दी।
साइमन की मुख्य बात यह है कि प्रशासक और प्रबंधक आदर्श अर्थ में "अधिकतमकर्ता" नहीं हो सकते, क्योंकि सूचना, समय और गणना की क्षमता सीमित है। इसलिए वे "संतोषजनक" हल चुनते हैं, यानी वह पहला विकल्प जो उनकी न्यूनतम अपेक्षा पूरी कर दे। OpenStax के अनुसार "सैटिसफ़ाइसिंग" में निर्णयकर्ता पहला स्वीकार्य हल चुन लेता है और सर्वोत्तम खोजने का अतिरिक्त प्रयास नहीं करता। OpenStax इसे नियमित, कम महत्त्व वाले निर्णयों के लिए समय बचाने की तकनीक बताती है।
यहाँ परीक्षा के लिए सावधानी: "सीमित तर्कसंगतता" को "तर्कहीनता" न लिखें। इसका अर्थ है कि निर्णयकर्ता तर्कसंगत होना चाहता है, पर परिस्थिति की सीमाओं में रहकर। साथ ही संतोषजनक चयन को आलस्य न बताएँ; वह सीमित संसाधनों में व्यावहारिक रणनीति है। और जहाँ निर्णय बड़ा और अपरिवर्तनीय हो, वहाँ केवल "पहला स्वीकार्य हल" पर्याप्त नहीं, इसलिए पूरी प्रक्रिया लगानी चाहिए (विश्लेषण)।
लोक प्रशासन के संदर्भ में यही विचार "प्रशासनिक व्यवहार" वाले पृष्ठ में है। देखें: लोक प्रशासन में "प्रशासनिक व्यवहार"। उस पृष्ठ में साइमन के तर्कसंगतता और संगठन-व्यवहार के बाक़ी पक्ष आते हैं, यहाँ केवल प्रबंध-निर्णय का हिस्सा है।
प्रक्रिया को संगठन के ढाँचे से जोड़ना
निर्णय की गुणवत्ता केवल व्यक्ति पर नहीं, संगठन के ढाँचे पर भी निर्भर करती है। यदि निर्णय का अधिकार बहुत ऊपर केंद्रित हो तो जानकारी ऊपर पहुँचते-पहुँचते देर हो जाती है। देखें: लोक प्रशासन में "केंद्रीकरण और विकेंद्रीकरण" और "प्रत्यायोजन"।
निर्णय का क्रियान्वयन "आदेश की एकता" और "समन्वय" से भी जुड़ा है। जब निर्णय अलग-अलग विभागों को लागू करना हो तो स्पष्ट आदेश और तालमेल के बिना अच्छा निर्णय भी अटक जाता है। देखें: लोक प्रशासन में "आदेश की एकता" और "समन्वय"।
अंत में, निर्णय का मूल्यांकन-चरण MBO से जुड़ता है। जब लक्ष्य पहले से मापने योग्य रूप में हों तो पता चलता है कि निर्णय सफल रहा या नहीं। देखें: इसी खंड का "MBO" पृष्ठ।
नियमित और अनियमित निर्णय
| आधार | नियमित (Programmed) | अनियमित (Nonprogrammed) |
|---|---|---|
| प्रकृति | बार-बार होने वाले, नियम बनाए जा सकते हैं | नए, असंरचित, मानदंड अस्पष्ट |
| सूचना | मानदंड ज्ञात या आँके जा सकते हैं | अधूरी या अस्पष्ट |
| अन्य नाम | दिनचर्या, निम्न-सहभागिता | असामान्य, उच्च-सहभागिता |
| उपयोगी साधन | अनुमान-विधि (Heuristics), संतोषजनक चयन | छह-चरणीय प्रक्रिया, परामर्श, रचनात्मकता, साक्ष्य |
| सिखाना | नियमों से आसान | कठिन; विवेक और अनुभव चाहिए |
| सरकारी उदाहरण (विश्लेषण) | नियमानुसार पेंशन-प्रकरण का निपटारा | आपदा के बाद राहत की नई रणनीति |
स्रोत-आधार: OpenStax 2.3 और 2.5; सरकारी उदाहरण विश्लेषण हैं
निर्णय-प्रक्रिया के छह चरण
1. ज़रूरत पहचानना
समस्या या अवसर
2. विकल्प बनाना
अनेक, रचनात्मक
3. विश्लेषण
लागत, लाभ, जोखिम, नैतिक पक्ष
4. चयन
विश्लेषण + विवेक
5. क्रियान्वयन
कौन, कब, किन साधनों से
6. मूल्यांकन
सुधार और सीख
मुख्य तथ्य
- निर्णय की परिभाषा
- विकल्पों पर सोचकर एक को चुनने की क्रिया या प्रक्रिया (OpenStax)
- प्रक्रिया के चरण
- छह: ज़रूरत पहचानना, विकल्प बनाना, विश्लेषण, चयन, क्रियान्वयन, मूल्यांकन (OpenStax)
- निर्णयों के दो प्रकार
- नियमित (Programmed) और अनियमित (Nonprogrammed) (OpenStax)
- सीमित तर्कसंगतता
- जटिल मुद्दों पर पूर्ण तर्कसंगत होना संभव नहीं (OpenStax)
- संतोषजनक चयन (Satisficing)
- पहला स्वीकार्य हल चुनना (OpenStax); अवधारणा साइमन की (Britannica)
- NCERT: नियोजन
- निर्णय लेने की प्रक्रिया; सात चरण; विकल्प का चयन असली निर्णय-बिंदु
- साइमन: नोबेल
- 1978, अर्थशास्त्र; "आर्थिक संगठनों के भीतर निर्णय-प्रक्रिया पर अग्रणी शोध" के लिए
- साइमन: जीवनकाल
- 1916-2001 (नोबेल तथ्य-पुस्तिका)
- Administrative Behavior
- 1947 (Britannica)
- सिलेबस की पंक्ति
- RPSC सिलेबस, 09-01-2026, पेपर I, इकाई III (ख)
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- चरणों की संख्या में गड़बड़ी। नियोजन के NCERT सात चरण और निर्णय-प्रक्रिया के छह चरण अलग हैं; दोनों को मिलाएँ नहीं।
- सीमित तर्कसंगतता को "तर्कहीनता" या "लापरवाही" लिख देना।
- साइमन की पुस्तक का वर्ष (1947) और नोबेल का वर्ष (1978) आपस में बदल देना।
- नियमित और अनियमित निर्णय का भेद केवल नाम से बताना, बिना उदाहरण के।
- मूल्यांकन-चरण को छोड़ देना। छह में अंतिम चरण वही है जो निर्णय को सुधार-चक्र में बदलता है।
केस स्टडी: एक कल्पित पोर्टल और बढ़ती प्रतिबद्धता
उदाहरण (काल्पनिक)"पैसा लग चुका है, इसलिए चलाते रहें?"
यह पूरी तरह गढ़ा गया उदाहरण है; विभाग, पोर्टल और संख्याएँ वास्तविक नहीं हैं। इसका उद्देश्य बाधाओं में से "प्रतिबद्धता की वृद्धि" सरकारी परिस्थिति पर दिखाना है।
- स्थिति
- एक कल्पित विभाग ने आवेदन-निपटारे के लिए एक पोर्टल बनवाने का निर्णय लिया और पहले चरण में बड़ी राशि लगा दी। छह माह बाद पता चला कि पोर्टल धीमा है और कर्मचारी उसे अपनाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
- बाधा
- अधिकारी को लगा कि अब पीछे हटना पहले का ख़र्च बेकार कर देगा। उसने और राशि और समय माँगा, जबकि एक सरल विकल्प कम ख़र्च में उपलब्ध था। यह प्रतिबद्धता की वृद्धि है।
- छह चरणों का प्रयोग
- तटस्थ समीक्षा में चरण 6 (मूल्यांकन) को गंभीरता से लिया गया: अब तक के ख़र्च को अलग रखकर आगे की लागत और लाभ की तुलना की गई, और चरण 2-3 दोहराकर नए विकल्प देखे गए।
- सबक
- पुराने ख़र्च का बचाव निर्णय का आधार नहीं होना चाहिए; आगे की लागत और लाभ देखें (विश्लेषण)।
सीख
निर्णय का मूल्यांकन-चरण केवल औपचारिकता नहीं है; यही ग़लत रास्ते पर डटे रहने से बचाता है।
कार्य-उदाहरण: तीन माँगों में एक चुनना (कल्पित)
हल सहित उदाहरण"राशि एक की, माँगें तीन"
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; गाँव, राशि और अंक वास्तविक नहीं हैं। भार और अंक कल्पित हैं, किसी मानक पद्धति का दावा नहीं।
- कल्पित ब्लॉक के पास 10 लाख रुपये हैं। माँगें: (क) टूटा रास्ता, (ख) पानी की टंकी की मरम्मत, (ग) विद्यालय की छत। मानदंड और भार: लाभार्थी-संख्या (भार 3), अत्यावश्यकता (भार 4), लागत की उपयुक्तता (भार 3)। प्रत्येक विकल्प को 1 से 5 अंक दिए गए।
- 1चरण 1: ज़रूरत राशि सीमित है और तीन में से एक पर निर्णय चाहिए। विकल्प और मानदंड तय किए गए (चरण 1-2)।
- 2चरण 2: अंक (क) रास्ता लाभार्थी 4, अत्यावश्यकता 3, लागत 3। भारित योग: 4 × 3 + 3 × 4 + 3 × 3 = 12 + 12 + 9 = 33।
- 3चरण 3: अंक (ख) टंकी लाभार्थी 5, अत्यावश्यकता 5, लागत 4। भारित योग: 5 × 3 + 5 × 4 + 4 × 3 = 15 + 20 + 12 = 47।
- 4चरण 4: अंक (ग) छत लाभार्थी 3, अत्यावश्यकता 4, लागत 5। भारित योग: 3 × 3 + 4 × 4 + 5 × 3 = 9 + 16 + 15 = 40।
- 5चरण 5: चयन सबसे अधिक भारित योग (ख) टंकी का 47 है। उसे चुना जाता है; (ग) 40 के साथ अगली बारी के लिए रखा जाता है।
- 6चरण 6: मूल्यांकन-योजना तीन माह बाद जाँच: पानी की उपलब्धता सुधरी या नहीं। यदि नहीं, तो चयन के कारणों की समीक्षा होगी।
निष्कर्ष: निष्कर्ष: छह चरण और स्पष्ट मानदंड मिलकर निर्णय को पारदर्शी बनाते हैं। अंतिम चुनाव में विवेक भी रहता है, क्योंकि अंक और भार स्वयं निर्णय का हिस्सा हैं।
अभ्यास प्रश्न (मौलिक; PYQ नहीं)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
निर्णय-प्रक्रिया के चरण गिनाइए।
आदर्श उत्तर
ज़रूरत पहचानना, विकल्प बनाना, विश्लेषण, चयन, क्रियान्वयन और मूल्यांकन, ये निर्णय-प्रक्रिया के छह चरण हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
नियमित और अनियमित निर्णय में अंतर बताइए।
आदर्श उत्तर
नियमित निर्णय बार-बार होते हैं, उनके नियम और मानदंड ज्ञात होते हैं, इसलिए अनुमान-विधि से जल्दी हो जाते हैं। अनियमित निर्णय नए और असंरचित होते हैं, सूचना अधूरी रहती है, इसलिए उनमें व्यवस्थित प्रक्रिया, परामर्श और विवेक चाहिए। पेंशन-निपटारा पहले के और आपदा-राहत की नई रणनीति दूसरे के निकट है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
सीमित तर्कसंगतता और संतोषजनक चयन की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
आदर्श उत्तर
साइमन के अनुसार निर्णयकर्ता के पास सूचना, समय और गणना की क्षमता सीमित होती है, इसलिए वह जटिल मुद्दों पर पूर्णतः तर्कसंगत नहीं हो सकता। यह सीमित तर्कसंगतता है, तर्कहीनता नहीं। इसी कारण निर्णयकर्ता सर्वोत्तम की जगह संतोषजनक हल चुनता है, यानी पहला विकल्प जो न्यूनतम अपेक्षा पूरी करे। इसे संतोषजनक चयन (Satisficing) कहते हैं। साइमन को निर्णय-प्रक्रिया पर शोध के लिए 1978 में अर्थशास्त्र का नोबेल मिला। नियमित, कम महत्त्व के निर्णयों में यह समय बचाती है, पर बड़े और अपरिवर्तनीय निर्णयों में पूरी छह-चरणीय प्रक्रिया आवश्यक है।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न: "निर्णय-प्रक्रिया के चरणों और बाधाओं की विवेचना कीजिए।" पहली पंक्ति: निर्णय विकल्पों में से एक को चुनने की प्रक्रिया है; प्रबंधन के सभी कार्य निर्णयों से बनते हैं। NCERT नियोजन को भी निर्णय-प्रक्रिया कहता है।
मुख्य भाग
- छह चरण: ज़रूरत, विकल्प, विश्लेषण, चयन, क्रियान्वयन, मूल्यांकन (हर एक पर एक वाक्य)
- प्रकार: नियमित और अनियमित, एक-एक उदाहरण सहित
- बाधाएँ: सीमित तर्कसंगतता (साइमन), प्रतिबद्धता की वृद्धि, समय, अनिश्चितता, पूर्वाग्रह
- सुधार: परामर्श, साक्ष्य, रचनात्मकता, दीर्घकालिक और नैतिक प्रभाव
निष्कर्ष
निष्कर्ष: अच्छा निर्णय प्रक्रिया, साक्ष्य और विवेक का मेल है; मूल्यांकन-चरण निर्णय को अगले चक्र की सीख में बदल देता है।
अतिरिक्त मूल्य
- सरकारी उदाहरण: आपदा-राहत या सीमित बजट पर प्राथमिकता-चयन (विश्लेषण)
- साइमन की सीमित तर्कसंगतता का एक वाक्य, 1978 नोबेल के साथ
त्वरित पुनरावृत्ति
- निर्णय = विकल्पों में से एक को चुनने की प्रक्रिया; NCERT: नियोजन ही निर्णय-प्रक्रिया है
- छह चरण: ज़रूरत, विकल्प, विश्लेषण, चयन, क्रियान्वयन, मूल्यांकन
- नियमित निर्णय: नियम, अनुमान-विधि; अनियमित: नए, पूरी प्रक्रिया
- बाधाएँ: सीमित तर्कसंगतता, प्रतिबद्धता की वृद्धि, समय, अनिश्चितता, पूर्वाग्रह
- संतोषजनक चयन: पहला स्वीकार्य हल; नियमित और कम महत्त्व के निर्णयों में उपयोगी
- साइमन: नोबेल 1978; जीवनकाल 1916-2001; Administrative Behavior 1947
- सीमित तर्कसंगतता तर्कहीनता नहीं; सीमाओं के भीतर तर्कसंगत होने का प्रयास
- सुधार: परामर्श, साक्ष्य-आधारित निर्णय, रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच, नैतिक और दीर्घकालिक विचार
याद रखने योग्य शब्द
- निर्णय-प्रक्रिया
- नियमित-अनियमित
- सीमित तर्कसंगतता
- संतोषजनक चयन
- प्रतिबद्धता की वृद्धि
- साइमन