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पेपर I · इकाई III (ख)

निर्णय-तकनीक और मॉडल: तर्कसंगत, सीमित तर्कसंगत, सहज-बोध, पेऑफ़ मैट्रिक्स, निर्णय-वृक्ष, डेल्फ़ाई

निर्णय के तीन मॉडल, पेऑफ़ मैट्रिक्स के चार मापदंड, निर्णय-वृक्ष, ब्रेनस्टॉर्मिंग और डेल्फ़ाई: एक पूरे हल किए गए पेऑफ़ उदाहरण और एक निर्णय-वृक्ष के साथ।

  • तर्कसंगत मॉडल
  • सीमित तर्कसंगतता
  • पेऑफ़ मैट्रिक्स
  • निर्णय-वृक्ष
  • डेल्फ़ाई
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग B (Management): "General Management: concept of management, managerial skills and levels, management functions; MBO; decision making: process, techniques and models." इस पृष्ठ पर "techniques and models" हैं; प्रक्रिया के छह चरण "निर्णय-प्रक्रिया" पृष्ठ पर हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • सिलेबस में "techniques and models" एक साथ लिखा है। इसलिए दो भाग तैयार रखें: निर्णय के मॉडल (सोचने का ढंग) और निर्णय की तकनीकें (औज़ार)।
  • यह पृष्ठ गणना वाला हिस्सा भी देता है। पेऑफ़ मैट्रिक्स और निर्णय-वृक्ष का एक छोटा हल उदाहरण 10 अंक के उत्तर में सबसे अलग दिखने वाला जोड़ बन जाता है (विश्लेषण)।
  • ब्रेनस्टॉर्मिंग और डेल्फ़ाई समूह की तकनीकें हैं। नीतिगत मामलों में विशेषज्ञ-परामर्श और बहु-हितधारक चर्चा सरकारी कामकाज में आम है, इसलिए इनके साथ सरकारी उदाहरण जोड़ना आसान है (विश्लेषण)।

PYQ की स्थिति

2013-2024 के संकलित पेपरों में निर्णय की तकनीकों या मॉडलों पर कोई सीधा प्रश्न नहीं आया। नीचे के अभ्यास प्रश्न मौलिक हैं, PYQ नहीं।

पहले सरल भाषा में: गर्मी से पहले पानी का इंतज़ाम

किसी ज़िले के अधिकारी को गर्मी से पहले पेयजल के लिए टैंकर-अनुबंध तय करना है। गर्मी सामान्य रहेगी या तेज़ पड़ेगी, यह अभी कोई नहीं जानता। छोटा अनुबंध लें तो सामान्य गर्मी में पैसा बचेगा, पर लू चली तो लोग प्यासे रहेंगे। बड़ा अनुबंध लें तो लू में काम चल जाएगा, पर सामान्य गर्मी में टैंकर खड़े रहेंगे और पैसा बेकार जाएगा।

ऐसे निर्णय में दो सवाल उठते हैं। पहला, अधिकारी किस तरह सोचे: क्या वह सभी जानकारी जुटाकर सर्वोत्तम खोजे, क्या वह जितना संभव है उतने में संतोषजनक हल निकाले, या अनुभव और अंतर्ज्ञान से फ़ैसला ले? यही निर्णय के मॉडल हैं। दूसरा, वह किस औज़ार से विकल्पों को तौले: एक तालिका बनाकर सभी विकल्पों और परिस्थितियों के नतीजे देखे, या शाखाओं वाला वृक्ष बनाए, या साथियों के साथ विचार-मंथन करे, या विशेषज्ञों की राय एकत्र करे? यही निर्णय की तकनीकें हैं।

इस पृष्ठ का काम है इन दोनों को साफ़ अलग-अलग रखना और हर एक को एक छोटे हल उदाहरण से समझाना।

निर्णय के मॉडल: तीन दृष्टिकोण

निर्णय कैसे लिया जाता है, इसके बारे में पाठ्यपुस्तकों में तीन सोचने के ढंग बार-बार आते हैं: तर्कसंगत, सीमित तर्कसंगत और सहज-बोध पर आधारित। तीनों को एक-दूसरे के विरोधी की तरह नहीं, बल्कि अलग-अलग परिस्थितियों में प्रयुक्त होने वाले मॉडल की तरह पढ़ें।

तर्कसंगत मॉडल (Rational model) एक आदर्श स्थिति मानता है। निर्णयकर्ता को समस्या पूरी तरह पता है, सभी विकल्प उसके सामने हैं, हर विकल्प के सभी परिणाम वह जानता है और वह सर्वोत्तम को चुनता है। OpenStax के अनुसार वास्तविकता में जटिल मुद्दों पर यह संभव नहीं, क्योंकि व्यक्ति सभी विकल्पों और उनके सभी परिणामों को पूरी तरह नहीं समझ सकता। पोर्टलैंड स्टेट के नोट्स में निर्णय-सिद्धांत को ऐसे ही "तर्कसंगत निर्णय के तरीक़े" के रूप में रखा गया है, जहाँ परिणाम पूरी तरह ज्ञात नहीं होते। इसलिए तर्कसंगत मॉडल को एक मानक या कसौटी की तरह समझें: आदर्श क्या है, यह बताता है।

सीमित तर्कसंगतता का मॉडल (Bounded rationality) इस आदर्श की सीमा बताता है। OpenStax के अनुसार इसका अर्थ है कि जटिल मुद्दों पर निर्णयकर्ता पूर्णतः तर्कसंगत नहीं हो सकता, क्योंकि मस्तिष्क की सूचना-संसाधन की सीमा है और अक्सर जानकारी या समय भी अधूरा रहता है। यह विचार हर्बर्ट साइमन से जुड़ा है, जिन्हें 1978 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार "आर्थिक संगठनों के भीतर निर्णय-प्रक्रिया पर अग्रणी शोध" के लिए मिला। इस मॉडल में निर्णयकर्ता सर्वोत्तम की खोज की जगह संतोषजनक हल चुनता है, जिसे सैटिसफ़ाइसिंग (Satisficing) कहा गया है। विस्तार "निर्णय-प्रक्रिया" पृष्ठ और लोक प्रशासन के "प्रशासनिक व्यवहार" पृष्ठ में है।

सहज-बोध पर आधारित मॉडल (Intuitive model) में निर्णय अनुभव और अंतर्ज्ञान से जल्दी लिया जाता है। OpenStax के अनुसार अनुभव से प्रबंधक नियमित निर्णयों के लिए अनुमान-विधियाँ (Heuristics) बना लेते हैं और यह भी समझते हैं कि अनियमित निर्णय से पहले कौन-सी अतिरिक्त जानकारी चाहिए। OpenStax मस्तिष्क की दो प्रणालियों की भी बात करती है: तेज़, प्रतिक्रियात्मक (reactive) प्रणाली और धीमी, विश्लेषणात्मक (reflective) प्रणाली। यह द्वैत एक ही पाठ्यपुस्तक से आता है, इसलिए परीक्षा-उत्तर में इसे "एक दृष्टिकोण के अनुसार" कहकर लिखें। सहज-बोध की ताक़त गति है और कमज़ोरी पूर्वाग्रह: परिचित या अपनी पुरानी धारणा के अनुकूल बात की ओर झुकाव, जैसा बाधाओं के खंड में OpenStax बताती है।

सार यह है: तर्कसंगत मॉडल लक्ष्य दिखाता है, सीमित तर्कसंगतता यथार्थ दिखाती है और सहज-बोध गति देता है। अच्छा प्रशासक दोनों के बीच संतुलन बनाता है: जहाँ निर्णय बड़ा और अपरिवर्तनीय हो वहाँ पूरी प्रक्रिया और गणना, जहाँ निर्णय छोटा और नियमित हो वहाँ अनुभव और अनुमान-विधि (विश्लेषण)।

किस परिस्थिति में निर्णय: जोखिम और अनिश्चितता

तकनीक चुनने से पहले यह देखना ज़रूरी है कि संभावित परिस्थितियों (States of nature) की संभावनाएँ पता हैं या नहीं। पोर्टलैंड स्टेट के नोट्स के अनुसार परिस्थितियों की संभाव्यता-वितरण पता होना ही "जोखिम" को "अनिश्चितता" से अलग करता है। संभावनाएँ पता न हों तो मैक्सिमैक्स, मैक्सिमिन और रिग्रेट जैसे मापदंड काम आते हैं; संभावनाएँ आँकी जा सकती हों (वस्तुनिष्ठ या व्यक्तिनिष्ठ) तो अपेक्षित-मूल्य (Expected value) का मापदंड लगता है।

यहाँ तीन शब्द जान लें। क्रिया (Action) वे विकल्प हैं जो निर्णयकर्ता के हाथ में हैं, जैसे छोटा, मध्यम या बड़ा अनुबंध। परिस्थिति (State of nature) वह बाहरी स्थिति है जो उसके नियंत्रण में नहीं है, जैसे सामान्य या तेज़ गर्मी। पेऑफ़ (Payoff) वह परिणाम है जो किसी क्रिया और परिस्थिति के मेल से मिलता है। Richland College के नोट्स में भी क्रिया और परिस्थिति का यही भेद है: क्रिया पर नियंत्रण है, परिस्थिति पर नहीं।

पेऑफ़ मैट्रिक्स और उसके चार मापदंड

पेऑफ़ मैट्रिक्स एक तालिका है जिसमें पंक्तियों में क्रियाएँ (या स्तंभों में, सुविधा के अनुसार) और दूसरी ओर परिस्थितियाँ रखी जाती हैं और हर खाने में उस मेल का पेऑफ़ लिखा जाता है। निर्णय से पहले यह तालिका सभी विकल्पों को एक नज़र में तुलनीय बना देती है।

Richland College के नोट्स चार मापदंड बताते हैं। पहला, अपेक्षित मूल्य (Expected value, "यथार्थवादी")। हर क्रिया का पेऑफ़ उसकी संभावना से गुणा करके जोड़ा जाता है और सबसे अधिक अपेक्षित मूल्य वाली क्रिया चुनी जाती है। यह चारों में अकेला है जो परिस्थितियों की संभावनाओं का उपयोग करता है।

दूसरा, मैक्सिमैक्स (Maximax, "आशावादी")। हर क्रिया का सबसे अच्छा संभव पेऑफ़ देखा जाता है और उनमें सबसे बड़ा चुना जाता है, यानी "सर्वश्रेष्ठों में सर्वश्रेष्ठ"। नोट्स इसे लॉटरी खेलने वाले की सोच बताते हैं, जो बड़ा लाभ देखता है और संभावनाओं की अनदेखी करता है। तीसरा, मैक्सिमिन (Maximin, "निराशावादी")। हर क्रिया का सबसे बुरा पेऑफ़ देखा जाता है और उनमें सबसे बड़ा चुना जाता है, यानी "सबसे बुरों में सबसे अच्छा"। नोट्स की उपमा है: जो व्यक्ति शेयर बाज़ार में नुक़सान के डर से बचत-खाते में पैसा रखे।

चौथा, मिनिमैक्स रिग्रेट (Minimax regret, "अवसर-हानि")। इसमें पहले रिग्रेट तालिका बनती है: हर परिस्थिति के स्तंभ में सबसे अच्छे पेऑफ़ से हर पेऑफ़ को घटाया जाता है, यानी "यदि मुझे परिस्थिति पहले से पता होती तो मैं कितना और पा सकता था।" फिर हर क्रिया का सबसे बड़ा रिग्रेट देखा जाता है और उनमें सबसे छोटा चुना जाता है। Baltimore विश्वविद्यालय के नोट्स इसे उन निर्णयकर्ताओं के लिए बताते हैं जो पछतावे से बचना चाहते हैं।

नामकरण की सावधानी: Richland के नोट्स "मैक्सिमिन" को निराशावादी मापदंड और "मिनिमैक्स" को अवसर-हानि वाला मापदंड कहते हैं, जबकि पोर्टलैंड स्टेट के नोट्स अलग-अलग शब्दों में "मिनिमैक्स" को निराशावादी (न्यूनतम में अधिकतम) मापदंड और "मिनिमैक्स रिग्रेट" को अलग मापदंड कहते हैं। इसलिए उत्तर में नाम के साथ उसका काम भी लिखिए, जैसे "मैक्सिमिन यानी सबसे बुरे पेऑफ़ में से सबसे अच्छा", ताकि शब्दावली के भेद से अंक न कटें।

व्यवहार में चारों मापदंड अक्सर अलग-अलग उत्तर देते हैं; इसलिए निर्णयकर्ता को पहले अपना दृष्टिकोण तय करना पड़ता है: क्या वह जोखिम लेने वाला है, सतर्क है, पछतावे से बचना चाहता है, या संभावनाओं पर भरोसा करता है। नीचे के हल उदाहरण में यही दिखाया गया है।

चार मापदंड: एक नज़र में

मापदंडनिर्णयकर्ता का स्वभावक्या देखा जाता हैचयन
अपेक्षित मूल्य (Expected value)यथार्थवादीहर क्रिया का संभाव्यता-भारित औसत पेऑफ़सबसे बड़ा अपेक्षित मूल्य
मैक्सिमैक्स (Maximax)आशावादीहर क्रिया का सबसे अच्छा पेऑफ़उनमें सबसे बड़ा
मैक्सिमिन (Maximin)निराशावादीहर क्रिया का सबसे बुरा पेऑफ़उनमें सबसे बड़ा
मिनिमैक्स रिग्रेट (Minimax regret)पछतावे से बचने वालारिग्रेट तालिका में हर क्रिया का सबसे बड़ा रिग्रेटउनमें सबसे छोटा

स्रोत-आधार: Richland College और Baltimore विश्वविद्यालय के नोट्स; पोर्टलैंड स्टेट के नोट्स में इन्हीं मापदंडों के नाम कुछ अलग हैं

निर्णय-वृक्ष (Decision tree)

जब निर्णय कई चरणों में हो और बीच में अनिश्चित घटनाएँ आती हों तो पेऑफ़ तालिका कम पड़ती है। तब निर्णय-वृक्ष काम आता है। The Open University की पाठ्य-सामग्री के अनुसार निर्णय-वृक्ष जटिल, बहु-चरणीय और अनिश्चित परिणामों वाले निर्णय को दृश्य रूप में तोड़ने का साधन है। उसमें वर्ग (निर्णय-बिंदु) वह जगह है जहाँ चुनाव निर्णयकर्ता के हाथ में है, और वृत्त (संयोग-बिंदु) वह जगह है जहाँ कोई घटना नियंत्रण से बाहर घटती है। शाखाएँ अलग-अलग रास्तों या परिणामों को दिखाती हैं।

वृक्ष का मूल्यांकन पीछे की ओर चलकर होता है, जिसे रोलबैक या "पीछे से जोड़ना" कहा जाता है। Open University और Baltimore विश्वविद्यालय, दोनों के अनुसार गणना दाएँ (अंतिम परिणाम) से बाएँ (पहले निर्णय) की ओर होती है। संयोग-बिंदु पर संभावना और परिणाम को गुणा करके अपेक्षित मूल्य निकाला जाता है; निर्णय-बिंदु पर सबसे अधिक मूल्य वाली शाखा चुनी जाती है। यही प्रक्रिया बाईं ओर पहले निर्णय तक चलती है और बताती है कि कौन-सी रणनीति सबसे अधिक अपेक्षित मूल्य देती है।

निर्णय-वृक्ष का लाभ यह है कि पूरा क्रम एक नज़र में दिखता है और बीच के निर्णयों, जैसे "पायलट के बाद आगे बढ़ें या रुकें", का मूल्य भी जुड़ जाता है। इसकी सीमा यह है कि संभावनाएँ और परिणाम अनुमान पर टिके हैं (विश्लेषण)। ग़लत अनुमान से सटीक दिखने वाली गणना भी भ्रामक हो सकती है। नीचे का कार्य-उदाहरण इसी "पायलट करें या सीधे लागू करें" प्रश्न पर है।

ब्रेनस्टॉर्मिंग: अधिक से अधिक विकल्प जुटाना

ब्रेनस्टॉर्मिंग समूह में विचार जुटाने की तकनीक है। Regent विश्वविद्यालय की सामग्री इसका संबंध ऐलेक्स ऑस्बॉर्न (Alex Osborn) से जोड़ती है, और Berkeley की एक पुस्तिका के अनुसार वे विज्ञापन एजेंसी BBDO के "O" थे और "brainstorming" शब्द उन्होंने गढ़ा। शुरुआत के वर्ष पर स्रोतों में मतभेद है (1939 और 1953 दोनों मिलते हैं), इसलिए परीक्षा में वर्ष लिखना ज़रूरी न हो तो न लिखें।

Berkeley की पुस्तिका के अनुसार इस चरण के मुख्य नियम हैं: निर्णय को स्थगित रखना (किसी विचार को तुरंत अच्छा या बुरा न कहना), अधिक संख्या में विचार लाना, असामान्य या अटपटे विचारों का भी स्वागत और दूसरों के विचारों पर आगे निर्माण करना। यह भी कहा गया है कि हर योगदान को बिना संपादन के दर्ज किया जाए। मूल्यांकन और छँटाई बाद के चरण में होती है।

निर्णय-प्रक्रिया से जोड़ें तो ब्रेनस्टॉर्मिंग चरण 2 (विकल्प बनाना) की तकनीक है। OpenStax भी कहती है कि अधिक विकल्प बनाने से अच्छे निर्णय की संभावना बढ़ती है और दूसरों से बात करना और रचनात्मक होना इसमें मदद करता है। सरकारी उदाहरण (विश्लेषण): किसी ज़िले में जल-संरक्षण के नए उपायों पर अधिकारियों, स्थानीय प्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ खुली विचार-बैठक। सीमा: मुखर लोग बैठक पर हावी हो सकते हैं और वरिष्ठ की उपस्थिति में अन्य लोग खुलकर नहीं बोलते (विश्लेषण)।

डेल्फ़ाई तकनीक: नामहीन विशेषज्ञ-राय और बार-बार प्रतिपुष्टि

RAND Corporation के अनुसार डेल्फ़ाई विधि 1950 के दशक के आरंभ में RAND में विशेषज्ञों की विश्वसनीय सर्वसम्मति पाने के लिए विकसित हुई। डेल्फ़ाई नाम से इसका पहला सहकर्मी-समीक्षित शोध-लेख 1963 में आया: Dalkey और Helmer का "An experimental application of the Delphi method to the use of experts", जो Management Science (खंड 9, अंक 3, पृ. 458-467) में छपा।

RAND इसके चार आवश्यक घटक गिनाता है: गोपनीयता या नामहीनता (anonymity), बार-बार दोहराया जाने वाला डेटा-संग्रह, प्रतिभागियों को प्रतिपुष्टि, और समूह-उत्तर का सांख्यिकीय निर्धारण। प्रक्रिया यह है कि विशेषज्ञों के पैनल से कई दौरों में प्रश्न पूछे जाते हैं। वे गोपनीय रूप से उत्तर देते हैं, फिर उन्हें दिखाया जाता है कि उनके उत्तर बाक़ियों से कैसे मिलते हैं, और वे अगले दौर में अपने उत्तर बदल सकते हैं। यह तब तक चलता है जब तक सर्वसम्मति न बन जाए या पूर्व-निर्धारित दौर पूरे न हो जाएँ।

RAND के अनुसार इस तरह मिली सर्वसम्मति एक अकेले विशेषज्ञ की राय से अधिक विश्वसनीय और वस्तुनिष्ठ मानी जाती है, क्योंकि गोपनीयता से समूह-सोच और प्रभावशाली व्यक्तियों के दबदबे का असर घटता है। यही डेल्फ़ाई और ब्रेनस्टॉर्मिंग का मुख्य अंतर है: ब्रेनस्टॉर्मिंग में लोग आमने-सामने खुले विचार रखते हैं और उद्देश्य अधिक विकल्प जुटाना है; डेल्फ़ाई में विशेषज्ञ अलग-अलग और गुमनाम रहकर राय देते हैं और उद्देश्य राय का अभिसरण या सर्वसम्मति है।

सरकारी उदाहरण (विश्लेषण): किसी राज्य की दीर्घकालिक जल-नीति या स्वास्थ्य-ढाँचे की योजना पर अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों से कई दौर में राय लेना। यह तुलना सैद्धांतिक है।

कब कौन-सी तकनीक: उत्तर में तुलनात्मक दृष्टि

यह खंड विश्लेषण है। तकनीक की चुनाव-कसौटी निर्णय की प्रकृति है। यदि समस्या यह है कि "विकल्प ही कम सूझ रहे हैं", तो ब्रेनस्टॉर्मिंग। यदि "भविष्य अनिश्चित है और विशेषज्ञ राय ही आधार है", तो डेल्फ़ाई। यदि "विकल्प और परिस्थितियाँ स्पष्ट हैं, नतीजे आँके जा सकते हैं", तो पेऑफ़ मैट्रिक्स। यदि "निर्णय कई चरणों का है और बीच में अनिश्चित घटनाएँ हैं", तो निर्णय-वृक्ष।

इसी तरह मॉडल से तकनीक जुड़ती है: तर्कसंगत मॉडल की भावना पेऑफ़ मैट्रिक्स और निर्णय-वृक्ष में दिखती है, क्योंकि वहाँ विकल्पों का सारा मूल्य गिना जाता है; सीमित तर्कसंगतता की स्वीकृति इसमें है कि संभावनाएँ और पेऑफ़ अनुमान भर हैं; और सहज-बोध वहाँ आता है जहाँ अंत में अनुभव से अनुमान तय करना पड़ता है।

प्रक्रिया से जोड़ें तो ब्रेनस्टॉर्मिंग और डेल्फ़ाई चरण 2 और 3 (विकल्प और विश्लेषण) में अधिक काम आती हैं, जबकि पेऑफ़ मैट्रिक्स और निर्णय-वृक्ष चरण 3 और 4 (विश्लेषण और चयन) में। इसे "निर्णय-प्रक्रिया" पृष्ठ के छह चरणों से मिलाकर पढ़ें; और नियंत्रण तथा MBO के लक्ष्य इसी निर्णय को परखने का मापदंड देते हैं।

निर्णय: मॉडल और तकनीकों का नक्शा

निर्णय: तकनीक और मॉडल

मॉडल

सोचने का ढंग

  • तर्कसंगत: आदर्श, पूरी जानकारी
  • सीमित तर्कसंगत: साइमन, संतोषजनक हल
  • सहज-बोध: अनुभव, गति, पूर्वाग्रह का जोखिम

पेऑफ़ मैट्रिक्स

क्रिया × परिस्थिति

  • अपेक्षित मूल्य (संभावनाएँ ज्ञात)
  • मैक्सिमैक्स (आशावादी)
  • मैक्सिमिन (निराशावादी)
  • मिनिमैक्स रिग्रेट (पछतावे से बचाव)

निर्णय-वृक्ष

बहु-चरणीय, अनिश्चित

  • वर्ग: निर्णय-बिंदु
  • वृत्त: संयोग-बिंदु
  • पीछे से जोड़ना (रोलबैक)

ब्रेनस्टॉर्मिंग

अधिक विकल्प, खुली चर्चा

  • निर्णय स्थगित
  • संख्या
  • असामान्य विचार
  • विचारों पर निर्माण

डेल्फ़ाई

RAND, 1950 के दशक का आरंभ

  • गोपनीयता
  • कई दौर
  • प्रतिपुष्टि
  • सर्वसम्मति

मुख्य तथ्य

सीमित तर्कसंगतता
जटिल मुद्दों पर पूर्ण तर्कसंगतता संभव नहीं (OpenStax)
साइमन: नोबेल
1978, अर्थशास्त्र; आर्थिक संगठनों के भीतर निर्णय-प्रक्रिया पर शोध के लिए
संतोषजनक चयन (Satisficing)
पहला स्वीकार्य हल चुनना (OpenStax)
चार मापदंड
अपेक्षित मूल्य, मैक्सिमैक्स, मैक्सिमिन, मिनिमैक्स रिग्रेट (Richland College)
अपेक्षित मूल्य
चारों में एकमात्र जो संभावनाओं का उपयोग करता है (Richland College)
जोखिम बनाम अनिश्चितता
परिस्थितियों का संभाव्यता-वितरण पता होना जोखिम को अनिश्चितता से अलग करता है (पोर्टलैंड स्टेट)
निर्णय-वृक्ष
वर्ग = निर्णय-बिंदु, वृत्त = संयोग-बिंदु; गणना दाएँ से बाएँ (Open University, Baltimore)
ब्रेनस्टॉर्मिंग
ऐलेक्स ऑस्बॉर्न से संबद्ध; विज्ञापन एजेंसी BBDO के "O"; शुरुआत के वर्ष पर स्रोत अलग
डेल्फ़ाई: उद्भव
1950 के दशक का आरंभ, RAND में (RAND)
डेल्फ़ाई: पहला नामित शोध-लेख
1963, Dalkey और Helmer, Management Science 9(3), 458-467
डेल्फ़ाई के घटक
गोपनीयता, दोहराया डेटा-संग्रह, प्रतिपुष्टि, सांख्यिकीय निर्धारण (RAND)
सिलेबस की पंक्ति
RPSC सिलेबस, 09-01-2026, पेपर I, इकाई III (ख)

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • मैक्सिमिन और मिनिमैक्स के नाम बिना काम बताए लिख देना। स्रोतों में शब्दावली अलग मिलती है, इसलिए नाम के साथ उसका अर्थ लिखिए।
  • रिग्रेट तालिका बनाते समय पेऑफ़ को सीधे उलट देना। रिग्रेट = उस परिस्थिति के सर्वश्रेष्ठ पेऑफ़ में से हर पेऑफ़ को घटाना।
  • अपेक्षित मूल्य में संभावनाओं का योग 1 न होना। हल करने से पहले जोड़कर जाँच लीजिए।
  • ब्रेनस्टॉर्मिंग और डेल्फ़ाई को एक ही बताना। एक में खुली आमने-सामने चर्चा, दूसरी में गोपनीय, बहु-दौर, विशेषज्ञ-राय।
  • निर्णय-वृक्ष को आगे से हल करना। गणना हमेशा पीछे (दाएँ से बाएँ) से होती है।