कार्बन एवं उसके यौगिक
यह पेज कार्बन के सहसंयोजी बंधन, शृंखलन, अपररूप और हाइड्रोकार्बन की समजातीय श्रेणियों (ऐल्केन-ऐल्कीन-ऐल्काइन) को REET परीक्षा के नज़रिए से कवर करता है। REET में इस टॉपिक से सामान्य सूत्र के आधार पर किसी यौगिक की सही श्रेणी पहचानने वाले प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
- REET 2024 में 2 प्रश्न
- कक्षा 6-8 स्तर
- 10 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में इस टॉपिक से दो प्रश्न पूछे गए, और दोनों ही ऐल्केन-ऐल्कीन-ऐल्काइन की समजातीय श्रेणी के सामान्य सूत्र पर आधारित थे। पहले प्रश्न में यह पहचानना था कि दिए गए चार सूत्रों में से कौन-सा ऐल्कीन श्रेणी का सदस्य नहीं है (उत्तर: C₂H₂, जो असल में ऐल्काइन है)। दूसरे प्रश्न में सीधे ऐल्कीन का उदाहरण पहचानना था (उत्तर: C₂H₄)। इससे स्पष्ट है कि REET में इस टॉपिक से सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₊₂ / CₙH₂ₙ / CₙH₂ₙ₋₂ को किसी भी दिए गए सूत्र पर तुरंत लागू कर पहचान करने की क्षमता परखी जाती है। साथ ही कार्बन के अपररूप, क्रियात्मक समूह व साबुन-अपमार्जक जैसे व्यावहारिक विषयों से जुड़े प्रश्न भी पूर्व वर्षों में आते रहे हैं, इसलिए पूरे अध्याय की ठोस तैयारी ज़रूरी है।
कार्बन का सहसंयोजी बंधन, शृंखलन व चतुःसंयोजकता
कार्बन परमाणु के बाह्यतम कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। न तो यह 4 इलेक्ट्रॉन त्यागकर C⁴⁺ धनायन बना सकता है (क्योंकि इसके लिए बहुत अधिक ऊर्जा चाहिए), न ही 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर C⁴⁻ ऋणायन बना सकता है (क्योंकि 6 प्रोटॉन वाले नाभिक के लिए 10 इलेक्ट्रॉन खींचना कठिन है)। इसलिए कार्बन आयनिक बंध के बजाय अपने 4 संयोजी इलेक्ट्रॉनों को दूसरे परमाणुओं के साथ साझा कर सहसंयोजी बंध (covalent bond) बनाता है — इसी को चतुःसंयोजकता (tetravalency) कहते हैं।
कार्बन में एक विशेष गुण है — शृंखलन (catenation), अर्थात कार्बन परमाणुओं की आपस में स्थाई व लंबी शृंखला (सीधी, शाखित या वलय के रूप में) बनाने की क्षमता, जो अन्य किसी तत्व में इतनी अधिक नहीं पाई जाती। चतुःसंयोजकता व शृंखलन — इन दोनों गुणों के मेल से कार्बन असंख्य यौगिक बना पाता है, जो हाइड्रोजन के बाद सबसे अधिक हैं, जबकि पृथ्वी की भूपर्पटी में कार्बन की मात्रा बहुत कम (लगभग 0.02%) है।
कार्बन के अपररूप (allotropes)
| अपररूप | संरचना व गुण |
|---|---|
| हीरा (diamond) | प्रत्येक कार्बन परमाणु 4 अन्य कार्बन परमाणुओं से दृढ़ त्रिविमीय (3-D) संरचना में जुड़ा; प्रकृति का सबसे कठोर पदार्थ; विद्युत का कुचालक |
| ग्रेफाइट (graphite) | कार्बन परमाणु समतलीय परतों में षट्कोणीय संरचना में जुड़े; परतें एक-दूसरे पर फिसल सकती हैं (मुलायम, स्नेहक के रूप में उपयोगी); मुक्त इलेक्ट्रॉन के कारण विद्युत का सुचालक |
| फुलरीन (fullerene, C₆₀) | 60 कार्बन परमाणु फुटबॉल जैसी गोलाकार संरचना में जुड़े — बकमिन्स्टर फुलरीन इसका प्रसिद्ध उदाहरण है |
समजातीय श्रेणी: ऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन
| श्रेणी | सामान्य सूत्र | बंध | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| ऐल्केन (alkane) | CₙH₂ₙ₊₂ | संतृप्त, केवल एकल बंध | मेथेन CH₄, एथेन C₂H₆ |
| ऐल्कीन (alkene) | CₙH₂ₙ | असंतृप्त, एक द्विआबंध (C=C) | एथीन C₂H₄, प्रोपीन C₃H₆ |
| ऐल्काइन (alkyne) | CₙH₂ₙ₋₂ | असंतृप्त, एक त्रिआबंध (C≡C) | एथाइन C₂H₂, प्रोपाइन C₃H₄ |
क्रियात्मक समूह (functional groups)
- -OH (एल्कोहॉल)
- उदाहरण: एथेनॉल C₂H₅OH (शराब में उपस्थित)
- -CHO (एल्डिहाइड)
- कार्बन शृंखला के अंतिम सिरे पर पाया जाने वाला क्रियात्मक समूह
- C=O (कीटोन)
- कार्बन शृंखला के मध्य में पाया जाने वाला क्रियात्मक समूह
- -COOH (कार्बोक्सिलिक अम्ल)
- उदाहरण: एथेनॉइक अम्ल/ऐसिटिक अम्ल CH₃COOH (सिरके का मुख्य घटक)
कार्बन यौगिकों के दैनिक जीवन में उपयोग
- ईंधन के रूप में
- रसोई गैस (LPG) मुख्यतः ब्यूटेन व प्रोपेन का मिश्रण है; वाहनों में प्रयुक्त CNG मुख्यतः मेथेन है — दोनों ही संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन) हैं
- पकने वाले फलों में
- एथीन (C₂H₄) गैस का उपयोग कच्चे फलों (जैसे आम, केला) को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए किया जाता है
- एथेनॉल के उपयोग
- एथेनॉल का उपयोग टिंक्चर आयोडीन, कफ सिरप व कई प्रसाधन सामग्री में विलायक के रूप में होता है
- प्लास्टिक व सिंथेटिक पदार्थ
- अधिकांश प्लास्टिक, सिंथेटिक रेशे व रबर भी दीर्घ-शृंखला कार्बन यौगिक (पॉलिमर) ही होते हैं, जो कार्बन के शृंखलन गुण के कारण संभव होते हैं
साबुन व अपमार्जक की क्रियाविधि
साबुन लंबी कार्बन शृंखला वाले वसा अम्लों (fatty acids) के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं। साबुन के अणु का एक सिरा हाइड्रोफोबिक (जल-विरोधी, लंबी कार्बन पूँछ) होता है जो तेल/चिकनाई से जुड़ता है, और दूसरा सिरा हाइड्रोफिलिक (जल-स्नेही, आयनिक सिर) होता है जो जल से जुड़ता है। इस कारण साबुन जल में मिसेल (micelle) नामक गोलाकार संरचना बनाकर तेल-मैल के कणों को अपने भीतर घेर लेता है, जिससे वे जल में घुलकर बह जाते हैं और कपड़ा/त्वचा साफ हो जाती है। कठोर जल (जिसमें कैल्शियम व मैग्नीशियम के लवण घुले होते हैं) में साबुन इन लवणों से अभिक्रिया कर अघुलनशील अवक्षेप (मैल) बना देता है, इसलिए झाग नहीं बनता — जबकि सिंथेटिक अपमार्जक (detergent) कठोर जल में भी सामान्य रूप से झाग देता है।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
गतिविधि
माचिस की तीलियों व मटर के दानों (या क्ले बॉल्स) से मेथेन, एथेन व एथीन के आण्विक मॉडल बनवाकर विद्यार्थियों को एकल व द्विआबंध का अंतर दिखाएँ।
शिक्षण सहायक सामग्री
कठोर जल व साफ (मृदु) जल में साबुन का घोल मिलाकर झाग की तुलना करवाएँ — यह सरल, सुरक्षित प्रयोग साबुन-अपमार्जक के अंतर को व्यावहारिक रूप से समझा देता है।
सामान्य भ्रांति
बहुत-से विद्यार्थी सोचते हैं कि हीरा व ग्रेफाइट अलग-अलग तत्व हैं, या यह कि सभी कार्बन यौगिक खतरनाक/जहरीले होते हैं — स्पष्ट करें कि दोनों शुद्ध कार्बन के ही अपररूप हैं (केवल परमाणुओं की व्यवस्था अलग होने से गुण भिन्न हो जाते हैं), और शर्करा, स्टार्च, वसा जैसे कार्बन यौगिक हमारे भोजन का मुख्य हिस्सा हैं।
आकलन
विद्यार्थियों को कुछ आण्विक सूत्र (जैसे C₃H₈, C₄H₈, C₅H₈) देकर उन्हें ऐल्केन/ऐल्कीन/ऐल्काइन में वर्गीकृत करने को कहें, और रसोई गैस व वाहन ईंधन में प्रयुक्त हाइड्रोकार्बन के नाम पूछकर व्यावहारिक समझ जाँचें, साथ ही हीरा व ग्रेफाइट के गुणों में अंतर का कारण भी मौखिक रूप से पूछें।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
समजातीय श्रेणी याद रखने की ट्रिक — तीनों श्रेणियों में हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या क्रमशः घटती जाती है: ऐल्केन में 2n+2, ऐल्कीन में 2n, ऐल्काइन में 2n−2। जल्दी पहचानने के लिए सूत्र में H की संख्या को 2n से तुलना करें — 2n से 2 अधिक हो तो ऐल्केन, बराबर हो तो ऐल्कीन, 2 कम हो तो ऐल्काइन। यह ध्यान रखें कि सामान्य सूत्र में दिखने वाला n ही कार्बन परमाणुओं की संख्या है, इसलिए पहले n ज्ञात करें, फिर उससे अपेक्षित H की संख्या निकालकर दिए गए सूत्र से मिलाएँ।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 129
निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक ऐल्कीन समजातीय श्रेणी का सदस्य नहीं है ?
- AC₅H₁₀
- BC₄H₈
- CC₃H₆
- DC₂H₂
व्याख्या
ऐल्कीन (alkene) का सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ है: C₅H₁₀, C₄H₈ और C₃H₆ इस सूत्र में आते हैं। C₂H₂ (एथाइन/ऐसीटिलीन) का सूत्र CₙH₂ₙ₋₂ में आता है, अतः यह ऐल्काइन (alkyne) है, ऐल्कीन नहीं। (एथीन का सूत्र C₂H₄ होता है।)
प्रश्न 123
ऐल्कीन का उदाहरण है
- AC₂H₆
- BC₂H₄
- CC₃H₈
- DC₂H₂
व्याख्या
ऐल्कीन वे हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें कार्बन–कार्बन द्विबंध होता है और सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ होता है। C₂H₄ (एथीन) इस सूत्र में आता है। C₂H₆ और C₃H₈ ऐल्केन (CₙH₂ₙ₊₂) हैं तथा C₂H₂ ऐल्काइन (CₙH₂ₙ₋₂) है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
CₙH₂ₙ₊₂ सामान्य सूत्र किस समजातीय श्रेणी का है?
- Aऐल्केन
- Bऐल्कीन
- Cऐल्काइन
- Dऐल्कोहॉल
व्याख्या
CₙH₂ₙ₊₂ संतृप्त हाइड्रोकार्बन (केवल एकल बंध वाले) ऐल्केन श्रेणी का सामान्य सूत्र है, जैसे मेथेन (CH₄) व एथेन (C₂H₆)।
प्रश्न 2
C₄H₈ निम्न में से किस समजातीय श्रेणी का सदस्य है?
- Aऐल्केन
- Bऐल्कीन
- Cऐल्काइन
- Dकार्बोक्सिलिक अम्ल
व्याख्या
यहाँ n = 4 है, तो CₙH₂ₙ के अनुसार H की संख्या 2×4 = 8 होनी चाहिए, जो C₄H₈ में मेल खाती है — अतः यह ऐल्कीन (CₙH₂ₙ) श्रेणी का सदस्य है।
प्रश्न 3
हीरे में प्रत्येक कार्बन परमाणु कितने अन्य कार्बन परमाणुओं से सहसंयोजी बंध बनाता है?
- A2
- B3
- C4
- D6
व्याख्या
हीरे में प्रत्येक कार्बन परमाणु अपनी चतुःसंयोजकता के कारण 4 अन्य कार्बन परमाणुओं से मजबूत सहसंयोजी बंध बनाकर एक कठोर त्रिविमीय जालक संरचना बनाता है।
प्रश्न 4
ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक क्यों होता है, जबकि हीरा नहीं?
- Aग्रेफाइट में आयनिक बंध होता है
- Bग्रेफाइट धातु है
- Cहीरे में कार्बन परमाणु नहीं होते
- Dग्रेफाइट में परतों के बीच गति करने योग्य मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं
व्याख्या
ग्रेफाइट में प्रत्येक कार्बन केवल 3 अन्य कार्बन से बंधित होता है, जिससे एक इलेक्ट्रॉन मुक्त रहकर परतों के बीच गति कर पाता है और विद्युत का संचालन करता है, जबकि हीरे में सभी 4 इलेक्ट्रॉन मजबूती से बंधे होते हैं।
प्रश्न 5
सिरके में मुख्य रूप से पाए जाने वाले एथेनॉइक अम्ल (ऐसिटिक अम्ल) का सूत्र है:
- ACH₃OH
- BCH₃COOH
- CC₂H₅OH
- DHCOOH
व्याख्या
सिरके का मुख्य घटक एथेनॉइक अम्ल (ऐसिटिक अम्ल) है, जिसका सूत्र CH₃COOH है — इसमें कार्बोक्सिलिक अम्ल क्रियात्मक समूह (-COOH) उपस्थित है।
प्रश्न 6
कौन-सा क्रियात्मक समूह एल्कोहॉल की पहचान कराता है?
- A-COOH
- B-CHO
- C-OH
- DC=O
व्याख्या
-OH (हाइड्रॉक्सिल) क्रियात्मक समूह एल्कोहॉल की पहचान है, जैसे एथेनॉल C₂H₅OH में यह समूह उपस्थित है।
प्रश्न 7
साबुन के अणु का कौन-सा भाग जल-स्नेही (hydrophilic) होता है?
- Aलंबी कार्बन शृंखला (पूँछ)
- Bइसमें कोई भाग जल-स्नेही नहीं होता
- Cपूरा अणु समान रूप से
- Dआयनिक सिरा (सिर)
व्याख्या
साबुन के अणु का आयनिक सिरा (सिर, जैसे -COO⁻Na⁺) जल-स्नेही (hydrophilic) होता है जो जल से जुड़ता है, जबकि लंबी कार्बन पूँछ जल-विरोधी (hydrophobic) होकर तेल/चिकनाई से जुड़ती है।
प्रश्न 8
कठोर जल में कपड़े धोने के लिए साबुन की तुलना में बेहतर विकल्प है, क्योंकि:
- Aअपमार्जक (detergent) कठोर जल में भी आसानी से झाग बनाता है
- Bअपमार्जक साबुन से सस्ता होता है
- Cअपमार्जक में कार्बन नहीं होता
- Dसाबुन जल में घुलता ही नहीं
व्याख्या
अपमार्जक (सिंथेटिक डिटर्जेंट) कठोर जल के कैल्शियम-मैग्नीशियम लवणों से अवक्षेप नहीं बनाता, इसलिए यह कठोर जल में भी सामान्य रूप से झाग देकर सफाई का काम करता है, जबकि साबुन कठोर जल में अवक्षेप बनाकर झाग देना बंद कर देता है।
प्रश्न 9
कक्षा 8 में कार्बन यौगिकों की संरचना (एकल व द्विआबंध का अंतर) समझाने हेतु सबसे प्रभावी शिक्षण सहायक सामग्री है:
- Aकेवल सूत्र श्यामपट्ट पर लिखना
- Bबॉल-एंड-स्टिक/क्ले मॉडल से आण्विक संरचना बनवाना
- Cकेवल परिभाषा रटवाना
- Dकेवल नाम याद कराना
व्याख्या
कक्षा 6-8 स्तर पर त्रिविमीय संरचना जैसी अमूर्त अवधारणाओं को मूर्त मॉडल (बॉल-एंड-स्टिक/क्ले) से बनवाने पर विद्यार्थी एकल व द्विआबंध का वास्तविक अंतर स्वयं देख व समझ पाते हैं।
प्रश्न 10
फुलरीन (C₆₀) में कार्बन परमाणुओं की कुल संख्या कितनी होती है?
- A12
- B32
- C60
- D70
व्याख्या
फुलरीन के सबसे प्रसिद्ध रूप बकमिन्स्टर फुलरीन में 60 कार्बन परमाणु फुटबॉल जैसी गोलाकार संरचना में व्यवस्थित होते हैं, इसीलिए इसे C₆₀ कहा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कार्बन सहसंयोजक बंध ही क्यों बनाता है, और शृंखलन किसे कहते हैं?+
कार्बन के बाह्यतम कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिन्हें त्यागना या ग्रहण करना ऊर्जा की दृष्टि से कठिन है, इसलिए यह इलेक्ट्रॉन साझा कर सहसंयोजी बंध बनाता है। कार्बन परमाणुओं की आपस में जुड़कर लंबी व स्थाई शृंखला (सीधी, शाखित या वलयाकार) बनाने की क्षमता को शृंखलन (catenation) कहते हैं, जो इसमें अन्य तत्वों से कहीं अधिक पाई जाती है और असंख्य कार्बनिक यौगिकों को जन्म देती है।
हीरा व ग्रेफाइट में क्या अंतर है?+
हीरे में हर कार्बन परमाणु 4 अन्य कार्बन परमाणुओं से त्रिविमीय संरचना में जुड़ा होता है, जिससे यह अत्यंत कठोर व विद्युत-कुचालक है। ग्रेफाइट में कार्बन परतदार षट्कोणीय संरचना में जुड़ा होता है, जिससे यह मुलायम व विद्युत-सुचालक है।
ऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन में क्या अंतर है?+
ऐल्केन (CₙH₂ₙ₊₂) में केवल एकल बंध होते हैं, ऐल्कीन (CₙH₂ₙ) में एक द्विआबंध और ऐल्काइन (CₙH₂ₙ₋₂) में एक त्रिआबंध होता है — ऐल्कीन व ऐल्काइन असंतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।
साबुन कठोर जल में झाग क्यों नहीं देता?+
कठोर जल में घुले कैल्शियम व मैग्नीशियम लवणों से साबुन अभिक्रिया कर अघुलनशील अवक्षेप (मैल) बना देता है, जिससे साबुन का उपयोगी भाग कम हो जाता है और झाग नहीं बनता।
फुलरीन क्या है?+
फुलरीन कार्बन का एक अपररूप है, जिसमें 60 कार्बन परमाणु फुटबॉल जैसी गोलाकार संरचना में जुड़े होते हैं — इसे बकमिन्स्टर फुलरीन (C₆₀) भी कहा जाता है।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए