पारिस्थितिकीय उपागम (Ecological Approach)
प्रशासन और उसके माहौल के संबंध का अध्ययन: गॉस के सात तत्त्व, डाहल, रिग्स और हेडी, पेसा का भारतीय-राजस्थानी उदाहरण, सीमाएँ और उत्तर-लेखन।
- गॉस
- रिग्स
- हेडी
- पर्यावरण
- पेसा 1996
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II: "Theories and approaches: Scientific Management, Human Relations, Behavioural, Structural-Functional, Ecological." इस पृष्ठ पर पारिस्थितिकीय उपागम (Ecological Approach) है: गॉस, डाहल, रिग्स और हेडी का योगदान। संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक उपागम का अलग पृष्ठ है।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में इस उपागम पर सीधा प्रश्न नहीं मिला। पर 2013-2024 के पेपरों में 5 अंक के सिद्धांत-आधारित प्रश्न देखे गए (जैसे 2024 में नव लोक प्रबंध के विरोधाभास और उत्तर-आधुनिकतावाद), इसलिए अभ्यास के लिए इसे 50 और 100 शब्दों में तैयार रखें।
- 2024 में रिग्स के तीन रुझानों में तीसरा, "अपारिस्थितिकीय से पारिस्थितिकीय" (non-ecological to ecological) शामिल है। इस पृष्ठ को पढ़कर उस प्रश्न का तीसरा बिंदु गहराई से लिखा जा सकता है।
- यह उपागम उदाहरणों से जीवित होता है। परीक्षक को उत्तर में एक भारतीय या राजस्थानी उदाहरण पसंद आता है: यहाँ अनुसूचित क्षेत्रों की पंचायतों (PESA) का सत्यापित उदाहरण दिया गया है।
पहले सरल भाषा में: एक ही बीज, अलग मिट्टी
एक ही किस्म का बीज थार की रेतीली मिट्टी में बोइए और फिर केरल की नमी भरी मिट्टी में। बीज वही है, पर पौधा अलग निकलेगा, क्योंकि पौधे को मिट्टी, पानी और जलवायु ढालती है और पौधा भी अपने आसपास की मिट्टी को बदलता है। प्रशासन भी ऐसा ही है। एक ही नियम, एक ही विभाग और एक ही पद का नाम, पर मरुस्थलीय ज़िले, आदिवासी इलाक़े और महानगर में वह अलग ढंग से चलता है। (यह समझाने के लिए गढ़ी गई उपमा है।) पारिस्थितिकीय उपागम कहता है: प्रशासन को खाली कमरे में बैठाकर मत समझिए, उसके आसपास के माहौल के साथ समझिए।
परीक्षा के लिए सटीक परिभाषा। पारिस्थितिकी (ecology) जीव और उसके पर्यावरण के संबंध का अध्ययन है। पारिस्थितिकीय उपागम लोक प्रशासन में प्रशासनिक व्यवस्था और उसके पर्यावरण (राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहलुओं) के बीच की अंतःक्रिया का अध्ययन करता है। यह मानकर चलता है कि प्रशासनिक व्यवस्था समाज के अनेक उप-तंत्रों में से एक है: वह माहौल से प्रभावित होती है और उसे प्रभावित भी करती है। (IJSR, 2016, और कोयंबटूर के सरकारी महाविद्यालय की सामग्री)
जॉन गॉस (1947): सात तत्त्व और पहली नींव
लोक प्रशासन में पारिस्थितिकीय (ecology) दृष्टि की शुरुआत करने वालों में जॉन एम. गॉस (John M. Gaus) प्रमुख हैं। उनकी पुस्तक Reflections on Public Administration (यूनिवर्सिटी ऑफ़ अलबामा प्रेस, 1947) का पहला अध्याय "The Ecology of Government" है। उनका सुझाव था कि प्रशासन को नीचे से, ज़मीन से शुरू करके समझें: पहले स्थान (मिट्टी, जलवायु, अवस्थिति), फिर वहाँ रहने वाले लोग (उनकी संख्या, उम्र, ज्ञान), फिर वे भौतिक और सामाजिक तरीक़े जिनसे लोग रोज़ी कमाते हैं। इसी से सरकार के कार्यों के उतार-चढ़ाव की व्याख्या होती है।
गॉस ने ऐसे सात तत्त्वों की सूची रखी, जिन्हें वे शासन के कार्यों की व्याख्या में उपयोगी पाते थे: लोग (people), स्थान (place), भौतिक प्रौद्योगिकी (physical technology), सामाजिक प्रौद्योगिकी (social technology), इच्छाएँ और विचार (wishes and ideas), आपदा (catastrophe) और व्यक्तित्व (personality)। उन्होंने स्वयं कहा कि इसमें मौलिकता का दावा नहीं है और यह सहयोगी प्रयास है; सूची को परखने के लिए अलग-अलग माहौल में अवलोकन होने चाहिए। बहुत से परीक्षार्थी इसे केवल "पर्यावरण" कहकर छोड़ देते हैं; सात नाम लिखना अंक दिला सकता है।
डाहल (Robert A. Dahl) ने भी 1947 में अपने लेख में यही चिंता उठाई कि क्या लोक प्रशासन के सिद्धांत अपने विशेष माहौल से स्वतंत्र हो सकते हैं। उनका तर्क था कि एक देश में सफल प्रशासनिक पद्धति का दूसरे देश के भिन्न सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक वातावरण में सफल होना ज़रूरी नहीं; और कोई राजनीतिक सिद्धांत एक देश से लेकर दूसरे देश में समान सफलता से अपनाया नहीं जा सकता, जैसे अमेरिका की राष्ट्रपति-प्रणाली को फ़्रांस में ज्यों-का-त्यों चलाने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
गॉस के सात तत्त्व और प्रशासन पर उनका असर
| तत्त्व (Gaus) | अर्थ | प्रशासन पर असर: गॉस के उदाहरण या हमारा विश्लेषण |
|---|---|---|
| लोग (People) | जनसंख्या की संख्या, उम्र, वितरण और ज्ञान | गॉस: जब खेत पर बड़े परिवार वाली अर्थव्यवस्था की जगह पैसे वाली अर्थव्यवस्था आई, तो बुज़ुर्गों के लिए पेंशन की माँग अनिवार्य बन गई |
| स्थान (Place) | मिट्टी, जलवायु, अवस्थिति और संसाधन | गॉस: जहाँ संसाधन चुक गए, वहाँ भूमि-मूल्य और कर घटे और स्कूल-सड़क जैसी सेवाओं का स्थानीय वित्तपोषण टूट गया। विश्लेषण: जल-अभाव वाले ज़िले में जल-प्रशासन की प्राथमिकता अलग होती है |
| भौतिक प्रौद्योगिकी (Physical technology) | मशीनें और भौतिक आविष्कार | गॉस: मोटरकार से पक्की सड़कों की सार्वजनिक सेवा बनी और सड़क-प्रशासन, वाहन-चालक लाइसेंस जैसे नियम आए। विश्लेषण: डिजिटल सेवाएँ आज इसी श्रेणी की मिसाल हैं |
| सामाजिक प्रौद्योगिकी (Social technology) | सामाजिक संस्थाओं और युक्तियों का आविष्कार | गॉस: निगम (corporation) की संस्था से बड़े पैमाने के उद्यम संभव हुए और शासन के लिए नए प्रश्न उठे |
| इच्छाएँ और विचार (Wishes and ideas) | लोगों की आकांक्षाएँ, मूल्य और विचार | विश्लेषण: पारदर्शिता और सूचना के अधिकार की जन-माँग ने कार्यालयों की कार्यशैली बदली |
| आपदा (Catastrophe) | युद्ध, महामंदी, अकाल जैसी अचानक घटनाएँ | गॉस: दूरस्थ गाँव में युद्धकालीन माँग के कारण अचानक सार्वजनिक आवास-परियोजना बनी। विश्लेषण: अकाल या बाढ़ राहत-प्रशासन की नई संरचनाएँ खड़ी करवाती है |
| व्यक्तित्व (Personality) | नेताओं और अधिकारियों का व्यक्तिगत प्रभाव | विश्लेषण: एक दृढ़ अधिकारी या नेता संस्था की दिशा बदल सकता है |
सात तत्त्वों की सूची और गॉस के उदाहरण उनकी 1947 की पुस्तक के पहले अध्याय से लिए गए हैं। जहाँ "विश्लेषण" लिखा है, वह समझाने के लिए हमारा निष्कर्ष है।
रिग्स: पारिस्थितिकी को सिद्धांत में बदलना
गॉस और डाहल ने दिशा दिखाई, पर पारिस्थितिकीय उपागम का सबसे बड़ा विद्वान फ़्रेड डब्ल्यू. रिग्स (Fred W. Riggs) को माना जाता है। उनकी पुस्तक The Ecology of Public Administration (1961) ने प्रशासन और उसके बाहरी माहौल की अंतःक्रिया की गतिकी खोली, और Administration in Developing Countries: The Theory of Prismatic Society (1964) में उन्होंने इस सोच को मॉडल में ढाला। विद्वान फ़ेरल हेडी (Ferrel Heady) के अनुसार 1964 की यह पुस्तक तुलनात्मक लोक प्रशासन में अब तक का संभवतः सबसे उल्लेखनीय अकेला योगदान है। (IJSR, 2016)
रिग्स का मूल तर्क यह था कि प्रशासन को माहौल से काटकर नहीं समझा जा सकता। अपने 1964 के अध्याय में वे लिखते हैं कि एक नज़रिया प्रशासनिक प्रक्रिया को ऐसी व्यवस्था मानता है जिसका अपना पर्यावरण है और जिससे वह अंतःक्रिया करती है; दूसरा नज़रिया पूरे समाज को व्यवस्था मानकर प्रशासन को उसका उप-तंत्र देखता है। दोनों में कोई "सही" नहीं, दोनों का अलग उपयोग है। साथ ही उन्होंने ध्यान दिलाया कि नई बाज़ार-व्यवस्था और आधुनिक प्रशासनिक संस्थाओं ने पारंपरिक व्यवस्थाओं को विस्थापित किया है, पर उनकी जगह पूरी तरह ली नहीं है। गाँव में बाज़ार आ गया, फिर भी पुरानी पुनर्वितरण-व्यवस्था की पकड़ बनी रही। यही कारण है कि सबसे अच्छे सिद्धांतों पर किए गए सुधार भी अक्सर वांछित नतीजा नहीं देते।
पेंग (2008) की आलोचनात्मक समीक्षा के अनुसार रिग्स ने यह भी स्वीकारा कि पर्यावरण का प्रशासन पर असर बताना ज़रूरी है, पर उलटा असर भी स्वीकारना चाहिए: व्यक्ति और प्रशासन भी पर्यावरण को बदलते हैं। यानी पारिस्थितिकीय उपागम दो-तरफ़ा संबंध की बात करता है, एकतरफ़ा नियतिवाद की नहीं।
हेडी, और "अपारिस्थितिकीय से पारिस्थितिकीय" की ओर मोड़
हेडी और स्टोक्स (Heady and Stokes) की 1962 की Papers in Comparative Public Administration में तुलनात्मक लोक प्रशासन के अध्ययन में एक बदलाव की बात आई: मुख्यतः अपारिस्थितिकीय अध्ययन से पारिस्थितिकीय आधार वाले अध्ययन की ओर। इसी मोड़ को रिग्स ने अपने तीन रुझानों में से एक कहा। इस रुझान के अनुसार प्रशासनिक संस्थाओं को सांस्कृतिक माहौल से अलग, स्वतंत्र इकाई मानकर देखना ग़लत है; उनकी पूरी संबंध-व्यवस्था, यानी कुल सामाजिक व्यवस्था में उनके आपसी संबंध, देखे जाने चाहिए।
हेडी ने तुलनात्मक लोक प्रशासन के चार संकल्पनात्मक उपागम बताए: संशोधित परंपरागत, विकास-उन्मुख, सामान्य व्यवस्था-मॉडल निर्माण और मध्यम-स्तरीय सिद्धांत। इनमें सामान्य व्यवस्था-मॉडल वाला उपागम पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को उसके पर्यावरण के संदर्भ में देखता है, जो पारिस्थितिकीय सोच के सबसे निकट है (विश्लेषण)। इस विषय के बारे में अधिक तुलनात्मक संदर्भ के लिए तुलनात्मक लोक प्रशासन की विधि वाला पृष्ठ देखें।
अपारिस्थितिकीय बनाम पारिस्थितिकीय दृष्टि
अपारिस्थितिकीय (Non-ecological)
प्रशासन को देखने का ढंगअलग इकाई, जैसे संस्थाएँ सांस्कृतिक परिवेश से अलग हों
अध्ययन की शुरुआतसंगठन-चार्ट, नियम, संस्थागत ढाँचे
निष्कर्ष का दायराएक ही देश के अनुभव पर आधारित नियम सार्वभौमिक मान लिए जाते हैं
सुधार का तरीक़ाऔपचारिक ढाँचा बदलना
पारिस्थितिकीय (Ecological)
प्रशासन को देखने का ढंगपूरे सामाजिक तंत्र का हिस्सा, संबंधों के पूरे ढर्रे के साथ
अध्ययन की शुरुआतसमाज, संस्कृति, राजनीति और अर्थव्यवस्था के साथ प्रशासन का रिश्ता
निष्कर्ष का दायराअलग-अलग देशों की तुलना; यह जाँच कि कौन-सा सिद्धांत किस माहौल में काम करता है
सुधार का तरीक़ामाहौल को समझकर ही ढाँचे और नीति का मेल बिठाना
पहली दो पंक्तियाँ रिग्स के तीसरे रुझान की व्याख्या (कोयंबटूर सामग्री) पर; बाक़ी दो डाहल और रिग्स के विचारों से निकला विश्लेषण।
पर्यावरण और प्रशासन: दो-तरफ़ा संबंध
पर्यावरण
राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक; गॉस के सात तत्त्व
प्रशासनिक व्यवस्था
समाज का उप-तंत्र; माँगें, संसाधन और नियम पाती है
प्रशासन के परिणाम
सेवाएँ, नियम, कार्यक्रम
पर्यावरण में बदलाव
परिणाम से माहौल भी बदलता है, यानी संबंध दो-तरफ़ा है
पारिस्थितिकीय उपागम की सीमाएँ (आलोचना)
| आलोचना | अर्थ |
|---|---|
| पर्यावरण-नियतिवाद का ख़तरा | अगर माना जाए कि केवल पर्यावरण प्रशासनिक व्यवहार तय करता है, तो व्यक्ति और संस्था की भूमिका गुम हो जाती है। रिग्स ने स्वयं उलटे असर को स्वीकारने की बात की। |
| नीति-मूल्यांकन की अनदेखी | पर्यावरण का वर्णन करने पर ज़्यादा ज़ोर रहता है; नीतियों के मूल्यांकन और लक्ष्य-प्राप्ति जैसे प्रशासन के अंतिम सरोकार पीछे छूट जाते हैं। |
| अनुभवजन्य साक्ष्य की कमी | इस नींव पर बने मॉडल अक्सर सहज-बोध और पूर्व-धारणाओं पर टिके माने गए; कुछ विद्वान आँकड़ों से पारिस्थितिक कारकों के परीक्षण की सलाह देते हैं। |
| पश्चिमी पैमाना | मूल्य-भरी शब्दावली और विवर्तित समाज के रूप में पश्चिम को आदर्श मानने पर आलोचना हुई (प्रिज़्मीय मॉडल के संदर्भ में)। |
| अत्यधिक सामान्यीकरण | पर्यावरण के बहुत से कारक होने से यह तय करना कठिन कि कौन-सा कारक कितना निर्णायक है (विश्लेषण)। |
समय-रेखा: पारिस्थितिकीय उपागम
1947
गॉस की Reflections on Public Administration: "The Ecology of Government", सात तत्त्व
1947
डाहल का लेख: क्या सिद्धांत अपने माहौल से स्वतंत्र हो सकते हैं
1961
रिग्स की The Ecology of Public Administration
1962
रिग्स का लेख 'Trends in the Comparative Study of Public Administration' और हेडी-स्टोक्स की Papers in Comparative Public Administration
1964
रिग्स की Administration in Developing Countries: The Theory of Prismatic Society
24 दिसंबर 1996
पेसा अधिनियम: स्थानीय परंपरा के अनुसार पंचायत व्यवस्था का भारतीय उदाहरण
एक नज़र में: पारिस्थितिकीय उपागम
पारिस्थितिकीय उपागम
अर्थ
- प्रशासन और पर्यावरण की अंतःक्रिया
- पर्यावरण: राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक
- प्रशासन समाज का उप-तंत्र
गॉस 1947
- लोग, स्थान
- भौतिक और सामाजिक प्रौद्योगिकी
- इच्छाएँ और विचार
- आपदा, व्यक्तित्व
डाहल 1947
- सिद्धांत माहौल से स्वतंत्र नहीं
- एक देश की पद्धति दूसरे में ज्यों-की-त्यों नहीं
रिग्स
- Ecology of PA (1961)
- प्रिज़्मीय मॉडल (1964)
- दो-तरफ़ा संबंध
भारतीय उदाहरण
- पेसा 1996: धारा 4(a), 4(d)
- राजस्थान: 1999 का अधिनियम; नियम 2011
मुख्य तथ्य
- गॉस की पुस्तक
- Reflections on Public Administration, यूनिवर्सिटी ऑफ़ अलबामा प्रेस, 1947; पहला अध्याय 'The Ecology of Government'
- गॉस के सात तत्त्व
- लोग, स्थान, भौतिक प्रौद्योगिकी, सामाजिक प्रौद्योगिकी, इच्छाएँ और विचार, आपदा, व्यक्तित्व
- रिग्स की पारिस्थितिकीय कृतियाँ
- The Ecology of Public Administration (1961); Administration in Developing Countries (1964)
- रिग्स का तीसरा रुझान
- अपारिस्थितिकीय से पारिस्थितिकीय; हेडी और स्टोक्स (1962) में भी यही मोड़
- पेसा अधिनियम
- अधिनियम 40/1996; 24 दिसंबर 1996; धारा 4(a), 4(d) परंपरा और ग्राम सभा से संबंधित
- राजस्थान के अनुसूचित-क्षेत्र नियम
- राजस्थान पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में उपबंधों का उपांतरण) नियम, 2011; अधिसूचना 01.11.2011
- अंतिम जाँच
- 1 अक्टूबर 2026
राजस्थान का पहलू
राजस्थान सरकार (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग) की 01.11.2011 की अधिसूचना के अनुसार राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्रों के लिए राजस्थान पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में उनके लागू होने के संबंध में उपबंधों का उपांतरण) नियम, 2011 बने। इनमें ग्राम सभा की बैठक कम से कम तिमाही में एक बार हो; बैठक का नोटिस कम से कम सात दिन पहले लगे और गाँव में मुनादी या ध्वनि-विस्तारक से सूचना दी जाए; फ़ैसले यथासंभव आम सहमति से हों और सहमति न बने तो एक सप्ताह बाद या बाद की बैठक में दोबारा चर्चा, फिर भी न बने तो बहुमत से निर्णय; और नशा-नियंत्रण वाले अध्याय में उपस्थित महिला सदस्यों की राय को ग्राम सभा की राय माना जाए (नियम 30)। (राजस्थान सरकार की अधिसूचना से तथ्य मिलान, 1 अक्टूबर 2026।) विश्लेषण: ये व्यवस्थाएँ पारिस्थितिकीय सोच के अनुकूल हैं, क्योंकि निर्णय-प्रक्रिया स्थानीय सामुदायिक परंपरा को ध्यान में रखकर गढ़ी गई है। अनुसूचित क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों या ग्राम सभाओं की वर्तमान संख्या यहाँ जानबूझकर नहीं दी गई है, क्योंकि उसके लिए आधिकारिक अधिसूचना की तारीख़ वाला स्रोत चाहिए।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- पारिस्थितिकीय उपागम को केवल "पर्यावरण का अध्ययन" (प्राकृतिक पर्यावरण) बता देना: यहाँ पर्यावरण का अर्थ राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक माहौल भी है।
- गॉस के सात तत्त्वों में से केवल तीन-चार लिखना या सूची उलट देना: लोग, स्थान, भौतिक प्रौद्योगिकी, सामाजिक प्रौद्योगिकी, इच्छाएँ और विचार, आपदा, व्यक्तित्व।
- गॉस और रिग्स का वर्ष-क्रम उलटना: गॉस 1947 (पहले), रिग्स 1961 और 1964 (बाद में, गॉस के काम को परिष्कृत करने वाले)।
- पर्यावरण को केवल एकतरफ़ा प्रभावकारी बताना: उलटा असर भी लिखें, यानी प्रशासन भी माहौल को बदलता है।
- पारिस्थितिकीय और संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक उपागम को एक ही मान लेना: रिग्स दोनों का प्रयोग करते हैं, पर पारिस्थितिकीय का ज़ोर माहौल पर है, संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक का संरचना और प्रकार्य के रिश्ते पर।
- पेसा और 73वें संशोधन को एक बता देना: पेसा अनुसूचित क्षेत्रों के लिए 24 दिसंबर 1996 का अलग अधिनियम है, जो भाग IX को कुछ उपांतरणों के साथ वहाँ बढ़ाता है।
केस स्टडी: पेसा (PESA) और राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्र
केस स्टडीजब पंचायत व्यवस्था को स्थानीय परंपरा के अनुसार ढाला गया
73वें संशोधन ने सारे देश के लिए एक समान पंचायती राज ढाँचा बनाया। पर अनुसूचित (Fifth Schedule) क्षेत्रों के आदिवासी समुदायों की अपनी परंपराएँ, ग्राम-संरचना और संसाधन-प्रबंध थे, इसलिए उनके लिए अलग क़ानून आया। यह पारिस्थितिकीय सोच का वास्तविक उदाहरण है: माहौल अलग है तो प्रशासनिक संरचना भी अलग।
- 24 दिसंबर 1996
- संसद ने Provisions of the Panchayats (Extension to the Scheduled Areas) Act, 1996 (अधिनियम 40/1996) बनाया, जो संविधान के भाग IX को अनुसूचित क्षेत्रों तक कुछ अपवादों और उपांतरणों के साथ बढ़ाता है।
- धारा 4(a) और 4(b)
- राज्य के पंचायत संबंधी क़ानून रूढ़ि-विधि, सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं तथा सामुदायिक संसाधनों के परंपरागत प्रबंध के अनुरूप होने चाहिए। गाँव सामान्यतः उस बसाहट या बसाहटों के समूह को माना जाएगा जो समुदाय बनाकर परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार अपने काम सँभालता है।
- धारा 4(d)
- हर ग्राम सभा लोगों की परंपराओं और रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक संसाधनों और विवाद-निपटारे के परंपरागत तरीक़े की रक्षा और संरक्षण में सक्षम होगी।
- राजस्थान
- राजस्थान में इसके लिए राजस्थान पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में उनके लागू होने के संबंध में उपबंधों का उपांतरण) अधिनियम, 1999 है, और राज्य सरकार की 01.11.2011 की अधिसूचना से नियम, 2011 बने।
- 2011 के नियमों में परंपरा का स्थान
- ग्राम सभा का मूल कर्तव्य सामुदायिक परंपराओं के अनुरूप शांति और व्यवस्था बनाए रखना है; वह बीस सदस्यों की शांति समिति बना सकती है जिसमें कम से कम 33 प्रतिशत महिलाएँ और कम से कम 50 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के सदस्य हों; वह लघु वन उपज की स्वामी है (शर्तों के साथ); और जन्म, विवाह जैसे सामाजिक अवसरों पर स्थानीय शराब रखने की सीमा तय कर सकती है।
- व्यवहार की कसौटी
- UNDP के 2012 के नीति-पत्र (policy brief) के अनुसार पेसा के नौ राज्यों में डेढ़ दशक का अनुभव निराशाजनक रहा और अपेक्षित बदलाव नहीं ला सका। यानी क़ानून का अनुकूलन काग़ज़ पर होना एक बात है, ज़मीन पर उतरना दूसरी (विश्लेषण)।
सीख
पारिस्थितिकीय उपागम का व्यावहारिक संदेश यह है कि एक ही ढाँचा सब जगह नहीं चल सकता; माहौल के हिसाब से अनुकूलन करना पड़ता है। उत्तर में पेसा का नाम और धारा 4(a) या 4(d) लिखना भारतीय संदर्भ वाला सत्यापित उदाहरण देता है। साथ ही यह जोड़ें कि अनुकूलन तब सार्थक है जब अमल में आए।
कार्य-उदाहरण: पारिस्थितिकीय विश्लेषण कैसे करें (कल्पित, केवल समझाने के लिए)
हल सहित उदाहरणएक काल्पनिक पेयजल योजना क्यों अटकी
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; ज़िला, योजना और ब्योरे वास्तविक नहीं हैं।
- एक सूखाग्रस्त ब्लॉक में नल-जल योजना बनी, पाइप बिछे, पर दो साल बाद भी अधिकांश नल सूखे हैं।
- औपचारिक कारण: ठेकेदार और अभियंता ने काम तय समय में पूरा बताया है।
- 1चरण 1: प्रशासन से बाहर निकलें केवल अभियंता, ठेकेदार और बजट की जाँच के बजाय पूछें कि ब्लॉक का माहौल क्या है: जलस्तर, बिजली, जनसंख्या और उसकी बसाहट, गाँव के सामाजिक समूह।
- 2चरण 2: गॉस की सूची से मिलान करें स्थान (भूजल की गहराई), भौतिक प्रौद्योगिकी (पंप और बिजली की उपलब्धता), लोग (बिखरी ढाणियाँ), सामाजिक प्रौद्योगिकी (जल-उपयोगकर्ता समिति कितनी सक्रिय), इच्छाएँ और विचार (पानी के उपयोग की स्थानीय परंपरा)।
- 3चरण 3: कारण-संबंध खोजें संभव है कि जलस्रोत अपर्याप्त हो और बिजली अनियमित, जबकि रखरखाव के लिए स्थानीय समिति सक्रिय ही नहीं। तब असफलता केवल प्रशासनिक नहीं, पर्यावरणीय भी है।
- 4चरण 4: उलटा असर देखें योजना पुराने जलस्रोतों की सामुदायिक देखभाल को भी कमज़ोर कर सकती है। माहौल प्रशासन को बदलता है और प्रशासन माहौल को।
- 5चरण 5: समाधान माहौल के अनुरूप स्रोत-संरक्षण और जल-संचयन साथ जोड़ें, बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था करें, और स्थानीय उपयोगकर्ता समिति को अधिकार और प्रशिक्षण दें।
निष्कर्ष: इस विश्लेषण में नियम-पुस्तिका और संगठन-चार्ट से आगे बढ़कर असली कारणों तक पहुँचा गया। पारिस्थितिकीय उपागम की शक्ति यही है कि वह सुधार को माहौल से जोड़ता है। (सीमा: यह एक काल्पनिक कसरत है; असल योजना में हर कारक की जाँच आँकड़ों से होगी।)
अभ्यास प्रश्न (हमारे अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
जॉन गॉस के अनुसार प्रशासन को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय तत्त्व कौन-से हैं?
आदर्श उत्तर
गॉस (1947): लोग, स्थान, भौतिक व सामाजिक प्रौद्योगिकी, इच्छाएँ और विचार, आपदा और व्यक्तित्व, ये सात तत्त्व हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
पारिस्थितिकीय उपागम का अर्थ बताते हुए इसका एक भारतीय उदाहरण दीजिए।
आदर्श उत्तर
पारिस्थितिकीय उपागम प्रशासनिक व्यवस्था और उसके राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व आर्थिक पर्यावरण की अंतःक्रिया का अध्ययन है; प्रशासन समाज का उप-तंत्र है। उदाहरण: पेसा 1996 की धारा 4(a) राज्य पंचायत क़ानूनों को आदिवासी रूढ़ि-विधि के अनुरूप रखती है, यानी माहौल के अनुसार संरचना बदलती है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
रिग्स के पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण की विशेषताएँ बताइए।
आदर्श उत्तर
रिग्स ने प्रशासन को समाज के उप-तंत्र के रूप में देखा। उन्होंने The Ecology of Public Administration (1961) और प्रिज़्मीय समाज के सिद्धांत (1964) में दिखाया कि पर्यावरण और प्रशासन में दो-तरफ़ा संबंध है: माहौल प्रशासन को ढालता है और प्रशासन माहौल को। इसलिए एक देश के सिद्धांत दूसरे पर ज्यों-के-त्यों नहीं लगते।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
पारिस्थितिकीय उपागम के योगदान और सीमाओं का मूल्यांकन कीजिए।
आदर्श उत्तर
गॉस (1947) ने लोग, स्थान, प्रौद्योगिकी, विचार, आपदा और व्यक्तित्व जैसे तत्त्वों से प्रशासन की व्याख्या की और रिग्स ने इसे मॉडल में बदला। योगदान: प्रशासन को माहौल के साथ समझना, एक देश के सिद्धांत को सार्वभौमिक मानने की भूल से बचाना और तुलनात्मक अध्ययन को आधार देना।
सीमाएँ: पर्यावरण-नियतिवाद का ख़तरा, नीति-मूल्यांकन की अनदेखी, अनुभवजन्य साक्ष्य की कमी और पश्चिमी पैमाने की आलोचना।
भारतीय संदर्भ में पेसा 1996 दिखाता है कि पंचायत ढाँचा आदिवासी परंपराओं के अनुसार ढाला गया; पर नीति-पत्र बताते हैं कि अमल कमज़ोर रहा, इसलिए अनुकूलन तभी सार्थक है जब ज़मीन पर उतरे।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न: "पारिस्थितिकीय उपागम की व्याख्या कीजिए और उसका मूल्यांकन कीजिए।" पहले दो वाक्यों में परिभाषा दें: प्रशासन और पर्यावरण की अंतःक्रिया का अध्ययन।
मुख्य भाग
- गॉस (1947): सात तत्त्वों की सूची एक पंक्ति में
- डाहल (1947): सिद्धांत माहौल से स्वतंत्र नहीं; रिग्स (1961, 1964): प्रशासन समाज का उप-तंत्र, दो-तरफ़ा संबंध
- तुलनात्मक संदर्भ: अपारिस्थितिकीय से पारिस्थितिकीय का रुझान
- भारतीय उदाहरण: पेसा 1996 (धारा 4(a), 4(d)) और राजस्थान के अनुसूचित-क्षेत्र नियम 2011
- सीमाएँ: नियतिवाद, नीति-मूल्यांकन की अनदेखी, पश्चिमी पैमाना
निष्कर्ष
निष्कर्ष: प्रशासन को माहौल से काटकर समझना या सुधारना अधूरा है; पर उपागम तभी उपयोगी है जब माहौल के साथ प्रशासन की अपनी भूमिका और परिणामों को भी देखा जाए।
अतिरिक्त मूल्य
- गॉस के अपने उदाहरण (मोटरकार और सड़क-प्रशासन; पेंशन की माँग) का एक वाक्य जोड़ें
- रिग्स के तीन रुझानों में तीसरे रुझान का उल्लेख करें
- UNDP नीति-पत्र के हवाले से अमल की चुनौती जोड़ें
त्वरित पुनरावृत्ति
- पारिस्थितिकीय उपागम = प्रशासन और राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक पर्यावरण की अंतःक्रिया का अध्ययन
- गॉस, Reflections on Public Administration (1947): अध्याय 'The Ecology of Government'
- गॉस के सात तत्त्व: लोग, स्थान, भौतिक प्रौद्योगिकी, सामाजिक प्रौद्योगिकी, इच्छाएँ और विचार, आपदा, व्यक्तित्व
- डाहल (1947): सिद्धांत अपने माहौल से स्वतंत्र नहीं; एक देश की पद्धति दूसरे में ज्यों-की-त्यों सफल नहीं
- रिग्स: Ecology of Public Administration (1961); Administration in Developing Countries (1964)
- तीसरा रुझान: अपारिस्थितिकीय से पारिस्थितिकीय (हेडी और स्टोक्स 1962 में भी)
- हेडी के चार उपागम: संशोधित परंपरागत, विकास-उन्मुख, सामान्य व्यवस्था-मॉडल, मध्यम-स्तरीय सिद्धांत
- दो-तरफ़ा संबंध: माहौल प्रशासन को ढालता है, प्रशासन माहौल को
- भारतीय उदाहरण: पेसा 24-12-1996 (अधिनियम 40/1996), धारा 4(a), 4(d)
- सीमाएँ: नियतिवाद, नीति-मूल्यांकन की अनदेखी, अनुभवजन्य साक्ष्य की कमी, पश्चिमी पैमाना
याद रखने योग्य शब्द
- ecology
- Gaus 1947
- Dahl 1947
- Riggs 1961
- environment
- two-way interaction
- non-ecological to ecological
- PESA 1996
- Heady and Stokes 1962
- Reflections on Public Administration