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REET L1+L2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

सृजनशीलता (Creativity) — REET CDP नोट्स

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सृजनशीलता (Creativity) CDP का वह टॉपिक है जिसमें वालस के सृजनात्मक प्रक्रिया मॉडल, गिलफोर्ड के अपसारी चिंतन, जेम्स ड्रीवर के कल्पना-वर्गीकरण और सृजनशील बालकों की विशेषताओं पर सीधे तथा 'कौन-सा कथन गलत है' जैसे उलझाने वाले प्रश्न बनते हैं। REET 2024 में इस टॉपिक से लगातार चार प्रश्न आए, इसलिए अवधारणाएँ रटने की बजाय हर सिद्धांत को उदाहरण सहित समझना ज़रूरी है ताकि परीक्षा में दिए गए भ्रामक विकल्पों में उलझें नहीं।

  • REET 2024 में 4 प्रश्न
  • सभी स्तर (L1 व L2)
  • 8 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Graham Wallas, The Art of Thought (1926) — चार चरण मॉडल

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के चारों प्रश्न सीधे परिभाषा-आधारित नहीं थे — ये अवधारणाओं की गहरी समझ जाँचते हैं: वालस के सृजनात्मक प्रक्रिया मॉडल का पहला चरण और 'यूरेका क्षण' किस अवस्था को कहते हैं, जेम्स ड्रीवर ने कल्पना को किन उप-भागों में बाँटा, और सृजनशीलता की विशेषताओं में से 'कौन-सी नहीं है' जैसे ट्रैप प्रश्न। पैटर्न साफ है — थ्योरी और उसका उल्टा दोनों याद रखना जरूरी है, क्योंकि परीक्षक अक्सर एक सही-सी दिखने वाली परन्तु गलत विशेषता या चरण को विकल्प में डाल देते हैं।

सृजनशीलता का अर्थ

सृजनशीलता (Creativity) वह मानसिक योग्यता है जिसके द्वारा व्यक्ति नई, मौलिक और उपयोगी अवधारणाओं, वस्तुओं या समाधानों को उत्पन्न करता है। यह केवल कला तक सीमित नहीं — विज्ञान, गणित, भाषा और दैनिक समस्या-समाधान में भी सृजनशीलता प्रयोग होती है।

सृजनशीलता को बुद्धि (Intelligence) से पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता, लेकिन दोनों एक-दूसरे के बराबर भी नहीं हैं — उच्च बुद्धि लब्धि (IQ) वाला हर बच्चा उतना ही सृजनशील हो, यह जरूरी नहीं, और यही बात REET में परीक्षित की जा चुकी है कि सृजनशीलता का विद्यालयी उपलब्धि (अंकों) से सीधा संबंध होना भी आवश्यक नहीं।

सृजनशीलता को मापने के लिए मनोवैज्ञानिकों ने कई परीक्षण विकसित किए हैं, जिनमें थॉरेंस टेस्ट्स ऑफ क्रिएटिव थिंकिंग (Torrance Tests of Creative Thinking) सबसे अधिक प्रचलित है। यह परीक्षण मौखिक व चित्रात्मक दोनों रूपों में उपलब्ध है और प्रवाह, लचीलापन, मौलिकता व विस्तार — इन चारों घटकों के आधार पर अंक देता है।

सृजनशीलता क्यों महत्वपूर्ण है — शिक्षक की दृष्टि से

एक भावी शिक्षक के लिए सृजनशीलता को समझना केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि कक्षा में विद्यार्थियों की मौलिक सोच को पहचानने के लिए भी जरूरी है। जो शिक्षक सृजनशीलता के सिद्धांतों से परिचित होता है, वह बच्चे के 'अलग' उत्तर को गलती समझने की बजाय उसकी सोच की प्रक्रिया समझने की कोशिश करता है।

REET के दृष्टिकोण से यह टॉपिक CDP के उन थोड़े हिस्सों में आता है जहाँ केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि सिद्धांत का व्यावहारिक अर्थ भी पूछा जाता है — इसलिए हर अवधारणा को कक्षा के किसी उदाहरण से जोड़कर याद करना सबसे कारगर तरीका है। ध्यान रहे, जेम्स ड्रीवर के अनुसार कल्पना मुख्यतः दो प्रकार की होती है — पुनरुत्पादक व उत्पादक — और उत्पादक कल्पना ही आगे परिणामवादी व सौंदर्यात्मक भेदों में बँटती है।

गिलफोर्ड का अपसारी चिंतन (Divergent Thinking)

घटकअर्थ
प्रवाह (Fluency)किसी समस्या पर अधिक-से-अधिक विचार/विकल्प उत्पन्न करने की क्षमता
लचीलापन (Flexibility)अलग-अलग श्रेणियों/दृष्टिकोणों से सोच पाने की क्षमता
मौलिकता (Originality)अनोखे व असामान्य विचार देने की क्षमता
विस्तार (Elaboration)किसी विचार में बारीक विवरण जोड़कर उसे पूर्ण करना

जे.पी. गिलफोर्ड ने अपसारी चिंतन को सृजनशीलता का केंद्रीय पक्ष माना — यह अभिसारी चिंतन (Convergent thinking, एक सही उत्तर तक पहुँचना) के विपरीत है।[स्रोत 2]

वालस का सृजनात्मक प्रक्रिया मॉडल (1926)

चरणक्या होता है
तैयारी (Preparation)समस्या को समझना, सूचना व तथ्य एकत्र करना — यह पहला चरण है
उद्भवन (Incubation)समस्या को कुछ समय के लिए मन के पीछे छोड़ देना, सचेत प्रयास रुक जाता है
प्रबोधन (Illumination)अचानक हल सूझ जाना — इसी को 'यूरेका क्षण' कहा जाता है
सत्यापन (Verification)प्राप्त हल की जाँच, परिष्करण व व्यावहारिक प्रयोग

ग्राहम वालस ने अपनी पुस्तक 'The Art of Thought' (1926) में सृजनात्मक चिंतन के इन चार चरणों का वर्णन किया।[स्रोत 1]

जेम्स ड्रीवर का कल्पना (Imagination) वर्गीकरण

पुनरुत्पादक कल्पना (Reproductive)
पहले के देखे-सुने अनुभवों को ज्यों-का-त्यों याद कर मन में दोबारा लाना, इसमें कोई नयापन नहीं जुड़ता
उत्पादक/रचनात्मक कल्पना (Productive) → परिणामवादी (Pragmatic)
व्यावहारिक जीवन की समस्याओं को हल करने की दिशा में काम करती है; इसके दो उप-भेद हैं — व्यावहारिक (Practical) व सैद्धान्तिक (Theoretical) कल्पना
उत्पादक/रचनात्मक कल्पना (Productive) → सौंदर्यात्मक (Aesthetic)
सौंदर्य-बोध व भावनात्मक अभिव्यक्ति से जुड़ी है; इसके दो उप-भेद हैं — कलात्मक (Artistic) व अनोखी/काल्पनिक (Fantastic) कल्पना

कक्षा में इसका उपयोग

रणनीतिउदाहरण
खुले (open-ended) प्रश्न पूछना'ईंट के कितने उपयोग हो सकते हैं?' जैसी गतिविधि से बच्चों में अपसारी चिंतन व प्रवाह दोनों बढ़ते हैं
असामान्य उत्तरों को स्वीकारनाबच्चे के अनोखे जवाब को तुरंत गलत कहकर हतोत्साहित न करें, उसे अपने तर्क के साथ समझाने का मौका दें
कला व भाषा को जोड़नाकहानी का नया अंत लिखवाना, चित्रकला में स्वतंत्र विषय देना, कविता/कोलाज बनवाना
जोखिम लेने को प्रोत्साहित करनागलत उत्तर देने के डर को कम करके कक्षा में प्रयोग व नयापन आज़माने का सुरक्षित माहौल बनाना
मूल्यांकन में लचीलापन रखनाकेवल एक 'सही उत्तर' की जगह तर्कसंगत विविध उत्तरों को भी अंक देना, विशेषकर भाषा व कला विषयों में

पूर्ण CDP (शुद्ध शिक्षाशास्त्र) टॉपिक होने के कारण इसका सीधा शैक्षिक-अनुप्रयोग रूप कक्षा-रणनीतियों में दिखता है, न कि किसी विषय-वस्तु की गतिविधि में।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

वालस के चार चरण याद रखने के लिए क्रम बनाएँ — 'तैयारी → उद्भवन → प्रबोधन → सत्यापन' (त-उ-प्र-स)। ध्यान रखें: 'यूरेका' हमेशा प्रबोधन (illumination) से जुड़ा प्रश्न होगा, उद्भवन (incubation) से नहीं — REET में यह भ्रम आम है। इसी तरह गिलफोर्ड के चार घटकों को 'प्र-ल-मौ-वि' (प्रवाह-लचीलापन-मौलिकता-विस्तार) क्रम में याद रखें ताकि उदाहरण देखते ही सही घटक पहचान सकें।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 23

जैम्स ड्रीवर के अनुसार परिणामवादी कल्पना को किस प्रकार की कल्पना में वर्गीकृत किया गया है ?

  1. Aव्यावहारिक और सैद्धांतिक
  2. Bसौंदर्यात्मक और अनोखी
  3. Cकलात्मक और सृजनात्मक
  4. Dसंरचनात्मक और सृजनात्मक

व्याख्या

जेम्स ड्रीवर (James Drever) ने कल्पना को पुनरुत्पादक (reproductive) और उत्पादक/रचनात्मक (productive) में बाँटा है। रचनात्मक कल्पना के दो भेद हैं — परिणामवादी (pragmatic) कल्पना, जिसके उपप्रकार व्यावहारिक (practical) और सैद्धान्तिक (theoretical) हैं; तथा सौंदर्यात्मक (aesthetic) कल्पना, जिसके उपप्रकार कलात्मक और अनोखी/काल्पनिक (fantastic) हैं। अतः परिणामवादी कल्पना के अन्तर्गत व्यावहारिक और सैद्धान्तिक कल्पना आती है।

प्रश्न 18

सृजनात्मक प्रक्रिया में “यूरेका” क्षण किस अवस्था को कहा जाता है ?

  1. Aगर्भाधान की अवस्था
  2. Bपुनरीक्षण की अवस्था
  3. Cप्रबोधन की अवस्था
  4. Dतैयारी की अवस्था

व्याख्या

वालास (Wallas) के सृजनात्मक प्रक्रिया मॉडल की अवस्थाएँ हैं – तैयारी, उद्भवन/गर्भाधान (incubation), प्रबोधन/अंतर्दृष्टि (illumination) और सत्यापन/पुनरीक्षण। प्रबोधन अवस्था में समस्या का हल अचानक सूझ जाता है, इसलिए इसे 'यूरेका' क्षण कहा जाता है।

प्रश्न 23

सृजनात्मक की विशेषताओं में निम्न में से कौन-सी नहीं है ?

  1. Aसृजनात्मकता साहसी और खुली सोच है
  2. Bसृजनात्मकता में अहं की भागीदारी होती है
  3. Cसृजनात्मकता को बुद्धि से पृथक नहीं किया जा सकता है
  4. Dसृजनात्मकता एवं विद्यालयी उपलब्धि परस्पर संबंधित है

व्याख्या

शिक्षा मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में सृजनात्मकता की विशेषताओं के रूप में खुली और साहसी सोच, अहं की भागीदारी (ego involvement) आदि गिनाई जाती हैं। साथ ही यह पढ़ाया जाता है कि ऊँचे विद्यालयी अंक पाने वाला हर विद्यार्थी सृजनशील हो, यह आवश्यक नहीं। इसलिए BSER की अंतिम कुंजी के अनुसार 'सृजनात्मकता एवं विद्यालयी उपलब्धि परस्पर संबंधित है' (D) विशेषता नहीं मानी गई।

प्रश्न 5

रचनात्मकता के विकास में पहला चरण कौन-सा है ?

  1. Aउष्मायन का चरण
  2. Bप्रबोधन का चरण
  3. Cपुनरीक्षण का चरण
  4. Dतैयारी का चरण

व्याख्या

ग्राहम वालास (Wallas) के अनुसार सृजनात्मक प्रक्रिया के चार चरण हैं — तैयारी (Preparation), उष्मायन (Incubation), प्रबोधन/अंतर्दृष्टि (Illumination) और सत्यापन/पुनरीक्षण (Verification)। अतः पहला चरण तैयारी का चरण है, जिसमें समस्या को समझकर जानकारी एकत्र की जाती है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

वालस के अनुसार सृजनात्मक प्रक्रिया का दूसरा चरण कौन-सा है ?

  1. Aउद्भवन (Incubation)
  2. Bतैयारी (Preparation)
  3. Cप्रबोधन (Illumination)
  4. Dसत्यापन (Verification)

व्याख्या

वालस मॉडल का क्रम है: तैयारी → उद्भवन → प्रबोधन → सत्यापन। अतः दूसरा चरण उद्भवन (Incubation) है।

प्रश्न 2

गिलफोर्ड के अपसारी चिंतन में जब व्यक्ति किसी समस्या के लिए अलग-अलग श्रेणियों/दृष्टिकोणों से समाधान सुझाता है, तो यह किस घटक को दर्शाता है ?

  1. Aप्रवाह (Fluency)
  2. Bलचीलापन (Flexibility)
  3. Cमौलिकता (Originality)
  4. Dविस्तार (Elaboration)

व्याख्या

प्रवाह विचारों की संख्या दर्शाता है, जबकि लचीलापन अलग-अलग श्रेणियों से सोचने की क्षमता दर्शाता है। यहाँ 'अलग-अलग दृष्टिकोण' का उल्लेख होने से उत्तर लचीलापन है।

प्रश्न 3

अभिसारी चिंतन (Convergent Thinking) मुख्यतः किससे संबंधित है ?

  1. Aएक ही सही उत्तर तक पहुँचना
  2. Bअनेक संभावित उत्तर खोजना
  3. Cकल्पना का विस्तार करना
  4. Dयादृच्छिक विचार उत्पन्न करना

व्याख्या

अभिसारी चिंतन में व्यक्ति तार्किक रूप से एक निश्चित सही उत्तर तक पहुँचता है, जबकि अपसारी चिंतन में अनेक संभावित उत्तर खोजे जाते हैं।

प्रश्न 4

निम्न में से कौन सृजनशील बालकों की सामान्य विशेषता नहीं है ?

  1. Aजिज्ञासा
  2. Bजोखिम लेने की प्रवृत्ति से बचना
  3. Cखुली एवं साहसी सोच
  4. Dस्वतंत्र चिंतन

व्याख्या

सृजनशील बालक सामान्यतः जोखिम लेने से नहीं डरते, नए व असामान्य विचारों को आज़माते हैं। 'जोखिम से बचना' उनकी विशेषता नहीं है।

प्रश्न 5

कक्षा में सृजनशीलता बढ़ाने के लिए शिक्षक को क्या करना चाहिए ?

  1. Aकेवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित रखना
  2. Bबच्चों के असामान्य उत्तरों को हतोत्साहित करना
  3. Cखुले प्रश्न पूछना और विविध उत्तरों को स्वीकारना
  4. Dहमेशा एक ही निश्चित तरीके से उत्तर देना सिखाना

व्याख्या

खुले प्रश्न बच्चों को अपसारी चिंतन का अवसर देते हैं और विविध उत्तरों को स्वीकारना उनकी सृजनशीलता को प्रोत्साहित करता है।

प्रश्न 6

'एक ईंट के कितने उपयोग बताइए' जैसी गतिविधि कक्षा में मुख्यतः किस उद्देश्य से कराई जाती है ?

  1. Aस्मरण शक्ति जाँचना
  2. Bअपसारी चिंतन एवं सृजनात्मकता को बढ़ावा देना
  3. Cवर्तनी सुधारना
  4. Dअनुशासन सिखाना

व्याख्या

ऐसी गतिविधियाँ बच्चों को एक वस्तु के कई संभावित उपयोग सोचने के लिए प्रेरित करती हैं, जो अपसारी चिंतन व सृजनशीलता को बढ़ावा देती हैं।

प्रश्न 7

थॉरेंस टेस्ट (Torrance Tests of Creative Thinking) का उपयोग मुख्यतः किसके मापन हेतु किया जाता है ?

  1. Aबुद्धि लब्धि
  2. Bव्यक्तित्व
  3. Cसृजनात्मकता
  4. Dस्मृति

व्याख्या

थॉरेंस टेस्ट सृजनात्मक क्षमता (जैसे प्रवाह, लचीलापन, मौलिकता, विस्तार) मापने के लिए प्रयोग होते हैं।

प्रश्न 8

वालस मॉडल में जब व्यक्ति समस्या को कुछ समय के लिए छोड़कर अन्य कार्यों में लग जाता है, तब यह कौन-सी अवस्था है ?

  1. Aतैयारी
  2. Bउद्भवन
  3. Cप्रबोधन
  4. Dसत्यापन

व्याख्या

उद्भवन (Incubation) अवस्था में सचेत प्रयास रुक जाता है और समस्या अवचेतन मन में 'पकती' रहती है।

प्रश्न 9

सृजनशीलता एवं विद्यालयी उपलब्धि के संबंध में निम्न में सही कथन कौन-सा है ?

  1. Aमजबूत विद्यालयी उपलब्धि सृजनशीलता की गारंटी देती है
  2. Bसृजनशीलता एवं विद्यालयी उपलब्धि में सीधा संबंध होना आवश्यक नहीं
  3. Cसृजनशील बालक सदैव कक्षा में अव्वल आते हैं
  4. Dसृजनशीलता का विद्यालयी परीक्षा परिणामों से सीधा विरोध है

व्याख्या

ऊँचे विद्यालयी अंक पाने वाला हर विद्यार्थी सृजनशील हो, यह आवश्यक नहीं — इसलिए इन दोनों में सीधा संबंध मानना गलत है।

प्रश्न 10

सृजनात्मकता में 'अहं की भागीदारी' (Ego-involvement) का क्या अर्थ है ?

  1. Aव्यक्ति अपने कार्य को गहरे व्यक्तिगत जुड़ाव के साथ करता है
  2. Bव्यक्ति दूसरों की आलोचना से बिल्कुल प्रभावित नहीं होता
  3. Cव्यक्ति केवल पुरस्कार के लिए कार्य करता है
  4. Dव्यक्ति समूह में कार्य करना पसंद नहीं करता

व्याख्या

अहं की भागीदारी का अर्थ है कि व्यक्ति अपने सृजनात्मक कार्य को अपने आत्म-सम्मान व पहचान से जोड़कर, गहरी रुचि व लगन से करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

REET में सृजनशीलता (Creativity) से कितने प्रश्न आते हैं?+

यह CDP भाग का हिस्सा है, जिसमें L1 और L2 दोनों में कुल 30 प्रश्न होते हैं। सृजनशीलता से सीधे 1-2 प्रश्न लगभग हर वर्ष आते हैं — REET 2024 में इस टॉपिक से पूरे 4 प्रश्न पूछे गए थे, जो सामान्य से अधिक है।

सृजनशीलता (Creativity) की सरल परिभाषा क्या है?+

नई, मौलिक और उपयोगी अवधारणाओं, वस्तुओं या समाधानों को उत्पन्न करने की मानसिक क्षमता को सृजनशीलता कहते हैं। यह कला, विज्ञान व दैनिक समस्या-समाधान — सभी क्षेत्रों में प्रयोग होती है।

वालस के सृजनात्मक प्रक्रिया मॉडल में 'यूरेका क्षण' किस चरण को कहते हैं?+

प्रबोधन (Illumination) चरण को — जब उद्भवन के बाद समस्या का हल अचानक, बिना सचेत प्रयास के सूझ जाता है।

क्या सृजनशीलता और बुद्धि एक ही चीज़ हैं?+

नहीं। दोनों संबंधित तो हैं पर एक-दूसरे से पृथक नहीं की जा सकतीं, फिर भी बराबर भी नहीं — उच्च बुद्धि लब्धि वाला हर बच्चा उतना ही सृजनशील हो, यह आवश्यक नहीं।

गिलफोर्ड का अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) क्या दर्शाता है?+

एक ही समस्या के लिए अनेक संभावित समाधान सोचने की क्षमता, जिसे प्रवाह, लचीलापन, मौलिकता व विस्तार के आधार पर मापा जाता है और जिसे सृजनशीलता का केंद्रीय पक्ष माना जाता है।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. Graham Wallas, The Art of Thought (1926) — चार चरण मॉडल
  2. J.P. Guilford — Divergent Thinking (अपसारी चिंतन)
  3. Torrance Tests of Creative Thinking

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए