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REET L2 · सामाजिक अध्ययन

राजस्थान के लोक नृत्य एवं संगीत

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राजस्थान के प्रमुख लोक नृत्य, उनसे जुड़ी जातियाँ/जनजातियाँ और लोक वाद्ययंत्रों को यह पेज REET परीक्षा के नज़रिए से कवर करता है। REET 2024 में इस टॉपिक से नृत्य-जनजाति सुमेलन, राजस्थानी साहित्यकारों और महोत्सव-स्थान जैसे विविध प्रश्न पूछे गए।

  • REET 2024 में 4 प्रश्न
  • कक्षा 6–8 स्तर
  • 10 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: कालबेलिया — विकिपीडिया

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में इस टॉपिक से 'शिकार नृत्य' किस जनजाति से जुड़ा है, महोत्सवों के गलत सुमेल पहचानने और राजस्थानी भाषा-साहित्य से जुड़े प्रश्न पूछे गए। यह दर्शाता है कि परीक्षा नृत्य को अलग-थलग नहीं बल्कि जनजाति, भाषा और साहित्य के साथ जोड़कर पूछती है — इसलिए इन्हें एक साथ याद करें।

प्रमुख लोक नृत्य और उनकी जनजाति/जाति

राजस्थान के लोक नृत्यों की जड़ें अक्सर किसी विशेष जनजाति या जाति की परंपरा में होती हैं, जिन्हें बाद में व्यापक लोकप्रियता मिली। घूमर नृत्य मूलतः भील जनजाति द्वारा देवी सरस्वती व स्थानीय देवताओं की आराधना में किया जाता था; बाद में राजपूत घरानों ने इसे अपनाकर एक सुसंस्कृत दरबारी नृत्य का रूप दिया। आज यह विवाह और त्योहारों में नवविवाहिता महिलाओं द्वारा किया जाने वाला राजस्थान का सबसे प्रतिनिधि नृत्य माना जाता है।

कालबेलिया नृत्य कालबेलिया (सपेरा) समुदाय से जुड़ा है, जो परंपरागत रूप से साँप पकड़ने के काम में जुड़ा था; 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के बाद इस समुदाय ने नृत्य-प्रदर्शन को आजीविका बनाया। यह नृत्य सबसे अधिक पाली, अजमेर, चित्तौड़गढ़ व उदयपुर क्षेत्र में प्रचलित है, और 2010 में यूनेस्को ने इसे मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया।

चरी नृत्य अजमेर-किशनगढ़ क्षेत्र की गुर्जर महिलाओं का नृत्य है, जिसमें सिर पर जलते दीये सहित पीतल का पात्र (चरी) संतुलित रखकर नृत्य किया जाता है — यह पानी लाने की दैनिक परंपरा से विकसित हुआ माना जाता है। तेरहताली नृत्य कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा किया जाता है, जो पोकरण व डीडवाणा क्षेत्र में विशेष रूप से प्रसिद्ध है; इसमें शरीर के विभिन्न हिस्सों पर तेरह मंजीरे बाँधकर बैठे-बैठे नृत्य किया जाता है, और गीत संत रामदेव जी की भक्ति में गाए जाते हैं।

गैर नृत्य मुख्यतः भील समुदाय व वागड़ अंचल (डूंगरपुर-बांसवाड़ा क्षेत्र) में होली के अवसर पर पुरुषों द्वारा समूह में किया जाता है, जिसमें गोलाकार घूमते हुए नृत्य होता है। शिकार नृत्य बाराँ ज़िले की सहरिया जनजाति से जुड़ा है, जिसमें शिकार के दृश्यों का अभिनय किया जाता है — REET 2024 में यह ठीक इसी रूप में पूछा गया था। भवाई नृत्य भवाई जाति की महिलाओं का करतब-प्रधान नृत्य है, जिसमें सिर पर सात-आठ मटकियाँ रखकर, कभी काँच के टुकड़ों या तलवार की धार पर संतुलन बनाते हुए नृत्य किया जाता है; यह मुख्यतः उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा व चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में प्रचलित है।

नृत्य-समुदाय-क्षेत्र सुमेलन

नृत्यसमुदाय/जातिप्रमुख क्षेत्र
घूमरमूलतः भील, बाद में राजपूत समाज में लोकप्रियसंपूर्ण राजस्थान
कालबेलियाकालबेलिया (सपेरा)पाली, अजमेर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर
चरीगुर्जर (महिलाएँ)अजमेर-किशनगढ़
तेरहतालीकामड़ जातिपोकरण, डीडवाणा
गैरभील समुदायवागड़ अंचल (डूंगरपुर-बांसवाड़ा)
शिकार नृत्यसहरिया जनजातिबाराँ (शाहबाद-किशनगंज)
भवाईभवाई जाति (महिलाएँ)उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़

प्रमुख लोक वाद्य यंत्र

रावणहत्था
भील व भोपा समुदाय से जुड़ा तार वाद्य, कथा-गायन में प्रयुक्त
कामायचा
जैसलमेर-बाड़मेर के मांगणियार समुदाय का प्रमुख वाद्य
सारंगी
जैसलमेर-बाड़मेर की लंगा जाति द्वारा बजाया जाने वाला वाद्य
अलगोज़ा
दो बाँसुरियों को एक साथ बजाने वाला वाद्य, राजस्थान का प्रमुख लोक वाद्य

महोत्सव और साहित्य से जुड़ाव

राजस्थान में हर क्षेत्र का अपना सांस्कृतिक महोत्सव है — जोधपुर का मारवाड़ महोत्सव, जैसलमेर का मरु महोत्सव और जयपुर का हाथी महोत्सव प्रसिद्ध हैं; थार महोत्सव बाड़मेर में आयोजित होता है, न कि बीकानेर में — REET परीक्षार्थी अक्सर इसे बीकानेर से जोड़कर गलती करते हैं (बीकानेर ऊँट महोत्सव के लिए जाना जाता है)।

राजस्थानी भाषा और लोक-साहित्य भी इसी सांस्कृतिक खंड से जुड़ते हैं। भाषा-सर्वेक्षणकर्ता जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने 'भारतीय भाषा सर्वेक्षण' में राज्य की भाषा के लिए सर्वप्रथम 'राजस्थानी' शब्द का प्रयोग किया, जबकि कर्नल जेम्स टॉड ने क्षेत्र के लिए 'राजस्थान' नाम दिया था। लोककथाकार विजयदान देथा ('बिज्जी') का कहानी-संग्रह 'सपन प्रिया' और उनकी कृति 'बातां री फुलवारी' राजस्थानी लोक-परंपरा को साहित्यिक रूप देने के लिए जानी जाती हैं।

पेशेवर लोक-गायक समुदाय: मांगणियार व लंगा

जैसलमेर-बाड़मेर के मरुस्थलीय क्षेत्र में मांगणियार मुस्लिम समुदाय पीढ़ी-दर-पीढ़ी पेशेवर लोक-संगीतकारों के रूप में जाना जाता है। सदियों से इन्हें राजपूत ठिकानेदारों, चारणों और व्यापारी परिवारों का संरक्षण (जजमानी परंपरा) मिलता रहा है, और इनके गीत राजाओं की वीरता व ऐतिहासिक घटनाओं को पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने का माध्यम रहे हैं। इसी क्षेत्र की लंगा जाति भी अपने संरक्षक परिवारों के लिए गायन करती है और सारंगी व सिंधी सुरिन्दा जैसे वाद्यों में विशेषज्ञ मानी जाती है। मांगणियार व लंगा दोनों समुदायों का लोकगीत-गायन आज मरु उत्सवों व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राजस्थान की पहचान बन चुका है।

नृत्य व संगीत के साथ-साथ कठपुतली कला भी राजस्थान की प्रमुख लोक-कला परंपरा है, जो मुख्यतः नट व भाट समुदाय द्वारा संचालित की जाती है। धागों से बनी लकड़ी की गुड़ियों के माध्यम से अमर सिंह राठौड़ जैसी लोककथाएँ व राजा-रानी के किस्से सुनाए जाते हैं, जिनके साथ ढोलक व सारंगी की संगत होती है। यह कला भी राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण, गैर-नृत्य हिस्सा है, जिसे REET में नृत्य-संगीत के साथ जोड़कर पूछा जा सकता है।

इन सभी लोक-कलाओं की एक साझा विशेषता यह है कि ये किसी शास्त्रीय प्रशिक्षण संस्थान से नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवार व समुदाय के भीतर सीखी जाती हैं। इसीलिए REET में इन्हें पढ़ते समय नृत्य/वाद्य का नाम, संबंधित समुदाय और भौगोलिक क्षेत्र — तीनों को एक साथ जोड़कर याद करना सबसे कारगर रणनीति है, क्योंकि परीक्षा अक्सर इन तीनों में से किन्हीं दो को देकर तीसरे की पहचान करवाती है।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

कक्षा गतिविधि

छात्रों को समूहों में बाँटकर हर समूह को एक नृत्य (घूमर, कालबेलिया, चरी आदि) सौंपें और उसकी जनजाति/जाति, वाद्य व क्षेत्र पर एक छोटा पोस्टर बनवाएँ।

शिक्षण सहायक सामग्री

नृत्यों के वीडियो क्लिप या तस्वीरें, और राजस्थान के मानचित्र पर संबंधित ज़िले चिह्नित करने वाला चार्ट उपयोगी है।

सामान्य भ्रांति

छात्र अक्सर घूमर व कालबेलिया को एक ही जाति से जोड़ देते हैं, जबकि घूमर मूलतः भील परंपरा से और कालबेलिया विशेष रूप से कालबेलिया (सपेरा) समुदाय से जुड़ा है — यह अंतर स्पष्ट करें।

आकलन विचार

एक सुमेलन (matching) प्रश्नोत्तरी बनवाएँ जिसमें नृत्य, समुदाय और ज़िला — तीनों को सही जोड़ा बनाना हो, ठीक उसी शैली में जैसे REET में पूछा जाता है।

याद रखने की ट्रिक

'कालबेलिया = साँप वाले (सपेरा)', 'चरी = चरी (पात्र) उठाने वाली गुर्जर महिलाएँ', 'तेरहताली = तेरह मंजीरे बाँधने वाली कामड़ जाति' — नृत्य के नाम में छिपे शब्द को ही समुदाय/वस्तु से जोड़कर याद रखें।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 101

‘सपन प्रिया’ कहानी संग्रह की रचना किसने की ?

  1. Aशिवचन्द्र भरतिया
  2. Bयादवेन्द्र शर्मा चन्द्र
  3. Cविजयदान देथा
  4. Dनथमल जोशी

व्याख्या

'सपन प्रिया' विजयदान देथा ('बिज्जी') का कहानी संग्रह है, जो 1997 में प्रकाशित हुआ। विजयदान देथा राजस्थानी लोककथाओं के प्रसिद्ध लेखक थे, जिनकी 'बातां री फुलवारी' प्रमुख कृति है। अतः सही उत्तर (C) है।

प्रश्न 104

निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है ? महोत्सव – स्थान

  1. Aमारवाड़ महोत्सव – जोधपुर
  2. Bथार महोत्सव – बीकानेर
  3. Cमरु महोत्सव – जैसलमेर
  4. Dहाथी महोत्सव – जयपुर

व्याख्या

थार महोत्सव बाड़मेर में आयोजित होता है, बीकानेर में नहीं; बीकानेर ऊँट महोत्सव के लिए प्रसिद्ध है। मारवाड़ महोत्सव जोधपुर, मरु महोत्सव जैसलमेर और हाथी महोत्सव जयपुर में होता है। इसलिए गलत सुमेलित युग्म (B) है।

प्रश्न 103

राजस्थान की भाषा के लिए ‘राजस्थानी’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया ?

  1. Aजॉर्ज थॉमस
  2. Bकर्नल जेम्स टॉड
  3. Cउद्योतन सूरी
  4. Dजॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन

व्याख्या

राजस्थान की भाषा के लिए ‘राजस्थानी’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने अपने ‘भारतीय भाषा सर्वेक्षण’ (Linguistic Survey of India) में किया था। कर्नल जेम्स टॉड ने इस क्षेत्र के लिए ‘राजस्थान/रायथान’ नाम का प्रयोग किया था, भाषा के लिए नहीं। उद्योतन सूरी ने ‘कुवलयमाला’ में मरु भाषा का उल्लेख किया था।

प्रश्न 115

राजस्थान का शिकार नृत्य संबंधित है

  1. Aसहरिया
  2. Bगरासिया
  3. Cकालबेलिया
  4. Dभील

व्याख्या

राजस्थान का शिकार नृत्य सहरिया जनजाति से संबंधित है। सहरिया बारां जिले (शाहबाद-किशनगंज क्षेत्र) की प्रमुख जनजाति है और इसके शिकार नृत्य में शिकार के दृश्यों का अभिनय किया जाता है। कालबेलिया जाति इंडोणी, शंकरिया व पणिहारी जैसे नृत्यों के लिए, तथा गरासिया वालर नृत्य के लिए जानी जाती है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

घूमर नृत्य मूलतः किस समुदाय की परंपरा से जुड़ा है?

  1. Aगुर्जर
  2. Bभील
  3. Cकामड़
  4. Dसहरिया

व्याख्या

घूमर नृत्य मूलतः भील जनजाति की देवी-आराधना परंपरा से जुड़ा है, जिसे बाद में राजपूत समाज ने अपनाया।

प्रश्न 2

कालबेलिया नृत्य किस समुदाय से जुड़ा है?

  1. Aसपेरा (कालबेलिया) समुदाय
  2. Bगुर्जर समुदाय
  3. Cसहरिया जनजाति
  4. Dमीणा जनजाति

व्याख्या

कालबेलिया नृत्य कालबेलिया (सपेरा) समुदाय की पहचान है, जिसे 2010 में यूनेस्को मान्यता मिली।

प्रश्न 3

चरी नृत्य मुख्यतः किस क्षेत्र में प्रचलित है?

  1. Aबीकानेर-जैसलमेर
  2. Bअजमेर-किशनगढ़
  3. Cकोटा-बूँदी
  4. Dजयपुर-अलवर

व्याख्या

चरी नृत्य अजमेर-किशनगढ़ क्षेत्र की गुर्जर महिलाओं का नृत्य है।

प्रश्न 4

तेरहताली नृत्य में महिलाएँ शरीर पर कितने मंजीरे बाँधती हैं?

  1. Aसात
  2. Bनौ
  3. Cतेरह
  4. Dसोलह

व्याख्या

तेरहताली नृत्य में कामड़ जाति की महिलाएँ शरीर के विभिन्न हिस्सों पर तेरह मंजीरे बाँधकर नृत्य करती हैं।

प्रश्न 5

राजस्थान का शिकार नृत्य किस जनजाति से संबंधित है?

  1. Aभील
  2. Bगरासिया
  3. Cसहरिया
  4. Dकालबेलिया

व्याख्या

शिकार नृत्य बाराँ ज़िले की सहरिया जनजाति से संबंधित है, जिसमें शिकार के दृश्यों का अभिनय किया जाता है।

प्रश्न 6

गैर नृत्य मुख्यतः किस अवसर पर किया जाता है?

  1. Aहोली
  2. Bदीपावली
  3. Cरक्षाबंधन
  4. Dनवरात्रि

व्याख्या

गैर नृत्य मुख्यतः भील समुदाय व वागड़ अंचल में होली के अवसर पर पुरुषों द्वारा समूह में किया जाता है।

प्रश्न 7

कालबेलिया नृत्य को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में कब शामिल किया गया?

  1. A2005
  2. B2010
  3. C2015
  4. D2020

व्याख्या

2010 में यूनेस्को ने कालबेलिया नृत्य को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया।

प्रश्न 8

राजस्थान की भाषा के लिए 'राजस्थानी' शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया?

  1. Aकर्नल जेम्स टॉड
  2. Bजॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन
  3. Cविजयदान देथा
  4. Dउद्योतन सूरी

व्याख्या

जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने 'भारतीय भाषा सर्वेक्षण' में राजस्थान की भाषा के लिए सर्वप्रथम 'राजस्थानी' शब्द का प्रयोग किया।

प्रश्न 9

राजस्थान के लोक नृत्यों को पढ़ाते समय अवधारणा स्पष्ट रूप से याद रखाने का सबसे प्रभावी तरीका है

  1. Aकेवल नाम रटवाना
  2. Bनृत्य-समुदाय-क्षेत्र का सुमेलन चार्ट व वीडियो दिखाना
  3. Cकोई गतिविधि न करवाना
  4. Dकेवल परीक्षा में पूछना

व्याख्या

बहु-संवेदी शिक्षण (दृश्य चार्ट व वीडियो) छात्रों को नाम, समुदाय और क्षेत्र के बीच संबंध स्थायी रूप से याद रखने में मदद करता है।

प्रश्न 10

यदि छात्र घूमर और कालबेलिया नृत्य को एक ही समुदाय का मान बैठें, तो शिक्षक को सबसे पहले क्या करना चाहिए?

  1. Aभ्रांति को नज़रअंदाज करना
  2. Bदोनों नृत्यों की उत्पत्ति व समुदाय को अलग-अलग स्पष्ट उदाहरणों से समझाना
  3. Cदोनों में से एक नृत्य पढ़ाना बंद करना
  4. Dकेवल परीक्षा में सही उत्तर बताना

व्याख्या

भ्रांति-निवारण के लिए दोनों अवधारणाओं को तुलनात्मक रूप से, ठोस उदाहरणों सहित अलग-अलग स्पष्ट करना ज़रूरी है, ताकि छात्र स्थायी रूप से अंतर समझ सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

घूमर नृत्य मूलतः किस समुदाय से जुड़ा है?+

भील जनजाति से, जिसे बाद में राजपूत समाज ने अपनाकर दरबारी नृत्य का रूप दिया।

कालबेलिया नृत्य को यूनेस्को ने कब मान्यता दी?+

2010 में, मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची में।

चरी नृत्य किस क्षेत्र और समुदाय से जुड़ा है?+

अजमेर-किशनगढ़ की गुर्जर महिलाओं से।

तेरहताली नृत्य में कितने मंजीरे बाँधे जाते हैं और किस जाति से जुड़ा है?+

तेरह मंजीरे, कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा, संत रामदेव जी की भक्ति में।

राजस्थान का शिकार नृत्य किस जनजाति से संबंधित है?+

बाराँ ज़िले की सहरिया जनजाति से।

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आधिकारिक स्रोत

  1. कालबेलिया — विकिपीडिया
  2. चरी नृत्य — विकिपीडिया
  3. तेरहताली नृत्य — Rajasthan History
  4. गैर नृत्य वागड़ अंचल — The Mooknayak
  5. भवाई नृत्य — विकिपीडिया
  6. मांगणियार समुदाय — विकिपीडिया

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए