REET के लिए सम्पूर्ण हिंदी
REET में भाषा I और भाषा II दोनों अनिवार्य हैं और मिलकर 150 में से 60 अंक बनाते हैं — यह पृष्ठ बताता है कि उस हिंदी खंड की असली बनावट क्या है, कौन-सा विषय किस रूप में पूछा जाता है, और हर विषय की पूरी तैयारी कहाँ पढ़नी है।
- भाषा I — 30 अंक
- भाषा II — 30 अंक
- कुल 60/150
- भाषा शिक्षण भी शामिल
REET में भाषा का भार
- भाषा I
- 30 अंक — अनिवार्य
- भाषा II
- 30 अंक — अनिवार्य, भाषा I से भिन्न भाषा
- हिंदी का विकल्प
- भाषा I या भाषा II, दोनों में से किसी एक के रूप में चुना जा सकता है
- कुल भाषा भार
- 150 अंक के प्रश्नपत्र में से 60 अंक
- अनुपात
- पूरे पेपर का 40 प्रतिशत — इस सूची की किसी भी परीक्षा से अधिक
REET का भाषा खंड बाकी परीक्षाओं जैसा नहीं है
पहली बात संख्या की है। REET में भाषा दो बार आती है — भाषा I और भाषा II — और दोनों अनिवार्य हैं, दोनों 30-30 अंक के। इसका मतलब है कि 150 अंक के प्रश्नपत्र में 60 अंक केवल भाषा के हैं। पटवारी में यही हिस्सा 44 अंक का एक संयुक्त खंड है, और वहाँ पूरे पेपर में उसका अनुपात काफ़ी कम बैठता है। इसलिए जो अभ्यर्थी REET को दूसरी भर्ती परीक्षाओं के क्रम में रखकर पढ़ता है, वह अक्सर भाषा को उतना ही समय देता है जितना वह पटवारी के लिए देता — और यही पहली रणनीतिक भूल है।
दूसरी बात, जो इससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है, विषयवस्तु की है। REET के भाषा खंड में केवल भाषा नहीं पूछी जाती; उसमें भाषा का शिक्षण भी पूछा जाता है। हमारे सिलेबस पृष्ठ पर भाषा I के अंतर्गत जो शीर्षक दर्ज हैं, वे हैं — व्याकरण, बोधगम्यता, शब्दावली, ध्वनि-विज्ञान, और भाषा-शिक्षण पद्धतियाँ व मूल्यांकन। इनमें अंतिम शीर्षक अपने आप में एक पूरा विषय है। भाषा-शिक्षण की विधियाँ, भाषा के चार कौशल — सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना — और उनका क्रम, कक्षा में उपचारात्मक शिक्षण, तथा भाषा में मूल्यांकन के तरीक़े: व्यवहार में 30 अंक के भाषा खंड का लगभग एक-तिहाई से आधा हिस्सा इसी शिक्षणशास्त्र से आता है, न कि संधि-समास से।
यही REET की सबसे बड़ी और सबसे अनदेखी खाई है। जो अभ्यर्थी पटवारी, LDC या CET की तैयारी से आता है, उसका हिंदी का अभ्यास पूरी तरह वस्तुनिष्ठ व्याकरण पर खड़ा होता है — पर्यायवाची, विलोम, मुहावरे, वाक्य शुद्धि। ये सब REET में भी काम आते हैं, पर वे भाषा खंड का पूरा हिस्सा नहीं हैं। वह अभ्यर्थी व्याकरण की तैयारी पूरी करके मान लेता है कि भाषा हो गई, और फिर परीक्षा में उन प्रश्नों पर अटकता है जो पूछते हैं कि प्राथमिक कक्षा में वाचन-कौशल किस क्रम में विकसित किया जाए, या किसी बालक की वर्तनी-अशुद्धि का उपचार कैसे किया जाए। इसे साफ़ शब्दों में समझ लेना ज़रूरी है: व्याकरण की तैयारी REET के भाषा खंड की आधी तैयारी है।
इस पृष्ठ से जुड़े जो ग्यारह विषय-पृष्ठ नीचे दिए गए हैं, वे उस आधे हिस्से — व्याकरण और शब्दावली — को पूरी गहराई से कवर करते हैं। वे भाषा-शिक्षण पद्धतियों को कवर नहीं करते, और यह जानबूझकर बताया जा रहा है ताकि कोई अभ्यर्थी इन ग्यारह पृष्ठों को पढ़कर यह न मान ले कि उसका भाषा खंड पूरा हो गया। शिक्षणशास्त्र का हिस्सा बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र की तैयारी के साथ जोड़कर, अलग से पढ़ना पड़ता है।
एक व्यावहारिक बात भाषा II पर भी। भाषा II भाषा I से भिन्न होनी चाहिए, और उसकी विषयवस्तु तथा पद्धति भाषा I जैसी ही रहती है। इसका सीधा लाभ यह है कि यदि अभ्यर्थी हिंदी को एक भाषा के रूप में चुनता है, तो हिंदी व्याकरण की जो तैयारी वह करता है वह पूरे 30 अंक पर लागू होती है; और भाषा-शिक्षण का जो सिद्धांत-पक्ष वह पढ़ता है, वह दोनों भाषाओं के 60 अंक पर लागू हो जाता है, क्योंकि शिक्षण की विधियाँ भाषा-निरपेक्ष होती हैं। यह REET की तैयारी का सबसे बड़ा दोहरा लाभ है और बहुत कम अभ्यर्थी इसे योजना बनाकर उठाते हैं।
विषय-सूची — पाठ्यक्रम में स्थिति और प्रश्न का स्वरूप
| विषय | REET भाषा पाठ्यक्रम में | प्रश्न किस रूप में आता है |
|---|---|---|
| संधि | व्याकरण व ध्वनि-विज्ञान शीर्षक के अंतर्गत | विच्छेद या जोड़ के रूप में एक-दो प्रश्न; ध्वनि-परिवर्तन की समझ शिक्षण-खंड में भी काम आती है |
| समास | व्याकरण शीर्षक के अंतर्गत | विग्रह देकर भेद पूछा जाता है, या भेद देकर उदाहरण |
| उपसर्ग | व्याकरण शीर्षक के अंतर्गत | शब्द में से उपसर्ग अलग करना, या दिए उपसर्ग से शब्द बनाना |
| प्रत्यय | व्याकरण शीर्षक के अंतर्गत | कृत् और तद्धित का अंतर, तथा मूल शब्द पहचानना |
| पर्यायवाची शब्द | शब्दावली शीर्षक के अंतर्गत | चार विकल्पों में से समानार्थी चुनना; गद्यांश में रेखांकित शब्द का पर्याय |
| विलोम शब्द | शब्दावली शीर्षक के अंतर्गत | सीधी जोड़ी, तथा उपसर्ग से बने विलोम की पहचान |
| वाक्यांश के लिए एक शब्द | शब्दावली शीर्षक के अंतर्गत | वाक्यांश देकर एक शब्द, या शब्द देकर उसका अर्थ |
| मुहावरे और लोकोक्तियाँ | शब्दावली शीर्षक के अंतर्गत | अर्थ चुनना, तथा वाक्य में रिक्त स्थान भरना |
| शब्द शुद्धि | व्याकरण शीर्षक के अंतर्गत | चार शब्दों में से शुद्ध वर्तनी छाँटना; बालकों की वर्तनी-अशुद्धि के उपचार से भी जुड़ता है |
| वाक्य शुद्धि | व्याकरण शीर्षक के अंतर्गत | अशुद्ध वाक्य पहचानना; उपचारात्मक शिक्षण के प्रश्नों का आधार भी यही है |
| पारिभाषिक शब्दावली | अलग से नामित नहीं | REET में सीधे कम, पर कार्यालयी हिंदी के प्रश्न आने पर उपयोगी |
पाठ्यक्रम-स्थिति हमारे सिलेबस पृष्ठ पर दर्ज शीर्षकों के आधार पर है; अंतिम प्रमाण बोर्ड की आधिकारिक अधिसूचना ही है।
हर विषय की पूरी तैयारी — ग्यारह विषय-पृष्ठ
संधि और संधि विच्छेद — नियम, भेद, उदाहरण और अभ्यास प्रश्न
स्वर, व्यंजन और विसर्ग संधि के नियम, भेद और विच्छेद का अभ्यास।
समास — परिभाषा, छह भेद, विग्रह और परीक्षा-स्तरीय उदाहरण
छहों समास, विग्रह की विधि और पहचान के सूत्र।
उपसर्ग — परिभाषा, भेद और परीक्षा-स्तरीय उदाहरण
तत्सम, तद्भव, उर्दू और अंग्रेज़ी उपसर्ग एक साथ।
प्रत्यय — कृत् और तद्धित, भेद एवं उदाहरण
कृत् और तद्धित प्रत्यय, शब्द-निर्माण के उदाहरण सहित।
पर्यायवाची शब्द — अर्थ-भेद सहित सूची
समानार्थी शब्दों की सूची, अर्थ-भेद के संकेत के साथ।
विलोम शब्द — उपसर्ग से विलोम निर्माण और सूची
उपसर्ग से विलोम बनाने की विधि और लंबी जोड़ी-सूची।
वाक्यांश के लिए एक शब्द — विषयवार सूची
विषयवार एक-शब्द सूची, वाक्यांश के साथ।
मुहावरे और लोकोक्तियाँ — अर्थ, वाक्य प्रयोग और परीक्षा अभ्यास
मुहावरे व लोकोक्तियाँ, अर्थ और वाक्य प्रयोग सहित।
शब्द शुद्धि — अशुद्धि के प्रकार, नियम और शुद्ध रूप
वर्तनी की अशुद्धियों के प्रकार और शुद्ध रूप।
वाक्य शुद्धि — अशुद्धि के प्रकार, नियम और 250+ अशुद्ध-शुद्ध वाक्य
वाक्य-स्तर की अशुद्धियाँ, नियम और शुद्ध-अशुद्ध जोड़े।
पारिभाषिक शब्दावली — प्रशासनिक, विधिक और तकनीकी शब्दों के 300+ हिंदी पर्याय
प्रशासनिक, विधिक व तकनीकी शब्दों के हिंदी पर्याय।
पढ़ने का क्रम — REET के लिए
पहला चरण — शब्दावली (सबसे ऊँचा प्रतिफल)
पर्यायवाची, विलोम, वाक्यांश के लिए एक शब्द और मुहावरे-लोकोक्तियाँ। REET के पाठ्यक्रम में शब्दावली एक अलग शीर्षक है, और ये चारों विषय सीधे उसी शीर्षक के नीचे आते हैं। ये याद करने वाले विषय हैं, इसलिए इन्हें सबसे पहले शुरू करके पूरे तैयारी-काल में दोहराते रहना चाहिए — एक बार में पूरा करने की चीज ये नहीं हैं।
दूसरा चरण — शुद्धि (बोधगम्यता से जुड़ा)
शब्द शुद्धि और वाक्य शुद्धि। इन दोनों का दोहरा मूल्य है। सीधे प्रश्न तो बनते ही हैं, पर इससे बड़ी बात यह है कि उपचारात्मक शिक्षण के प्रश्न — बालक की अशुद्धि का कारण और उपचार — इसी समझ पर खड़े होते हैं। इसलिए इन्हें व्याकरण नहीं, भाषा-शिक्षण की भूमिका मानकर पढ़ें।
तीसरा चरण — शब्द-रचना
संधि, उपसर्ग और प्रत्यय। संधि का अतिरिक्त लाभ है कि ध्वनि-विज्ञान REET के पाठ्यक्रम में नामित है, और संधि उसी ध्वनि-परिवर्तन का व्यावहारिक रूप है। उपसर्ग-प्रत्यय को विलोम और पर्यायवाची के साथ पढ़ें — तीनों एक-दूसरे को सहारा देते हैं।
चौथा चरण — समास
समास को अंत में रखें। यह अकेला विषय है जिसके प्रश्न सीमित हैं और जिसे पूरी तरह छोड़ देने पर भी एक-दो अंक ही जाते हैं। पहले तीन चरण पक्के होने के बाद ही इस पर समय दें।
समांतर में — भाषा शिक्षण
पहले दिन से, इन ग्यारह पृष्ठों के समांतर। यह हिस्सा इन पृष्ठों में नहीं है, और यही इसे सबसे ज़्यादा जोखिम वाला हिस्सा बनाता है। भाषा-शिक्षण की विधियाँ, चार कौशल, उपचारात्मक शिक्षण और भाषा में मूल्यांकन — इन्हें बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के साथ जोड़कर पढ़ें, क्योंकि दोनों की शब्दावली एक है।
पारिभाषिक शब्दावली — वैकल्पिक
REET के पाठ्यक्रम में यह अलग से नामित नहीं है। यदि अभ्यर्थी साथ-साथ RAS या LDC की तैयारी कर रहा है तो यह पृष्ठ उपयोगी है, अन्यथा REET-केंद्रित तैयारी में इसे अंत में रखें।
REET में भाषा की सबसे बड़ी भूल
भाषा खंड को शुद्ध व्याकरण मान लेना। अभ्यर्थी संधि-समास-पर्यायवाची पूरा करके भाषा को तैयार मान लेता है, और परीक्षा में वे प्रश्न छूट जाते हैं जो पूछते हैं कि भाषा कैसे सिखाई जाए — चार कौशलों का क्रम, उपचारात्मक शिक्षण, भाषा में मूल्यांकन। यह हिस्सा 30 अंक के हर भाषा खंड का एक-तिहाई से आधा तक हो सकता है, और यह दोनों भाषाओं में दोहराता है, इसलिए इसे छोड़ने की कीमत 60 अंक में से चुकानी पड़ती है। नीचे दिए ग्यारह पृष्ठ व्याकरण और शब्दावली का हिस्सा पूरा करते हैं — शिक्षणशास्त्र का हिस्सा अलग से पढ़ना ही पड़ेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में हिंदी के कुल कितने अंक होते हैं?+
भाषा I और भाषा II दोनों 30-30 अंक के होते हैं, यानी भाषा के कुल 60 अंक, 150 अंक के प्रश्नपत्र में से। हिंदी इनमें से किसी एक भाषा के रूप में चुनी जा सकती है, इसलिए हिंदी के अंक इस पर निर्भर करते हैं कि आपने उसे भाषा I में लिया है या भाषा II में — दोनों स्थितियों में उस खंड के 30 अंक।
क्या भाषा I और भाषा II दोनों देना अनिवार्य है?+
हाँ, दोनों अनिवार्य हैं और भाषा II भाषा I से भिन्न होनी चाहिए। दोनों की विषयवस्तु और पद्धति समान रहती है, इसलिए भाषा-शिक्षण का सिद्धांत-पक्ष एक बार पढ़कर दोनों खंडों में काम आ जाता है।
REET के भाषा खंड में क्या केवल व्याकरण पूछा जाता है?+
नहीं। पाठ्यक्रम में व्याकरण और शब्दावली के साथ बोधगम्यता, ध्वनि-विज्ञान तथा भाषा-शिक्षण पद्धतियाँ व मूल्यांकन भी शामिल हैं। भाषा-शिक्षण का हिस्सा व्यवहार में भाषा खंड का एक-तिहाई से आधा तक बैठता है। केवल व्याकरण पढ़कर भाषा खंड तैयार नहीं होता।
पटवारी की हिंदी तैयारी REET में काम आएगी?+
आधी काम आएगी। पर्यायवाची, विलोम, वाक्यांश के लिए एक शब्द, मुहावरे और वाक्य शुद्धि — ये सब दोनों परीक्षाओं में उपयोगी हैं और इन्हें दोबारा पढ़ने की ज़रूरत नहीं। पर पटवारी की तैयारी में भाषा-शिक्षण नहीं आता, और वही REET में सबसे बड़ा अंतर पैदा करता है। इसलिए पटवारी से आने वाले अभ्यर्थी को व्याकरण दोहराने से ज़्यादा शिक्षणशास्त्र पर समय देना चाहिए।
REET के लिए हिंदी में सबसे पहले क्या पढ़ना चाहिए?+
शब्दावली — पर्यायवाची, विलोम, वाक्यांश के लिए एक शब्द और मुहावरे-लोकोक्तियाँ। ये पाठ्यक्रम में नामित शीर्षक के अंतर्गत आते हैं, इनके प्रश्न सीधे बनते हैं, और ये याद करने वाले विषय हैं इसलिए जितनी जल्दी शुरू हों उतना अच्छा। समास को अंत में रखें।
क्या इन विषय-पृष्ठों से भाषा शिक्षण की तैयारी हो जाएगी?+
नहीं। ये ग्यारह पृष्ठ व्याकरण और शब्दावली को पूरी गहराई से कवर करते हैं, पर भाषा-शिक्षण पद्धतियों, चार कौशलों और भाषा में मूल्यांकन को कवर नहीं करते। यह हिस्सा बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र की तैयारी के साथ जोड़कर अलग से पढ़ना होता है।