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REET लेवल 2 · सामाजिक अध्ययन

राजस्थान की चित्रकला — REET नोट्स (सामाजिक अध्ययन)

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राजस्थान की चित्रकला अपनी अलग-अलग रियासतों जितनी ही विविध रही है — हर रियासत की अपनी चित्रशैली, रंग-संयोजन व पसंदीदा विषय रहे। REET में इस टॉपिक से किसी शैली की पहचान उसके प्रसिद्ध चित्रकार, ग्रंथ या विशेष विषय-वस्तु से करवाने वाले बारीक प्रश्न पूछे जाते हैं।

  • REET 2024 में 2 प्रश्न
  • कक्षा 8 स्तर (राजस्थान अध्ययन)
  • 12 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के दोनों प्रश्न किसी विशिष्ट चित्रकार/ग्रंथ को उसकी सही उप-शैली से जोड़ने पर आधारित थे — एक में महिला चित्रकार 'कमला व इलायची' को नाथद्वारा शैली (मेवाड़ की उप-शैली) से जोड़ना था, दूसरे में सबसे प्राचीन चित्रित ग्रंथ 'श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' (1260 ई.) को मेवाड़ शैली से जोड़ना था। यानी REET में यहाँ केवल शैलियों के नाम याद रखना काफी नहीं — हर शैली से जुड़े विशिष्ट चित्रकार, ग्रंथ व घटनाएँ भी सटीक याद रखनी होंगी।

राजस्थान की प्रमुख चित्रशैलियाँ

शैलीकेंद्रविशेषता / प्रसिद्ध चित्रकार
मेवाड़ शैलीउदयपुर, चावंड, आहड़सबसे प्राचीन शैली; चटख लाल-पीले रंग; चित्रकार निसारदीन (रागमाला, 1605, चावंड) व साहबदीन प्रमुख
नाथद्वारा उप-शैलीनाथद्वारा (मेवाड़ की शाखा)श्रीनाथजी की पिछवाई चित्रकला के लिए प्रसिद्ध; महिला चित्रकार कमला व इलायची (दामोदरदास की पुत्रियाँ) प्रमुख
बूँदी शैलीबूँदी (हाड़ौती)हरे-नीले रंगों का प्रचुर प्रयोग, घने वृक्ष व पशु-पक्षी अंकन; रागमाला व बारहमासा चित्रण; राव छत्रसाल व राव भावसिंह के काल में उत्कर्ष
कोटा शैलीकोटा (बूँदी से अलग होकर विकसित)शिकार (विशेषकर बाघ-शिकार) व पशुओं की गतिमान मुद्राओं के चित्रण में दक्ष
किशनगढ़ शैलीकिशनगढ़ (मारवाड़ क्षेत्र)चित्रकार निहालचंद द्वारा बनाई 'बणी-ठणी' के लिए विश्वप्रसिद्ध — लंबी आँखें, तीखी नासिका व ठोढ़ी; राधा-कृष्ण प्रेम-प्रसंग प्रमुख विषय
मारवाड़ (जोधपुर) शैलीजोधपुरवीर दुर्गादास राठौड़ की गाथाएँ, ढोला-मारू, नाथ संप्रदाय से जुड़े विषय प्रमुख
बीकानेर शैलीबीकानेरमुगल शैली का गहरा प्रभाव; 'उस्ता' कारीगरों द्वारा 'मांडी' (स्टूडियो) में चित्रण
ढूँढाड़ (जयपुर) शैलीआमेर, जयपुरचित्रकार साहिबराम प्रमुख; राधा-कृष्ण, रसिकप्रिया व गीत-गोविंद पर आधारित भित्ति-चित्र

बणी-ठणी को इसकी विशिष्ट शैली के कारण 'भारत की मोनालिसा' भी कहा जाता है।

याद रखने योग्य विशेष तथ्य

सबसे प्राचीन चित्रित ग्रंथ
'श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' (1260 ई.), गुहिल शासक तेजसिंह के काल में आहड़ (आघाटपुर) में चित्रित — मेवाड़ शैली से संबंधित।
बणी-ठणी
किशनगढ़ के राजा सावंतसिंह (कवि नाम 'नागरीदास') की प्रेयसी व गायिका; चित्रकार निहालचंद ने इन्हें राधा के रूप में चित्रित किया।
नाथद्वारा की महिला चित्रकार
कमला व इलायची — चित्रकार दामोदरदास की पुत्रियाँ, नाथद्वारा शैली (मेवाड़ की उप-शैली) की प्रमुख महिला चित्रकार मानी जाती हैं।
बीकानेर के 'उस्ता' कलाकार
मूलतः मुस्लिम परंपरा के कारीगर, जो चित्रकारी के साथ-साथ मीनाकारी व सोने की नक्काशी में भी दक्ष थे।

चित्रकला की सामान्य विशेषताएँ

राजस्थान की अधिकतर चित्रशैलियाँ लघु-चित्रकला (miniature painting) परंपरा से जुड़ी हैं, जिनमें कागज़ या कपड़े पर बारीक ब्रश से रंग भरे जाते थे और स्वयं तैयार किए गए प्राकृतिक रंगों (खनिज, वनस्पति व कीमती पत्थरों से) का प्रयोग होता था। अधिकतर शैलियों में कृष्ण-लीला, रागमाला (संगीत रागों का दृश्यांकन), बारहमासा (बारह महीनों का चित्रण) व दरबारी-शिकार दृश्य प्रमुख विषय रहे।

हर रियासत के शासकों के व्यक्तिगत रुचि व संरक्षण ने वहाँ की चित्रशैली को अपनी अलग पहचान दी — जैसे किशनगढ़ में राजा सावंतसिंह की भक्ति-भावना से 'बणी-ठणी' शैली विकसित हुई, तो मुगल दरबार से घनिष्ठ संबंधों के कारण बीकानेर व आमेर की शैलियों में मुगल प्रभाव स्पष्ट झलकता है।

चित्रशैलियों का वर्गीकरण: चार बड़े समूह

अध्ययन की सुविधा के लिए राजस्थान की चित्रशैलियों को प्रायः चार बड़े समूहों में बाँटा जाता है — मेवाड़ समूह (उदयपुर, नाथद्वारा, देवगढ़), मारवाड़ समूह (जोधपुर, बीकानेर, किशनगढ़, नागौर), ढूँढाड़ समूह (आमेर-जयपुर) और हाड़ौती समूह (बूँदी, कोटा, झालावाड़)। हर समूह के भीतर की उप-शैलियाँ अपने मुख्य केंद्र से मिलती-जुलती विशेषताएँ साझा करते हुए भी अपनी अलग पहचान रखती हैं — जैसे किशनगढ़ मारवाड़ समूह का हिस्सा होते हुए भी अपनी विशिष्ट 'बणी-ठणी शैली' के लिए अलग से पहचाना जाता है।

यह वर्गीकरण REET जैसी परीक्षाओं में बहुत उपयोगी है क्योंकि प्रश्न अक्सर यह जाँचते हैं कि कोई उप-शैली (जैसे नाथद्वारा या कोटा) किस बड़े समूह की शाखा है — इसलिए हर उप-शैली को उसके मूल समूह से जोड़कर याद रखना चाहिए, न कि अलग-थलग नाम के रूप में।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

कक्षा गतिविधि (कक्षा 8)

बच्चों को हर चित्रशैली की एक प्रसिद्ध छवि (जैसे बणी-ठणी) दिखाकर उसकी विशेषताएँ (आँखों का आकार, रंग-संयोजन) स्वयं पहचानने को कहना।

शिक्षण सहायक सामग्री

राजस्थान के मानचित्र पर हर चित्रशैली के केंद्र (उदयपुर, बूँदी, किशनगढ़, बीकानेर, जयपुर) को चिह्नित करता चार्ट बनवाना।

सामान्य ग़लतफ़हमी

बच्चे प्रायः बूँदी व कोटा शैली को एक ही समझ लेते हैं — स्पष्ट करें कि कोटा शैली बूँदी से अलग होकर विकसित हुई और शिकार-दृश्यों में विशेष दक्ष मानी जाती है।

आकलन विचार

चित्रशैली व उसकी विशेषता (जैसे 'लंबी आँखें' → किशनगढ़, 'बाघ-शिकार' → कोटा) की जोड़ी मिलाने वाली प्रश्नोत्तरी करवाना।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

हर शैली की एक ही विशिष्ट 'पहचान-शब्द' से याद रखें — 'मेवाड़ = सबसे प्राचीन', 'बूँदी = हरा-नीला रंग', 'किशनगढ़ = बणी-ठणी की आँखें', 'बीकानेर = उस्ता-मांडी', 'नाथद्वारा = पिछवाई'। REET में जब भी कोई चित्रकार/ग्रंथ अनजाना लगे, उसे उसके विषय व शैली की 'पहचान-शब्द' से जोड़कर उत्तर तय करें।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 115

कमला एवं इलायची नामक महिला चित्रकारों का सम्बंध राजस्थान की किस चित्रकला शैली से है ?

  1. Aजोधपुर शैली
  2. Bकिशनगढ़ शैली
  3. Cनाथद्वारा शैली
  4. Dबून्दी शैली

व्याख्या

कमला और इलायची नाथद्वारा के चित्रकार दामोदर दास की पुत्रियाँ थीं और नाथद्वारा की प्रमुख महिला चित्रकारों में गिनी जाती हैं। नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की उपशैली है, जिसमें श्रीनाथजी की पिछवाइयाँ प्रसिद्ध हैं। अतः सही उत्तर (C) नाथद्वारा शैली है।

प्रश्न 122

‘श्रावकप्रतिक्रमणसूत्रचूर्णि’ नामक चित्रित ग्रंथ का संबंध किस चित्रकला शैली से है ?

  1. Aमारवाड़ शैली
  2. Bहाड़ौती शैली
  3. Cमेवाड़ शैली
  4. Dढूंढाड़ शैली

व्याख्या

‘श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि’ (1260 ई.) मेवाड़ शैली का सबसे प्राचीन उपलब्ध चित्रित ग्रंथ माना जाता है। यह गुहिल शासक तेजसिंह के काल में आघाटपुर (आहड़) में चित्रित किया गया था। इसलिए इसका संबंध मेवाड़ चित्रकला शैली से है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'बणी-ठणी' चित्र के चित्रकार कौन थे?

  1. Aसाहबदीन
  2. Bनिसारदीन
  3. Cनिहालचंद
  4. Dसाहिबराम

व्याख्या

किशनगढ़ शैली के चित्रकार निहालचंद ने राजा सावंतसिंह की प्रेयसी 'बणी-ठणी' का प्रसिद्ध चित्र बनाया था, जिसे इसकी लंबी आँखों व तीखी नासिका के कारण 'भारत की मोनालिसा' भी कहा जाता है।

प्रश्न 2

श्रीनाथजी की 'पिछवाई' चित्रकला के लिए कौन-सी चित्रशैली प्रसिद्ध है?

  1. Aबूँदी शैली
  2. Bनाथद्वारा शैली
  3. Cकिशनगढ़ शैली
  4. Dढूँढाड़ शैली

व्याख्या

नाथद्वारा शैली, जो मेवाड़ शैली की एक उप-शैली है, श्रीनाथजी मंदिर की 'पिछवाई' चित्रकला (देवता की मूर्ति के पीछे टाँगे जाने वाले बड़े चित्रित कपड़े) के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3

बूँदी चित्रशैली का उत्कर्ष काल किन शासकों के समय माना जाता है?

  1. Aराव छत्रसाल व राव भावसिंह
  2. Bसवाई जयसिंह व सवाई मानसिंह
  3. Cराव मालदेव व महाराजा मानसिंह
  4. Dराजा सावंतसिंह व राजा राजसिंह

व्याख्या

बूँदी चित्रशैली का उत्कर्ष काल राव छत्रसाल व राव भावसिंह के शासनकाल (17वीं शताब्दी के मध्य-उत्तरार्ध) में माना जाता है, जब हरे-नीले रंगों व प्रकृति-चित्रण में यह शैली अपने चरम पर पहुँची।

प्रश्न 4

बीकानेर चित्रशैली में 'उस्ता' कारीगर किस लिए प्रसिद्ध थे?

  1. Aकेवल मंदिर-निर्माण
  2. Bचित्रकारी के साथ मीनाकारी व सोने की नक्काशी
  3. Cकेवल मूर्तिकला
  4. Dकेवल वस्त्र-बुनाई

व्याख्या

बीकानेर के 'उस्ता' कारीगर चित्रकारी के साथ-साथ मीनाकारी व सोने की नक्काशी (गोल्ड लीफ वर्क) में भी दक्ष थे, और 'मांडी' नामक स्टूडियो में मिलकर काम करते थे।

प्रश्न 5

कोटा चित्रशैली किस विषय में विशेष रूप से प्रवीण मानी जाती है?

  1. Aधार्मिक ग्रंथों का चित्रण
  2. Bशिकार (विशेषकर बाघ-शिकार) दृश्य
  3. Cकेवल रागमाला चित्रण
  4. Dकेवल भित्ति-चित्र

व्याख्या

कोटा शैली, जो बूँदी शैली से अलग होकर विकसित हुई, शिकार (विशेषकर बाघ-शिकार) व पशुओं की गतिमान मुद्राओं के चित्रण में विशेष रूप से प्रवीण मानी जाती है।

प्रश्न 6

ढूँढाड़ (जयपुर) चित्रशैली के प्रमुख दरबारी चित्रकार कौन थे?

  1. Aनिहालचंद
  2. Bसाहबदीन
  3. Cसाहिबराम
  4. Dनिसारदीन

व्याख्या

साहिबराम सवाई जयसिंह द्वितीय के शासनकाल में ढूँढाड़ (जयपुर) शैली के प्रमुख दरबारी चित्रकार थे, जिन्होंने राधा-कृष्ण व रसिकप्रिया जैसे विषयों पर चित्र बनाए।

प्रश्न 7

जोधपुर (मारवाड़) चित्रशैली में किस वीर योद्धा की गाथाएँ प्रमुखता से चित्रित की गईं?

  1. Aमहाराणा प्रताप
  2. Bवीर दुर्गादास राठौड़
  3. Cराव जोधा
  4. Dपृथ्वीराज चौहान

व्याख्या

जोधपुर (मारवाड़) चित्रशैली में वीर दुर्गादास राठौड़ की वीरता की गाथाएँ, ढोला-मारू प्रेम-कथा व नाथ संप्रदाय से जुड़े विषय प्रमुखता से चित्रित किए गए।

प्रश्न 8

राजस्थान की लघु-चित्रकला में रंग बनाने के लिए मुख्यतः किन स्रोतों का प्रयोग होता था?

  1. Aकेवल आयातित सिंथेटिक रंग
  2. Bखनिज, वनस्पति व कीमती पत्थरों से बने प्राकृतिक रंग
  3. Cकेवल काली स्याही
  4. Dकेवल सफेद चूने का रंग

व्याख्या

राजस्थान की लघु-चित्रकला में चित्रकार स्वयं खनिज पदार्थों, वनस्पतियों व कीमती/अर्ध-कीमती पत्थरों से प्राकृतिक रंग तैयार करते थे, जो सदियों बाद भी अपनी चमक बनाए रखते हैं।

प्रश्न 9

कक्षा में राजस्थान की चित्रशैलियाँ पढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका क्या है?

  1. Aकेवल शैलियों के नाम रटवाना
  2. Bप्रसिद्ध चित्रों की छवियाँ दिखाकर उनकी विशेषताएँ स्वयं पहचानने को कहना
  3. Cविषय को केवल परीक्षा तक सीमित रखना
  4. Dबिना उदाहरण के परिभाषा पढ़वाना

व्याख्या

प्रसिद्ध चित्रों (जैसे बणी-ठणी) की छवियाँ दिखाकर बच्चों से उनकी विशेषताएँ (रंग, आँखों का आकार) स्वयं पहचानने को कहने से दृश्य स्मृति मज़बूत होती है, जो केवल नाम रटने से संभव नहीं।

प्रश्न 10

'श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' नामक प्राचीनतम चित्रित ग्रंथ किस स्थान पर चित्रित किया गया था?

  1. Aचावंड
  2. Bआहड़ (आघाटपुर)
  3. Cनाथद्वारा
  4. Dकिशनगढ़

व्याख्या

'श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' (1260 ई.), जो मेवाड़ शैली का सबसे प्राचीन उपलब्ध चित्रित ग्रंथ माना जाता है, गुहिल शासक तेजसिंह के काल में आहड़ (आघाटपुर) में चित्रित किया गया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान की चित्रकला से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में इस टॉपिक से 2 प्रश्न पूछे गए, दोनों किसी चित्रकार/ग्रंथ को उसकी सही उप-शैली से जोड़ने पर आधारित थे। राजस्थान की कला व संस्कृति खंड में यह नियमित रूप से पूछा जाने वाला टॉपिक है।

बणी-ठणी किस चित्रशैली से संबंधित है?+

बणी-ठणी किशनगढ़ चित्रशैली की सबसे प्रसिद्ध कृति है, जिसे चित्रकार निहालचंद ने बनाया था। इसे इसकी विशिष्ट शैली (लंबी आँखें, तीखी नासिका) के कारण 'भारत की मोनालिसा' भी कहा जाता है।

राजस्थान की सबसे प्राचीन चित्रशैली कौन-सी मानी जाती है?+

मेवाड़ शैली को राजस्थान की सबसे प्राचीन चित्रशैली माना जाता है, जिसका सबसे प्राचीन उपलब्ध चित्रित ग्रंथ 'श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' (1260 ई.) है।

नाथद्वारा शैली की पहचान किस विषय से है?+

नाथद्वारा शैली (मेवाड़ की उप-शैली) श्रीनाथजी की 'पिछवाई' चित्रकला — मंदिर में देवता की मूर्ति के पीछे टाँगे जाने वाले बड़े कपड़े के चित्रों — के लिए प्रसिद्ध है।

बीकानेर शैली की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?+

बीकानेर शैली में मुगल शैली का गहरा प्रभाव देखा जाता है, क्योंकि वहाँ के शासकों के मुगल दरबार से घनिष्ठ संबंध थे; यहाँ 'उस्ता' कारीगर 'मांडी' (स्टूडियो) में चित्रण करते थे।

राजस्थान की चित्रशैलियों को कितने बड़े समूहों में बाँटा जाता है?+

अध्ययन की सुविधा के लिए इन्हें चार बड़े समूहों में बाँटा जाता है — मेवाड़ समूह (उदयपुर, नाथद्वारा), मारवाड़ समूह (जोधपुर, बीकानेर, किशनगढ़), ढूँढाड़ समूह (आमेर-जयपुर) और हाड़ौती समूह (बूँदी, कोटा, झालावाड़)।

किशनगढ़ शैली में राधा-कृष्ण प्रेम-प्रसंग इतने प्रमुख क्यों हैं?+

किशनगढ़ के राजा सावंतसिंह स्वयं कृष्ण-भक्त कवि थे (कवि नाम 'नागरीदास') और उनकी प्रेयसी बणी-ठणी को राधा के रूप में देखा जाता था। इसी भक्ति-भावना व निजी प्रेरणा से चित्रकार निहालचंद ने राधा-कृष्ण के प्रेम-प्रसंगों को किशनगढ़ शैली का केंद्रीय विषय बना दिया।

राजस्थानी लघु-चित्रकला किस व्यापक कला-परंपरा का हिस्सा मानी जाती है?+

राजस्थानी चित्रकला भारत की व्यापक 'राजपूत चित्रकला' (Rajput Painting) परंपरा का हिस्सा है, जिसमें राजस्थान के अतिरिक्त पहाड़ी क्षेत्र (हिमाचल-जम्मू) की चित्रशैलियाँ भी शामिल हैं। दोनों परंपराओं में भक्ति-भावना व दरबारी जीवन के चित्रण की समानता मिलती है, फिर भी रंग-संयोजन व शैली में स्पष्ट अंतर है।

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए