नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)
संविधान के अनुच्छेद 148–151, DPC अधिनियम 1971, लेखा-परीक्षा रिपोर्ट से PAC तक का रास्ता, सीमाएँ और सुधार — उत्तर-लेखन के ढाँचे के साथ।
- अनुच्छेद 148–151
- DPC अधिनियम 1971
- लोक लेखा समिति
सिलेबस में
संघ सरकार और प्रशासनिक संस्थाएँ। संस्थाएँ: UPSC, भारत निर्वाचन आयोग, C&AG, वित्त आयोग, लोकपाल, नीति आयोग। (RPSC सिलेबस, 09-01-2026, पेपर III, इकाई II)
परिचय और संवैधानिक आधार
भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) वह स्वतंत्र संवैधानिक अधिकारी है जो केंद्र और राज्य सरकारों के पैसे के ख़र्च और आमदनी की जाँच करता है। यह जाँच इस सवाल पर टिकी होती है कि पैसा विधायिका की मंज़ूरी के मुताबिक़, क़ानून के दायरे में और समझदारी से ख़र्च हुआ या नहीं। इसे प्रायः 'लोक-धन का संरक्षक' (guardian of the public purse) कहा जाता है।
संविधान के भाग V के अध्याय V में अनुच्छेद 148 से 151 इस पद की नींव रखते हैं। अनुच्छेद 148 पद बनाता है और स्वतंत्रता की गारंटियाँ देता है; अनुच्छेद 149 कहता है कि कर्तव्य व शक्तियाँ संसद की बनाई विधि से तय होंगी (यही विधि 1971 का DPC अधिनियम है); अनुच्छेद 150 के अनुसार संघ व राज्यों के लेखे उस रूप में रखे जाते हैं जो राष्ट्रपति CAG की सलाह पर तय करे; अनुच्छेद 151 रिपोर्ट के रास्ते को बताता है। इनके अलावा अनुच्छेद 279 के तहत करों की 'शुद्ध आय' का प्रमाणपत्र भी CAG देता है, और वह प्रमाणपत्र अंतिम माना जाता है।
संवैधानिक प्रावधान एक नज़र में
| अनुच्छेद | क्या कहता है | याद रखें |
|---|---|---|
| 148 | पद का सृजन; राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति; शपथ; वेतन-सेवा शर्तें संसद तय करे पर नियुक्ति के बाद नुक़सान में न बदलें; पद के बाद अन्य सरकारी पद नहीं; ख़र्च संचित निधि पर भारित | स्वतंत्रता की गारंटी |
| 149 | कर्तव्य व शक्तियाँ संसद की विधि से; (DPC अधिनियम 1971) | कार्य-क्षेत्र |
| 150 | संघ व राज्यों के लेखों का रूप राष्ट्रपति CAG की सलाह पर तय करे | लेखा-स्वरूप |
| 151 | संघ की रिपोर्ट राष्ट्रपति को, राज्य की राज्यपाल को; वे सदन/विधान-मंडल में रखवाते हैं | रिपोर्ट का मार्ग |
| 279(1) | करों की शुद्ध आय का निर्धारण व प्रमाणन; प्रमाणपत्र अंतिम | वित्त आयोग/राजस्व-बँटवारे का आधार |
नियुक्ति, कार्यकाल और हटाना
नियुक्ति: राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुहर वाले वारंट से CAG को नियुक्त करता है। पद सँभालने से पहले राष्ट्रपति के समक्ष तीसरी अनुसूची में दिए गए प्रारूप के अनुसार शपथ या प्रतिज्ञान लेना होता है, जिसमें वह संविधान के प्रति निष्ठा और बिना भय या पक्षपात के कर्तव्य निभाने की शपथ लेता है।
कार्यकाल: संविधान में अवधि नहीं दी गई; DPC अधिनियम 1971 की धारा 4 के अनुसार पद ग्रहण से छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो। वेतन धारा 3 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के बराबर है।
हटाना: अनुच्छेद 148(1) कहता है कि उसे उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिन पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को। अर्थात अनुच्छेद 124(4) की प्रक्रिया: प्रत्येक सदन अपनी कुल सदस्यता के बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से समावेदन पारित करे, तब राष्ट्रपति आदेश दे; आधार केवल सिद्ध कदाचार या अक्षमता।
स्वतंत्रता के रक्षा-कवच: (क) नियुक्ति के बाद वेतन, पेंशन, छुट्टी या सेवानिवृत्ति-आयु उसके नुक़सान में नहीं बदल सकती; (ख) पद छोड़ने पर केंद्र या किसी राज्य के अधीन कोई और पद नहीं ले सकता, ताकि सेवाकाल में सरकार को ख़ुश करने का प्रलोभन न रहे; (ग) कार्यालय का सारा ख़र्च भारत की संचित निधि पर भारित है, इसलिए संसद के वार्षिक मतदान पर निर्भर नहीं। आप चाहें तो इन्हें तीन शब्दों में याद रखें: 'वेतन-सुरक्षा, पद-बंदी, निधि-भार'।
कर्तव्य और शक्तियाँ: DPC अधिनियम 1971
DPC अधिनियम 1971 (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कर्तव्य, शक्तियाँ और सेवा की शर्तें) अधिनियम) CAG के काम को ठोस रूप देता है। मुख्य प्रावधान नीचे हैं।
| धारा | विषय |
|---|---|
| धारा 13 | संघ, राज्यों व संघ राज्य-क्षेत्रों की संचित निधि से होने वाले सभी व्यय का अंकेक्षण; जाँच कि रक़म उसी काम के लिए वैधानिक रूप से उपलब्ध थी जिसमें लगी; आकस्मिकता निधि व लोक लेखा के लेन-देन |
| धारा 14 | अनुदान या ऋण से पर्याप्त वित्तपोषित निकाय का अंकेक्षण (न्यूनतम 25 लाख रुपये और कुल व्यय का 75 प्रतिशत) |
| धारा 16 | संचित निधि में आने वाली सभी प्राप्तियों (राजस्व) का अंकेक्षण |
| धारा 17 | सरकारी कार्यालयों के भंडार और स्टॉक के लेखे |
| धारा 18 | कार्यालयों का निरीक्षण, दस्तावेज़ माँगना, अधिकारियों से पूछताछ की शक्ति |
| धारा 19 | सरकारी कंपनियों व निगमों का अंकेक्षण संबंधित क़ानून के अनुसार |
| धारा 23 | अंकेक्षण के 'दायरे और विस्तार' के लिए विनियम बनाने की शक्ति |
CAG तीन तरह के अंकेक्षण प्रमुख रूप से करता है: अनुपालन (नियम-क़ानून का पालन हुआ या नहीं), वित्तीय (लेखे सही तस्वीर देते हैं या नहीं) और निष्पादन (कार्यक्रम ने मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता के पैमाने पर कैसा काम किया)। 1976 से संघ स्तर पर लेखा बनाने की ज़िम्मेदारी विभागीय लेखा संगठनों को दी गई और CAG मुख्यतः अंकेक्षक रह गया; राज्यों में महालेखाकार कार्यालयों का लेखा और अंकेक्षण में विभाजन मार्च 1984 में हुआ। (स्रोत: CAG अंकेक्षण मानक 2017)
'वैधानिक उपलब्धता' और 'औचित्य' का फ़र्क़ समझना उत्तर में काम आता है। धारा 13 की कसौटी यह देखती है कि जो रक़म ख़र्च हुई, वह उसी काम के लिए क़ानूनी रूप से उपलब्ध थी या नहीं जिसमें लगाई गई, यानी विनियोग की सीमा और नियम का पालन। निष्पादन अंकेक्षण आगे जाकर पूछता है कि कार्यक्रम या संस्था ने मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता के सिद्धांतों पर कैसा काम किया, और उपयुक्त मानदंड से तुलना करके अंतर बताता है और सुधार के सुझाव देता है (CAG के अंकेक्षण मानक 2017, खंड 1.3.2)। इस तरह अनुपालन-अंकेक्षण 'क्या नियम के अनुसार हुआ' का उत्तर देता है और निष्पादन-अंकेक्षण 'क्या अच्छे से हुआ' का।
वित्तीय अंकेक्षण की कसौटी अलग है: वहाँ देखा जाता है कि किसी इकाई की वित्तीय जानकारी लागू वित्तीय-रिपोर्टिंग और नियामकीय ढाँचे के अनुसार प्रस्तुत है या नहीं, और उसमें धोखाधड़ी या त्रुटि से कोई बड़ी ग़लत प्रस्तुति तो नहीं। आवश्यकता होने पर एक ही अंकेक्षण में वित्तीय, अनुपालन और निष्पादन, तीनों पहलू साथ भी लिए जा सकते हैं। उत्तर में इन तीनों को उदाहरण सहित अलग-अलग लिखने से स्पष्टता बढ़ती है।
लेखा-परीक्षा रिपोर्ट और लोक लेखा समिति
रिपोर्ट का मार्ग अनुच्छेद 151 से तय है: संघ की रिपोर्ट राष्ट्रपति के पास जाती है और वह उसे संसद के प्रत्येक सदन में रखवाता है; राज्य की रिपोर्ट राज्यपाल के पास जाती है और वह उसे राज्य विधान-मंडल में रखवाता है। उसके बाद लोक लेखा समिति (PAC) इन रिपोर्टों की गहराई से जाँच करती है।
PAC में अधिकतम 22 सदस्य होते हैं: 15 लोकसभा से और अधिकतम 7 राज्यसभा से, जो हर साल आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत से चुने जाते हैं। मंत्री इसके सदस्य नहीं हो सकते। अध्यक्ष को लोकसभा अध्यक्ष नियुक्त करता है और 1967-68 से परंपरा है कि यह पद विपक्ष के सदस्य को मिले। समिति सरकार से स्पष्टीकरण माँगती है, अधिकारियों को बुलाती है और सिफ़ारिशें संसद को भेजती है। इस पूरे काम में CAG समिति का 'मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक' माना जाता है। नतीजा यह कि CAG तथ्य निकालता है और PAC उन पर राजनीतिक जवाबदेही तय करवाती है।
CAG रिपोर्ट का सफ़र
अंकेक्षण
CAG/महालेखाकार कार्यालय
CAG रिपोर्ट
अनुच्छेद 151
राष्ट्रपति / राज्यपाल
रिपोर्ट उन्हें भेजी जाती है
संसद / विधान-मंडल
सदन के समक्ष रखी जाती है
लोक लेखा समिति (PAC)
जाँच, सिफ़ारिशें
सरकार की कार्रवाई
अनुवर्तन
सीमाएँ, आलोचनाएँ और सुधार
सीमाएँ और विश्लेषण: अनुच्छेद 151 के अनुसार CAG की भूमिका रिपोर्ट सौंपने तक है; रिपोर्ट पर आगे की जाँच संसद/विधान-मंडल की समितियाँ करती हैं (हमारा विश्लेषण: उसके पास स्वयं दंड देने या कार्रवाई कराने की शक्ति नहीं मानी जाती)। अंकेक्षण का दायरा अनुच्छेद 149 के अनुसार संसद की बनाई विधि से बँधा है। संघ स्तर पर लेखा-रखरखाव 1976 से उसके हाथ में नहीं है, (हमारा विश्लेषण) इसलिए उसका व्यवहारिक काम मुख्यतः अंकेक्षण रह गया।
आलोचनाएँ (विश्लेषण): रिपोर्ट अक्सर ख़र्च हो चुकने के बाद आती है, इसलिए सुधार देर से होता है; निष्पादन अंकेक्षण में नीति के औचित्य और लेखा-परीक्षक की 'सूझ-बूझ' की सीमा पर बहस होती है; और रिपोर्टों पर कार्रवाई की रिपोर्ट अक्सर देर से पहुँचती है। ये मूल्यांकन हमारे हैं, किसी अधिसूचना का कथन नहीं।
सुधार के सुझाव (विश्लेषण): रिपोर्टों पर कार्रवाई की समय-सीमा तय हो; अंकेक्षण में आँकड़ा-विश्लेषण व रीयल-टाइम निगरानी का उपयोग बढ़े; PAC में अनुवर्तन (follow-up) की व्यवस्था मज़बूत हो; और रिपोर्ट सरल भाषा में सार्वजनिक की जाए।
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद (पद/नियुक्ति)
- 148 (1950 का संविधान)
- कार्यकाल
- 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो (DPC अधिनियम, 1971, धारा 4)
- वेतन
- सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के बराबर (धारा 3)
- अनुदानित निकाय की सीमा
- कम से कम 25 लाख रुपये और कुल व्यय का 75% (धारा 14)
- PAC
- अधिकतम 22 सदस्य: 15 लोकसभा + अधिकतम 7 राज्यसभा; अध्यक्ष परंपरा से विपक्ष का (1967-68 से)
- लेखा और अंकेक्षण का पृथक्करण
- संघ में 1976 से चरणबद्ध; राज्यों में मार्च 1984
- वर्तमान CAG
- के. संजय मूर्ति (पदभार 21 नवंबर 2024)
राजस्थान का पहलू
राजस्थान में राज्य के लेखों की जाँच CAG के राज्य कार्यालय करते हैं। cag.gov.in पर 'Accountant General (Audit-I), Rajasthan' का परिचय बताता है कि यह कार्यालय राज्य के सिविल विभागों का अनुपालन, वित्तीय प्रमाणन और निष्पादन अंकेक्षण करता है, राज्य के वित्त व विनियोग लेखों को प्रमाणित करता है और विधायी समितियों को सहायता देता है। इसी वेबसाइट की रिपोर्ट-सूची में 21 अगस्त 2026 की सूचीबद्ध तिथि के साथ 'State Finances for the year 2024-2025' (रिपोर्ट सं. 5/2026) और जल जीवन मिशन पर निष्पादन अंकेक्षण (रिपोर्ट सं. 4/2026) दर्ज हैं। अनुच्छेद 151(2) के अनुसार ये रिपोर्टें राज्यपाल के माध्यम से विधान-मंडल में रखी जाती हैं। स्रोत: cag.gov.in/राजस्थान पृष्ठ, पहुँच की तिथि 01-10-2026; रिपोर्टों के निष्कर्ष यहाँ जानबूझकर नहीं दिए गए।
अभ्यास प्रश्न (हमारे अपने — PYQ नहीं)
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
CAG को 'लोक-धन का संरक्षक' क्यों कहा जाता है? संक्षेप में बताइए।
आदर्श उत्तर
CAG केंद्र और राज्यों के ख़र्च व आय का स्वतंत्र अंकेक्षण करता है और देखता है कि धन विधायिका की मंज़ूरी व क़ानून के अनुसार लगा या नहीं। उसकी रिपोर्ट अनुच्छेद 151 से संसद या विधान-मंडल तक पहुँचती है, जहाँ PAC जाँच करती है। इस तरह कार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाबदेह रहती है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
CAG की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने वाले संवैधानिक प्रावधान बताइए।
आदर्श उत्तर
अनुच्छेद 148 के अनुसार उसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जैसी रीति से ही हटाया जा सकता है; वेतन, पेंशन व सेवानिवृत्ति-आयु नियुक्ति के बाद नुक़सान में नहीं बदलती; पद छोड़ने पर वह सरकार के अधीन कोई पद नहीं ले सकता; और कार्यालय का ख़र्च संचित निधि पर भारित है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 150 शब्द
भारत में CAG की भूमिका और सीमाओं का विवेचन कीजिए।
आदर्श उत्तर
CAG भारत का सर्वोच्च अंकेक्षण संस्थान है। अनुच्छेद 148 से 151 उसकी नींव हैं और DPC अधिनियम 1971 कर्तव्य तय करता है। धारा 13 व 16 के तहत वह संचित निधि के सारे व्यय व प्राप्तियों का अंकेक्षण करता है, धारा 14 व 19 के तहत अनुदानित निकायों व सरकारी कंपनियों का भी। उसकी रिपोर्ट राष्ट्रपति या राज्यपाल के माध्यम से सदन में रखी जाती है और लोक लेखा समिति उसकी जाँच करती है। अनुच्छेद 279 में करों की शुद्ध आय का उसका प्रमाणपत्र अंतिम है।
सीमाएँ भी हैं। उसकी भूमिका रिपोर्ट सौंपने तक है; उसका दायरा संसद की बनाई विधि से बँधा है; संघ स्तर पर लेखा-रखरखाव 1976 से उसके पास नहीं; और रिपोर्ट व्यय के बाद आती है। सुधार के लिए कार्रवाई की समय-सीमा, तकनीक-आधारित अंकेक्षण और PAC में मज़बूत अनुवर्तन ज़रूरी हैं। संक्षेप में, CAG जवाबदेही की कड़ी है, उसका असर संसद और सरकार की इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है।
उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
शुरुआत में CAG को अनुच्छेद 148 के अंतर्गत स्वतंत्र संवैधानिक अंकेक्षक के रूप में परिभाषित करें और एक पंक्ति में 'लोक-धन का संरक्षक' की भूमिका लिखें।
मुख्य भाग
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 148–151 और 279, DPC अधिनियम 1971
- नियुक्ति, कार्यकाल, हटाना और स्वतंत्रता के रक्षा-कवच
- कर्तव्य: धारा 13, 14, 16, 19; अनुपालन/वित्तीय/निष्पादन अंकेक्षण
- रिपोर्ट से PAC तक की जवाबदेही-श्रृंखला (फ़्लो-चार्ट बनाएँ)
- सीमाएँ और सुधार, दो-दो बिंदु
निष्कर्ष
निष्कर्ष में लिखें कि CAG की प्रभावशीलता रिपोर्ट पर विधायिका और सरकार की कार्रवाई पर निर्भर है; इसलिए अनुवर्तन व पारदर्शिता बढ़ाना ज़रूरी है।
अतिरिक्त मूल्य
- अनुच्छेद 279 का 'अंतिम प्रमाणपत्र' — वित्त आयोग से जोड़ें
- 1976 व 1984 का लेखा-अंकेक्षण पृथक्करण
- राज्य का उदाहरण: महालेखाकार (लेखा-परीक्षा), राजस्थान की रिपोर्टें (तिथि सहित)
एक पन्ने में दोहराव
- अनुच्छेद 148: पद, नियुक्ति (राष्ट्रपति), हटाना (सुप्रीम कोर्ट जज जैसा)
- अनुच्छेद 149: कर्तव्य संसद की विधि से; 150: लेखों का रूप; 151: रिपोर्ट राष्ट्रपति/राज्यपाल को
- अनुच्छेद 279: शुद्ध आय का प्रमाणपत्र अंतिम
- DPC 1971: 6 वर्ष / 65 वर्ष; वेतन = SC जज
- धारा 13 व्यय, 14 अनुदानित निकाय (25 लाख, 75%), 16 प्राप्तियाँ, 19 कंपनियाँ
- PAC: अधिकतम 22 (15+7); अध्यक्ष विपक्ष से (परंपरा)
- लेखा-अंकेक्षण पृथक्करण: संघ 1976, राज्य 1984
- सीमा: भूमिका रिपोर्ट तक; रिपोर्ट व्यय के बाद आती है (विश्लेषण)
याद रखने योग्य शब्द
- लोक-धन का संरक्षक
- अनुच्छेद 148–151
- DPC अधिनियम 1971
- PAC
- अनुच्छेद 279
- संचित निधि